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मृणाल सेन
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मृणाल सेन মৃনাল সেন Mrinal-sen.jpg मृणाल सेन 1923 5 14 फरीदपुर, पूर्वी बंगाल, ब्रिटिश भारत 2018 12 30 1923 5 14 कोलकाता, भारत भारतीय फिल्म निर्माता 1955–2002 गीता सेन 1952 2017 her death पद्म विभूषण (1983)ऑर्डर ऑफ फ्रैन्डशिप (2000)
मृणाल सेन (बांग्ला: মৃণাল সেন मृणाल् शेन्) भारतीय फ़िल्मों के प्रसिद्ध निर्माता व निर्देशक थे। इनकी अधिकतर फ़िल्में बांग्ला भाषा में रही हैं। उनका जन्म फरीदपुर नामक शहर में (जो अब बंगला देश में है) में १४ मई १९२३ में हुआ था। हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने बाद उन्होंने शहर छोड़ दिया और कोलकाता में पढ़ने के लिये आ गये। वह भौतिक शास्त्र के विद्यार्थी थे और उन्होंने अपनी शिक्षा स्कोटिश चर्च कॉलेज़ एवं कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पूरी की। अपने विद्यार्थी जीवन में ही वे वह कम्युनिस्ट पार्टी के सांस्कृतिक विभाग से जुड़ गये। यद्यपि वे कभी इस पार्टी के सदस्य नहीं रहे पर इप्टा से जुड़े होने के कारण वे अनेक समान विचारों वाले सांस्कृतिक रुचि के लोगों के परिचय में आ गए। उन्हें अक्सर वैश्विक मंच पर बंगाली समानांतर सिनेमा के सबसे बड़े राजदूतों में से एक माना जाता है।http://us.rediff.com/movies/2005/feb/02mrinal.htm Memories from Mrinalda February 1, 2005 Rediff Rediff.com January 27, 2010 https://web.archive.org/web/20100918004355/http://us.rediff.com/movies/2005/feb/02mrinal.htm 18 सितंबर 2010 live
प्रारम्भिक जीवन
संयोग से एक दिन फिल्म के सौंदर्यशास्त्र पर आधारित एक पुस्तक उनके हाथ लग गई। जिसके कारण उनकी रुचि फिल्मों की ओर बढ़ी। इसके बावजूद उनका रुझान बुद्धिजीवी रहा और मेडिकल रिप्रेजन्टेटिव की नौकरी के कारण कलकत्ता से दूर होना पड़ा। यह बहुत ज्यादा समय तक नहीं चला। वे वापस आए और कलकत्ता फिल्म स्टूडियो में ध्वनि टेक्नीशीयन के पद पर कार्य करने लगे जो आगे चलकर फिल्म जगत में उनके प्रवेश का कारण बना।
निर्देशन का प्रारंभ
१९५५ में मृणाल सेन ने अपनी पहली फिल्म रातभोर बनाई। उनकी अगली फिल्म नील आकाशेर नीचे ने उनको स्थानीय पहचान दी और उनकी तीसरी फिल्म बाइशे श्रावण ने उनको अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलाई।
भारत में समांतर सिनेमा
पांच और फिल्में बनाने के बाद मृणाल सेन ने भारत सरकार की छोटी सी सहायता राशि से भुवन शोम बनाई, जिसने उनको बड़े फिल्मकारों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया और उनको राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्रदान की। भुवन शोम ने भारतीय फिल्म जगत में क्रांति ला दी और कम बजट की यथार्थपरक फ़िल्मों का 'नया सिनेमा' या 'समांतर सिनेमा' नाम से एक नया युग शुरू हुआ। The New Indian Cinema Vasudev Aruna 1986 Macmillan India 0-333-90928-3
सामाजिक संदर्भ और उनका राजनैतिक प्रभाव
इसके उपरान्त उन्होंने जो भी फिल्में बनायीं वह राजनीति से प्रेरित थीं जिसके कारण वे मार्क्सवादी कलाकार के रूप में जाने गए। Cinemas of India Thorval Yves 2000 Macmillan India 0-333-93410-5 280–282 https://archive.org/details/cinemasofindia0000thor वह समय पूरे भारत में राजनीतिक उतार चढ़ाव का समय था। विशेषकर कलकत्ता और उसके आसपास के क्षेत्र इससे ज्यादा प्रभावित थे, जिसने नक्सलवादी विचारधारा को जन्म दिया। उस समय लगातार कई ऐसी फिल्में आयीं जिसमें उन्होंने मध्यमवर्गीय समाज में पनपते असंतोष को आवाज़ दी। यह निर्विवाद रूप से उनका सबसे रचनात्मक समय था।
