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अनुच्छेद 140 (भारत का संविधान)

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भारत का संविधान भाग 5 संघ न्यायपालिका अनुच्छेद 141 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 139 (भारत का संविधान) भारतीय संविधान सभा भारत हिंदी :श्रेणी:संविधान 1949 प्रकाशित भारत के संविधान का अनुच्छेद 140 सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों के विस्तार से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान है, जो यह सुनिश्चित करता है कि न्यायालय अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सके। यह अनुच्छेद संसद को यह अधिकार प्रदान करता है कि वह विधि द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को ऐसी अतिरिक्त शक्तियाँ प्रदान कर सके,Ancillary powers of Supreme Court https://www.constitutionofindia.net/articles/article-140-ancillary-powers-of-supreme-court/ 2025-12-16 भारत का संविधान en-US जो उसके अधिकार-क्षेत्र के सुचारु संचालन और न्यायिक कार्यों के समुचित निष्पादन के लिए आवश्यक हों।सचिव, भारत सरकार डॉ. जी. नारायण राजू भारत का संविधान https://surveyofindia.gov.in/documents/coi-hindi.pdf 9 नवम्बर 2015 भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) राजभाषा खण्ड 79 पृष्ठभूमि संविधान-निर्माण के समय यह स्पष्ट था कि समय के साथ न्यायिक प्रणाली के समक्ष नई चुनौतियाँ और जटिलताएँ उत्पन्न होंगी, जिनका पूर्वानुमान पूर्णतः संभव नहीं है। अतः एक लचीली व्यवस्था की आवश्यकता अनुभव की गई, जिसके माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों का विस्तार परिस्थितियों के अनुरूप किया जा सके। इसी दृष्टि से अनुच्छेद 140 का निर्माण किया गया, ताकि संसद को यह सामर्थ्य प्राप्त हो कि वह आवश्यकतानुसार न्यायालय को अतिरिक्त शक्तियाँ प्रदान कर सके। यह प्रावधान न्यायपालिका को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ संविधान की गतिशीलता और अनुकूलनशीलता को भी दर्शाता है। अनुच्छेद 140 को संविधान के अन्य न्यायिक प्रावधानों, विशेषतः अनुच्छेद 136 (विशेष अनुमति याचिका), अनुच्छेद 141 (घोषित विधि की बाध्यता)राजगोपाल कृष्णदास 2023-01-12 Under Constitution, law declared by the Supreme Court is binding on all https://www.thehindu.com/news/national/under-constitution-law-declared-by-the-supreme-court-is-binding-on-all/article66369225.ece 2025-12-16 द हिंदू en-IN तथा अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की शक्ति)Article 142: The Supreme Power or Judicial Overreach? https://ddnews.gov.in/en/article-142-the-supreme-power-or-judicial-overreach/ 17 दिसंबर 2025 ddnews.gov.in के साथ जोड़कर देखा जाता है। इन प्रावधानों के समन्वय से यह स्पष्ट होता है कि सर्वोच्च न्यायालय को एक सशक्त, लचीली और प्रभावी संस्था के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया है। मूल पाठ संसद को यह अधिकार प्रदान किया गया है कि वह विधि निर्माण के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय को ऐसी अनुपूरक शक्तियाँ प्रदान कर सके, जो संविधान के किसी भी प्रावधान से असंगत न हों और जो न्यायालय को अपने प्रदत्त अधिकार-क्षेत्र का अधिक प्रभावी, सक्षम और उद्देश्यपूर्ण ढंग से प्रयोग करने में सहायक हों। यह व्यवस्था इस विचार पर आधारित है कि न्यायपालिका को केवल निर्धारित शक्तियों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक साधन भी उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि वह न्याय के उद्देश्य को पूर्णतः साकार कर सके।भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र 1957 52 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४७सचिव, भारत सरकार डॉ० रीटा वशिष्ट भारत का संविधान https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s380537a945c7aaa788ccfcdf1b99b5d8f/uploads/2023/05/2023050186.pdf 26 नवम्बर 2021 भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) 64 Parliament may by law make provision for conferring upon the Supreme Court such suppl-emental powers not inconsistent with any of the provisions of this Constitution as may appear to be necessary or desirable for the purpose of enabling the Court more effectively to exercise the jurisdiction conferred upon it by or under this Constitution.भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र 1957 52 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४६ संदर्भ टिप्पणी अनुच्छेद 140 भारतीय न्यायिक व्यवस्था की लचीलापन और दूरदर्शिता का परिचायक है। यह सुनिश्चित करता है कि सर्वोच्च न्यायालय समयानुकूल अपनी शक्तियों का विस्तार कर सके और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप न्याय प्रदान करने में सक्षम बना रहे। हालाँकि यह शक्ति सीधे न्यायालय को नहीं, बल्कि संसद को प्रदान की गई है, जिससे शक्तियों के संतुलन का सिद्धांत भी सुरक्षित रहता है। इस प्रकार यह अनुच्छेद न्यायपालिका और विधायिका के बीच सहयोगात्मक संबंध को सुदृढ़ करता है।भारत का संविधान (25 मार्च, 2014 को यथाविद्यमान) https://www.google.co.th/books/edition/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE/acGM0AYUDwAC भारत सरकार, विधि और न्याय मंत्रालय, विद्या विभाग 2014 अतः अनुच्छेद 140 न केवल एक सहायक प्रावधान है, बल्कि यह भारतीय संविधान की उस जीवंतता को दर्शाता है, जो बदलते समय के साथ स्वयं को ढालते हुए न्याय के उद्देश्य को सर्वोपरि बनाए रखती है। बाहरी कड़ियाँ भारत का संविधान श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद