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बादशाह (1999 फ़िल्म)
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फ़रवरी २०२३
बादशाह बादशाह.jpg बादशाह का पोस्टर भँवर जैन गिरीश जैन अब्बास-मस्तान अनु मलिक नीरज वोरा शाहरुख़ ख़ान, ट्विंकल खन्ना, अमरीश पुरी, जॉनी लीवर, प्रेम चोपड़ा, राखी, शरत सक्सेना, सचिन खेडेकर, पंकज धीर, दीपशिखा, सौरभ शुक्ला, अवतार गिल, रज़ाक ख़ान, श्याम गोयल 27 अगस्त, 1999 भारत हिन्दी
बादशाह 1999 में बनी हिन्दी भाषा की हास्य एक्शन फिल्म है। इसका निर्देशन अब्बास-मस्तान ने किया और इसमें शाहरुख़ ख़ान और ट्विंकल खन्ना मुख्य भूमिकाओं में हैं। शाहरुख़ को अपने प्रदर्शन के लिये फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता पुरस्कार के लिये नामांकित किया गया था लेकिन वह जीत नहीं पाए थे।
संक्षेप
राज उर्फ बादशाह (शाहरुख खान) एक जवान लड़का है, जो अपनी माँ के साथ मुंबई में रहता है। उसकी वहाँ बादशाह डिटैक्टिव एजेंसी होती है, जिसे वो अपने दोस्तों के साथ मिल कर बनाए रहता है। वे लोग उस एजेंसी में बहुत सारे गैजेट रखते हैं और ऐसा दिखते रहते हैं कि उनकी एजेंसी काफी व्यस्त रहती है। उन्हें इधर-उधर से छोटे-मोटे काम मिल जाते रहते हैं, लेकिन उनकी इच्छा एक बहुत बड़े काम को करने की होती है।
सूरज सिंह थापर (अमरीश पुरी) एक बहुत बड़ा व्यापारी है, जिसका एक बायो-केमिकल प्लांट भी है, जिसे गोवा की मुख्यमंत्री, गायत्री बच्चन (राखी गुलज़ार) बंद करवा देती है। वो अपने प्लांट को फिर से शुरू कराने के लिए उससे मिलता है, पर बात न बनने के कारण वो उसे मरवाने की कोशिश करता है। वो इस काम को करने के लिए रानी (दीपशिखा) को आदेश देता है, जो शिवा नाम के एक कांट्रैक्ट-किलर को इस काम के लिए रख लेती है। वहीं के॰ झुनझुनवाला (अवतार गिल) नाम का व्यक्ति बादशाह के पास एक अजीब से मामले को लेकर आता है। वो बादशाह से बोलता है कि उसकी जल्द ही ब्रेन-ट्यूमर की वजह से मौत होने वाली है, पर वो अपने मरने से पहले अपनी बेटी की शादी अपने पसंद के लड़के, नितिन से कराना चाहता है। उसकी बेटी, सीमा (ट्विंकल खन्ना) शादी से इंकार कर रही है। उसे शादी के लिए राजी कराने हेतु बादशाह मान जाता है। वो अपने दोस्तों के साथ मिल कर सीमा को पटाने का प्लान बनाता है। कई सारे झूठ बोलने और नाटक करने के बाद सीमा को राज से प्यार हो जाता है, पर राज उसके बाद नाटक करते हुए सीमा को ऐसा दिखाता है कि वो एक बहुत बड़ा झूठा इंसान है और उसने बस प्यार का नाटक किया था। इससे सीमा का दिल टूट जाता है। वहीं बादशाह को अपने काम के पैसे मिल जाते हैं। बाद में दिखाया जाता है कि वो सच में सीमा से प्यार करने लगता है।
झुनझुनवाला और नितिन असल में बाप और बेटे हैं, जिसे सीबीआई की टीम तलाश कर रही है। वे दोनों बैंक धोखाधड़ी मामले में कसूरवार साबित हुए हैं, जिसकी जांच, सीबीआई का एक गुप्त अफसर दीपक मल्होत्रा (दीपक तिजोरी) ने किया था, जो असल में सीमा का भाई है।
