Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

चिंपैंजी

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

yes चिंपैंजी182–183 Schimpanse zoo-leipig.jpg आम चिंपैंजी (पैन ट्रोग्लोडाइट्स) Animalia Chordata Mammalia Primates Hominidae Homininae Hominini Panina पैन Oken, 1816 पैन ट्रोग्लोडाइट्स (आम चिंपैंजी) पैन पैनिस्कस (बोनोबो) Pan (genus) distribution map.png पैन ट्रोग्लोडाइट्स (आम चिंपैंजी) और पैन पैनिस्कस (लाल बोनोबो) का वितरण Species पैन ट्रोग्लोडाइट्स पैन पैनिस्कस चिंपैंजी जिसे आम बोलचाल की भाषा में कभी-कभी चिम्प भी कहा जाता है, पैन जीनस (वंश) के वनमानुष की दो वर्तमान प्रजातियों का सामान्य नाम है।https://www.bbc.com/hindi/science/2014/09/140919_chimpanzee_murder_du स्वभाव से ही 'क़ातिल' है चिंपैंजी 12 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20171007175558/http://www.bbc.com/hindi/science/2014/09/140919_chimpanzee_murder_du 7 अक्तूबर 2017 live कांगो नदी दोनों प्रजातियों के मूल निवास स्थान के बीच सीमा का काम करती है:http://animaldiversity.ummz.umich.edu/site/accounts/information/Pan_troglodytes.html ADW:Pan troglodytes:information 11 अगस्त 2007 Animal Diversity Web (University of Michigan Museum of Zoology) https://web.archive.org/web/20141102195716/http://animaldiversity.ummz.umich.edu/site/accounts/information/Pan_troglodytes.html 2 नवंबर 2014 dead आम चिंपांज़ी, पैन ट्रोग्लोडाइट्स (पश्चिम और मध्य अफ्रीका) बोनोबो, पैन पैनिस्कस (कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के जंगलों में) चिंपैंजी; बोनोबो, गोरिल्ला, मानव और ओरंगउटान के साथ होमिनिडे परिवार के सदस्य हैं। एप्स प्रजाती के जीवों को साधारण भाषा में चिम्पांज़ी कहते हैं।http://www.bbc.com/hindi/science/2014/09/140919_chimpanzee_murder_du स्वभाव से ही 'क़ातिल' है चिंपैंजी 7 अक्तूबर 2017 https://web.archive.org/web/20171007175558/http://www.bbc.com/hindi/science/2014/09/140919_chimpanzee_murder_du 7 अक्तूबर 2017 live सबसे जाना माना चिम्पांज़ी पैन ट्रोदलोडाइटस (Pan troglodytes) है, जो मुख्यतः पश्चिमी तथा मध्य अफ्रिका में पाया जाता है। चिम्पांज़ी होमीनीडा परिवार का सदस्य है। मनुष्य तथा गोरिल्ला भी इसी परिवार के हैं। चिम्पांजी लगभग साठ लाख वर्ष पहले मानव विकास की प्रक्रिया से अलग हो गए थे और चिम्पांजी की दो प्रजातियाँ मनुष्य की सबसे करीबी जीवित संबंधी हैं, ये सभी होमिनी जनजाति (होमिनिया उप-जनजाति की वर्तमान प्रजातियों के साथ) के सदस्य हैं। चिम्पांजी पैनिना उप-जनजाति के एकमात्र ज्ञात सदस्य भी हैं। इन दो पैन प्रजातियों का विभाजन केवल दस लाख (1 मिलियन) वर्ष पहले ही हुआ था। विकासवादी इतिहास विकासवादी संबंध History of hominoid taxonomy thumb|होमिनोइडे के टेक्सोनोमिक संबंध पैन जीनस को होमिनिनी उप-परिवार का हिस्सा माना जाता है जिससे मनुष्यों का संबंध है। ये दो प्रजातियाँ मनुष्यों की सबसे करीबी जीवित विकासवादी संबंधी हैं तथा साठ लाख (छः मिलियन) वर्ष पहले मनुष्यों और इनके पूर्वज एक ही थे।http://news.mongabay.com/2005/0831a-nih.html Chimps and Humans Very Similar at the DNA Level News.mongabay.com 6 जून 2009 https://web.archive.org/web/20150226164110/http://news.mongabay.com/2005/0831a-nih.html 26 फ़रवरी 2015 live 1973 में मैरी-क्लेयर किंग की शोध में मनुष्यों और चिम्पान्जियों के बीच 99% एक सामान डीएनए पाए गए,मैरी-क्लेयर किंग, डॉक्टरेट शोध प्रबंध, प्रोटीन पॉलीमोर्फिस्म्स इन चिम्पांजी एंड ह्यूमन इवोल्यूशन, डॉक्टोरल डिसर्टैशन, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले (1973). हालांकि गैर-कोडिंग डीएनए में कुछ भिन्नता के कारण उसके बाद की शोध में इस आंकड़े को बदलकर लगभग 94% http://www.sciam.com/article.cfm?chanID=sa003&articleID=9D0DAC2B-E7F2-99DF-3AA795436FEF8039 19 दिसंबर 2006 Humans and Chimps: Close But Not That Close Scientific American 20 दिसंबर 2006 https://web.archive.org/web/20071011104012/http://www.sciam.com/article.cfm?chanID=sa003&articleID=9D0DAC2B-E7F2-99DF-3AA795436FEF8039 11 अक्तूबर 2007 dead कर दिया गया। यह प्रस्ताव किया गया है ट्रोग्लोडाइट्स और पैनिस्कस का संबंध सेपियंस के साथ जीनस पैन की बजाय होमो से है। इसके लिए दिए गए तर्कों में से एक यह है कि अन्य प्रजातियों को मनुष्यों और चिम्पान्जियों के बीच की तुलना में कम आनुवंशिक समानता के आधार पर एक ही जीनस में रखने के लिए पुनः वर्गीकृत किया गया है। जीवाश्म मानव जीवाश्म काफी मात्रा में पाए गए हैं लेकिन चिम्पांजी के जीवाश्मों के बारे में 2005 तक कोई वर्णन मौजूद नहीं था। पश्चिम और मध्य अफ्रीका में चिम्पांजी की मौजूदा आबादी पूर्वी अफ्रीका में प्रमुख मानव जीवाश्म स्थलों से मेल नहीं खाती हैं। हालांकि अब चिम्पांजी के जीवाश्मों के बारे में केन्या से जानकारी प्राप्त हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि मनुष्य और पैन क्लेड के सदस्य, दोनों मध्य प्लेस्टोसीन काल के दौरान पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट वैली में मौजूद थे। First fossil chimpanzee https://archive.org/details/sim_nature-uk_2005-09-01_437_7055/page/105 McBrearty S. N. G. Jablonski Nature 1 सितंबर 2005 437 7055 105–108 16136135 16136135 10.1038/nature04008 0028-0836 शारीरिक रचना और शरीर विज्ञान आम नर चिम्प की ऊँचाई खड़े होने पर 1.7 m ft तक होती है और इसका वजन अधिक से अधिक 70 kg lb होता है; मादा चिम्पांजी कुछ छोटी होती है। आम चिम्प के लंबे हाथ फैलाए जाने पर शरीर की ऊँचाई से अधिक से अधिक डेढ़ गुना अधिक होते हैं और चिम्पांजी के हाथ इसके पैरों से लम्बे होते हैं।" https://web.archive.org/web/20131020005432/http://www.rollinghillswildlife.com/animals/c/chimpanzee/chimpanzee.pdf 20 अक्तूबर 2013 ", रोलिंग हिल्स वाइल्डलाइफ एडवेंचर 2005 बोनोबो आम चिम्पांजी की तुलना में थोड़ा छोटा और दुर्बल होता है लेकिन इसके हाथ-पैर लम्बे होते हैं। दोनों प्रजातियाँ अपने लंबे, शक्तिशाली हाथों का इस्तेमाल पेड़ों पर चढ़ने के लिए करती हैं। जमीन पर चिम्पांजी आम तौर पर अपने सभी चारों हाथ-पैरों पर अपनी उँगलियों की गांठों (नक्कल्स) का इस्तेमाल करते हुए चलते हैं और सहारे के लिए हाथों को भीच कर रखते हैं, चलने-फिरने का यह तरीका नक्कल-वाकिंग कहलाता है। चिम्पांजी के पैर ओरांगउटान की तुलना में चलने-फिरने