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अशोक कुमार
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सितंबर 2014
अशोक कुमार Ashok Kumar in Kismet1.jpg १९४३ में निर्मित फ़िल्म किस्मत में कुमार कुमुदलाल कुंजीलाल गांगुली 1911 10 13 भागलपुर, बंगाल प्रेसिडेंसी, ब्रिटिश भारत yes 2001 12 10 1911 10 13 y मुंबई, महाराष्ट्र, भारत अभिनेता, चित्रकार संजय अशोक कुमार १९३६ - १९९७ रत्तन बाई
अशोक कुमार (অশোক কুমার ; १३ अक्टूबर १९११, भागलपुरhttp://bollywood.bhaskar.com/news/ENT-FLAS-ashok-kumar-life-story-4773817-PHO.html अशोक कुमार को देख रणबीर कपूर की दादी ने हटा लिया था घूंघट दैनिक भास्कर 14 अक्टूबर 2014 15 अक्टूबर 2014 https://web.archive.org/web/20141014201729/http://bollywood.bhaskar.com/news/ENT-FLAS-ashok-kumar-life-story-4773817-PHO.html 14 अक्तूबर 2014 dead, कुमुद कुमार गांगुली - १० दिसम्बर २००१, मुंबई) हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। सन् १९९९ में भारत सरकार ने उन्हें कला के क्षेत्र में उनके योगदानों के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया। ये महाराष्ट्र राज्य से थे।
व्यक्तिगत जीवन
हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री में दादा मुनि के नाम से मशहूर कुमार का जन्म एक मध्यम वर्गीय बंगाली परिवार में हुआ था। इनके पिता कुंजलाल गांगुली पेशे से वकील थेhttp://aajtak.intoday.in/story/happy-birthday-ashok-kumar-1-783456.html सबके प्यारे थे हिन्दी सिनेमा के पहले ‘एंटी हीरो’ अशोक कुमार आज तक 14 अक्टूबर 2014 15 अक्टूबर 2014 https://web.archive.org/web/20141015230619/http://aajtak.intoday.in/story/happy-birthday-ashok-kumar-1-783456.html 15 अक्तूबर 2014 live। अशोक कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में प्राप्त की। बाद में उन्होंने अपनी स्नातक की शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरी की। इस दौरान उनकी दोस्ती शशधर मुखर्जी से हुई। भाई बहनो में सबसे बड़े अशोक कुमार की बचपन से ही फ़िल्मों में काम करके शोहरत की बुंलदियो पर पहुंचने की चाहत थी, लेकिन वह अभिनेता नहीं बल्कि
निर्देशक बनना चाहते थे। अपनी दोस्ती को रिश्ते में बदलते हुए अशोक कुमार ने अपनी इकलौती बहन की शादी शशधर से कर दी। सन 1934 में न्यू थिएटर में बतौर लेबोरेट्री असिस्टेंट काम कर रहे अशोक कुमार को उनके बहनोई शशधर मुखर्जी ने बाम्बे टॉकीज में अपने पास बुला लिया।
फिल्मी सफर
1936 में बांबे टॉकीज की फ़िल्म (जीवन नैया) के निर्माण के दौरान फ़िल्म के अभिनेता नजम उल हसन ने किसी कारणवश फ़िल्म में काम करने से मना कर दिया। इस विकट परिस्थिति में बांबे टॉकीज के मालिक हिमांशु राय का ध्यान अशोक कुमार पर गया और उन्होंने उनसे फ़िल्म में बतौर अभिनेता काम करने की पेशकश की। इसके साथ ही 'जीवन नैया' से अशोक कुमार का बतौर अभिनेता फ़िल्मी सफर शुरू हो गया।
1937 में अशोक कुमार को बांबे टॉकीज के बैनर तले प्रदर्शित फ़िल्म 'अछूत कन्या' में काम करने का मौका मिला। इस फ़िल्म में जीवन नैया के बाद 'देविका रानी' फिर से उनकी नायिका बनी। फ़िल्म में अशोक कुमार एक ब्राह्मण युवक के किरदार में थे, जिन्हें एक अछूत लड़की से प्यार हो जाता है। सामाजिक पृष्ठभूमि पर बनी यह फ़िल्म काफी पसंद की गई और इसके साथ ही अशोक कुमार बतौर अभिनेता फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए।