सीबीआई को पता चलता है कि एक कांट्रैक्ट-किलर की सड़क हादसे में मौत हो गई है, जिसके सामान से पता चलता है कि वो गायत्री बच्चन को मारने के इरादे से आया था। इस तरह की अगली कोशिश भी हो सकती है, इसके डर से वे लोग एजेंट दीपक मल्होत्रा को मुख्यमंत्री की सुरक्षा का कार्य देते हैं, जिसके मिशन का नाम "बादशाह" होता है। थापर को इस बात का पता चलता है तो वो रानी को बादशाह को खत्म करने का काम देता है। रानी अपने प्रेमी, मोती (शरत सक्सेना) के साथ हवाई अड्डे में बादशाह का इंतजार करते रहती है।
उसी दौरान बादशाह को एक और काम महेंद्र सेठ (अनंत महादेवन) देता है। उसकी बेटी को माणिकचंद (रज़ाक खान) और सक्सेना (सौरभ शुक्ला) अपहरण कर उससे हीरे की मांग करते रहते हैं। बादशाह और उसके दोस्त उसी विमान से गोवा जाते हैं। बादशाह से पहले एजेंट मल्होत्रा उर्फ बादशाह टिकट काउंटर में आता है, जिसे पहचान कर रानी और मोती मार देते हैं। इसके बाद राज उर्फ बादशाह भी अपने दोस्तों के साथ उसी टिकट काउंटर में आता है। उसे गलती से एजेंट मल्होत्रा की टिकट मिल जाती है।
गोवा के हवाई अड्डे में सीबीआई की टीम में से कोई भी एजेंट मल्होत्रा उर्फ बादशाह को देखे नहीं रहता है, इस कारण वे लोग राज उर्फ बादशाह को ही सीबीआई का एजेंट समझ लेती है और बादशाह उन्हें महेंद्र सेठ के लिए काम करने वाले सोच लेता है। वहीं सीमा अपने अंकल के साथ अपने भाई एजेंट मल्होत्रा का इंतजार करते रहती है, लेकिन वो राज को बादशाह के रूप में देख कर हैरान रह जाती है। वहीं बादशाह के बाकी दोस्तों को माणिकचंद और उसके आदमी अपहरण कर ले जाते हैं।
बादशाह को सीबीआई की टीम अपने साथ ले जाती है और उसे कई सारे गुप्त गैजेट देती है। इसके बाद उसे झुनझुनवाला और उसके बेटे के बैंक धोखाधड़ी मामले के बारे में पता चलता है, जिससे उसे पता चलता है कि असल में वो दोनों बाप और बेटे थे। उसे लगता है कि उसने सीमा के साथ बहुत बड़ी गलती कर दी।
वहीं सीमा को राज के बादशाह बन कर आने का कारण ढूंढना होता है और वो उसके कमरे में तलाशी लेने जाती है। उसे बादशाह के कमरे से एक सीडी मिलती है। ये वही सीडी होती है, जिसे बादशाह ने हवाई अड्डे में एजेंट मल्होत्रा के गिरे सीडी को उठाया था। सीमा को वीडियो देखने के बाद पता चलता है कि वो सीडी एजेंट मल्होत्रा अर्थात उसके भाई की है और उसने थापर को गोला भी लगाया है, जिससे साफ है कि उसे थापर पर शक है। सीमा को लगता है कि वो थापर के लिए काम कर रहा है और गायत्री बच्चन को मारने आया है।
थापर के क्लब में बादशाह भी जाता है, जो थापर को महेंद्र सेठ के साथ काम करने वाला सोच लेता है और थापर उसे रानी का प्रेमी समझता है, और उन दोनों को आपस में बात करते हुए सीमा को यकीन हो जाता है कि राज असल में थापर के लिए काम कर रहा है और वो कल सेंट पॉल स्कूल में गायत्री बच्चन का खून कर देगा।