के लिए कहीं अधिक अनुकूल होते हैं क्योंकि चिम्पांजी के तलवे अपेक्षाकृत चौड़े और अंगूठे छोटे होते हैं। आम चिंपांज़ी और बोनोबो दोनों अपने हाथों और बाजुओं से किसी चीज को उठाकर ले जाते समय दो पैरों पर सीधे खड़े होकर चल सकते हैं। बोनोबो के हाथ आनुपातिक रूप से अधिक लंबे होते हैं और ये आम चिम्पांजी की तुलना में अक्सर सीधे खड़े होकर चलना पसंद करते हैं। इसकी खाल काली होती है; चेहरे, उँगलियों, हाथ की हथेलियाँ और पैर के तलवे बालरहित होते हैं; और चिम्प के पास पूँछ नहीं होती है। दोनों प्रजातियों में चेहरे, हाथों और पैरों की बाहरी त्वचा गुलाबी से लेकर बहुत गहरे रंग की होती है लेकिन युवा चिम्पान्जियों में आम तौर पर यह रंग अपेक्षाकृत हल्का होता है, परिपक्व (वयस्क) होने पर इसका रंग गहरा होने लगता है। शिकागो मेडिकल सेंटर विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में चिम्पांजी की आबादियों के बीच काफी आनुवंशिक भिन्नताएं पायी गयी हैं। Gene study shows three distinct groups of chimpanzees 20 अप्रैल 2007 http://www.eurekalert.org/pub_releases/2007-04/uocm-gss042007.php EurekAlert 23 अप्रैल 2007 https://web.archive.org/web/20160303192241/http://www.eurekalert.org/pub_releases/2007-04/uocm-gss042007.php 3 मार्च 2016 dead आँखों के ऊपर एक हड्डी का शेल्फ माथे को एक ढलवां स्वरूप देता है और नाक चौड़ी होती है। हालांकि जबड़े बाहर निकले हुए होते हैं, होठ केवल तभी फैलाए जाते हैं जब कोई चिम्प मुँह फुलाने (खीझने) की मुद्रा में होता है। चिम्पांजी का मस्तिष्क मनुष्य के मस्तिष्क के आधे आकार का होता है।"चिम्पांजी https://web.archive.org/web/20091028071148/http://encarta.msn.com/encyclopedia_761573582/Chimpanzee.html 28 अक्तूबर 2009 ," माइक्रोसॉफ्ट एनकार्टा ऑनलाइन एन्सीक्लोपीडिया 2008. 31 अक्टूबर 2009. चिम्पांजी के अंडकोष उसके शरीर के आकार के हिसाब से असामान्य तौर पर बड़े होते हैं जिनका संयुक्त वजन एक गोरिल्ला के अंडकोष 1 oz या एक मानव अंडकोष 1.5 oz की तुलना में लगभग 4 oz होता है। इसके लिए आम तौर पर चिम्पांजी के संभोग संबंधी आचरण की बहुपतीत्व (पोलीएंड्रस) प्रकृति के कारण होने वाली शुक्राणु की प्रतिस्पर्धा जिम्मेदार है।http://www.ratbehavior.org/testicles.htm Why are rat testicles so big? 2003-2004 1 सितंबर 2009 https://web.archive.org/web/20160115164845/http://ratbehavior.org/testicles.htm 15 जनवरी 2016 dead चिम्पांजी 8 से 10 वर्ष के बीच की आयु में यौवनावस्था तक पहुँच जाते हैं और जंगलों में शायद ही कभी 40 साल की उम्र से अधिक जीवित रहते हैं लेकिन कैद में इसके 60 वर्ष से अधिक की उम्र तक पहुँचने के बारे में ज्ञात है। व्यवहार left|thumb|बोनोबो आम चिम्पांजी और बोनोबो के बीच शारीरिक रचना में मामूली अंतर होता है लेकिन इनके यौन संबंधी और सामाजिक व्यवहार में काफी भिन्नताएं होती हैं। आम चिम्पांजी का एक सर्वभक्षी आहार होता है, ये बीटा नरों पर एक अल्फा नर के नेतृत्व के आधार पर टुकड़ी बनाकर शिकार करने की संस्कृति का अनुसरण करते हैं और इनके सामाजिक संबंध अत्यंत जटिल होते हैं। दूसरी और बोनोबो का आहार ज्यादातर फलाहारी (फ्रूजीवोरस) होता है और इनका आचरण समतावादी, अहिंसक, मातृसत्तात्मक और यौन संबंधों के लिए ग्रहणशील होता है।http://www.bio.davidson.edu/people/vecase/Behavior/Spring2004/laird/Social%20Organization.htm Bonobo social spacing Courtney Laird 10 मार्च 2008 Davidson College https://web.archive.org/web/20060922212105/http://www.bio.davidson.edu/people/vecase/Behavior/Spring2004/laird/Social%20Organization.htm 22 सितंबर 2006 live बोनोबो लगातार यौन संबंध बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं जिसमें नरों और मादाओं दोनों के लिए तरीका उभयलिंगी होता है, इसके अलावा ये यौन संबंधों का इस्तेमाल विवादों को रोकने और सुलझाने में मदद के लिए भी करते हैं। उपकरणों के प्रकार की प्राथमिकता के अनुसार विभिन्न समूहों के चिम्पान्जियों के सांस्कृतिक आचरण भी अलग-अलग होते हैं।http://www.janegoodall.com/chimp_central/chimpanzees/behavior/default.asp Chimp Behavior 11 अगस्त 2007 Jane Goodall Institute https://web.archive.org/web/20070927045315/http://www.janegoodall.com/chimp_central/chimpanzees/behavior/default.asp 27 सितंबर 2007 dead आम चिम्पांजी बोनोबो की अपेक्षा अधिक आक्रामक होते हैं। http://books.google.com/books?id=lDP4TPccgC8C&pg=PA30&dq=chimpanzee+bonobo+aggresion&ei=aJbQSJbULIH-sQPwlOHbAw&sig=ACfU3U0LoKGF-b2Q8gMffVix_d1xsHxFDA#PPA31,M1 Our Inner Ape Apes in the family de Waal F Frans de Waal 1594481962 2006 Riverhead Books New York registration https://archive.org/details/isbn_9781594481963 सामाजिक संरचना चिम्पांजी, अनेक नर और मादा वाले सामाजिक समूहों में रहते हैं जिन्हें समुदाय कहा जाता है। समुदाय के भीतर एक निश्चित सामाजिक पदानुक्रम होता है जो एक सदस्य की सामाजिक स्थिति और दूसरों पर उसके प्रभाव से निर्धारित होता है। चिम्पांजी एक निम्न (लीनर) पदानुक्रम में रहते हैं जिसमें एक से अधिक सदस्य इतने प्रभावी हो सकते हैं कि वे कम रैंक वाले अन्य सदस्यों पर अपना दबदबा कायम कर सकें. आम तौर पर इसमें एक प्रभावशाली नर सदस्य होता है जिसे अल्फा मेल के रूप में जाना जाता है। अल्फा मेल सर्वोच्च-रैंकिंग वाला नर सदस्य होता है जो समूह पर नियंत्रण रखता है और किसी भी विवाद के दौरान व्यवस्था को बनाए रखता है। चिम्पांजी समाज में 'प्रमुख नर' हमेशा सबसे बड़ा या सबसे ताकतवर नर नहीं होता है बल्कि यह सदस्य सबसे अधिक जोड़-तोड़ करने वाला और राजनीतिक नर होता है जो एक समूह के भीतर चल रही गतिविधियों को प्रभावित कर सके। नर चिम्पांजी आम तौर पर अपना वर्चस्व ऐसे मित्र बनाकर हासिल करता है जो शक्ति के लिए उस सदस्य की भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के मामले में सहायता प्रदान करेगा। ताकत दिखाने और दूसरों से मान्यता प्राप्त करने की कोशिश का प्रदर्शन करना एक नर चिम्पांजी के चरित्र में होता है जो अपनी सामाजिक स्थिति को कायम रखने के लिए बुनियादी तौर पर जरूरी हो सकता है। अल्फा नर अपनी शक्ति पर पकड़ और अधिकार को बनाए रखने के प्रयास में अन्य सदस्यों को धमकाने के लिए अपने आकार को बड़ा और डरावना दिखाने और जितना अधिक संभव हो अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए अक्सर अपनी सामान्य रूप से पतली खालों को फुला कर मोटा कर लेते हैं। निचली-श्रेणी के