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कुल्लू
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कुल्लू Kullu Kullu.jpg कुल्लू का दृश्य कुल्लू India Himachal Pradesh 31.960 77.114 inline, title हिमाचल प्रदेश में स्थिति देश प्रान्त हिमाचल प्रदेश ज़िला कुल्लू ज़िला 18536 2011 भाषा प्रचलित पहाड़ी, हिन्दी भारतीय मानक समय +5:30 पिनकोड 175101 दूरभाष कोड 01902 HP 34, HP 66 लिंगानुपात 1.17 (1000/852) ♂/♀ www.hpkullu.gov.in
thumb|280px|कुल्लू ब्यास नदी के किनारे बसा हुआ है
thumb|280px|कुल्लू में पतझड़
कुल्लू (Kullu) भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के कुल्लू ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है। यह कुल्लू घाटी में ब्यास नदी के किनारे बसा हुआ है। कुल्लू उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।"Himachal Pradesh, Development Report, State Development Report Series, Planning Commission of India, Academic Foundation, 2005, ISBN 9788171884452"Himachal Pradesh District Factbook," RK Thukral, Datanet India Pvt Ltd, 2017, ISBN 9789380590448
विवरण
कुल्लू घाटी को पहले कुलंथपीठ कहा जाता था। कुलंथपीठ का शाब्दिक अर्थ है रहने योग्य दुनिया का अंत। कुल्लू घाटी भारत में देवताओं की घाटी रही है। हिमाचल प्रदेश में बसा एक खूबसूरत पर्यटक स्थल है कुल्लु। बरसों से इसकी खूबसूरती और हरियाली पर्यटकों को अपनी ओर खींचती आई है। व्यास नदी के किनारे बसा यह स्थान अपने यहां मनाए जाने वाले रंगबिरंगे दशहरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां 17वीं शताब्दी में निर्मित रघुनाथजी का मंदिर भी है जो हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ स्थान है। सिल्वर वैली के नाम से मशहूर यह जगह केवल सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के लिए ही नहीं बल्कि एडवेंचर स्पोर्ट के लिए भी प्रसिद्ध है।
कुल्लू गर्मी के मौसम में लोगों का एक मनपसंद गंतव्य है। मैदानों में तपती धूप से बच कर लोग हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में शरण लेते हैं। यहां के मंदिर, सेब के बागान और अंतर्राष्ट्रीय दशहरा उत्सव हजारों पर्यटकों को कुल्लू की ओर आकर्षित करते हैं। यहां के स्थानीय हस्तशिल्प कुल्लू की सबसे बड़ी विशेषता है।
रघुनाथजी मंदिर
इस मंदिर का निर्माण राजपूत राजा जगत सिंह ने 17वीं शताब्दी में करवाया था। कहा जाता है कि एक बार उनसे एक भयंकर भूल हो गई थी। उस गलती का प्रायश्चित करने के लिए उन्होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। यहां श्री रघुनाथ अपने रथ पर विराजमान हैं। इस मंदिर में स्थापित रघुनाथ जी की प्रतिमा राजा जगत सिंह ने अयोध्या से मंगवाई थी। आज भी इस मंदिर की शोभा देखते ही बनती है।
बिजली महादेव मंदिर
कुल्लू से 1४ किलोमीटर दूर पहाड़ी मथान नामक स्थान पर बना यह मंदिर यहां का प्रमुख धार्मिक स्थल है। मंदिर तक पहुंचने के लिए कठिन चढ़ाई चढ़नी होती है। यहां का मुख्य आकर्षण 100 मी. लंबी ध्वज़(छड़ी) है। इसे देखकर ऐसा ल्रगता है मानो यह सूरज को भेद रही हो। इस ध्वज़ (छड़ी) के बारे में कहा जाता है बिजली कड़कने पर इसमें जो तरंगे उठती है वे भगवान का आशीर्वाद होता है। इस ध्वज पर लग़भग हर साल बिजली गिरती है। कभी-कभी मंदिर के अन्दर शिवलिंग पर भी बिजली गिरती है जिस से शिवलिंग खंडित हो जाता है। पुजारी खंडित शिवलिंग को मक्खन से जोड़ता है जिस से शिवलिंग फिर सामान्य हो जाता है। इस मंदिर से कुल्लू और पार्वती घाटी का खुबसूरत नजारा देखा जा सकता है।
बिजली महादेव मंदिर हलैनी
यह मंदिर बिजली महादेव रोड में हलैनी नामक एक गांव में पड़ता है। जो लगभग कुल्लू शहर से 17की.म. की दूरी पर है। इस मंदिर की खास विशेषता यह है यहां पर एक दियार का पेड़ है। जो उल्टा है ।जिसका सिर जमीन में धसा हुआ है और जड़े उपर की तरफ है। बताया जाता किसी काल में भगवान् बिजली महादेव ने बिजली महादेव(मथान) से यहां फेंका था।
कुल्लु दशहरा
कुल्लू का दशहरा