राज अपहरण करने वालों से किसी तरह बच्ची को बचा लेता है और गलतफहमी के कारण थापर के पास पहुंचा देता है। वहीं जब राज और सीमा की मुलाक़ात होती है तो वे दोनों एक दूसरे की गलतफहमी दूर करते हैं। सीमा को पता चलता है कि उसके भाई का खून हो चुका है और राज को सीबीआई की टीम अपना बादशाह सोच रही है। वहीं राज को पता चलता है कि थापर महेंद्र सेठ का आदमी नहीं है। इन दोनों की बातें रानी और मोती सुन लेते हैं और थापर को सारी बात बता देते हैं। थापर इस स्थिति का फायदा लेने की सोचता है और राज को ब्लैकमेल करता है कि अगर उसने गायत्री बच्चन को नहीं मारा तो वो उस बच्ची को बम से उड़ा देगा।
राज के पास अब गायत्री बच्चन को मारने के अलावा कोई चारा नहीं रहता है। गायत्री बच्चन जिस जगह भाषण देने वाली होती हैं, उसी जगह बादशाह को भेज दिया जाता है। आने वालों की जांच करने वाला बादशाह के बंदूक को देख कर भी अनदेखा कर देता है। बादशाह एक लड़की से किसी तरह मदद मांगता है, उसके बाद वो लड़की उसे गायत्री बच्चन के पति के पास ले जाती है, उसके बाद राज को पता चलता है कि इस पूरे प्लान का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि गायत्री बच्चन का पति ही है।
राज किसी तरह सीमा की मदद से गायत्री बच्चन के भाषण के कागज के साथ अपना संदेश रख देता है और भाषण देने के लिए जब गायत्री बच्चन आती है तो वो सारी बात पढ़ कर समझ जाती है। राज, थापर के आदमियों पर गोली चला देता है और थापर अपनी बंदूक से गायत्री बच्चन पर गोली चला देता है। उसके पति को लगता है कि वो मर गई है, और वो सच्चाई उसी के सामने बोल देता है, जिसके बाद गायत्री बच्चन उठ जाती है और अपने पति को गिरफ्तार करने का आदेश दे देती है। थापर किसी तरह वहाँ से भागने लगता है और वहीं राज उस बच्ची को बम वाले बेल्ट से आजाद कर लेता है और दूर कहीं उस बेल्ट को फैक देता है। वो बम वाला बेल्ट थापर के गाड़ी के पास आ जाता है और बटन दबाने के साथ ही उसके गाड़ी में विस्फोट हो जाता है।
अंत में दिखाया जाता है कि राज का डिटैक्टिव एजेंसी काफी प्रसिद्ध हो चुका है और उसे विदेशों से भी काम के ऑफर आते रहते हैं। उसे राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का भी फोन आता है, जो उसे एक मामले को सुलझाने के लिए एक मिलियन डॉलर देने को तैयार रहता है। पर बादशाह काम लेने से इंकार कर देता है और कहता है कि अभी उसके लिए उसकी बीवी, सीमा ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसी के साथ फिल्म की कहानी समाप्त हो जाती है।
मुख्य कलाकार
राखी गुलज़ार
शाहरुख़ ख़ान
ट्विंकल खन्ना - सीमा मल्होत्रा
अमरीश पुरी
जॉनी लीवर - राम लालबहादुर
प्रेम चोपड़ा - सी मुख्य
शशि कला
दीपक तिजोरी
शरत सक्सेना - मोती
सचिन खेडेकर
पंकज धीर
दीपशिखा - रानी
सौरभ शुक्ला - सक्सेना
अवतार गिल
रज़ाक ख़ान
संगीत
गीत गायक समीर और जावेद अख्तर अनु मलिक वो लड़की जो सबसे अलग है अभिजीत 7:03 मैं तो हूँ पागल, ये कहूँ हर पल अभिजीत, शहरुख़ ख़ान 6:18 हम तो दीवाने हुए यार अभिजीत, अलका याज्ञिक 6:56 मोहब्बत हो गई है अभिजीत, अलका याज्ञिक 6:00 ओ बेबे डॉन्ट से बेबी अनु मलिक 6:54 बादशाह ओ बादशाह अभिजीत 6:37
बाहरी कड़ियाँ
0211934 बादशाह
श्रेणी:1999 में बनी हिन्दी फ़िल्म
श्रेणी:अनु मलिक द्वारा संगीतबद्ध फिल्में