चिम्पांजी शारीरिक भाषा में आज्ञाकारी हाव-भाव बनाकर या घुरघुराते हुए अपने हाथ को बाहर निकालकर सम्मान का प्रदर्शन करते हैं। मादा चिम्पांजी अपने पुट्ठों (हाइंड-क्वार्टर्स) को पेश कर अल्फा नर के प्रति अपनी अधीनता का प्रदर्शन करती हैं। मादा चिम्पांजी भी एक पदानुक्रम रखती हैं जो किसी समूह के भीतर एक मादा की व्यक्तिगत स्थिति से प्रभावित होता है। कुछ चिम्पांजी समुदायों में युवा मादाएं एक उच्च-श्रेणी की माँ से विरासत के तौर पर अपनी उच्च सामाजिक स्थिति हासिल कर सकती है। मादाएं भी निचले-क्रम की मादाओं पर अपना वर्चस्व कायम करने के लिए नए मित्र बनाती हैं। नरों के विपरीत जिनका वर्चस्व का दर्जा हासिल करने का मुख्य प्रयोजन यौन संबंधों में विशेषाधिकार प्राप्त करना और कभी-कभी अपने अधीनस्थों पर हिंसक प्रभाव दिखाना होता है, मादाएं भोजन जैसे संसाधनों को प्राप्त करने के लिए वर्चस्व का दर्जा हासिल करती हैं। उच्च-श्रेणी की मादाओं को अक्सर संसाधनों तक पहली पहुँच हासिल होती है। आम तौर पर नर और मादाएं दोनों एक समूह के भीतर सामाजिक स्थिति में सुधार के लिए प्रभावशाली दर्जा हासिल करते हैं। अक्सर मादाएं ही अल्फा नर का चयन करती हैं। एक नर चिम्पांजी को अल्फा का दर्जा हासिल करने के लिए समूह के भीतर मादाओं से स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होता है क्योंकि वास्तव में वे ही ये तय करती हैं कि किस तरह की जीवनशैली निर्धारित की जाए (मादाएं ही अगली पीढ़ी की आजीविका सुनिश्चित करती हैं; उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि उनका समूह उन स्थानों में जा रहा है जहाँ उन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन की आपूर्ति होगी). कई ऐसे मामले हैं जहाँ प्रभावशाली मादाओं का एक समूह अपनी प्राथमिकता के अनुरूप न होने के कारण अल्फा नर को बेदखल कर देता है और इसके बजाय वे दूसरे नर का समर्थन करती हैं जिसके पास उन्हें एक सफल अल्फा नर के रूप में समूह का नेतृत्व करने की क्षमता दिखाई देती है। बुद्धिमत्ता Primate cognition thumb|right|250px|मस्तिष्क का चित्र. चिम्पांजी के मोटर फिल्ड में फोसाई के मुख्य समूहों की टोपोग्राफी (स्थलाकृति) चिम्पांजी अपने उपकरण बनाते हैं और उनका उपयोग भोजन-सामग्रियों को जुटाने और सामाजिक प्रदर्शन के लिए करते हैं; उनके पास शिकार करने की आधुनिक रणनीतियां होती हैं जिसके लिए समन्वय, प्रभाव और रैंक की जरूरत होती है; वे अपने स्टेटस के लिए संवेदनशील, जोड़-तोड़ करने वाले और छल-कपट के लिए योग्य होते हैं; वे संकेतों का इस्तेमाल करना सीख सकते हैं और इंसानी भाषा के पहलुओं को समझ सकते हैं जिनमें शामिल हैं कुछ संबंधपरक वाक्य विन्यास, संख्या और संख्यात्मक अनुक्रम की अवधारणाएं; http://www.indiana.edu/~origins/teach/A105/lectures/A105L12.html Chimpanzee intelligence Indiana University 24 मार्च 2008 23 फरवरी 2000 https://web.archive.org/web/20160917161331/http://www.indiana.edu/~origins/teach/A105/lectures/A105L12.html 17 सितंबर 2016 live और वे भविष्य की स्थिति या घटना के लिए तत्काल योजना तैयार करने में सक्षम होते हैं।Osvath Mathias 10 मार्च 2009 Spontaneous planning for future stone throwing by a male chimpanzee Current Biology Elsevier 19 5 R190–R191 10.1016/j.cub.2009.01.010 19278627 उपकरण का उपयोग अक्टूबर 1960 में जेन गुडऑल द्वारा चिम्पान्जियों के बीच उपकरणों के इस्तेमाल की खोज को सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक माना गया है। हाल के शोध से यह संकेत मिलता है कि चिम्पांजी द्वारा पत्थर के उपकरण का इस्तेमाल कम से कम 4,300 साल पहले शुरू किया गया था। Julio Mercader, Huw Barton, Jason Gillespie, Jack Harris, Steven Kuhn, Robert Tyler, Christophe Boesch 2007 4300-year-old Chimpanzee Sites and the Origins of Percussive Stone Technology PNAS Feb चिम्पांजी के उपकरण संबंधी उपयोग में एक बड़े छड़ीनुमा उपकरण से दीमक के ढेर की खुदाई और उसके बाद एक छोटी रूपांतरित छड़ी का उपयोग कर दीमकों को "बाहर" निकालना शामिल है। Bijal T. Chimps Shown Using Not Just a Tool but a "Tool Kit" http://news.nationalgeographic.com/news/2004/10/1006_041006_chimps.html 20 जनवरी 2010 6 सितंबर 2004 https://web.archive.org/web/20160820162051/http://news.nationalgeographic.com/news/2004/10/1006_041006_chimps.html 20 अगस्त 2016 live हाल के एक अध्ययन से भाले जैसे उन्नत औजारों का पता चला है जिसे सेनेगल के आम चिम्पांजी अपनी दांतों से पैना करते थे और उसका इस्तेमाल सेनेगल की बुशबेबीज को पेड़ों के छोटे-छोटे छिद्रों से बाहर निकालने में करते थे। Fox, M. Hunting chimps may change view of human evolution http://news.yahoo.com/s/nm/20070222/sc_nm/chimps_hunting_dc 22 फरवरी 2007 22 फरवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070224115149/http://news.yahoo.com/s/nm/20070222/sc_nm/chimps_hunting_dc 24 फ़रवरी 2007 live http://www.iastate.edu/~nscentral/news/2007/feb/chimpstools.shtml ISU anthropologist's study is first to report chimps hunting with tools 11 अगस्त 2007 22 फरवरी 2007 Iowa State University News Service https://web.archive.org/web/20070816143403/http://www.iastate.edu/%7Enscentral/news/2007/feb/chimpstools.shtml 16 अगस्त 2007 dead चिम्पांजियों में औजारों के इस्तेमाल की खोज से पहले यह माना जाता था कि मनुष्य ही एकमात्र ऐसी प्रजाति थी जो औजार बनाना और उसका इस्तेमाल करना जानती थी, लेकिन औजार का इस्तेमाल करने वाली कई अन्य प्रजातियों के बारे में अब ज्ञात हो चुका है।http://www.livescience.com/animals/070212_chimp_tools.html Chimps Learned Tool Use Long Ago Without Human Help 11 अगस्त 2007 Whipps Heather 12 फरवरी 2007 LiveScience https://web.archive.org/web/20110101223116/http://www.livescience.com/animals/070212_chimp_tools.html 1 जनवरी 2011 live http://janegoodall.net/chimp_central/chimpanzees/gombe/tool.asp Tool Use 11 अगस्त 2007 Jane Goodall Institute https://web.archive.org/web/20070520045747/http://www.janegoodall.net/chimp_central/chimpanzees/gombe/tool.asp 20 मई 2007 dead समानुभूति left|thumb|चिम्पांजी की माँ और बच्चे हाल के अध्ययनों से पता चला है कि चिम्पांजी समूहों के भीतर जाहिर तौर पर परोपकारी व्यवहार में संलग्न होते हैं,http://www.sciencedaily.com/releases/2007/06/070625085134.htm Human-like Altruism Shown In Chimpanzees 11 अगस्त 2007 25 जून 2007 Science Daily https://web.archive.org/web/20160721065758/https://www.sciencedaily.com/releases/2007/06/070625085134.htm 21 जुलाई 2016 live Bradley Brenda 1999 June Levels of Selection, Altruism, and Primate Behavior The Quarterly Review of Biology 74 2 171–194 https://archive.org/details/sim_quarterly-review-of-biology_1999-06_74_2/page/171 11 अगस्त 2007 10.1086/393070 10412224 लेकिन ये असंबंधित समूह के सदस्यों की भलाई के प्रति उदासीन रहते हैं।