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411 समाचार
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ऋषभदेव

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प्रथम तीर्थंकर Adinath_Tirthankar_Palitana ऋषभदेव भगवान की प्रतिमा आदिनाथ, ऋषभनाथ, वृषभनाथ अजितनाथ अहिंसा, अपरिग्रह, असि मसि कृषि विद्या वाणिज्य आयुर्वेद युद्धकला शस्त्रविद्या इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय नाभिराय मरूदेवी भरत चक्रवर्ती, बाहुबली और वृषभसेन,अनन्तविजय,अनन्तवीर्य आदि 98 पुत्र ब्राह्मी और सुंदरी आषाढ़ कृष्ण द्वितीया सर्वार्थ सिद्धि विमान चैत्र कृष्ण नवमी (तीर्थंकर दिवस) अयोध्या चैत्र कृष्ण नवमी सिद्धार्थकवन में वट वृक्ष के नीचे फाल्गुन कृष्ण एकादशी सहेतुक वन अयोध्या माघ कृष्ण चतुर्दशी [[अष्टापद /कैलास पर्वत कैलाश पर्वत]] स्वर्ण वृषभ (बैल) ५०० धनुष (१५०० मीटर) ८,४००,००० पूर्व (५९२.७०४ × १०१८ वर्ष)von Glasenapp Helmuth Helmuth von Glasenapp Jainism: An Indian Religion of Salvation https://books.google.com/books?id=WzEzXDk0v6sC मोतीलाल बनारसीदास (Reprinted 1999) 1925 दिल्ली 81-208-1376-6Jacobi Hermann Hermann Jacobi Jaina Sutras https://archive.org/stream/jainasutrasparti029233mbp#page/n347/mode/2up 1964 मोतीलाल बनारसीदास सरस्वती दयानन्द Dayanand Saraswati An English translation of Satyarth Prakash (Reprinted in 1970) 1908 https://archive.org/stream/satyarthprakashl00dayauoft#page/n467/mode/2up दीक्षा वट वृक्ष के नीचे गोमुख देव चक्रेश्वरी वृषभसेन चौरासी 84 भूतकाल चौबीसी के अनंतवीर्य भगवान ऋषभदेव जैन धर्म के इस हुण्‍डावसर्पिणी काल के प्रथम जैन तीर्थंकर हैं। जैन मान्यता के अनुसार, उन्होंने अपने सभी कर्मो का क्षय कर अपनी आत्मा को मुक्त कर लिया, और सिद्ध पदवी प्राप्त की। " ऋषभदेव जी " https://www.jainismknowledge.com/2020/05/rishabh-dev-ji.html Jainism Knowledge जीवन चरित्र जैन पुराणों के अनुसार अन्तिम कुलकर राजा नाभिराज और महारानी मरुदेवी के पुत्र भगवान ऋषभदेव का जन्म चैत्र कृष्ण नवमी को अयोध्या में एक इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार में हुआ था।http://archive.org/details/RisabhaDeva-TheFounderOfJainism Risabha Deva - The Founder of Jainism Champat Rai Jain 1929 Sabyasachi Mishra English 11 मई 2020 https://web.archive.org/web/20160413013803/https://archive.org/details/RisabhaDeva-TheFounderOfJainism 13 अप्रैल 2016 livehttp://archive.org/details/JainaArchaeology ABC of Jainism S. L. Jain Maitree Samoohhttp://archive.org/details/Digambar दिगम्बरत्व और दिगम्बर मुनि Jain Babu Kamtaprasad 1975http://archive.org/details/SvayambhuWebCover Acarya Samantabhadra’s Svayambhustotra – Adoration of The Twenty-four Tirthankara Vijay K. Jain 2015 11 मई 2020 https://web.archive.org/web/20161014065046/https://archive.org/details/SvayambhuWebCover 14 अक्तूबर 2016 liveवह वर्तमान अवसर्पिणी काल के प्रथम तीर्थंकर थे। भगवान ऋषभदेव का विवाह नन्दा और सुनन्दा से हुआ। ऋषभदेव के 100 पुत्र और दो पुत्रियाँ थी।