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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

उद्भावना

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उद्भावना हिन्दी की एक साहित्यिक पत्रिका है। इसके सम्पादक अजेय कुमार हैं। इस पत्रिका का प्रकाशन सन् 1986 से आरंभ हुआ और यह अपने प्रकाशन के 30 वर्ष पार कर चुकी है। इसका प्रकाशन शाहदरा, दिल्ली से होता है। प्रमुख विशेषांक इस पत्रिका के द्वारा समय-समय पर अनेक महत्त्वपूर्ण विशेषांक प्रकाशित किये गये हैं। इसके 1857 पर केन्द्रित विशेषांक के तीन संस्करण निकाले गये फिर भी उसकी मांग बनी ही रही।मजाज़ विशेषांक 'बहुत मुश्किल है दुनिया का सँवरना', अतिथि संपादक- जानकी प्रसाद शर्मा, उद्भावना अंक-101-102, अगस्त 2012, पृष्ठ-2. कुछ चर्चित विशेषांकों के नाम इस प्रकार हैं : 1857 : निरंतरता और परिवर्तन (संपादक- प्रदीप सक्सेना) पाब्लो नेरूदा विशेषांक (संपादक- विष्णु खरे) मजाज़ विशेषांक 'बहुत मुश्किल है दुनिया का सँवरना' (अतिथि संपादक- जानकी प्रसाद शर्मा, उद्भावना अंक-101-102, अगस्त 2012) रामविलास शर्मा महाविशेषांक 'प्रतिरोध ही सौंदर्य है' (दिसंबर 2012) मंटो विशेषांक 'अजब आज़ाद मर्द था मंटो' (अतिथि संपादक- जानकी प्रसाद शर्मा, उद्भावना अंक-122, जनवरी 2016) प्रतिरोध ही सौंदर्य है : रामविलास शर्मा महाविशेषांक डॉ॰ रामविलास शर्मा के जन्म-शताब्दी वर्ष में प्रकाशित कुल 730 पृष्ठों के इस महाविशेषांक के अतिथि संपादक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक प्रदीप सक्सेना हैं। इस महाविशेषांक के संपादन के मूल में डॉ॰ रामविलास शर्मा के समग्र मूल्यांकन की दृष्टि से तीन संकल्प रहे हैं : एक, यानी सबसे पहले यह कि बहस बड़े पैमाने पर प्रतिनिधि सामग्री से संगठित होगी। ताजातरीन सामग्री को ही जगह दी जायेगी।प्रतिरोध ही सौंदर्य है : रामविलास शर्मा महाविशेषांक (उद्भावना अंक-104, नवम्बर-दिसम्बर, 2012), अतिथि संपादक- प्रदीप सक्सेना, पृष्ठ-11. दो, व्यक्तिगत संस्मरणों, फ़िजूल के विवरणों, आग्रहों और हिसाब-किताब साफ करने वाली सामग्री से बचा जायेगा। सिर्फ इश्यूज़ पर केन्द्रित किया जायेगा। तीन, सभी भौतिक साधनों की सहायता भी प्रदान की जायेगी क्योंकि यह रचनाकार का नहीं आलोचक-चिंतक का मामला था। पुस्तकें, मूल दस्तावेज, फोटोस्टेट प्रतियां, तथा अन्य सामग्री मुहैया करायी जायेगी जो भी मन से श्रम करने को तैयार होगा।प्रतिरोध ही सौंदर्य है : रामविलास शर्मा महाविशेषांक (उद्भावना अंक-104, नवम्बर-दिसम्बर, 2012), अतिथि संपादक- प्रदीप सक्सेना, पृष्ठ-12. इन बृहत्तर संकल्पों के साथ तैयार इस महाविशेषांक का प्रकाशन दिसंबर 2012 में हुआ। इस महाविशेषांक में पाँच खण्ड हैं। प्रथम खण्ड है- प्रतिभा : केन्द्र और परिधि जिसमें डॉ॰ शर्मा के कवि रूप से लेकर मार्क्सवाद, सौंदर्य-चिंतन, भाषाविज्ञान, अर्थशास्त्रीय चिन्तन से लेकर रंगमंच एवं संगीत-दर्शन तक को विभिन्न विद्वानों ने अपने आलेखों में विश्लेषित किया है। दूसरा खण्ड है- आलोचना और इतिहास जिसमें नामवर सिंह एवं नन्दकिशोर नवल के विरोधपरक साक्षात्कार एवं अभय कुमार दुबे तथा विश्वनाथ त्रिपाठी के निष्पक्ष अथवा समर्थनपरक साक्षात्कारों के अलावा डॉ॰ शर्मा की इतिहास दृष्टि एवं आलोचना दृष्टि पर आलेखों के साथ-साथ रामविलास शर्मा और विवाद पर भी भगवान सिंह का आलेख है। तीसरा खण्ड है जागरण, दर्शन, काव्य और परंपरा। इस खंड में डॉ॰ शर्मा के सौंदर्य बोध और तुलसीदास, ऋग्वेद, महाभारत, नवजागरण एवं लोक जागरण संबंधी मान्यताओं पर विभिन्न विद्वानों ने विस्तार से लिखा है। चौथा खंड है प्रतिरोध का सौंदर्य। इस खंड में सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक रविभूषण ने 34 पृष्ठों में पर्याप्त प्रमाणों के साथ काफी विस्तार से 'साम्राज्यवाद-विरोधी आलोचक' के रूप में डॉ॰ शर्मा की मान्यताओं का विश्लेषण किया है।प्रतिरोध ही सौंदर्य है : रामविलास शर्मा महाविशेषांक (उद्भावना अंक-104, नवम्बर-दिसम्बर, 2012), अतिथि संपादक- प्रदीप सक्सेना, पृष्ठ-469-502. इसके अतिरिक्त इस खंड में 'मित्र-संवाद' में व्यक्त डॉ॰ शर्मा के काव्य चिंतन से लेकर साम्राज्यवाद, हिन्दी जाति, दलित दृष्टि, स्त्री दृष्टि, किसान चेतना, महावीर प्रसाद द्विवेदी के संदर्भ में उनकी आलोचना दृष्टि तथा 1857 के संदर्भ में उनके विचारों पर विभिन्न आलेख संयोजित हैं। पाँचवाँ खण्ड अंग्रेजी लेखन : ज्ञान-ज्वार के मोती में संकलित पाँच आलेखों में विभिन्न दृष्टिकोण से डॉ॰ शर्मा के अंग्रेजी लेखन एवं अनुवाद पर विचार किया गया है। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:पत्रिकाएँ श्रेणी:हिन्दी पत्रिकाएँ श्रेणी:साहित्यिक पत्रिकाएँ