Nature http://www.nature.com/nature/journal/v437/n7063/full/nature04243.html Nature 437, 1357–1359 (27 अक्टूबर 2005) 10.1038/nature04243 Nature.com 6 जून 2009 https://web.archive.org/web/20100430170653/http://www.nature.com/nature/journal/v437/n7063/full/nature04243.html 30 अप्रैल 2010 live "चिम्पांजी के अध्यात्म" के साक्ष्यों में शामिल हैं शोक का प्रदर्शन, "प्रारंभिक रोमांटिक प्यार", "वर्षा नृत्य", प्राकृतिक सौन्दर्य की सराहना जैसे कि किसी झील के ऊपर सूर्यास्त का दृश्य, वन्यजीव के प्रति जिज्ञासा और आदर भाव (जैसे कि अजगर, जो चिम्पान्जियों के लिए ना तो कोई खतरा है और ना ही भोजन का स्रोत), अन्य प्रजातियों के प्रति समानुभूति (जैसे कि कछुओं को खिलाना) और यहाँ तक कि बच्चों को खिलाते समय "एनिमिज्म (नाटक)" का प्रदर्शन.http://www.originsnet.org/chimpspiritdatabase.pdf एपेंडिक्स फॉर चिम्पांजी स्प्रिचुएल्टी बाय जेम्स हैरोड 28 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20080527230019/http://www.originsnet.org/chimpspiritdatabase.pdf 27 मई 2008 dead संवाद चिम्पांजी मनुष्य के गैर-शाब्दिक संवाद की तरह स्वरों के उच्चारण, हाथ के इशारों और चेहरे के हाव-भाव के प्रयोग से आपस में संवाद करते हैं। चिम्पांजी के मस्तिष्क पर किये गए शोध में यह पता चला है कि चिम्प का संवाद उनके मस्तिष्क के एक क्षेत्र को सक्रिय करता है जो उसी स्थान पर मौजूद है जहां मानव मस्तिष्क में भाषा का केन्द्र, ब्रोका का क्षेत्र मौजूद होता है। Communication Evolve Evolve (TV series) 14 सितंबर 2008 1 7 भाषा के अध्ययन Great ape language thumb|चिम्पांजी का साइड प्रोफ़ाइल वैज्ञानिक लंबे समय से भाषा के अध्ययन के प्रति इस विश्वास के साथ आकर्षित होते हैं कि यह एक अद्वितीय मानव संज्ञानात्मक क्षमता है। इस परिकल्पना का परीक्षण करने के लिए वैज्ञानिकों ने विशालकाय वानरों की कई प्रजातियों को मानवीय भाषा सिखाने का प्रयास किया है। 1960 के दशक में एलन और बीट्रिस गार्डनर द्वारा की गयी एक शुरुआती कोशिश में वाशू नामक एक चिम्पांजी को अमेरिकी सांकेतिक भाषा सिखाने के लिए 51 महीने का समय बिताना शामिल था। गार्डनर ने बताया कि वाशू ने 151 संकेतों को सीख लिया था और यह कि उसने तत्काल इन्हें अन्य चिम्पान्जियों को सिखा दिया था। Gardner, R. A., Gardner, B. T. 1969 Teaching Sign Language to a Chimpanzee Science 165 664–672 10.1126/science.165.3894.664 5793972 894 एक लंबी अवधि के बाद वाशू ने 800 से अधिक संकेतों को सीख लिया था। Allen, G. R., Gardner, B. T. 1980 Comparative psychology and language acquisition Thomas A. Sebok and Jean-Umiker-Sebok (eds.) Speaking of Apes: A Critical Anthology of Two-Way Communication with Man New York Plenum Press 287–329 कुछ वैज्ञानिकों, विशेषकर नोम चोमस्की और डेविड प्रिमैक के बीच गैर-मानव विशालकाय वानरों की भाषा सीखने की क्षमता के बारे में लगातार बहस चल रही है। वाशू पर शुरुआती रिपोर्ट के बाद कई अन्य अध्ययनों को विभिन्न स्तरों की सफलता प्राप्त हुई है,http://www.greatapetrust.org/bonobo/language/ संग्रहीत प्रति 28 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20040815161414/http://www.greatapetrust.org/bonobo/language/ 15 अगस्त 2004 dead जिसमें कोलंबिया विश्वविद्यालय के हर्बर्ट टेरेस द्वारा प्रशिक्षित पैरोडी के रूप में रखे गए निम चिम्प्स्की नाम के एक चिम्पांजी पर किया गया अध्ययन शामिल है। हालांकि उनके प्रारंभिक रिपोर्ट काफी सकारात्मक थे, नवंबर 1979 में टेरेस और उनकी टीम ने निम के वीडियोटेपों का उसके प्रशिक्षकों के साथ पुनः मूल्यांकन किया जिसमें उन्होंने संकेतों और सही संदर्भ (निम के संकेतों के पहले और उसके बाद दोनों ही स्थितियों में क्या हो रहा था) मूल्यांकन दोनों से पहले और नीम के संकेत के बाद) के लिए फ्रेम दर फ्रेम इसका विश्लेषण किया। फिर से विश्लेषण में टेरेस ने यह निष्कर्ष निकाला कि निम के जवाबों की व्याख्या केवल प्रयोगकर्ताओं की ओर से प्रोत्साहन और आंकड़ों की जानकारी देने में त्रुटियों के रूप में की जा सकती है। उन्होंने कहा, "वानरों का अधिकांश व्यवहार, अभ्यास मात्र होता है।" "भाषा अभी भी मानव प्रजाति की एक महत्वपूर्ण परिभाषा के रूप में मौजूद है।" इस विपरीत प्रतिक्रिया में टेरेस अब यह तर्क देते हैं कि निम द्वारा एएसएल का इस्तेमाल एक मानवीय भाषा को अपनाना नहीं था। निम ने कभी स्वयं बातचीत की शुरुआत नहीं की, नये शब्दों का इस्तेमाल शायद ही कभी किया और लोगों ने जो किया उसने सिर्फ़ उसकी नकल की। निम के वाक्य इंसानी बच्चों के विपरीत ज्यादा लंबे नहीं होते थे जिनकी शब्दावली और वाक्य की लंबाई एक मजबूत आपसी संबंध को प्रदर्शित करते हैं।http://www.skeptic.com/eskeptic/07-10-31 संग्रहीत प्रति 28 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110416095851/http://www.skeptic.com/eskeptic/07-10-31/ 16 अप्रैल 2011 dead स्मरण शक्ति क्योटो विश्वविद्यालय के प्राइमेट रिसर्च इन्स्टिट्यूट में 30-साल तक किये गये एक अध्ययन ने यह दिखाया कि चिम्पांजी 1 से 9 तक की संख्याओं और उनके मानों की पहचान करना सीखने में सक्षम हैं। इससे आगे चिम्पांजी ने फोटोग्राफ़ संबंधी स्मरण शक्ति के प्रति एक रुझान दिखाया, जिसे प्रयोगों में दिखाया गया था जिसमें 1 से 9 तक की संयुक्त संख्याओं को एक कंप्यूटर स्क्रीन पर एक सेकंड के चौथाई हिस्से से भी कम समय तक फ़्लैश किया गया था जिसके बाद चिम्प, अयूमू आरोही क्रम में दिखाये गये स्थानों को सही तरीके से और तुरंत बताने में सफ़ल रहा था। यही प्रयोग विश्व स्मरण शक्ति चैम्पियन बेन प्रिड्मोर द्वारा कई कोशिशों के बावजूद असफ़ल रहा था।