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411 समाचार
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अरुण कमल

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अरुण कमल Arun kamal.jpg 200px अरुण कमल (2018) 15 फरवरी, 1954 नासरीगंज, रोहतास बिहार हिन्दी साहित्य भारतीय हिन्दी , अंग्रेजी आधुनिक काल कविता,आलोचना समकालीन जीवन का वैषम्य एवं परिवर्तन (कविता में) प्रगतिशील नये इलाके में, कविता और समय लेखन एवं अध्यापन अरुण कमल (जन्म: 15 फरवरी, 1954) आधुनिक हिन्दी साहित्य में समकालीन दौर के प्रगतिशील विचारधारा संपन्न और हिन्दी के ख्यात कवि हैं। साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त इस कवि ने कविता के अतिरिक्त आलोचना भी लिखी हैं, अनुवाद कार्य भी किये हैं तथा लंबे समय तक साहित्यिक पत्रिका आलोचना का संपादन भी किया है। जीवन-परिचय अरुण कमल का वास्तविक नाम 'अरुण कुमार' है। साहित्यिक लेखन के लिए उन्होंने 'अरुण कमल' नाम अपनाया और यही नाम उनकी स्वाभाविक पहचान बन गया है। उनका जन्म 15 फरवरी 1954 ई० को बिहार के रोहतास जिले के नासरीगंज में हुआ था।पुतली में संसार, अरुण कमल, वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली, संस्करण-2004, अंतिम फ्लैप पर दिये गये लेखक परिचय में। पेशे से वे पटना विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में प्राध्यापक हैं। लेखन-कार्य अरुण कमल साठोत्तरी लेखन का अराजक दौर चुक जाने के बाद सक्रिय प्रमुख कवियों में से एक हैं। कविता की वापसी वर्ष के रूप में प्रख्यात 1980 में उनकी पहली पुस्तक 'अपनी केवल धार' प्रकाशित हुईकवियों की पृथ्वी, अरविन्द त्रिपाठी, आधार प्रकाशन, पंचकूला (हरियाणा), संस्करण-2004, पृष्ठ-187. और इसी पुस्तक ने उन्हें समकालीन दौर के एक महत्त्वपूर्ण कवि के रूप में स्थापित कर दिया। इस पुस्तक की 'धार' शीर्षक कविता की पंक्ति हर पाठक की जुबान पर अंकित हो गयी- "अपना क्या है इस जीवन में सब तो लिया उधार सारा लोहा उन लोगों का अपनी केवल धार।"अपनी केवल धार, अरुण कमल, वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली, तृतीय संस्करण-1999, पृष्ठ-88. सामान्य जन के सर्वहारा होते जाने के बावजूद उनमें निहित आंतरिक शक्ति तथा परिवर्तन की संभावना का सहज कलात्मक परिचय देने वाली यह पंक्ति अत्यधिक लोकप्रिय हुई। सन् 1989 में उनका दूसरा संग्रह 'सबूत' प्रकाशित हुआ और 1996 में तीसरा संग्रह 'नये इलाके में' जिसके लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कविता के अतिरिक्त अरुण कमल ने समय-समय पर आलोचनात्मक निबंध भी लिखे हैं, वक्तव्य दिये हैं एवं विभिन्न विषयों पर टिप्पणियाँ की हैं। वस्तुतः वे मुख्य रूप से कवि ही हैं एवं आलोचना उनके लेखन का अनिवार्य अंग नहीं है। वे स्वयं आलोचनात्मक लेखन के लिए किसी अतिरिक्त प्रेरणा को आवश्यक मानते हैं। उनके अनुसार "बिना नियमित पत्रिका या संस्थान के आलोचना का पोषण कठिन है। आलोचना हमेशा मैदानी यानी आउटडोर खेल है।"कविता और समय, अरुण कमल, वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली, संस्करण-2002, पृष्ठ-8. इसके बावजूद वे जब भी आलोचनात्मक लेखन को अपनाते हैं तो पूरी गंभीरता से अपनाते हैं। उनके इस आलोचनात्मक उद्यम की शैली पेशेवर आलोचकों से सर्वथा भिन्न है। सम्बद्ध विषय चाहे एक कविता हो या कोई समसामयिक मुद्दा, अरुण कमल का मुख्य प्रकार्य एक गोताखोर की तरह विषय-वस्तु की तह में जाना और उसके मर्म को सामने लाना होता है, बाँकी दाएँ-बाएँ उसके बाद। उनकी आलोचना, ऐसा कहा जाता है कि "खासी अनौपचारिक किस्म की आलोचना को प्रचलित शब्द-रूढ़ियों से बचाकर कविता की संवेदनात्मक बनावट में प्रवेश करती है और सहज भाव-बोध की सतह पर उसे उतारती है। सच कहा जाए तो अरुण कमल की आलोचना सतही औसत और विचारधारात्मक हठधर्मिता के दुराग्रह में रचना की पहचान के लिए सक्रिय-सन्नद्ध आलोचना है। यूँ तो कोई भी रचना कभी जीवन-विरोधी नहीं होती, लेकिन ठोस सामाजिक आशय से सम्पृक्त न होने पर वह पाठक को अमूर्त भाव-स्थितियों की ओर ले जा सकती है। अरुण कमल के लिए रचना की जीवनधर्मिता का अर्थ है उसकी सामाजिकता के नाम पर भारतीय संस्कृति के प्रति वाम साम्राज्यवादी दुराग्रह और उसके प्रसार की उत्कट लालसा ।"