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प्रकाश मंत्र
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अंगूठाकार|नानशान, चीन में अमोघपाशा लोकेश्वर की एक मूर्ति।
प्रकाश मंत्र (चीनी: 光明真言, पिनयिन: guāngmíng zhēnyán; जापानी: kōmyō shingon; संस्कृत: प्रभासमन्त्र), जिसे पूर्ण नाम से “毗盧遮那如來所說不空大灌頂光真言” (पिनयिन: pílúzhēnà rúlái ruǒshuō bukōng dà guàndǐng guāng zhēnyán) भी कहा जाता है, एक बौद्ध मंत्र है। चीनी और जापानी बौद्ध परंपराओं में यह मंत्र बुद्ध वैरौचन तथा बोधिसत्त्व अमोघपाश से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसे “महाग्रन्थिभूमि प्रकाश मंत्र”, “अमोघपाश मंत्र (अफल रज्जु)”, “अमोघपाश हृदय” (संस्कृत: amoghapāśahṛdaya) तथा “अमोघराज” (अफलराज) के नामों से भी जाना जाता है।Quinter David 2018 Mantras and Materialities: Saidaiji Order Kōmyō Shingon Practices https://www.jstor.org/stable/26854487 Japanese Journal of Religious Studies 45 2 309–340 10.18874/jjrs.45.2.2018.309-340 0304-1042 26854487https://read.84000.co/translation/toh686.html?id=&part= The Sovereign Ritual of Amoghapāśa 84000 Reading Room Dharmachakra Translation Committee 84000 Translating The Words of The Buddha en 2022-12-06
यह मंत्र “अमोघपाशकल्पराज-सूत्र” (चीनी में तैशो संहिता क्रमांक १०९२ तथा कोरियाई बौद्ध कैनन क्रमांक K.२८७; अनुवादक: बोधिरुचि) तथा “ब्रह्म वैरौचन महाग्रन्थिभूमि प्रकाश मंत्रसूत्र” (“不空羂索毘盧遮那佛大灌頂光真言一卷”, तैशो क्रमांक १००२) में मिलता है। दोनों ही ग्रंथों में यह वैरौचन बुद्ध और अमोघपाश (अफल रज्जु, अवलोकितेश्वर का एक रूप) के साथ संबंधित है। तिब्बती संस्करण में इस मंत्र को अमोघपाश के अभिषेक (महाग्रन्थिभूमि दीक्षा) के लिए “मुद्रा दीक्षा मंत्र” के रूप में भी वर्णित किया गया है।Shingon Refractions: Myoe and the Mantra of Light Unno Mark Wisdom Press 2004 0-86171-390-7 1, 26–41https://read.84000.co/translation/toh686.html?id=&part= The Sovereign Ritual of Amoghapāśa 84000 Reading Room Dharmachakra Translation Committee 84000 Translating The Words of The Buddha en 2022-12-06Dharmachakra Translation Committee. "The Sovereign Ritual of Amoghapāśa | 84000 Reading Room". 84000 Translating The Words of The Buddha. Retrieved 6 December 2022.
मंत्र
अंगूठाकार|प्रकाश मंत्र का पत्थर का स्तंभ, नीत्सुहिमे-जिंजा, जापान।
"प्रकाश मंत्र" निम्नलिखित हैः
संस्कृत
देवनागरी: ॐ अमोघ वैरौचन महामुद्रा मणिपद्म ज्वाल प्रवर्त्तय हूं
रोमन लिपि: Oṃ Amogha Vairocana Mahāmudrā Maṇi-padma Jvāla-pravarttaya Hūṃ सिद्धम् लिपि: 𑖌𑖼𑖀𑖦𑖺𑖑𑖪𑖹𑖨𑖺𑖓𑖡𑖦𑖮𑖯𑖦𑖲𑖟𑖿𑖨𑖯𑖦𑖜𑖰𑖢𑖟𑖿𑖦𑖕𑖿𑖪𑖯𑖩𑖢𑖿𑖨𑖪𑖨𑖿𑖝𑖿𑖝𑖧𑖮𑗝𑖽
चीनी लिपियाँ (दो संस्करण):
唵 阿謨伽 尾盧左曩 摩訶母捺囉 麽抳 鉢納麽 入嚩攞 鉢囉韈哆野 吽 (Ǎn āmójiā wěilúzuǒnǎng móhēmǔnàluō mónǐ bōnàme rùmóluó bōluōwàduōyě hōng)
唵 㫊暮伽 廢嚕者娜 摩訶畝陀囉 麼抳 鉢頭麼 入縛攞 跛囉韈嚲野 吽 (Ǎn āmùjiā fèilǔzhěnà móhēmǔtuóluō mónǐ bōtóumó rùfùluó bǒluōwàduǒyě hōng)
जापानी
おん あぼきゃ べいろしゃのう まかぼだら まに はんどま じんばら はらばりたや うん
On abokya beiroshanō makabodara mani handoma jinbara harabaritaya un
कोरियाई
옴 아모가 바이로차나 마하무드라 마니 파드마 즈바라 프라바릍타야 훔
om amoga bairochana mahamudra mani padma jeubara peurabareutaya hum)
वियतनामी
Án (Ông/Úm) a mộ già di lô tã nẵng, ma ha mẫu nại ra, na nĩ bát nạp mạ nhập phạ lã, nhập phạ lã, bác ra ni, mát đa dã hồng।
