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तत्त्वार्थ सूत्र
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तत्त्वार्थसूत्र, जैन आचार्य उमास्वामी द्वारा रचित एक जैन ग्रन्थ है। जैन २०११ vi इसे 'तत्त्वार्थ-अधिगम-सूत्र' तथा 'मोक्ष-शास्त्र' भी कहते हैं। संस्कृत भाषा में लिखा गया यह प्रथम जैन ग्रंथ माना जाता है। इसमें दस अध्याय तथा ३५० सूत्र हैं। उमास्वाती सभी जैन मतावलम्बियों द्वारा मान्य हैं। इन्हे गिद्ध पिछाचार्य के नाम से जाना जाता है
दस अध्याय
तत्त्वार्थ सूत्र के दस अध्याय इस प्रकार है जैन २०११ xi:-
दर्शन और ज्ञान
जीव के भेद
उर्ध लोक और मध्य लोक
देव
अजीव के भेद
आस्रव
पाँच व्रत
कर्म बन्ध
निर्जरा
मोक्ष
कुछ प्रख्यात सूत्र
"सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्ग:" (१-१): यह तत्त्वार्थसूत्र का पहला सूत्र है है। इसका अर्थ है- सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र तीनों मिलकर मोक्ष का मार्ग हैं।
"परस्परोपग्रहो जीवानाम् (५.२१): यह सूत्र जैन धर्म का आदर्श-वाक्य है। यह जैन प्रतीक चिन्ह के अन्त में लिखा जाता है। इसका अर्थ है, आपस में एक-दूसरे का उपकार करना जीवों का कर्तव्य है या धर्म है।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
तत्त्व (जैन धर्म)
जैन साहित्य
तत्त्वसंग्रह
बाहरी कड़ियाँ
श्रेणी:जैन ग्रंथ
श्रेणी:प्राचीन भारतीय साहित्य
श्रेणी:प्राचीन ग्रंथ
श्रेणी:धर्म की तत्वमीमांसा