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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

भदन्त आनन्द कौसल्यायन

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भदंत आनंद कौसल्यायन भदंत डॉ. आनंद कौसल्यायन yes 1905 1 5 सोहना गाँव, अंबला जिला, पंजाब, भारत yes 1988 6 22 1905 1 5 भारत लेखक, निबंधकार, विद्वान, बौद्ध भारतीय यदि बाबा ना होते, कहाँ क्या देखा भदंत डॉ. आनंद कौसल्यायन (5 जनवरी 1905 - 22 जून 1988) बौद्ध भिक्षु, पालि भाषा के मूर्धन्य विद्वान तथा लेखक थे। इसके साथ ही वे पूरे जीवन घूम-घूमकर समतामूलक समाज का प्रचार प्रसार करते रहे। वे 10 साल राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के प्रधानमंत्री रहे। वे बीसवीं सदी में बौद्ध धर्म के सर्वश्रेष्ठ क्रियाशील व्यक्तियों में गिने जाते हैं।न्यूज़ दलित दस्तक जयंती विशेषः भदन्त आनन्द कौसल्यायन, जिन्होंने बाबासाहेब से पूछा था- आपको कौन से बुद्ध पसंद हैं दलित दस्तक 5 January 2022 https://www.dalitdastak.com/bhadant-anand-kausalyayan-a-follower-of-babasaheb-ambedkar/ 19 August 2024 जीवन परिचय उनका जन्म ०५ जनवरी १९०५ कोआज का इतिहास: आज है प्रसिद्ध बौध भिक्षु भदन्त आनंद कौसल्यायन की जयंती Zee News Hindi 5 January 2019 https://zeenews.india.com/hindi/zee-hindustan/video/aaj-ka-itihas-today-is-the-birth-anniversary-of-the-famous-buddhist-monk-bhadnant-anand-kausalayan/485950 hi 19 August 2024 अविभाजित पंजाब प्रांत के मोहाली के निकट सोहना नामक गाँव में एक खत्री परिवार में हुआ था। उनके पिता लाला रामशरण दास अंबाला में अध्यापक थे। उनके बचपन का नाम हरिनाम था। १९२० में आनंद ने १०वी की परीक्षा पास की, १९२४ में १९ साल की आयु में आनंद ने स्नातक की परीक्षा पास की। जब वे लाहौर में थे तब वे उर्दू में भी लिखते थे। वह एक महान विचारक और पालि भाषा के जानकर भी थेभदंत आनंद कौसल्यायन सम्मान समारोह आयोजित dainiktribuneonline.com 31 January 2023 https://www.dainiktribuneonline.com/news/topnews/bhadant-anand-kausalyayan-felicitation-ceremony-organized-139082/ 19 August 2024 19 अगस्त 2024 https://web.archive.org/web/20240819151352/https://www.dainiktribuneonline.com/news/topnews/bhadant-anand-kausalyayan-felicitation-ceremony-organized-139082/ dead भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी आनंद ने सक्रिय रूप से भाग लिया। वे भीमराव आंबेडकर और महापंडित राहुल सांकृत्यायन से काफी प्रभावित थे। उन्होंने भिक्षु जगदीश कश्यप, भिक्षु धर्मरक्षित आदि लोगो के साथ मिलकर पाली तिपिटक का अनुवाद हिंदी में किया। वे श्रीलंका में जाकर बौद्ध भिक्षु हुए। वे श्रीलंका की विद्यालंकर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अध्यक्ष भी रहे। आनंद ने जातक की अत्थाकथाओ का ६ खंडो में पालि भाषा से हिंदी में अनुवाद किया। धम्मपद का हिंदी अनुवाद के आलावा अनेक पालि भाषा की किताबों का हिंदी भाषा में अनुवाद किया। साथ ही अनेक मौलिक ग्रंथ भी रचे जैसे - 'अगर बाबा न होते', जातक कहानियाँ, भिक्षु के पत्र, दर्शन : वेद से मार्क्स तक, 'राम की कहानी, राम की जुबानी', 'मनुस्मृति क्यों जलाई', बौद्ध धर्म एक बुद्धिवादी अध्ययन, बौद्ध जीवन पद्धति, जो भुला न सका, ३१ दिन में पालि, पालि शब्दकोश, सारिपुत्र मौद्गाल्ययान की साँची, अनागरिक धरमपाल आदि। आंबेडकर के 'दि बुद्धा एण्ड हिज् धम्मा' ग्रंथ का हिंदी एवं पंजाबी अनुवाद किया है। 22 जून 1988 को भदंत आनंद का नागपुर में महापरिनिर्वा +भदंत आनंद कौशल्यायन की 20 पुस्तकें भिक्खु के पत्र जो भूल न सका आह! ऐसी दरिद्रता बहानेबाजी यदि बाबा न होते रेल के टिकट कहाँ क्या देखा संस्कृति देश की मिट्टी बुलाती है बौद्ध धर्म एक बुद्धिवादी अध्ययन श्रीलंका मनुस्मृति क्यों जलायी गई? भगवद्गीता की बुद्धिवादी समीक्षा राम कहानी राम की जबानी एन इंटेलिजेंट मैंस गाइड टू बुद्धिज्म धर्म के नाम पर भगवान बुद्ध और उनके अनुचर भगवान बुद्ध और उनके समकालीन भिक्षु बौद्ध धर्म का सार आवश्यक पालि________________________________________________________________ बौद्ध धर्म और दर्शन बौद्ध धर्म: एक बुद्धिवादी अध्ययन त्रिपिटक और जातक कथाएँ धम्मपद अंगुत्तर निकाय जातक कथाएँ भगवान बुद्ध और अनुचर बौद्ध जीवन-पद्धति बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:1905 में जन्मे लोग श्रेणी:१९८८ में निधन श्रेणी:हिंदी गद्यकार श्रेणी:बौद्ध लेखक श्रेणी:बौद्ध भिक्षु श्रेणी:अंबाला के लोग श्रेणी:20 पुस्तकें के रचीयता