इसके बाद देविका रानी के साथ अशोक कुमार ने कई फ़िल्मों में काम किया। इन फ़िल्मों में 1937 में प्रदर्शित फ़िल्म इज्जत के अलावा फ़िल्म सावित्री (1938) और निर्मला (1938) जैसी फ़िल्में शामिल हैं। इन फ़िल्मों को दर्शको ने पसंद तो किया, लेकिन कामयाबी का श्रेय बजाए अशोक कुमार के फ़िल्म की अभिनेत्री देविका रानी को दिया गया।
इसके बाद उन्होंने 1939 में प्रदर्शित फ़िल्म कंगन, बंधन 1940 और झूला 1941 में अभिनेत्री लीला चिटनिश के साथ काम किया। इन फ़िल्मों में उनके अभिनय को दर्शको द्वारा काफी सराहा गया, जिसके बाद अशोक कुमार बतौर अभिनेता फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गए।
अशोक कुमार को 1943 में बांबे टाकीज की एक अन्य फ़िल्म किस्मत में काम करने का मौका मिला। इस फ़िल्म में अशोक कुमार ने फ़िल्म इंडस्ट्री के अभिनेता की पांरपरिक छवि से बाहर निकल कर अपनी एक अलग छवि बनाई। इस फ़िल्म में उन्होंने पहली बार एंटी हीरो की भूमिका की और अपनी इस भूमिका के जरिए भी वह दर्शको का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे। किस्मत ने बॉक्स आफिस के सारे रिकार्ड तोड़ते हुए कोलकाता के चित्रा सिनेमा हॉल में लगभग चार वर्ष तक लगातार चलने का रिकार्ड बनाया।
बांबे टॉकीज के मालिक हिमांशु राय की मौत के बाद 1943 में अशोक कुमार बॉम्बे टाकीज को छोड़ फ़िल्मिस्तान स्टूडियों चले गए। वर्ष 1947 में देविका रानी के बाम्बे टॉकीज छोड़ देने के बाद अशोक कुमार ने बतौर प्रोडक्शन चीफ बाम्बे टाकीज के बैनर तले मशाल जिद्दी और मजबूर जैसी कई फ़िल्मों का निर्माण किया।
इसी दौरान बॉम्बे टॉकीज के बैनर तले उन्होंने 1949 में प्रदर्शित सुपरहिट फ़िल्म महल का निर्माण किया। उस फ़िल्म की सफलता ने अभिनेत्री मधुबाला के साथ-साथ पार्श्वगायिका लतामंगेश्कर को भी शोहरत की बुंलदियों पर पहुंचा दिया था।
फिल्म निर्माण
पचास के दशक में बाम्बे टॉकीज से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी खुद की कंपनी शुरू की और जूपिटर थिएटर को भी खरीद लिया। अशोक कुमार प्रोडक्शन के बैनर तले उन्होंने सबसे पहली फ़िल्म समाज का निर्माण किया, लेकिन यह फ़िल्म बॉक्स आफिस पर बुरी तरह असफल रही। इसके बाद उन्होनें अपने बैनर तले फ़िल्म परिणीता भी बनाई। लगभग तीन वर्ष के बाद फ़िल्म निर्माण क्षेत्र में घाटा होने के कारण उन्होन अपनी प्रोडक्शन कंपनी बंद कर दी।
1953 में प्रदर्शित फ़िल्म परिणीता के निर्माण के दौरान फ़िल्म के निर्देशक बिमल राय के साथ उनकी अनबन हो गई थी। जिसके कारण उन्होंने बिमल राय के साथ काम करना बंद कर दिया, लेकिन अभिनेत्री नूतन के कहने पर अशोक कुमार ने एक बार फिर से बिमल रॉय के साथ 1963 में प्रदर्शित फ़िल्म बंदिनी में काम किया यह फ़िल्म हिन्दी फ़िल्म के इतिहास में आज भी क्लासिक फ़िल्मों में शुमार की जाती है।
1967 में प्रदर्शित फ़िल्म .ज्वैलथीफ. में अशोक कुमार के अभिनय का नया रूप दर्शको को देखने को मिला। इस फ़िल्म में वह अपने सिने कैरियर में पहली बार खलनायक की भूमिका में दिखाई दिए। इस फ़िल्म के जरिए भी उन्होंने दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया।
अभिनय में आई एकरुपता से बचने और स्वंय को चरित्र अभिनेता के रूप में भी स्थापित करने के लिए अशोक कुमार ने खुद को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया। इनमें 1968 में प्रदर्शित फ़िल्म आशीर्वाद खास तौर पर उल्लेखनीय है। फ़िल्म में बेमिसाल अभिनय के लिए उनको सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस फ़िल्म में उनका गाया गाना रेल गाड़ी-रेल गाड़ी बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।
