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सेंगोल (राजदंड)
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thumb|लोकसभा में 'सेंगोल' लगाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
सेंगोल स्वर्ण परत वाला एक राजदंड है जिसे 28 मई 2023 को भारत के नए संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थापित किया। इसका इतिहास चोल साम्राज्य से जुड़ा है। नए राजा के राजतिलक के समय सेंगोल भेंट किया जाता था।नये संसद भवन के उद्घाटन के समय सामने आयेगा भारत का राजदण्ड
1947 में धार्मिक मठ - अधीनम के प्रतिनिधि ने सैंगोल भारत गणराज्य के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा था। https://www.anandabazar.com/photogallery/all-you-need-to-know-about-historical-septre-sengol-that-is-going-to-be-placed-in-new-parliament-building-dgtl-photogallery/cid/1432390?slide=4 নতুন সংসদ ভবনে থাকছে স্বাধীনতার অন্যতম প্রতীক ‘সেঙ্গল’! সোনার রাজদণ্ডে লুকিয়ে কোন ইতিহাস? 24 May 2023 Anandabazar Anandabazar Patrika New Delhi bn 25 May 2023 लेकिन भारत में लोकतांत्रिक शासन होने के कारण इसे इलाहाबाद संग्रहालय में रख दिया और किसी सरकार ने इसका इस्तेमाल नहीं किया।What is 'Sengol', a sceptre to be installed in new Parliament https://www.rediff.com/news/report/sengol-from-tn-received-by-nehru-finds-a-home-in-new-parliament/20230524.htm 25 मई 2023 Rediff en सेंगोल मुख्यतः चांदी से बना है जिसके ऊपर सोने का पानी चढ़ा है।
शब्द उत्पत्ति
'सेंगोल' तमिल शब्द 'सेम्मई' (नीतिपरायणता) व 'कोल' (छड़ी) से मिलकर बना है।கோல் - தமிழ் விக்சனரி https://ta.wiktionary.org/w/index.php?title=%E0%AE%95%E0%AF%8B%E0%AE%B2%E0%AF%8D&oldid=1634223 ta.wiktionary.org 28 मई 2023 ta ‘सेंगोल’ शब्द संस्कृत के ‘संकु’ (शंख) से भी आया हो सकता है।नए संसद भवन में रखा जाएगा 'सेंगोल' सनातन धर्म में शंख पवित्रता का प्रतीक है।
तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित तमिल विश्वविद्यालय में पुरातत्त्व के प्रोफेसर एस राजावेलु के अनुसार तमिल में सेंगोल का अर्थ 'न्याय' है। तमिल राजाओं के पास ये सेंगोल होते थे जिसे अच्छे शासन का प्रतीक माना जाता था। शिलप्पदिकारम् और मणिमेखलै, दो महाकाव्य हैं जिनमें सेंगोल के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है। विश्वप्रसिद्ध तिरुक्कुरल में भी सेंगोल का उल्लेख है।सेंगोल क्या है जिसे प्रधानमन्त्री मोदी ने नए संसद भवन में स्थापित किया है
बनावट व प्रतीकात्मकता
सेंगोल सोने की परत चढ़ा हुआ राजदंड है, जिसकी लंबाई लगभग 5 फीट (1.5 मीटर) है इसका मुख्य हिस्सा चांदी से बना है।2023-05-25 ചോളന്മാരിൽനിന്ന് പ്രചോദനം, അഞ്ചടി നീളം, മുകളിൽ നന്ദീരൂപം, നെഹ്റുവിന് കൈമാറി; എന്താണ് ചെങ്കോൽ? https://www.mathrubhumi.com/in-depth/features/inspired-by-the-cholas-handed-over-to-nehru-sengol-to-be-installed-in-new-parliament-building-1.8587079 2023-05-26 Mathrubhumi ml सेंगोल को बनाने में 800 ग्राम सोने का प्रयोग किया गया था। इसे जटिल डिजाइनों से सजाया गया है और शीर्ष पर नंदी की नक्काशी की गई है। नंदी हिंदू धर्म में एक पवित्र पशु और शिव का वाहन है। इसे धर्म के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जिसे पुराणों में एक बैल के रूप में व्यक्त किया गया है।2023-05-24 New Parliament building opening How a letter to PMO set off a search for the Sengol en-IN The Hindu https://www.thehindu.com/news/national/new-parliament-building-opening-how-a-letter-to-pmo-set-off-search-for-the-sengol/article66889495.ece 2023-05-25 0971-751X 2023-05-24 https://web.archive.org/web/20230524181219/https://www.thehindu.com/news/national/new-parliament-building-opening-how-a-letter-to-pmo-set-off-search-for-the-sengol/article66889495.ece live அகஸ்டஸ் 2023-05-25 நாடாளுமன்றத்தில் செங்கோல்; இதற்கும் சோழர்களுக்கும் என்ன தொடர்பு? - தரவுகளுடன் விரிவான அலசல் https://www.vikatan.com/government-and-politics/story-about-historic-sengol-to-be-installed-in-new-parliament-building 2023-05-25 www.vikatan.com ta
