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411 समाचार
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कार्बाइन

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कार्बाइन (Carbine) thumb फ़्रान्स (ऐतिहासिक शब्दावली के रूप में) आमतौर पर 10 से 20 इंच के बीच राइफल कैलिबर या पिस्तौल कैलिबर घुड़सवार सेना (ऐतिहासिक), विशेष बल, पैराट्रूपर्स, पुलिस कार्बाइन (Carbine) एक प्रकार का लंबी नली वाला आग्नेयास्त्र (Firearm) है, लेकिन इसकी नली और कुल लंबाई एक मानक राइफल या मस्कट की तुलना में काफी छोटी होती है। मूल रूप से, अधिकांश आधुनिक कार्बाइन किसी मौजूदा 'असॉल्ट राइफल' के ही छोटे संस्करण होते हैं, जो उसी गोला-बारूद का उपयोग करते हैं। कार्बाइन का मुख्य उद्देश्य एक मानक राइफल की तुलना में बेहतर 'पैंतरेबाज़ी' और हल्कापन प्रदान करना है, जिससे इसे 'नज़दीकी मुठभेड़' और तंग जगहों (जैसे वाहनों के अंदर या घने जंगलों में) आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।Hogg Ian V. Military Small Arms of the 20th Century https://archive.org/details/militarysmallarm0000hogg_j0j9 Krause Publications 2000 978-0873418249 185-188Hugh"Lightweight compact rifle" इतिहास और घुड़सवार सेना 'कार्बाइन' शब्द की उत्पत्ति 16वीं शताब्दी में फ्रांसीसी शब्द कैराबिन से हुई है, जिसका अर्थ घुड़सवार सैनिक होता था। ऐतिहासिक रूप से, पूर्ण आकार की लंबी राइफलें या मस्कट 'घुड़सवार सेना' के लिए पूरी तरह से अव्यावहारिक थीं। घोड़े की पीठ पर बैठकर एक लंबी और भारी बंदूक को लोड करना या उससे निशाना लगाना बेहद मुश्किल था। इसलिए, बंदूक निर्माताओं ने घुड़सवार सैनिकों के लिए छोटी नली वाले विशेष हथियार बनाए, जिन्हें 'कार्बाइन' कहा गया। 19वीं सदी के अंत में, जब 'लीवर-एक्शन' राइफलों (जैसे विंचेस्टर) का आविष्कार हुआ, तो काउबॉय और घुड़सवारों के बीच कार्बाइन सबसे लोकप्रिय हथियार बन गई। सबमशीन गन से अंतर अक्सर लोग कार्बाइन और 'सबमशीन गन' के बीच भ्रमित हो जाते हैं क्योंकि दोनों आकार में छोटे होते हैं। मुख्य अंतर उनके गोला-बारूद में है: सबमशीन गन: यह पिस्तौल के कारतूस (9mm) फायर करती है। इसकी मारक दूरी बहुत कम होती है (आमतौर पर 100 मीटर तक)। कार्बाइन: यह आमतौर पर पूरी शक्ति वाले या मध्यवर्ती राइफल कारतूस (जैसे 5.56×45mm NATO या 7.62×39mm) फायर करती है, जो इसे SMG की तुलना में बहुत अधिक मारक क्षमता और लंबी प्रभावी दूरी (300-400 मीटर तक) प्रदान करता है। हालाँकि, आज 'पिस्तौल कैलिबर कार्बाइन' भी मौजूद हैं जो 9mm गोलियों का उपयोग करते हैं।Cutshaw Charles Q. Tactical Small Arms of the 21st Century https://archive.org/details/tacticalsmallarm0000cuts Gun Digest Books 2006 978-0873499149 150-155 विश्व युद्ध और आधुनिक उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, अमेरिका ने प्रसिद्ध M1 कार्बाइन का भारी मात्रा में उत्पादन किया। यह भारी M1 गारंड राइफल और पिस्तौल के बीच का एक हथियार था, जिसे पैराट्रूपर्स, रेडियो ऑपरेटरों और तोपखाना कर्मियों को दिया गया था, जिन्हें एक पूर्ण राइफल की आवश्यकता नहीं थी लेकिन पिस्तौल से अधिक मारक क्षमता चाहिए थी।"How the Fully Automatic M2 Carbine Became a World War II Killer" आधुनिक 'शहरी युद्ध' के उदय के साथ, पूर्ण आकार की राइफलें सेनाओं के लिए बहुत लंबी साबित होने लगीं। इमारतों को साफ करने और बख़्तरबंद वाहनों से बाहर निकलने में लंबी राइफलें फंस जाती थीं। इस समस्या को हल करने के लिए, आधुनिक सेनाओं ने अपनी मानक असॉल्ट राइफलों के छोटे कार्बाइन संस्करणों को अपना लिया: अमेरिका की M4 कार्बाइन (जो M16 राइफल का छोटा संस्करण है)। रूस की AKS-74U (जो AK-74 का छोटा संस्करण है)।Ezell Edward Clinton Small Arms of the World Stackpole Books 1988 978-0880296014 450-455 भौतिकी और समझौते कार्बाइन का हल्कापन और छोटा आकार एक तकनीकी कीमत पर आता है। बैरल (नली) छोटी होने के कारण, बंदूक के अंदर जलने वाले बारूद को गोली को धकेलने के लिए कम समय और जगह मिलती है। इसके परिणामस्वरूप: कम मज़ल वेलोसिटी: गोली राइफल की तुलना में कम गति से बाहर निकलती है, जिससे इसकी लंबी दूरी की मारक क्षमता और कवच-भेदने की शक्ति कम हो जाती है। अधिक तेज़ आवाज़ और मेश-फ्लैश: छोटी नली के कारण कुछ बारूद नली के बाहर हवा में जलता है, जिससे एक तेज़ चमक और ज़ोरदार धमाका होता है।Fackler Martin L. Wounding patterns of military rifle bullets International Defense Review 22 1989 59-64"Battle Rifle vs Assault Rifle: What's the Difference?" सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ नेशनल राइफल एसोसिएशन (NRA) - आग्नेयास्त्रों के प्रकार और इतिहास