दादामुनि और दूरदर्शन
1984 में दूरदर्शन के इतिहास के पहले शोप ओपेरा हमलोग में वह सीरियल के सूत्रधार की भूमिका में दिखाई दिए और छोटे पर्दे पर भी उन्होंने दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया। दूरदर्शन के लिए ही दादामुनि ने भीमभवानी बहादुर शाह जफर और उजाले की ओर जैसे सीरियल में भी अपने अभिनय का जौहर दिखाया।
पुरस्कार व सम्मान
अशोक कुमार को दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फ़िल्म फेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया। पहली बार राखी 1962 और दूसरी बार आशीर्वाद 1968। इसके अलावा 1966 में प्रदर्शित फ़िल्म अफसाना के लिए वह सहायक अभिनेता के फ़िल्म फेयर अवार्ड से भी नवाजे गए। दादामुनि को हिन्दी सिनेमा के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ठ सहयोग के लिए 1988 में हिन्दी सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अशोक कुमार भारतीय सिनेमा के एक प्रमुख अभिनेता रहे हैं। प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार भी इनके ही सगे भाई थे। लगभग छह दशक तक अपने बेमिसाल अभिनय से दर्शकों के दिल पर राज करने वाले अशोक कुमार का निधन १० दिसम्बर २००१ को हुआ।
प्रमुख फिल्में
वर्ष फ़िल्म चरित्र टिप्पणी1997 आँखों में तुम हो 1996 रिटर्न ऑफ ज्वैलथीफ दुश्मन दुनिया का डॉक्टर बेकाबू 1995 जमला हो जमला मेरा दामाद अजीत खन्ना 1994 यूंही कभी 1993 आँसू बने अंगारे 1992 हमला 1991 मौत की सज़ा आधि मिमांसा 1989 ममता की छाँव में क्लर्क भरत के पिता अनजाने रिश्ते दाना पानी सच्चाई की ताकत मज़बूर 1988 फ़ैसला रहमान भारत एक खोज इन्तकाम 1987 आवाम हिफ़ाज़त वो दिन आयेगा वतन के रखवाले प्रोफेसर पीटर फ़र्नांडीज़ प्यार की जीत मिस्टर इण्डिया प्रोफेसर सिन्हा जवाब हम देंगे सुपरमैन 1986 भीम भवानी प्यार किया है प्यार करेंगे अब्दुल रहमान दहलीज़ कत्ल असली नकली शत्रु सुपरिटेन्डेन्ट पुलिस 1985 एक डाकू शहर में पुलिस इंस्पेक्टर दुर्गा फिर आई बरसात तवायफ़ 1984 दुनिया फ़रिश्ता राय बहादुर राम तेरा देश राम दास हम लोग राजा और राना अकलमंद मेजर गृहस्थी शंकर हम रहे ना हम 1983 महान काया पलट लव इन गोआ हादसा चोर पुलिस प्रेम तपस्या बेकरार पसन्द अपनी अपनी शांतिलाल आनन्द तकदीर 1982 डायल 100 चलती का नाम ज़िन्दगी संबंध शक्ति मेहंदी रंग लायेगी दर्द का रिश्ता अनोखा बंधन 1981 जय यात्रा रामनाथ वर्मा महफ़िल मान गये उस्ताद शौकीन ओम प्रकाश चौधरी ज्योति 1980 सौ दिन सास के कर्नल गुप्ता जुदाई निवृत्त न्यायाधीश उमाकांत वर्मा खूबसूरत ज्योति बने ज्वाला आखिरी इंसाफ ख़्वाब साजन मेरे मैं साजन की आप के दीवाने टक्कर नज़राना प्यार का महेश कुमार गुप्ता 1979 बगुला भगत जनता हवलदार अमर दीप डॉन (अतिथि पात्र) 1978 खट्टा मीठा तुम्हारे लिये डाक्टर वाचस्पति/वैद्यराज अपना कानून दो मुसाफ़िर चोर के घर चोर प्रेमी गंगाराम अनमोल तस्वीर फूल खिले हैं गुलशन गुलशन लाला गनपत राय दिल और दीवार 1977 अनुरोध ड्रीम गर्ल मिस्टर वर्मा आनंद आश्रम प्रायश्चित चला मुरारी हीरो बनने हीरा और पत्थर मस्तान दादा आनन्द आश्रम ठाकुर जादू टोना सफेद झूठ गुलाटी 1976 भँवर एक से बढ़कर एक राजा शंकर दादा सुपरिटेन्डेन्ट पुलिस संतान अर्जुन पंडित आप बीती रंगीला रतन बारूद 1975 आक्रमण एक महल हो सपनों का चोरी मेरा काम शंकर मिली छोटी सी बात उलझन दफ़ा ३०२ 1974 खून की कीमत पैसे की गुड़िया बढ़ती का नाम दाढ़ी उजाला ही उजाला प्रोफेसर श्यामलाल गुप्ता प्रेम नगर दुल्हन दो आँखें 1973 हिफ़ाज़त टैक्सी ड्राइवर बड़ा कबूतर दो फूल धुंध 1972 