नंदी की प्रतिमा इसका शैव परंपरा से जुड़ाव दर्शाती है। हिंदू व शैव परंपरा में नंदी समर्पण का प्रतीक है। यह समर्पण राजा और प्रजा दोनों के राज्य के प्रति समर्पित होने का वचन है। दूसरा, शिव मंदिरों में नंदी हमेशा शिव के सामने स्थिर मुद्रा में बैठे दिखते हैं। हिंदू मिथकों में ब्रह्मांड की परिकल्पना शिवलिंग से की जाती रही है। इस तरह नंदी की स्थिरता शासन के प्रति अडिग होने का प्रतीक है।5000 साल पुराना है सेंगोल का इतिहास, जानिए 'राजदंड' की कहानी जो संसद में होगा स्थापित https://www.msn.com/hi-in/news/other/5000-%E0%A4%B8-%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B2-%E0%A4%95-%E0%A4%87%E0%A4%A4-%E0%A4%B9-%E0%A4%B8-%E0%A4%9C-%E0%A4%A8-%E0%A4%8F-%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A6%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%B9-%E0%A4%A8-%E0%A4%9C-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9-%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5-%E0%A4%AA-%E0%A4%A4/ar-AA1bMGD4 28 मई 2023 MSN hi-IN
इसके अतिरिक्त नंदी के नीचे वाले भाग में देवी लक्ष्मी व उनके आस-पास हरियाली के तौर पर फूल-पत्तियां, बेल-बूटे उकेरे गए हैं, जो कि राज्य की संपन्नता को दर्शाती हैं।
इतिहास
thumb|तेलुगु भाषा के समाचार पत्र आंध्र पत्रिका में जवाहरलाल नेहरू को प्रस्तुत किए जा रहे 'सेंगोल' का उल्लेख, 17 अगस्त 1947 (अनुवाद:स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरुवदुथुराई मठ के प्रमुख, परम पावन श्री अंबावन बंडारा सन्नधा ने श्री जवाहरलाल नेहरू को स्वर्ण राजदंड सौंपा।)
प्राचीन काल में भारत में जब राजा का राज्याभिषेक होता था, तो विधिपूर्वक राज्याभिषेक हो जाने के बाद राजा राजदण्ड लेकर राजसिंहासन पर बैठता था। राजसिंहासन पर बैठने के बाद वह कहता था कि अब मैं राजा बन गया हूँ अदण्ड्योऽस्मि, अदण्ड्योस्मि, अदण्ड्योऽ (मैं अदण्ड्य हूँ, मैं अदण्ड्य हूँ); अर्थात मुझे कोई दण्ड नहीं दे सकता। तो पुरानी विधि ऐसी थी कि उनके पास एक संन्यासी खड़ा रहता था, लँगोटी पहने हुए। उसके हाथ में एक छोटा, पतला सा पलाश का डण्डा रहता था। वह उससे राजा पर तीन बार प्रहार करते हुए उसे कहता था कि 'राजा ! यह अदण्ड्योऽस्मि अदण्ड्योऽस्मि गलत है। दण्ड्योऽसि दण्ड्योऽसि दण्ड्योऽसि अर्थात तुझे भी दण्डित किया जा सकता है। सामाजिक समरसता और हिन्दुत्व
चोल काल के दौरान ऐसे ही राजदंड का प्रयोग सत्ता हस्तान्तरण को दर्शाने के लिए किया जाता था। उस समय पुराना राजा नए राजा को इसे सौंपता था।क्या है सेंगोल? नई संसद के उद्घाटन में रखा जाएगा, अमित शाह बोले- इससे पवित्र कोई स्थान नहीं हो सकता https://www.jansatta.com/national/what-is-sengol-amit-shah-press-conference-on-azadi-ka-amrit-mahotsav/2823565/ 25 मई 2023 Jansatta 24 मई 2023 hiराजदंड सौंपने के दौरान 7वीं शताब्दी के तमिल संत संबंध स्वामी द्वारा रचित एक विशेष गीत का गायन भी किया जाता था।
कुछ इतिहासकार मौर्य, गुप्त वंश और विजयनगर साम्राज्य में भी सेंगोल को प्रयोग किए जाने की बात कहते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने पंडित जवाहरलाल नेहरू से एक सवाल किया था: "ब्रिटिश से भारतीय हाथों में सत्ता के हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में किस समारोह का पालन किया जाना चाहिए?" इस प्रश्न ने नेहरू को वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी सी राजगोपालाचारी (राजाजी) से परामर्श करने के लिए प्रेरित किया। राजाजी ने चोल कालीन समारोह का प्रस्ताव दिया जहां एक राजा से दूसरे राजा को सत्ता का हस्तांतरण उच्च पुरोहितों की उपस्थिति में पवित्रता और आशीर्वाद के साथ पूरा किया जाता था। राजाजी ने तमिलनाडु के तंजावुर जिले में शैव संप्रदाय के धार्मिक मठ - तिरुवावटुतुरै आतीनम् से संपर्क किया। तिरुवावटुतुरै आतीनम् 500 वर्ष से अधिक पुराना है और पूरे तमिलनाडु में 50 मठों को संचालित करता है। अधीनम के नेता ने तुरंत पांच फीट लंबाई के 'सेंगोल' को तैयार करने के लिए चेन्नई में सुनार वुम्मिदी बंगारू चेट्टी को नियुक्त किया।