इस अध्ययन को चैनल की एक्स्ट्राऑर्डिनरी एनिमल्स श्रृंखला के एक हिस्से के रूप में, "दी मेमोरी चिम्पजून 2020 InternetArchiveBot " नामक एक पांच कड़ियों वाली डॉक्युमेंट्री में प्रस्तुत किया गया। वानरों में हँसी thumb|300px|right|alt=Young chimpanzees|खेलता हुआ युवा चिम्पांजी हँसी मनुष्यों की तरह सीमित या विशिष्ट नहीं हो सकती है। चिम्पांजी और मनुष्य की हँसी में भिन्नताएं उन रूपांतरणों का परिणाम हो सकती हैं जो इंसानी बोली के रूप में विकसित हुआ है। दर्पण परीक्षण में देखे गये के अनुसार किसी की स्थिति के बारे में आत्म-जागरूकता या दूसरे की अवस्था के साथ उसकी पहचान करने की क्षमता (देखें मिरर न्युरोंस), हँसी के लिये आवश्यक शर्तें हैं, इसीलिये संभवतः जानवरों के हँसने का तरीका भी मनुष्यों के समान ही होता है। चिम्पांजी, गोरिल्ला और ओरांगउटान शारीरिक संपर्क जैसे कि कुश्ती, पीछा करने के खेल या गुदगुदी के जवाब में हँसी की तरह के स्वरोच्चारण का प्रदर्शन कर सकते हैं। यह जंगली और कैद में रखे गये चिम्पांजियों के मामले में प्रलेखित है। आम चिम्पांजी की हँसी को मनुष्यों द्वारा आसानी से नहीं पहचाना जा सकता है क्योंकि यह साँस लेने और छोड़ने की वैकल्पिक क्रियाओं से उत्पन्न होती है जिसकी आवाज काफ़ी हद तक साँस लेने या हाँफने जैसी होती है। कई ऐसे उदाहरण हैं जिनमें गैर-मानव प्रजातियों को खुशी जाहिर करते दिखाया गया है। एक अध्ययन में मानव शिशु और बोनोबोज के गुदगुदी करने पर निकाले गये आवाजों का विश्लेषण किया गया और इन्हें रिकार्ड किया गया है। ऐसा देखा गया है कि हालांकि बोनोबो की हँसी उच्च आवृत्ति की थी, इस हँसी में मानव शिशुओं के समान हँसी के तरीके का अनुसरण किया गया था और इसमें चेहरे के भाव भी उसी तरह के थे। मनुष्य और चिम्पांजी के शरीर में एक जैसी जगहों पर गुदगुदी होती है जैसे कि काँख और पेट. चिम्पांजियों में गुदगुदी का आनंद उम्र के साथ कम नहीं होता है।Steven Johnson 1 अप्रैल 2003 Emotions and the Brain Discover Magazine http://discovermagazine.com/2003/apr/featlaugh 10 दिसंबर 2007 https://web.archive.org/web/20110719034137/http://discovermagazine.com/2003/apr/featlaugh 19 जुलाई 2011 live Laughter in animals गुस्सा thumb|left|तंजानिया के महाले नेशनल पार्क में नर चिम्पांजी आम वयस्क चिम्पांजी विशेष रूप से नर बहुत ही आक्रामक हो सकते हैं। ये अपने क्षेत्र के प्रति अति संवेदनशील होते हैं और अन्य चिम्पांजियों को जान से भी मार सकते हैं।Walsh Bryan http://www.time.com/time/health/article/0,8599,1880229,00.html Why the Stamford Chimp Attacked TIME 18 फरवरी 2009 6 जून 2009 https://web.archive.org/web/20130826165155/http://www.time.com/time/health/article/0,8599,1880229,00.html 26 अगस्त 2013 live चिम्पांजी निम्न श्रेणी के प्राइमेट्स जैसे कि रेड कोलोबसhttp://www.springerlink.com/content/f78767667u462588/ Primates Volume 49, Number 1 / January, 2008 p41-49 10.1007/s10329-007-0062-1 स्प्रिंगरlink.com 6 जून 2009 जून 2020 InternetArchiveBot और बुश बेबीजhttp://www.sciencemag.org/cgi/content/full/315/5815/1063 Science 23 फ़रवरी 2007: Vol. 315. no. 5815, p. 1063 Sciencemag.org 23 फरवरी 2007 6 जून 2009 https://web.archive.org/web/20100916054421/http://www.sciencemag.org/cgi/content/full/315/5815/1063 16 सितंबर 2010 live http://www.sciencedirect.com/science?_ob=ArticleURL&_udi=B6VRT-4N3XDTT-1&_user=10&_rdoc=1&_fmt=&_orig=search&_sort=d&view=c&_acct=C000050221&_version=1&_urlVersion=0&_userid=10&md5=3e71833d8e3c5f228535010f7b7d72d7 Current Biology Volume 17, Issue 5, 6 मार्च 2007, Pages 412-417 10.1016/j.cub.2006.12.042 Sciencedirect.com 6 जून 2009 https://web.archive.org/web/20080308110011/http://www.sciencedirect.com/science?_ob=ArticleURL&_udi=B6VRT-4N3XDTT-1&_user=10&_rdoc=1&_fmt=&_orig=search&_sort=d&view=c&_acct=C000050221&_version=1&_urlVersion=0&_userid=10&md5=3e71833d8e3c5f228535010f7b7d72d7 8 मार्च 2008 live का लक्ष्य बनाकर शिकार करने में भी संलग्न रहते हैं और इन शिकारों से प्राप्त माँस का इस्तेमाल अपने समुदाय के बीच "सोशल टूल" के रूप में करते हैं।http://www.pubmedcentral.nih.gov/articlerender.fcgi?tool=pubmed&pubmedid=17849015 PLoS ONE. 2007; 2(9): e886 10.1371/journal.pone.0000886 Pubmedcentral.nih.gov 6 जून 2009 नवंबर 2024 InternetArchiveBot फ़रवरी 2009 में एक ऐसी घटना के बाद जिसमें ट्रैविस नामक एक पालतू चिम्प ने स्टैन्फ़ोर्ड, कनेक्टिकट में एक मादा पर हमला किया था और उसे विकृत कर दिया था, जिसके बाद अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने संयुक्त राज्य अमेरिका में आदिम पालतू जानवरों पर प्रतिबंध को मंजूरी दी थी।शहरी, पीटर, स्टाफ लेखक, दी एडवोकेट . 2009. हाउस ने प्राइवेट पेट बैन को स्वीकृति दी . http://www.stamfordadvocate.com/ci_11778339 https://web.archive.org/web/20091220060553/http://www.stamfordadvocate.com/ci_11778339 20 दिसंबर 2009 इंसानों से मेलजोल इतिहास thumb|300px|right|alt=62-year-old chimpanzee|ग्रेगोइरे: 62 वर्षीय वृद्ध चिम्पांजी अफ़्रीकियों का चिम्पांजियों के साथ सहस्त्राब्दियों से संपर्क रहा है। कुछ अफ़्रीकी गाँवों, विशेषकर कांगो के लोकतांत्रिक गणराज्य में चिम्पांजियों को सदियों तक पालतू जानवरों के रूप में रखा गया था। देश के पूर्व में स्थित विरुंगा नेशनल पार्क में पार्क के अधिकारी नियमित रूप से उन लोगों से चिम्पांजियों को जब्त कर लेते थे जो उन्हें पालतू जानवरों के रूप में रखते थे।http://news.bbc.co.uk/1/hi/sci/tech/7839819.stm बीबीसी न्यूज़ Gorilla diary: August - December 2008 20 जनवरी 2009 28 अप्रैल 2010 https://web.archive.org/web/20090205031918/http://news.bbc.co.uk/1/hi/sci/tech/7839819.stm 5 फ़रवरी 2009 live यूरोपीय लोगों के साथ चिम्पांजियों का पहला सम्पर्क 17वीं सदी के दौरान वर्तमान समय के अंगोला में दर्ज किया गया था। पुर्तगाली राष्ट्रीय संग्रहालय (टोरे डो टोम्बो) में संरक्षित पुर्तगाली अन्वेषक ड्वार्टे पैचेको परेरा (1506) की डायरी संभवतः यह बताने वाला पहला यूरोपीय दस्तावेज है कि चिम्पांजियों ने अपने चट्टानी औजारों स्वयं बनाया था। हालांकि “चिम्पांजी” नाम का पहला प्रयोग 1738 तक नहीं देखा गया था। यह नाम शिलूबा भाषा के शब्द "किविली-चिम्पेन्जे" से लिया गया है जो इस जानवर का स्थानीय नाम है और इसका साधारण अनुवाद "मॉकमैन" या सम्भवतः सिर्फ़ "वानर" है। भाषा विज्ञान में "चिम्प " को काफ़ी हद तक 1870 के दशक के अंत में किसी समय शामिल किया गया था।