दिल दौलत दुनिया राखी और हथकड़ी रानी मेरा नाम सा रे गा मा पा विक्टोरिया नं॰ 203 राजा मालिक सज़ा गरम मसाला ज़मीन आसमान शांति स्वरूप अनुराग मिस्टर राय/दादाजी ज़िन्दगी ज़िन्दगी चौधरी रामप्रसाद 1971 अधिकार नया ज़माना दूर का राही पाकीज़ा शहाबुद्दीन कंगन हम तुम और वो 1970 पूरब और पश्चिम माँ और ममता विलियम सफर शराफ़त जवाब जमींदार उमा शंकर 1969 सत्यकाम आराधना प्यार का सपना भाई बहन राजा विक्रम प्रताप इंतकाम हीरालाल मेहरा पैसा या प्यार दो भाई आँसू बन गये फूल 1968 आशीर्वाद शिव नाथ फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कारएक कली मुस्काई साधू और शैतान दिल और मोहब्बत आबरू 1967 ज्वैलथीफ अर्जुन सिंह बहू बेगम नवाब सिकन्दर मिर्ज़ा नई रोशनी (1967 फ़िल्म) मुखर्जी मेहरबाँ 1966 अफ़साना तूफान में प्यार कहाँ ये ज़िन्दगी कितनी हसीन है दादी माँ ममता मनीष रॉय 1965 आधी रात के बाद भीगी रात ऊँचे लोग मेजर चन्द्रकाँत (1965 फ़िल्म) नया कानून आकाशदीप बहू बेटी जज चाँद और सूरज 1964 क्रॉसरोड्स चित्रलेखा पूजा के फूल बेनज़ीर नवाब फूलों की सेज डॉक्टर वर्मा दूज का चाँद 1963 बन्दिनी गृहस्थी हरीश चन्द्र खन्ना ये रास्ते हैं प्यार के उस्तादों के उस्ताद गुमराह बैरिस्टर अशोक मेरी सूरत तेरी आँखें मेरे महबूब आज और कल 1962 आरती बर्मा रोड इसी का नाम दुनिया मेहेंदी लगी मेरे हाथ प्राइवेट सेक्रेटरी उम्मीद नकली नवाब राखी फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार1961 धर्मपुत्र फ्लैट नम्बर ९ वारंट डार्क स्ट्रीट 1960 मासूम आँचल काला आदमी कानून जज बद्री प्रसाद हौस्पिटल कल्पना अमर 1959 धूल का फूल बाप बेटे डाका नई राहें कंगन बेदर्द ज़माना क्या जाने 1958 फ़रिश्ता कारीगर रागिनी सितारों के आगे हावड़ा ब्रिज चलती का नाम गाड़ी ब्रिजमोहन शर्मा सवेरा 1957 शेरू एक साल सुरेश कुमार तलाश बंदी शंकर उस्ताद मिस्टर एक्स 1956 भाई भाई अशोक कुमार शतरंज एक ही रास्ता प्रकाश मेहता इंस्पेक्टर 1955 सरदार भगवत महिमा बंदिश कमल रॉय 1954 लकीरें समाज नाज़ बादबाँ 1953 परिनीता शेखर राय शमशीर शोले 1952 जलपरी काफ़िला नौ बहार अशोक राग रंग बेवफ़ा अशोक बेताब सलोनी तमाशा पूनम 1951 अफ़साना दीदार 1950 खिलाड़ी समाधि शेखर निशाना मशाल समर संग्राम आधी रात 1949 महल हरी शंकर 1948 पदमिनी 1947 साजन चन्द्रशेखर प्रताप 1946 एट डेज़ शमशेर सिंह शिकारी (1946 फ़िल्म) 1945 बेगम हुमायूँ 1944 किरन चल चल रे नौजवान अर्जुन 1943 अंगूठी किस्मत शेखर नज़मा युसुफ़ 1941 अंजान अजीत झूला रमेश नया संसार 1940 आज़ाद बंधन निर्मल 1939 कंगन कमल 1938 निर्मला वचन 1937 इज़्ज़त प्रेम कहानी सावित्री 1936 अछूत कन्या प्रताप जन्मभूमि अजय जीवन नैया रंजीत
बतौर निर्माता
वर्ष फ़िल्म टिप्पणी1983 लाल चुनरिया 1953 परिनीता 1949 महल अनपढ़ १९७१
|} आठ दिन 1945
नामांकन और पुरस्कार
1970 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - आशीर्वाद
1967 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार - अफ़साना
1963 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - राखी
1988 - दादासाहब फालके पुरस्कार
1999 - पद्म भूषण
2001 - उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अवध सम्मान
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
श्रेणी:1911 में जन्मे लोग
श्रेणी:२००१ में निधन
कुमार, अशोक
कुमार, अशोक
कुमार, अशोक
श्रेणी:दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता
श्रेणी:श्रेष्ठ अभिनेता के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार विजेता