तिब्बती
ཨོཾ་ཨ་མོ་གྷ་བཻ་རོ་ཙ་ན་མ་ཧཱ་མུ་དྲཱ་མ་ཎི་པདྨ་པྫྭ་ལ་པྲ་ཝརྟཱ་ཡ་ཧཱུྃ
अनुवाद
“पूर्ण, सर्वव्यापी प्रकाश (ब्रह्म) की स्तुति हो। मणि-ज्योत (रत्न-ज्योत), कमल और तेजस्वी प्रकाश, मेरे ऊपर प्रवर्तित हो जाएँ।”
या भावानुवादः
“हे अपरंपार, सर्वव्यापी प्रकाश को नमः! मणि-कमल और दिव्य ज्वाला मेरे प्रति प्रवर्तित हो।”
अमोघपाश सूत्र
दाएँ|अंगूठाकार|जापानी प्रकाश मंत्र मंडला, एडो काल, लगभग १७वीं-१८वीं शताब्दी।
संक्षिप्त सूत्र
अमोघपाश-संक्षेपक सूत्रों में प्रकाश मंत्र तथा इसके प्रयोग की बुनियादी निर्देशावली शामिल है। मुख्य रूप से निम्नलिखित ग्रंथों में ये मंत्र मिलते हैं:
अमोघपाश-धारणीय-सूत्र (अछम्बक् रज्जु मंत्रसूत्र; चीनी: 不空羂索咒經; तैशो संहिता क्रमांक १०९३), जिसका चीनी अनुवाद ज्ञानागुप्त (५८७ ई.) ने किया।
अमोघपाशहृदय-सूत्र (Xuanzang द्वारा ६५९ ई. में चीनी में अनुवाद; तैशो क्रमांक १०९४) तथा (Bodhiruci द्वारा ६९३ ई. में चीनी में अनुवाद; तैशो क्रमांक १०९५)।
अमोघपाश-धारणीय-सूत्र (Dānapāla, १०वीं शताब्दी; तैशो क्रमांक १०९९)।
不空羂索神變真吉經 (Amoghapāśa अलौकिक-विस्तार मंत्रसूत्र; तैशो क्रमांक १०९२), जिसका अनुवाद Bodhiruci (७०७-७०९ ई.) ने किया।
इन सभी संक्षिप्त सूत्रों में अमोघपाश (अफल रज्जु) नामक अवलोकितेश्वर के रूपण की महिमा, प्रकाश मंत्र का महत्व तथा मूल प्रयोगके निर्देश वर्णित हैं।
विस्तृत संस्कृत-तिब्बती अमोघपाशकल्पराज
“अमोघपाशकल्पराज-सूत्र” (तिब्बती: ’phags pa don yod pa’i zhags pa’i cho ga zhib mo’i rgyal po; तिब्बती कैनन क्रमांक Toh 686) एक विस्तृत अनुष्ठान-ग्रन्थ है, जिसमें पहले अध्याय में संक्षिप्त सूत्र समाहित है और बाद के अध्यायों में कई विस्तृत अनुष्ठान विधियाँ, अमोघपाश के विभिन्न अवतरण तथा धारणीयाएँ (मंत्र-रज्जु) वर्णित हैं। संभवतः यह एकत्रित ग्रंथ स्वतंत्रतः प्रसारित कई साधना-पुस्तिकाओं का संग्रह है।
बौद्ध परंपराओं में प्रयोग
प्रकाश मंत्र को समस्त महायान परंपरा में मुख्यतः वैरौचन बुद्ध तथा अमोघपाश बोधिसत्त्व की आराधना और अभिषेक के दौरान उच्चारित किया जाता है। तिब्बती संस्करण में इसे “अमोघराज” (अफलराज), “अमोघपाशहृदय” (अमोघपाश का हृदय-सार) तथा “विमोक्षमण्डल” (मुक्तिसाधना हेतु आत्मनिर्भर साधना) के रूप में परिभाषित किया गया है।
प्रकाश मंत्र का प्रयोग निम्नलिखित उद्देश्यों हेतु किया जाता है:
समाधि-अभिषेक (दीक्षा): अनेक दिशाओं के बुद्ध इस मंत्र द्वारा अमोघपाश को अभिषेक देते हैं, जिससे वह समस्त प्राणी-बन्धन से मुक्त करने में समर्थ होता है।
मृत्यु-जन्मोपरांत उद्धार: संक्षिप्त चीनी संस्करणों में यह मंत्र मृतक प्राणियों को मृत्युपश्चात अमिताभ के शुद्धभूमि लोक (प्योरलैंड) में जन्म दिलाने तथा रोग-निवारण हेतु शक्तिशाली माना जाता है।
मोक्ष सिद्धि: विस्तारयुक्त अमोघपाशकल्पराज में इस मंत्र को आत्मा-विशुद्धि और बन्धन मोचन हेतु “हृदय धारणीय” के रूप में रखा गया है।
अन्य संबंधित ग्रंथ
ब्रह्म वैरौचन महाग्रन्थिभूमि प्रकाश मंत्रसूत्र (不空羂索毘盧遮那佛大灌頂光眞言, तैशो क्रमांक १००२), जिसे चीनी तिब्बती गुरु अमोघवाज्र (७०५–७७४ ई.) ने तांग राजवंश में अनूदित किया।
अमोघपाशकल्पराज (संस्कृत पाण्डुलिपि रूप में विद्यमान), जिसमें विभिन्न अमोघपाश साधन-ग्रंथों का संग्रह है।
अन्य छोटे महायान सूत्र, जिनमें कवच, साधना-विधियाँ तथा “अमोघपाशहृदय” मंत्र शामिल हैं।
यह भी देखें
ओम मणि पद्मे हम
नीलकण्ठ धाराणी
संदर्भ
श्रेणी:चीन में बौद्ध धर्म
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