http://dictionary.reference.com/browse/chimp chimp definition | Dictionary.com Dictionary.reference.com 6 जून 2009 https://web.archive.org/web/20160303170009/http://dictionary.reference.com/browse/chimp 3 मार्च 2016 live जीव विज्ञानियों ने पैन को इस जानवर के जीनस नाम रूप में रखा है। चिम्पांजियों तथा अन्य वानरों के बारे में कथित रूप से प्राचीन काल के पश्चिमी लेखकों को ज्ञात था; लेकिन उनकी यह जानकारी मुख्यतः यूरोपीय यात्रियों के खंडित वर्णनों से उपजे यूरोपीय और अरब समाज के मिथकों या किंवदंतियों पर ही आधारित थी। वानरों का उल्लेख अरस्तू और अंग्रेजी बाइबल में भी कई जगह किया गया है जहाँ इन्हें सोलोमन द्वारा एकत्र किये जाने के रूप में वर्णित किया गया है। (1 किंग्स 10:22. हालांकि हिब्रू शब्द qőf का मतलब वानर हो सकता है). कुरान में भी वानरों का उल्लेख किया गया है (7:166), जहाँ शब्बत का उल्लंघन करने वाले इजरायलियों से अल्लाह कहते हैं "बी ये एप्स". इन प्रारम्भिक अंतरमहाद्वीपीय चिम्पांजियों में से पहला अंगोला से आया था और उसे 1640 में ओरेंज के राजकुमार फ़्रेडरिक हेनरी को उपहार स्वरूप भेंट किया गया था और अगले कई सालों तक इसके भाई-बंधुओं द्वारा इस सिलसिले का अनुसरण किया गया था। वैज्ञानिकों ने इन पहले चिम्पांजियों का वर्णन "पिग्मीज" के रूप में किया और मनुष्य के साथ इनकी गहरी समानता पर ध्यान दिया। अगले दो दशकों में यूरोप में अनेकों जीवों का आयात किया गया जिन्हें मुख्यतः विभिन्न प्राणी उद्यानों में दर्शकों के मनोरंजन हेतु मंगाया गया था। thumb|left|100px|ह्यूगो रीन्होल्ड की 'एफे मिट शाडेल ("दिमाग वाला वानर"), 19 वीं सदी के अंत में चिम्पांजियों को किस प्रकार देखा जाता था उसका एक उदाहरण है। डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत (1859 में प्रकाशित) ने चिम्पांजियों अधिकांश जीव विज्ञान में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी जगा दी जिसके कारण जंगलों और कैद में रखे गये जानवरों के कई अध्ययन किये गए। उस समय के चिम्पांजियों के पर्यवेक्षक मुख्यतः मनुष्यों से संबंधित व्यवहारों में दिलचस्पी रखते थे। इसको विशुद्ध रूप से वैज्ञानिक नहीं कहा जा सकता क्योंकि ज्यादातर ध्यान इस बात पर केंद्रित किया जा रहा था कि क्या इन जानवरों में ऐसे गुण मौजूद हैं जिन्हें "अच्छा" कहा जा सके; चिम्पांजियों की बुद्धि को अक्सर काफ़ी बढ़ा-चढ़ा कर बताया जाता था, उदाहरण के लिए ह्यूगो रेनहोल्ड की अति प्रसिद्ध एफ़े मिट शैडेल (बायीं ओर के चित्र को देखें) में. 19वीं सदी के अंत तक चिम्पांजी मनुष्यों के लिये काफ़ी हद तक एक रहस्य बने हुये थे जिसकी बहुत ही कम वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध थी। thumb|right|लॉस एंजिल्स चिड़ियाघर में चिम्पांजी 20वीं सदी में चिम्पांजी व्यवहार में वैज्ञानिक शोध के एक नए अध्याय का शुभारंभ हुआ। 1960 से पहले चिम्पांजी के अपने प्राकृतिक आवास में उसके व्यवहार के बारे में लगभग कोई भी जानकारी नहीं थी। उसी साल जुलाई में जेन गुडऑल तंजानिया के गोम्बे वन में चिम्पांजियों के बीच रहने के लिये चली गयीं जहाँ उन्होंने प्राथमिक रूप से कासाकेला चिम्पांजी समुदाय के सदस्यों पर अध्ययन किया। उनकी यह खोज धमाकेदार थी कि चिम्पांजी अपने औजार स्वयं बनाते थे और उनका उपयोग करते थे, क्योंकि पहले यह माना जाता था कि ऐसा करने वाली एकमात्र प्रजाति मानव है। चिम्पांजियों पर सबसे अधिक प्रगतिशील प्रारंभिक अध्ययन वोल्फ़गैंग कोहलर और राबर्ट यर्केस द्वारा किये गये थे, दोनों ही प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थे। दोनों वैज्ञानिकों और उनके साथियों ने चिम्पांजियों की सीखने, विशेषकर समस्या को सुलझाने की बौद्धिक क्षमता के बारे में अध्ययन पर खास तौर से ध्यान केंद्रित करने वाले चिम्पांजियों के प्रयोगशाला अध्ययनों को निर्धारित किया। इसमें प्रयोगशाला के चिम्पांजियों पर विशेष रूप से बुनियादी, व्यावहारिक परीक्षणों को शामिल किया गया था जिसके लिये साफ़ तौर पर एक उच्च स्तरीय बौद्धिक क्षमता (जैसे कि पहुँच से दूर मौजूद केले को हासिल करने की समस्या का समाधान कैसे करें) की आवश्यकता थी। उल्लेखनीय रूप से यर्केस ने जंगलों में चिम्पांजियों पर विस्तारित परीक्षण किये जिससे चिम्पांजियों और उनके व्यवहार की वैज्ञानिक समझ को विकसित करने में काफ़ी मदद मिली। यर्केस ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय तक चिम्पांजियों पर अध्ययन किया जबकि कोहलर ने पाँच वर्ष के अध्ययन के नतीजे को अपनी प्रसिद्ध रचना 1925 में (जो संयोगवश वही समय था जब यर्केस ने अपना विश्लेषण शुरु किया था) मेंटालिटी आफ़ एप्स में प्रकाशित किया, उन्होंने अंततः यह निष्कर्ष दिया कि "चिम्पांजी मनुष्यों में देखे जाने वाले सामान्य तरह के बौद्धिक व्यवहार को विकसित कर लेते हैं।.. एक ऐसा व्यवहार जिसे विशेष तौर पर मनुष्यों में देखा जाता है" (1925). Goodall Jane Jane Goodall 1986 The Chimpanzees of Gombe: Patterns of Behavior 0-674-11649-6 Belknap Press of Harvard University Press Cambridge, Mass. registration https://archive.org/details/chimpanzeesofgom00good अमेरिकन जर्नल आफ़ प्राइमेटोलोजी के अगस्त 2008 के अंक में तंजानिया के महाले माउंटेन्स नेशनल पार्क में चिम्पांजियों पर एक साल तक चले एक अध्ययन के परिणामों के बारे में बताया गया था जिसमें यह साक्ष्य प्रस्तुत किये गये थे कि चिम्पांजी वायरस के संक्रमण से होने वाली बीमारियों के शिकार होते हैं जो संभवतः उन्हें मनुष्यों के सम्पर्क से हुआ होगा। आणविक, सूक्ष्मदर्शीय और महामारी संबंधी जाँचों ने यह दिखाया कि महाले माउंटेन नेशनल पार्क में रहने वाले चिम्पांजी एक सांस की बीमारी से ग्रस्त थे जिसका कारण सम्भवतः मानव पारामाइक्सोवायरस का एक प्रकार था।