कुल्लु का दशहरा पूरे देश में प्रसिद्ध है। इसकी खासियत है कि जब पूरे देश में दशहरा खत्म हो जाता है तब यहां शुरु होता है। देश के बाकी हिस्सों की तरह यहां दशहरा रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन करके नहीं मनाया जाता। सात दिनों तक चलने वाला यह उत्सव हिमाचल के लोगों की संस्कृति और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। उत्सव के दौरान भगवान रघुनाथ जी की रथयात्रा निकाली जाती है। यहां के लोगों का मानना है कि करीब 1000 देवी-देवता इस अवसर पर पृथ्वी पर आकर इसमें शामिल होते हैं।
वॉटर और एडवेंचर स्पोर्ट
कुल्लु घाटी में अनेक जगह हैं जहां मछली पकड़ने का आनंद उठाया जा सकता है। इन जगहों में पिरडी, रायसन, कसोल नग्गर और जिया प्रमुख हैं। इसके साथ ही ब्यास् नदी में वॉटर राफ्टिंग का मजा लिया जा सकता है। इन सबके अलावा यहां ट्रैकिंग भी की जा सकती है।
कुल्लु के आसपास दर्शनीय स्थल
नग्गर
नग्गर
यह स्थान करीब 1400 वर्षों तक कुल्लु की राजधानी रही है। यहां 16वीं शताब्दी में बने पत्थर और लकड़ी के आलीशान महल आज होटल में बदल चुके हैं। इन होटलों का संचालन हिमाचल पर्यटन निगम करता है। यहां रूसी चित्रकार निकोलस रोएरिक की एक चित्र दीर्घा है। इन सबके अलावा यहां विष्णु, त्रिपुरा सुंदरी और भगवान कृष्ण के प्राचीन मंदिर भी हैं।
जगतसुख
जगतसुख कुल्लु की सबसे प्राचीन राजधानी है। यह विज नदी के बायीं ओर नागर और मनाली के बीच स्थित है। यहां दो प्राचीन मंदिर हैं। पहला छोटा सा गौरीशंकर मंदिर और दूसरा संध्या देवी का मंदिर है।
देव टिब्बा
समुद्र से 2953 मी. की ऊंचाई पर स्थित इस जगह को इंद्रालिका के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि महर्षि वशिष्ठ ने अर्जुन को पशुपति अस्त्र पाने के लिए तप करने का परामर्श दिया था। इसी स्थान पर अर्जुन ने इंद्र से यह अस्त्र पाने के लिए तप किया था।
बंजार
बंजार, कुल्लू
यहां श्रृंग ऋषि का प्रसिद्ध मंदिर है। इन्हीं ऋषि की याद में यहां प्रति वर्ष मई के महीने में एक उत्सव का आयोजन किया जाता है। ठहरने के लिए पीडब्ल्यूडी का रेस्ट हाउस उपलब्ध है। कुछ दूरी पर ही जलोरी पास हे जो बन्जार से सिर्फ् १९ किलोमीटर दूर् हे जो गर्मियों में भी बर्फ् की चादर से लिप्त रह्ता हे। यहां से कुछ दूरी पर सरयोलसर नाम की झील है, जो देवदार के उंचे-उंचे पेडों के हरे भरे जंगल से घिरी हुई है जो बेह्द सुन्दर है और यहां पर एक नदी बहती है, जिसका नाम तीर्थन नदी है।
मणिकर्ण
मणिकर्ण
यह स्थान कुल्लु से 43 किलोमीटर दूर है। यह जगह गर्म पानी के झरने के लिए प्रसिद्ध है। हजारों लोग इस पवित्र गर्म पानी में डुबकी लगाते हैं। यहां का पानी इतना गर्म होता है कि इसमें दाल और सब्जी पकायी जा सकती हैं। यह हिंदुओं और सिक्खों का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां गुरुद्वारे के साथ रामचंद्र और शिवजी का प्राचीन मंदिर भी है।
रुमसू
यह स्थान कुल्लु से 25 कि॰मी॰ दूर नग्गर से पूर्व की और 7 कि॰मी॰ जाकर है। एस गाँव से होकर चन्द्राखनी और मलाणा जाते है। इस गाँव में बहुत सारे देवी देवता है पर इनमे प्रमुख भगवान शुभ नारायण है।
thumb|280px|कुल्लू, लहसनी से एक सुंदर प्रकृति का दृश्य
आवागमन
वायु मार्ग
कुल्लू-मनाली विमानक्षेत्र निकटतम हवाई अड्डा है, जो कुल्लू से 10 किलोमीटर दूर भुंतर में है। यहाँ के लिए दिल्ली से नियमित उड़ानें हैं। भुंतर से कुल्लू घाटी के लिए बस और टैक्सियां मिल जाती हैं।
रेल मार्ग
निकटतम रेलहेड कालका, चंडीगढ़ और पठानकोट हैं जहां से कुल्लू सड़क के रास्ते पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग
राष्ट्रीय राजमार्ग 3 यहाँ से गुज़रता है। कुल्लू दिल्ली, अंबाला, चंडीगढ़, शिमला, देहरादून, पठानकोट, धर्मशाला और डलहौजी समेत हिमाचल और देश के अन्य भागों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। इन जगहों से कुल्लु के लिए नियमित रूप से बसें चलती हैं।
इन्हें भी देखें
कुल्लू ज़िला
हिमाचल प्रदेश
सन्दर्भ
श्रेणी:हिमाचल प्रदेश के शहर
श्रेणी:कुल्लू ज़िला
श्रेणी:कुल्लू ज़िले के नगर
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श्रेणी:हिमाचल प्रदेश में पर्यटन आकर्षण
श्रेणी:हिमाचल प्रदेश में हिल स्टेशन