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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

आमार साध ना मिटिलो

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आमार साध ना मिटिलो (बंगाली: আমার সাধ না মিটিলো) एक श्यामा संगीत या विशेष रूप से कमलाकांत भट्टाचार्य द्वारा रचित एक काली भजन है।http://www.priyadarshan.org/amar-sadh-na-mitilo-pannalal-bhattacharya-29.html Amar Sadh Na Mitilo by Pannalal Bhattacharya https://web.archive.org/web/20111008164502/http://www.priyadarshan.org/amar-sadh-na-mitilo-pannalal-bhattacharya-29.html 8 October 2011 10 October 2011 इस गीत में कवि इच्छा की निरर्थकता को इङ्गित करता है और उस से छुटकारा पाने के लिए उन कठिनाइयों को बताता है जिनसे वह गुज़रा था। हम उसे समाज की प्रेमहीनता से असन्तुष्ट देखते हैं और इस तरह इस दुनिया से बचना चाहते हैं और देवी काली से उसे आश्रय देने की प्रार्थना करते हैं। पन्नालाल भट्टाचार्य इस गीत को गाने हेतु प्रसिद्ध थे। लिरिक्स माँ आमार साध ना मिटिलो आशा ना पुरिलो सकलइ फुराये जाय माँ। जनमेर शोध डाकि गो माँ तोरे कोले तुले निते आय माँ सकलइ फुराये जाय माँ। पृथिवीर केउ भालतो बाशेना ए पृथिवी भालोबाशिते जानेना जेथा आछे शुधु भालोबाशा बाशी शेथा जेते प्राण चाय माँ सकलइ फुराये जाय माँ। बड़ दागा पेये बासना तेजेछि बड़ ज्वाला सहे कामना भुलेछि अनेक केँदेछि, काँदिते पारि ना बुक फेटे भेङ्गे जाय माँ सकलइ फुराये जाय माँ। सन्दर्भ श्रेणी:भजन