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सुईं
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सुईं भारत के राजस्थान राज्य के बीकानेर ज़िले के लूनकरनसर क्षेत्र में स्थित एक गांव है।
सुईं Suingarh सुई, सिहगगोटी, सुंईगढ़ सिहाग्गोटी गांव India Rajasthan#India right राजस्थान में स्थिति 28.746828 N 74.071000 E inline,title देश भारत राज्य राजस्थान ज़िला बीकानेर छोका राम सिहाग सुशील सिहाग ग्राम पंचायत (सरपंच प्रतिनिधि: प्रमोद सिंह राठौर) 194 3,445 2011 आधिकारिक भाषा हिन्दी भारतीय मानक समय +5:30 पिन कोड 334603 RJ-07 नजदीकी शहर बीकानेर लिंगानुपात 997/1000 (पुरुष/महिला) RJ-IN Suin
इतिहास
सुईं प्राचीन जांगलदेश क्षेत्र में स्थित था और यह सिहाग गोत्र के जाट गणराज्य की राजधानी माना जाता है।https://books.google.co.in/books?id=AZIMAQAAMAAJ&dq=Suin+Sihag&focus Mediaeval History of Rajasthan: Western Rajasthan Singh Rajvi Amar Rajvi Amar Singh 1992
इस गणराज्य का प्रमुख छोका (चोखा) सिहाग था, जिसके अधीन लगभग 150 गांव थे। सुईं उनकी राजधानी थी, जबकि पल्लू, दांदूसर, बीरमसर, गंधेली और रावतसर इसके प्रमुख क्षेत्र माने जाते हैं।
किंवदंतियाँ और धार्मिक परंपराएँ
स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, इस गांव की स्थापना गोस्वामी समाज द्वारा की गई थी। गोस्वामी समाज की कुलदेवी हिंगलाज माता मानी जाती हैं, जिनका प्रमुख तीर्थ वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है। सुईं गांव में गोस्वामी समाज के प्राचीन मठ और मंदिर आज भी विद्यमान हैं।
गांव में तारा गिरी जी और नवल गिरी जी, दो सगे भाइयों की अत्यंत प्राचीन जीवित समाधियाँ स्थित हैं। उनके पुत्र भगत गिरी जी की समाधि शेरपुरा गांव में है। भगत गिरी जी के पिता नवल गिरी जी और माता अणची बाई थीं। तारा गिरी जी द्वारा सुईं में एक प्राचीन कुएं तथा एक जोहड़ का निर्माण करवाया गया, जिसे आज तराणा जोहड़ के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि उनके पास 300 से अधिक सफेद गायें थीं।
पुरातात्विक संकेत
सुईं गांव की पूर्व दिशा में रोलासर मार्ग पर एक अत्यंत प्राचीन मूर्ति स्थित है, जिसे स्थानीय लोग भूमि से प्रकट हुई हुई मानते हैं। इसे भगवान शिव के रूप में पूजा जाता है, हालांकि इसका ऐतिहासिक प्रमाण अभी तक स्थापित नहीं हुआ है। यह मूर्ति किसी देवी-देवता अथवा शासक से भी संबंधित हो सकती है। वर्तमान में इसके कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं।
गांव के चारों ओर पुराने अवशेष पाए जाते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में थेह कहा जाता है। इनके वैज्ञानिक सर्वेक्षण से गांव के प्राचीन इतिहास पर महत्वपूर्ण प्रकाश पड़ सकता है। कुछ स्थानीय विद्वान सुईं को सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन मानते हैं, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई निर्णायक पुरातात्विक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
सन्दर्भ
श्रेणी:बीकानेर ज़िले के गाँव