न्यूज़वाइज़: रिसर्चर्स फाइंड ह्यूमन वायरस इन चिम्पांजी https://web.archive.org/web/20110412172956/http://www.newswise.com/articles/view/541407/ 12 अप्रैल 2011 5 जून 2008 को प्राप्त किया गया। अध्ययन left|thumb|अंतरिक्ष में जाने वाला चिम्पांजी एनोस, 1961 में मर्करी-एटलस 5 कैप्सूल में डाले जाने से पहले. नवंबर 2007 तक अमेरिका की 10 प्रयोगशालाओं में (वहाँ कैद में रहने वाले 3,000 विशाल वानरों में से) 1300 चिम्पांजी मौजूद थे जिन्हें या तो जंगलों से पकड़ा गया था या फ़िर सर्कसों, पशु प्रशिक्षकों या चिड़ियाघरों से प्राप्त किया गया था। http://www.releasechimps.org/mission/end-chimpanzee-research End chimpanzee research: overview Project R&R, New England Anti-Vivisection Society 11 दिसंबर 2005 24 मार्च 2008 https://web.archive.org/web/20080417043712/http://www.releasechimps.org/mission/end-chimpanzee-research/ 17 अप्रैल 2008 dead ज्यादातर प्रयोगशालाओं में या तो शोध को स्वयं किया गया या शोध के लिए चिम्पांजियों को उपलब्ध कराया; http://www.hsus.org/animals_in_research/chimps_deserve_better/research/chimpanzee-lab-and-sanctuary-map.html Chimpanzee lab and sanctuary map The Humane Society of the United States 24 मार्च 2008 https://web.archive.org/web/20080307055400/http://www.hsus.org/animals_in_research/chimps_deserve_better/research/chimpanzee-lab-and-sanctuary-map.html 7 मार्च 2008 dead इस शोध को "संक्रामक एजेंट के साथ टीकाकरण, चिम्पांजी के हित के लिये नहीं बल्कि शोध के लिये की जाने वाली शल्य चिकित्सा या बायोप्सी और/या औषधि परीक्षण" के रूप में परिभाषित किया गया। http://www.hsus.org/animals_in_research/chimps_deserve_better/research/overview_of_research_uses_and.html Chimpanzee Research: Overview of Research Uses and Costs Humane Society of the United States 24 मार्च 2008 https://web.archive.org/web/20080307055406/http://www.hsus.org/animals_in_research/chimps_deserve_better/research/overview_of_research_uses_and.html 7 मार्च 2008 dead संघ द्वारा वित्त पोषित दो प्रयोगशालाएं चिम्पांजियों का प्रयोग करती हैं: जॉर्जिया के अटलांटा में इमोरी यूनिवर्सिटी में यर्केस नेशनल प्राइमेट रिसर्च लेबोरेटरी और टेक्सास के सैन एंटोनियो में साउथवेस्ट नेशनल प्राइमेट सेंटर.लोव्ग्रेन, स्टेफन. शुड लैब्स ट्रीट चिम्पस मोर लाइक ह्यूमन? https://web.archive.org/web/20110604070812/http://news.nationalgeographic.com/news/2005/09/0906_050906_chimplabs.html 4 जून 2011 , नेशनल ज्योग्राफिक न्यूज, 6 सितम्बर 2005. अमेरिका में पाँच सौ चिम्पांजियों को प्रयोगशाला में इस्तेमाल से रिटायर कर दिया गया है और ये अमेरिका या कनाडा में अभयारण्यों में रहते हैं। जैव-चिकित्सा संबंधी अनुसंधान में इस्तेमाल किये गए चिम्पांजियों को ज्यादातर प्रयोगशाला संबंधी जानवरों के मामले में प्रयोग करने के बाद मार डालने के प्रचलन की बजाय कई दशकों तक बार-बार इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिका की प्रयोगशालाओं में वर्तमान में मौजूद कुछ चिम्पांजियों को 40 से अधिक वर्षों से प्रयोगों में इस्तेमाल किया जा रहा है।चिम्पस डिज़र्व बेटर https://web.archive.org/web/20080215112131/http://www.hsus.org/animals_in_research/chimps_deserve_better/ 15 फ़रवरी 2008 , संयुक्त राज्य अमेरिका की ह्यूमन सोसायटी. प्रोजेक्ट आरएंडआर के अनुसार अमेरिका की प्रयोगशालाओं में रखे गये चिम्पांजियों को मुक्त करने के लिये एक अभियान – न्यू इंगलैंड एंटी-विविसेक्शन सोसायटी द्वारा जेन गुडऑल और अन्य प्राइमेट शोधकर्ताओं के सहयोग से चलाया जा रहा है – अमेरिकी प्रयोगशाला में सबसे पुराना ज्ञात चिम्प, वेनका है जिसका जन्म 21 मई 1954 को फ़्लोरिडा की एक प्रयोगशाला में हुआ था।A former Yerkes lab worker http://www.releasechimps.org/chimpanzees/their-stories/wenka/ Release & Restitution for Chimpanzees in U.S. Laboratories » Wenka Releasechimps.org 6 जून 2009 https://web.archive.org/web/20090504232851/http://www.releasechimps.org/chimpanzees/their-stories/wenka/ 4 मई 2009 dead उसे उसके जन्म के दिन ही एक दृष्टि प्रयोग में इस्तेमाल के लिये उसकी माँ से अलग कर दिया गया था, यह प्रयोग 17 महीनों तक चला और उसके बाद उसे एक पालतू जानवर के रूप में उत्तरी कैरोलिना के एक परिवार को बेच दिया गया। 1957 में उसे फ़िर से यर्केस नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर में वापस लाया गया जब वह इतना बड़ा हो गया था कि उसे संभालना मुश्किल हो गया था। तब से उसने छः बार अपने बच्चों को जन्म दिया है और उसे शराब के इस्तेमाल, खाने वाले गर्भ निरोधकों, बुढ़ापा और संज्ञानात्मक अध्ययनों में इस्तेमाल किया गया है।वेंका https://web.archive.org/web/20090504232851/http://www.releasechimps.org/chimpanzees/their-stories/wenka/ 4 मई 2009 , आर&आर परियोजना, न्यू इंग्लैंड एंटी-विविसेक्शन सोसायटी. चिम्पांजी जीनोम के प्रकाशन के साथ प्रयोगशालाओं में चिम्पांजियों के इस्तेमाल को बढ़ाने की कथित तौर पर योजनाएं तैयार की गयी हैं जिसके बारे में कुछ वैज्ञानिकों का तर्क है कि शोध के लिये चिम्पांजियों के प्रजनन पर संघीय प्रतिबंध (फ़ेडरल मोरेटोरियम) को हटा लिया जाना चाहिये। लैंगली, गिल. नेक्सट टू किन: ए रिपोर्ट ऑन दी यूज़ ऑफ प्रिमेट्स इन एक्सपेरिमेंट्स https://web.archive.org/web/20071128121456/http://www.eceae.org/english/documents/NoKReport.pdf 28 नवंबर 2007 , विभाजन के उन्मूलन के लिए ब्रिटिश संघ, पी. 15, सिटिंग वंडेबर्ग, जेएल, एट ऑल. "ए यूनिक बायोमेडिकल रिसोर्स एट रिस्क", नेचुरल 437:30-32. यू.एस. नेशनल इन्स्टिट्यूट्स आफ़ हेल्थ (एनआईएच) द्वारा 1996 में पाँच साल का एक प्रतिबंध लगाया गया था क्योंकि एचआईवी संबंधी शोध के लिये बड़ी संख्या में चिम्पांजियों को पैदा किया जा रहा था और इसे 2001 के बाद से वार्षिक रूप से आगे बढ़ाया जा रहा था। अन्य शोधकर्ताओं का तर्क है कि चिम्पांजी विशिष्ट प्रकार के जानवर हैं और इनका इस्तेमाल या तो प्रयोगशालाओं में नहीं किया जाना चाहिये या फ़िर इनके साथ अलग तरह से व्यवहार किया जाना चाहिये। एक विकासवादी जीव विज्ञानी और सैन डियेगो में कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के प्राइमेट विशेषज्ञ, पास्कल गैग्नियक्स यह तर्क देते हैं कि चिम्पांजियों की अपने बारे में समझ, औजारों का इस्तेमाल और मनुष्यों से आनुवंशिक समानता को देखते हुए चिम्पांजियों के इस्तेमाल से किये जाने वाले अध्ययनों में उन नैतिक दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिये जिन्हें आम-सहमति देने में अक्षम मानवीय विषयों के लिये इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा हाल के एक अध्ययन में यह बताया गया है कि प्रयोगशालाओं से मुक्त किये गये चिम्पांजियों में यातना के बाद होने वाली एक तनाव संबंधी समस्या देखी जाती है।