https://www.jainismknowledge.com/2020/05/rishabh-dev-ji.htmlSangave 2001 105 उनमें भरत चक्रवर्ती सबसे बड़े एवं प्रथम चक्रवर्ती सम्राट हुए जिनके नाम पर इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा। दूसरे पुत्र बाहुबली भी एक महान राजा एवं कामदेव पद से बिभूषित थे। इनके आलावा ऋषभदेव के वृषभसेन, अनन्तविजय, अनन्तवीर्य, अच्युत, वीर, वरवीर आदि 98 पुत्र तथा ब्राम्ही और सुन्दरी नामक दो पुत्रियां भी हुई, जिनको ऋषभदेव ने सर्वप्रथम युग के आरम्भ में क्रमश: लिपिविद्या (अक्षरविद्या) और अंकविद्या का ज्ञान दिया।जैन 1998 47-48आदिनाथपुराण और चौबीस तीर्थंकर-पुराण बाहुबली और सुंदरी की माता का नाम सुनंदा था। भरत चक्रवर्ती, ब्रह्मी और अन्य 98 पुत्रों की माता का नाम नन्‍दा (यशावती) था। ऋषभदेव भगवान की आयु 84 लाख पूर्व की थी जिसमें से 20 लाख पूर्व कुमार अवस्था में व्यतीत हुआ और 63 लाख पूर्व राजा की तरह|जैन २०१५ 181 छः कलायें जैन पुराण साहित्य में असि, मसि, कृषि, वाणिज्य, शिल्प, कला का उपदेश ऋषभदेव जी ने दिया। केवल ज्ञान thumb|ऋषभदेव भगवान केवलज्ञान प्राप्ति के बाद जैन ग्रंथो के अनुसार लगभग 1,000 वर्षो तक तप करने के पश्चात् ऋषभदेव को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। और निर्वाण मोक्ष की प्राप्ति कैलाश पर्वत से हुई थी। भगवान ऋषभदेव के समवशरण में निम्नलिखित व्रती थे :Champat Rai Jain 2008 126-127 84 गणधर 22 हजार केवली 12,700 मुनि मन: पर्ययज्ञान ज्ञान से विभूषित Champat Rai Jain 2008 126 9,000 मुनि अवधी ज्ञान से 4,750 श्रुत केवली 20,600 ऋद्धि धारी मुनि 350,000 आर्यिका माता जी Champat Rai Jain 2008 127 300,000 श्रावक वैदिक दर्शन में अथर्ववेद व अग्नि पुराण, मार्कंडेय पुराण और भी बहुत सारे ग्रंन्थो में ऋषभदेव जी का वर्णन आता है |An Antiquty of Jainism Bothra Lata Shri Jain Swetamber Khartargachha Sangha, Kolkata Chaturmass Prabandh Samiti २००६ Kolkata १३६ वैदिक दर्शन में ऋषभदेव जी एक महान राजा और महापुरुष एवं राजा नाभि और मेरूदेवी के महान पुत्र व प्रथम चक्रवर्ती सम्राट भरत जिनके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा के पिता के रूप में संस्तवन किये गये हैं। प्रतिमा भगवान ऋषभदेव जी की एक ८४ फुट की विशाल प्रतिमा भारत में मध्य प्रदेश राज्य के बड़वानी जिले में बावनगजा नामक स्थान पर है और मांगीतुंगी (महाराष्ट्र ) में भी भगवान ऋषभदेव की 108 फुट की विशाल प्रतिमा है। उदयपुर जिले के एक प्रसिद्ध शहर का नाम भी "ऋषभदेव" है जो भगवान ऋषभदेव के नाम पर ऋषभदेव पड़ा। इस ऋषभदेव शहर में भगवान ऋषभदेव का एक विशाल जैन मंदिर तीर्थ क्षेत्र विद्यमान हैं । भगवान आदिनाथ ऋषभदेव की विशाल पद्मासन प्रतिमा मूलनायक के रूप में सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जिला दमोह में एक विशाल नागौरी शैली में निर्मित लाल पाषाण के मंदिर में विराजमान है इस प्रतिमा को बड़े बाबा के नाम से जाना जाता है। भारत में अनेकों स्थान पर ऋषभनाथ भगवान के जिनालय विद्यमान है इनमे कुछ अति प्राचीन है कुछ प्राचीन मंदिरों के नाम आदिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी खानपुर राजस्थान, दिगंबर जैन दर्शनोदय अतिशय क्षेत्र थूबोनजी जिला अशोकनगर मध्य प्रदेश, दिगंबर जैन सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र अमरकंटक इन्हें भी देखें भगवान महावीर का साधना काल नाभिराज भरत चक्रवर्ती शलाकापुरुष बाहरी कड़ियाँ पुराणों में ऋषभ पर टिप्पणी(संस्कृत) सन्दर्भ 30em श्रेणी:दर्शन श्रेणी:जैन धर्म श्रेणी:हिन्दू धर्म श्रेणी:तीर्थंकर