वुम्मिदी बंगारू चेट्टी ने सेंगोल तैयार करके अधीनम के प्रतिनिधि को दे दिया। अधीनम के नेता ने वह सैंगोल पहले लॉर्ड माउंटबेटन को दे दिया। फिर उनसे वापस लेकर 15 अगस्त की तारीख 1947 के शुरू होने से ठीक 15 मिनट पहले स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दे दिया। लोकप्रिय पुस्तक "फ्रीडम एट मिडनाइट" में, लेखकों ने उल्लेख किया है कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, दो हिंदू संन्यासी एक प्राचीन परंपरा का पालन करते हुए प्रधानमंत्री नेहरू को स्वर्ण राजदंड, 'सेंगोल' सौंपने आए थे, जिसमें हिंदू संतों ने भारत के राजा अपनी शक्ति के प्रतीकों के साथ.Collins Larry Lapierre Dominique Freedom at Midnight 1997 230 As once Hindu holy men had conferred upon ancient India's kings their symbols of power, so sannyasin had come to York Road to bestow their antique emblems of authority on the man about to assume the leadership of a modern Indian nation. They sprinkled Jawaharlal Nehru with holy water, smeared his forehead with sacred ash, laid their sceptre on his arms.
स्थापना
thumb|अधीनम से 'सेंगोल' प्राप्त करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
28 मई, 2023 को, नई संसद के उद्घाटन की शुरुआत में, अधीनम पुजारियों ने एक पारंपरिक पूजा की जिसमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया, और मोदी सम्मान के प्रतीक के रूप में पवित्र सेंगोल के सामने झुके। तब अधीनम पुजारियों के एक समूह ने सेंगोल को पीएम मोदी को प्रस्तुत किया।2023-05-24 Inspired by the Cholas, handed over to Nehru: historic 'Sengol' to be installed in new Parliament building en-IN The Hindu https://www.thehindu.com/news/national/inspired-by-cholas-handed-over-by-british-to-nehru-historic-sengol-to-be-installed-in-new-parliament-building/article66888185.ece 2023-05-28 0971-751X.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी सेंगोल को नए संसद भवन में लोकसभा के अध्यक्ष के आसन के ठीक निकट स्थापित कर दिया।2023-05-24 Inspired by the Cholas, handed over to Nehru: historic 'Sengol' to be installed in new Parliament building en-IN The Hindu https://www.thehindu.com/news/national/inspired-by-cholas-handed-over-by-british-to-nehru-historic-sengol-to-be-installed-in-new-parliament-building/article66888185.ece 2023-05-28 कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सेनगोल भारत की सभ्यतागत परंपरा की पुनः खोज का प्रतीक बन गया है| The political story behind Modi's new Parliament and Sengol https://economictimes.indiatimes.com/news/india/the-political-story-behind-modis-new-parliament-and-sengol/articleshow/100566905.cms en-IN The Economic Times 2023-05-28 2023-06-23 "Sengol is a narrative device that helps Modi tell many stories — of Nehru's banalisation of tradition, of buried histories, of India missing its tryst with the civilisational authority of a divine scepter, and of India rediscovering itself after 75 years of cultural amnesia. With Sengol, Modi has rewritten India as Bharat."
इन्हें भी देखें
तिरुवावटुतुरै आतीनम्
नया संसद भवन
बाहरी कड़ियाँ
सेंगोल का मूल महाभारत में https://web.archive.org/web/20230616222149/https://awadhfirst.com/history/1166/ 16 जून 2023
सन्दर्भ
30em
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श्रेणी:चोल वास्तुकला