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411 समाचार
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इलाहाबाद के दर्शनीय स्थल

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प्रयागराज (Prayagraj), जिसका भूतपूर्व नाम इलाहाबाद (Allahabad) था, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्रमुख नगर है। नीचे प्रयागराज मुख्य दर्शनीय स्थल का विवरण है। इलाहाबाद किला, प्रयागराज संगम के निकट स्थित यह किला बहुत पुराना है जिसे मुगल सम्राट अकबर ने 1583 ई. में बनवाया था। वर्तमान में इस किले का कुछ ही भाग पर्यटकों के लिए खुला रहता है। बाकी हिस्से का प्रयोग भारतीय सेना करती है। इस किले में तीन बड़ी गैलरी हैं जहां पर ऊंची मीनारें हैं। सैलानियों को अशोक स्तंभ, सरस्वती कूप और जोधाबाई महल देखने की इजाजत है। इसके अलावा यहां अक्षय वट के नाम से मशहूर बरगद का एक पुराना पेड़ और पातालपुर मंदिर भी है। त्रिवेणी संगम, प्रयागराज इस स्थान पर गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का मिलन होता है। संगम सिविल लाइन्स से 7 किलोमीटर की दूरी पर है। साधु सन्तों को यहां हमेशा पूजा पाठ करते हुए देखा जा सकता है। 12 साल में लगने वाले कुंभ मेले के अवसर पर संगम विभिन्न गतिविधियों का केन्द्र बन जाता है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बेहद मनमोहक लगता है। स्वराज भवन, प्रयागराज इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण मोतीलाल नेहरू ने करवाया था। 1930 में उन्होंने इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। इसके बाद यहां कांग्रेस कमेटी का मुख्यालय बनाया गया। भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का जन्म यहीं पर हुआ था। एक जमाने में आनंद भवन भारतीय राजनीति में अहम स्थान रखने वाले नेहरू परिवार का निवास स्थान था। आज इसे संग्रहालय का रूप दे दिया गया है। यहां पर गांधी और नेहरू परिवार की पुरानी निशानियों को देखा जा सकता है। हनुमान मंदिर, प्रयागराज संगम के निकट स्थित यह मंदिर उत्तर भारत के; मंदिरों में अद्वितीय है। मंदिर में हनुमान की विशाल मूर्ति आराम की मुद्रा में स्थापित है। यद्यपि यह एक छोटा मंदिर है फिर भी प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में भक्तगण आते हैं। नदी से नजदीक होने कारण बाढ आने पर यह मंदिर डूब जाता है इलाहाबाद उच्च न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय भारत का ही नहीं एशिया का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है, यहाँ पर 95 न्यायाधीशो की क्षमता है। इसकी एक खंडपीड उच्च न्यायालय (लखनऊ पीठ) लखनऊ में स्थित है। खुसरौ बाग, प्रयागराज इस विशाल बाग में खुसरौ, उसकी बहन और उसकी राजपूत मां का मकबरा स्थित है। खुसरौ सम्राट जहांगीर के सबसे बड़े पुत्र थे। इस पार्क का संबंध भारत के स्वतंत्रता संग्राम से भी है। पब्लिक लाइब्रेरी, प्रयागराज चन्द्रशेखर आजाद पार्क के अंदर स्थित यह लाइब्रेरी शहर की सबसे प्राचीन लाइब्रेरी है। 1864 में स्थापित यह लाइब्रेरी वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहां बहुत सी दुर्लभ पुस्तकें देखी जा सकती हैं। शिवकुटी, प्रयागराज गंगा नदी के किनार स्थित शिवकुटी भगवान शिव को समर्पित है। शिवकुटी को कोटीतीर्थ के रूप में भी जाना जाता है। सावन माह में यहां एक मेला लगता है। मिन्टो पार्क, प्रयागराज सफेद पत्थर के इस मैमोरियल पार्क में सरस्वती घाट के निकट सबसे ऊंचे शिखर पर चार सिंहों के निशान हैं। लार्ड मिन्टो ने इन्हें 1910 में स्थापित किया था। 1 नवम्बर 1858 में लार्ड कैनिंग ने यहीं रानी विक्टोरिया का लोकप्रिय घोषणापत्र पढा था। इलाहाबाद म्युजियम, प्रयागराज चन्द्र शेखर आजाद पार्क के निकट स्थित है। इस संग्रहालय का मुख्य आकर्षण निकोलस रोरिच की पेंटिग्स, राजस्थानी लघु आकृतियां, सिक्कों और दूसरी शताब्दी से आधुनिक युग की पत्थरों की मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। संग्रहालय में 18 गैलरी हैं और यह सोमवार के अलावा प्रतिदिन 10 से 5 बजे तक खुला रहता है। जवाहर प्लेनेटेरियम, प्रयागराज आनंद भवन के बगल में स्थित इस प्लेनेटेरियम में खगोलीय और वैज्ञानिक जानकारी हासिल करने के लिए जाया जा सकता है। यहां प्रतिदिन पांच शो चलते हैं। सोमवार और सरकारी अवकाश के दिन यह प्लेनेटेरियम बंद रहता है। चन्द्रशेखर आजाद पार्क, प्रयागराज यह पार्क महान स्वतंत्रता सैनानी चन्द्रशेखर आजाद को समर्पित है जिन्होंने अंग्रेजी सेना से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। पार्क में उनकी मूर्ति स्थापित है। भारद्वाज आश्रम, प्रयागराज यह आश्रम संत भारद्वाज से संबंधित है। कहा जाता है भगवान राम चित्रकूट में बनवास जाने से पहले यहां आए थे। वर्तमान में यहां भारद्वाजेश्वर महादेव, संत भारद्वाज और देवी काली का मंदिर है। श्रेणी:प्रयागराज के दर्शनीय स्थल