http://www.releasechimps.org/pdfs/ExecSumTraumaFINAL.pdf Building an Inner Sanctuary: Complex PTSD in Chimpanzees Journal of Trauma and Dissociation Bradshaw, G.A. et al 9 1 9–34 28 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110128213506/http://www.releasechimps.org/pdfs/ExecSumTraumaFINAL.pdf 28 जनवरी 2011 dead यर्केस नेशनल प्राइमेट रिसर्च लैबोरेटरी के निदेशक, स्टुअर्ट ज़ोला इस बात से सहमत नहीं हैं। उन्होंने नेशनल ज्योग्राफ़िक को बताया: "मुझे नहीं लगता है कि हमें किसी प्रजाति के साथ मानवीय रूप से व्यवहार करने के लिये अपने दायित्व के बीच किसी तरह का अंतर रखना चाहिये, चाहे यह कोई चूहा हो या बंदर हो या फ़िर चिम्पांजी. इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है कि हम इसका कितना भला चाह सकते हैं, आखिरकार चिम्पांजी इंसान नहीं हैं।" सरकारों द्वारा विशाल वानरों के शोध पर प्रतिबंध लगाने की संख्या बढ़ती जा रही है जो शोध या जहरीले परीक्षणों में चिम्पांजियों और अन्य विशाल वानरों के इस्तेमाल पर रोक लगाती है।गुल्डबर्ग, हेलेन. दी ग्रेट ऐप डिबेट https://web.archive.org/web/20110521070438/http://www.spiked-online.com/Articles/000000005549.htm 21 मई 2011 , स्पिक्ड ऑनलाइन 29 मार्च 2001. 12 अगस्त 2007 को प्राप्त किया गया। वर्ष 2006 तक ऑस्ट्रिया, न्यूजीलैंड, नीदरर्लैंड, स्वीडन और ब्रिटेन ने इस तरह के प्रतिबंधों की शुरुआत की है।लैंगली, गिल. नेक्सट टू किन: ए रिपोर्ट ऑन दी यूज़ ऑफ प्रिमेट्स इन एक्सपेरिमेंट्स https://web.archive.org/web/20071128121456/http://www.eceae.org/english/documents/NoKReport.pdf 28 नवंबर 2007 , विभाजन के उन्मूलन के लिए ब्रिटिश संघ, पी. 12. लोकप्रिय संस्कृति में List of fictional apes Category:Famous apes चिम्पांजियों को लोकप्रिय संस्कृति में एक समान रूप से दिखाया गया है जहाँ उन्हें ज्यादातर मानकीकृत भूमिकाओंVan Riper A. Bowdoin Science in popular culture: a reference guide https://archive.org/details/sciencepopularcu00ripe_428 Greenwood Press Westport 2002 19 0–313–31822–0 जैसे कि बच्चों जैसे साथियों के रूप में, खास सहयोगियों या जोकरों के रूप में शामिल किया गया है।वान रिपर, ओप.सिट., पी. 18. अपने चेहरे की प्रमुख विशिष्टताओं, लम्बे हाथ-पैरों और तेजी से चलने-फ़िरने के कारण खास सहयोगियों या जोकरों की भूमिका के लिये ये विशेष रूप से अनुकूल होते हैं, जो मनुष्यों के लिये मनोरंजक होते हैं। इसी प्रकार चिम्पांजियों को मनुष्यों की तरह कपड़े पहनाकर दिखाने के मनोरंजक कार्य सर्कसों और रंगमंचीय कार्यक्रमों के पारंपरिक स्टेपल्स रहे हैं। टेलीविजन के युग में चिम्प की भूमिका के लिये संयुक्त राज्य अमेरिका में एक नयी शैली की शुरुआत हुई है: एक ऐसी सीरीज जिसके पात्रों में चिम्पांजियों को पूरी तरह से मनुष्यों जैसे कपड़े पहने और मानव अभिनेताओं द्वारा डब की गयी लाइनों पर "बोलते" हुए दिखाया जाता है। ये कार्यक्रम, जिनके उदाहरणों में 1970 के दशक में लैन्सेलोट लिंक, सीक्रेट चिम्प या 1990 के दशक में द चिम्प चैनल शामिल हैं, अपनी पुरानी, कम हास्य वाली कथाओं को मजेदार बनाने के लिये वानर पात्र की विलक्षणता पर भरोसा किया गया था। उनके चिम्पांजी "अभिनेता" सर्कस के किसी खेल में वानरों के समान आपस में बदले जाने योग्य होते थे जो चिम्पांजियों की तरह मनोरंजक होते थे ना कि व्यक्तिगत तौर पर. मानव अधिकार समूह पेटा ने पशुओं के साथ होनेवाले दुरुपयोग का हवाला देते हुए विज्ञापन दाताओं को टेलीविजन और व्यावसायिक विज्ञापनों में चिम्पांजियों के इस्तेमाल के विरुद्ध आग्रह किया था।http://www.nomoremonkeybusiness.com/ संग्रहीत प्रति 28 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20100303121336/http://www.nomoremonkeybusiness.com/ 3 मार्च 2010 dead जब अन्य टीवी कार्यक्रमों में चिम्पांजियों को दिखाया जाता है, आम तौर पर उन्हें हास्यपूर्ण ढंग से मनुष्यों को सहायता पहुँचाने के लिये ऐसा करते हुए पेश किया जाता है। उदाहरण के लिये उस भूमिका में जे. फ़्रेड मग्स टुडे शो के प्रस्तोता (होस्ट) डेव गैरोवे के साथ 1950 के दशक में, जूडी 1960 के दशक में डक्टारी में या डार्विन द वाइल्ड थोर्न बेरीज में 1990 के दशक में दिखाई दिये थे। इसके विपरीत अन्य जानवरों के काल्पनिक चित्रणों में जैसे कि कुत्तों (लैसी के रूप में), डॉल्फ़ीन्स (फ़्लिपर), घोड़े (द ब्लैक स्टैलियन) या यहाँ तक कि अन्य विशाल वानरों (किंग कांग), चिम्पांजी के पात्र और उनकी भूमिकाएं शायद ही कभी कथानक के लिये प्रासंगिक होती हैं। विज्ञान कथा में भूमिकाएं चिम्पांजियों के व्यक्तिगत चित्रण और किसी कथानक में आकस्मिक की बजाय उनकी केंद्रीय भूमिका को आम तौर पर विज्ञान कथाओं में देखा जा सकता है। रॉबर्ट ए. हेनलेन की लघु कथा "जेरी वाज ए मैन" (1947) में एक आनुवंशिक रूप से विकसित चिम्पांजी द्वारा बेहतर चिकित्सा के लिए किये गए मुकदमे को दर्शाया गया है। 1972 की निकट भविष्य पर आधारित फ़िल्म कॉन्क्वेस्ट ऑफ द प्लानेट ऑफ द एप्स में एकमात्र बोलने वाले चिम्पांजी, सीजर के नेतृत्व में गुलाम वानरों द्वारा अपने मानव मालिकों के खिलाफ़ विद्रोह का चित्रण दर्शाया गया था। वर्तमान समय पर आधारित रॉबर्ट सिल्वरबर्ग द्वारा लिखित एक अन्य लघु कथा "द पोप ऑफ द चिम्प्स" में चिम्पांजियों के एक समूह में धार्मिकता के चिह्नों को विकसित होते दिखाया गया है, जो उनके व्यवहार पर नज़र रखने वालों के लिये काफ़ी हद तक आश्चर्यजनक था। डेविड बर्न के सुधारक उपन्यासों में भविष्य की एक ऐसी स्थिति को प्रस्तुत किया गया है जिसमें मनुष्यों द्वारा चिम्पांजियों (और कुछ अन्य प्रजातियों) का "उत्थान" करके उनमें मानव-स्तरीय क्षमताओं को विकसित किया जाता है। इन्हें भी देखें Mammals जीनोम परियोजना मानवनुमा (Hominid) आनुवांशिक कोड पढ़ने की विधि राइज़ ऑफ़ द प्लैनेट ऑफ़ द एप्स वॉर फॉर द प्लैनेट ऑफ एप्स डॉन ऑफ़ द प्लैनेट ऑफ़ द एप्स बोनोबो कपि मानवनुमा आस्ट्रेलोपिथिक्स सन्दर्भ 2 सामान्य संदर्भ पिक्रैल, जॉन. (24 सितम्बर 2002). "ह्यूमंस, चिम्पस नॉट एज़ क्लोजली रिलेटेड एज़ थॉट" https://web.archive.org/web/20170907210754/http://news.nationalgeographic.com/news/2002/09/0924_020924_dnachimp.html 7 सितंबर 2017 . नेशनल ज्योग्राफिक. अग्रिम पठन हाक, जॉन. "हाउ स्ट्रोंग इज ए चिम्पांजी?" स्लेट, 25 फ़रवरी 2009. बाहरी कड़ियाँ Pan Pan Chimpanzee Chimpanzee: Wildlife summary African Wildlife Foundation http://www.awf.org/wildlives/6 April 2010 https://web.archive.org/web/20080516205918/http://www.awf.org/wildlives/6 16 मई 2008 live Stanford Craig B. The Predatory Behavior and Ecology of Wild Chimpanzees University of Southern California 2002(?) April 2010 http://www-rcf.usc.edu/~stanford/chimphunt.html https://web.archive.org/web/20100629151044/http://www-rcf.usc.edu/~stanford/chimphunt.html 29 जून 2010 live श्रेणी:चिम्पांजी श्रेणी:महाकपि श्रेणी:कपि श्रेणी:अफ़्रीका के स्तनधारी