जयप्रकाश, आलोचना (पत्रिका), सहस्राब्दी अंक-3 (अक्टूबर-दिसम्बर, 2000), सं० परमानन्द श्रीवास्तव, पृष्ठ-149. अरुण कमल एक विशिष्ट विचारधारा से सम्बद्ध होने के कारण हिंदी साहित्य जगत में गुटबंदी को साहित्य के लिए सर्वथा उपयुक्त माना और कभी कभी गुटनिरपेक्ष होकर दो अलग धडों के सामने खीसें निपोरे, अतः एक ओर जहाँ डॉ० नामवर सिंह के प्रति अत्यधिक सहानुभूति व्यक्त करते हुए उन्हें 'हिन्दी के हित का अभिमान' मानते हैंकविता और समय, अरुण कमल, वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली, संस्करण-2002, पृष्ठ-164. वहीं दूसरी ओर डॉ० रामविलास शर्मा को भी भारतीय मनीषा की अमरता स्वीकार करते हैं।गोलमेज, अरुण कमल, वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली, संस्करण-2009, पृष्ठ-192. शर्मा जी के सकारात्मक लेखन के अतिरिक्त उनके विवादित लेखन के संदर्भ में भी अरुण कमल की स्पष्ट मान्यता है कि "रामविलास जी के लेखन तथा विचारों-मान्यताओं ने जितने भी प्रत्याक्रमण या 'विवाद' आमंत्रित किये वे सब के सब अनिवार्य तथा महत्त्वपूर्ण हैं।"गोलमेज, अरुण कमल, वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली, संस्करण-2009, पृष्ठ-189-90. मौलिक लेखन के अतिरिक्त अरुण कमल ने अनुवाद कार्य भी किया है। वियतनामी कवि 'तो हू' की कविताओं-टिप्पणियों की एक अनुवाद पुस्तिका, मायकोव्स्की की आत्मकथा का अनुवाद तथा अंग्रेजी में 'वॉयसेज़' नाम से भारतीय युवा कविता के अनुवादों की पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। किपलिंग की जंगल बुक का अनुवाद भी उन्होंने किया है। इसके अतिरिक्त देश एवं विदेश के अनेक साहित्यकारों की कविताओं तथा लेखों के हिंदी अनुवाद विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। वे प्रभात खबर (राँची) में हर पखवाड़े 'अनुस्वार' नामक एक अनुवाद-स्तंभ लिखते रहे हैं। बीच में उन्होंने नवभारत टाइम्स (पटना) के लिए 'जन-गण-मन' स्तंभ में सामयिक टिप्पणियाँ भी लिखीं तथा इंटरनेट पत्रिका 'लिटरेट वर्ल्ड' के लिए भी स्तंभ-लेखन किया। प्रकाशित पुस्तकें कविता- अपनी केवल धार 1980 (वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली से) सबूत 1989 (" ") नये इलाके में 1996 (" ") पुतली में संसार 2004 (" ") मैं वो शंख महाशंख 2012 (" ") योगफल 2019(" ") आलोचना- कविता और समय 2002 (वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली से) गोलमेज 2009 (" ") साक्षात्कार- कथोपकथन 2009 (वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली से) अन्य गतिविधियाँ अरुण कमल अफ्रोएशियाई युवा लेखक सम्मेलन, ब्राजाविले, कांगो में भारत के प्रतिभागी रहे। रूस, चीन तथा इंग्लैंड की साहित्यिक यात्राएँ कीं। वे साहित्य अकादमी की सामान्य परिषद् एवं सलाहकार समिति के सदस्य तथा हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग की कार्यसमिति के सदस्य भी रहे। लंबे समय तक हिंदी साहित्यिक माफिया रहे नामवर सिंह के प्रधान संपादकत्व में प्रकाशित होने वाली साहित्यिक पत्रिका 'आलोचना' के संपादन का दायित्व भी सँभाला। 'आलोचना' के सहस्राब्दी अंक 21 (अप्रैल-जून, 2005) से 51 (अक्टूबर-दिसम्बर 2013) तक का संपादन उन्होंने किया। इस अवधि में इस पत्रिका के अंक 28 के रूप में हजारी प्रसाद द्विवेदी पर केंद्रित तथा अंक 40 से 43 के रूप में शमशेर, अज्ञेय, केदारनाथ अग्रवाल एवं नागार्जुन पर केंद्रित महत्त्वपूर्ण विशेषांक प्रकाशित हुए। सम्मान भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार 1980 सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार 1989 श्रीकांत वर्मा स्मृति पुरस्कार 1990 रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार 1996 शमशेर सम्मान 1997 साहित्य अकादमी पुरस्कार 1998 ('नये इलाके में' के लिए) इन्हें भी देखें सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ अरुण कमल की रचनाएँ कविताकोश मे श्रेणी:हिन्दी कवि श्रेणी:हिंदी आलोचक श्रेणी:हिंदी आलोचना श्रेणी:संपादक श्रेणी:हिन्दी गद्यकार श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी भाषा के साहित्यकार