मृत्यु
३० दिसम्बर २०१८ को मृणाल सेन का उनके कोलकता स्थित निज निवास में ९५ वर्ष की आयु में हृदयाघात से निधन हो गया। वह लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे।दादासाहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित दिग्गज फिल्म निर्माता मृणाल सेन का 95 साल की उम्र में निधन https://khabar.ndtv.com/news/bollywood/veteran-film-maker-mrinal-sen-dies-at-age-of-95-dadasaheb-phalke-award-1970059 एनडीटीवी इंडिया 30 दिसम्बर, 2018 https://web.archive.org/web/20181230135253/https://khabar.ndtv.com/news/bollywood/veteran-film-maker-mrinal-sen-dies-at-age-of-95-dadasaheb-phalke-award-1970059 30 दिसंबर 2018 dead
सम्मान और पुरस्कार
मृणाल सेन को भारत सरकार द्वारा १९८१ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
भारत सरकार ने उनको 'पद्म विभूषण' पुरस्कार एवं २००५ में 'दादा साहब फाल्के' पुरस्कार प्रदान किया। उनको १९९८ से २००० तक मानक संसद सदस्यता भी मिली। फ्रांस सरकार ने उनको "कमान्डर ऑफ द ऑर्ट ऑफ ऑर्ट एंडलेटर्स" उपाधि से एवं रशियन सरकार ने "ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप" सम्मान प्रदान किये।
मृणाल सेन को अपनी फिल्मों के लिये देश-विदेश से कई सम्मान हासिल हुए है, उनकी कुछ विशेष कृति नीचे दिये गये है:
सर्वश्रेष्ठ फिल्म (आलो.) 1976 मृगया (फिल्म) सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले 1984 खंडहरसर्वश्रेष्ठ निर्देशक भुवन शोमे 1969 एक दिन प्रतिदिन 1979 अकालेर संधाने 1980 खंडहर 1984 सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले पदातिक 1974 अकालेर संधाने 1983 खारीज़ 1984मास्को फिल्म समारोह - रजत पुरस्कार 1975 सहगान 1979 परशुराम कार्लोवी वैरी फिल्म फेस्टिवल - विशेष जूरी पुरस्कार 1977 ओका ओरी कथा बर्लिन फिल्म फेस्टिवल - इंटरफिल्म अवार्ड 1979 परशुराम 1981 अकलेर सांधाने बर्लिन फिल्म महोत्सव - ग्रैंड ज्यूरी पुरस्कार 1981 अकलेर सांधाने कान्स फिल्म फेस्टिवल - जूरी प्राइज 1983 खारिज़ वैलाडोलिड फिल्म फेस्टिवल - गोल्डन स्पाइक 1983 खारिज़ शिकागो फिल्म समारोह - सर्वश्रेष्ठ फिल्म 1984 खानधार मॉन्ट्रियल फिल्म फेस्टिवल - जूरी का विशेष पुरस्कार 1984 खानधार वेनिस फिल्म फेस्टिवल - माननीय मेंशन 1989 एक दिन अचानक काहिरा फ़िल्म समारोह - सर्वश्रेष्ठ निर्देशक 2002 आमेर भुवन
वह गेबरियल गार्सिय मार्क्यूज़ के मित्र हैं एवं कई बार अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में जज के रूप में कार्य कर चुके हैं। २००४ में मृणाल सेन ने अपने ऊपर लिखी पुस्तक " ऑलवेज़ बींग बार्न" प्रकाशित की।
प्रसिद्ध फिल्में
3
रातभोर
नील आकाशेर नीचे
बाइशे श्रावण
पुनश्च
अवशेष
प्रतिनिधि
अकाश कुसुम
मतीरा मनीषा
भुवन शोम
इच्छा पुराण
इंटरव्यू
एक अधूरी कहानी
कलकत्ता १९७१
बड़ारिक
कोरस
मृगया
ओका उरी कथा
परसुराम
एक दिन प्रतिदिन
आकालेर सन्धाने
चलचित्र
खारिज
खंडहर
जेंनसिस
एक दिन अचानक
सिटी लाईफ-कलकत्ता भाई एल-डराडो
महापृथ्वी
अन्तरीन
१०० ईयर्स ऑफ सिनेमा
आमार भुवन
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सन्दर्भ
श्रेणी:पद्म भूषण
श्रेणी:दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता
श्रेणी:बंगाली फ़िल्म निर्देशक
श्रेणी:भारतीय फ़िल्म निर्देशक
श्रेणी:भारतीय फ़िल्मकर्मी
श्रेणी:बंगाली सिनेमा
श्रेणी:२०१८ में निधन