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गांधी जयंती
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thumb|महात्मा गांधी की प्रतिमा
महात्मा गांधी का संपूर्ण जीवन सत्य (सत्याग्रह) और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित था। उनका विश्वास था कि सत्य ही परम सत्य है और अहिंसा मानवता का सबसे बड़ा हथियार है। उनके अनुसार हिंसा से केवल घृणा और विनाश उत्पन्न होता है, जबकि अहिंसा से शांति और स्थायी समाधान प्राप्त होते हैं।
गांधीजी अपने विचारों को केवल उपदेश के रूप में नहीं, बल्कि अपने जीवन में अपनाकर प्रस्तुत करते थे। उनका जीवन सादगी, आत्मसंयम और ईमानदारी का आदर्श था। वे सादा वस्त्र पहनते थे और आत्मनिर्भरता में विश्वास रखते थे। उनके लिए स्वराज केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक आत्मशासन भी था।
सामाजिक सुधार और उत्थान
स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ गांधीजी ने समाज सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए। वे निम्नलिखित बुराइयों के विरोधी थे:
· छुआछूत
· जातिगत भेदभाव
· सामाजिक असमानता
· लैंगिक भेदभाव
उन्होंने अछूतों को “हरिजन” अर्थात् ईश्वर के बच्चे कहा और उनके उत्थान के लिए कार्य किया। गांधीजी ने शिक्षा, स्वच्छता, ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया। उनका मानना था कि भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है और सच्चा विकास गाँवों के सशक्तिकरण से ही संभव है।
गांधी जयंती का आयोजन
गांधी जयंती पूरे भारत में प्रार्थना सभाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और श्रद्धांजलि समारोहों के साथ मनाई जाती है। देश के नेता नई दिल्ली स्थित राजघाट पर जाकर गांधीजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में भाषण, निबंध प्रतियोगिताएँ, वाद-विवाद और प्रदर्शनी आयोजित की जाती हैं। इस दिन स्वच्छता अभियानों और सामाजिक सेवा गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है, जो गांधीजी के विचारों को दर्शाता है। उनके प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम” का गायन भी किया जाता है।
गांधी जयंती का अंतरराष्ट्रीय महत्व
महात्मा गांधी के विचारों का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। मार्टिन लूथर किंग जूनियर, नेल्सन मंडेला और दलाई लामा जैसे विश्व नेताओं ने उनके अहिंसक सिद्धांतों से प्रेरणा ली। उनके योगदान को सम्मान देते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया। आज गांधीजी को विश्व शांति के दूत के रूप में जाना जाता है। उनके विचार विश्व-भर के विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाते हैं और कई देशों में उनकी प्रतिमाएँ स्थापित हैं।
आधुनिक युग में गांधीजी की प्रासंगिकता आज का विश्व हिंसा, आतंकवाद, पर्यावरण संकट और सामाजिक संघर्षों से जूझ रहा है। ऐसे समय में गांधीजी के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उनके द्वारा बताए गए सहिष्णुता, करुणा और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धांत वैश्विक समस्याओं के समाधान में सहायक हो सकते हैं। गांधीजी का सादा जीवन और उच्च विचार का संदेश आज के उपभोक्तावादी समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के संदर्भ में भी उनके विचार मार्गदर्शक हैं। गांधी जयंती केवल एक महान व्यक्ति का जन्मदिन नहीं, बल्कि एक आदर्श जीवन-पद्धति की याद दिलाने वाला दिवस है। महात्मा गांधी एक ऐसे दूरदर्शी नेता थे जिनके विचार समय और सीमाओं से परे हैं। यदि हम उनके सिद्धांतों को अपनाएँ, तो एक शांतिपूर्ण, समान और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव है। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम सत्य, अहिंसा और मानवता के मार्ग पर चलकर गांधीजी की विरासत को जीवित रखें। यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी
“आप स्वयं वह परिवर्तन बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।”
— महात्मा गांधीभारत के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी जिन्हें बापू या महात्मा गांधी के नाम से भी जाना जाता है, के जन्म दिन २ अक्टूबर १८६९ को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। वस्तुतः गांधीजी विश्व भर में उनके अहिंसात्मक आंदोलन के लिए जाने जाते हैं और यह दिवस उनके प्रति वैश्विक स्तर पर सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है।http://archive.indianexpress.com/news/gandhi-not-formally-conferred-father-of-the-nation-title-govt/973101/ संग्रहीत प्रति 2 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20140906121950/http://archive.indianexpress.com/news/gandhi-not-formally-conferred-father-of-the-nation-title-govt/973101 6 सितंबर 2014 live http://timesofindia.indiatimes.com/india/Constitution-doesnt-permit-Father-of-the-Nation-title-Government/articleshow/16961980.cms संग्रहीत प्रति 2 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20170107223546/http://timesofindia.indiatimes.com/india/Constitution-doesnt-permit-Father-of-the-Nation-title-Government/articleshow/16961980.cms 7 जनवरी 2017 live
मनाने का कारण
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने सत्य और अहिंसा के आदर्शों पर चलकर भारत को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराया था। गांधी जयंती के रूप में उनके जन्मदिन मनाकर देश राष्ट्रपिता को श्रद्धासुमन अर्पित करतें हैं। आज के विद्यार्थियों एवं युवा पीढ़ी बापू के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाए तथा देश हित के लिए अपना योगदान दे। इसी उद्देश्य से गांधी जयंती का आयोजन किया जाता हैं। गांधी जयंती को हर भारतवासी को उल्लास से मनाना चाहिए।
सन्दर्भ
श्रेणी:महात्मा गांधी को समर्पित स्मारक
श्रेणी:जन्मदिन