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सात्यकि द्वापर का अजेय योद्धा
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सात्यकि द्वापर का अजेय योद्धा Satyaki_Dwapar_Ka_Ajey_Yodha.jpg पुस्तक का आवरण पृष्ठ दुष्यंत प्रताप सिंहhttps://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/lucknow/news/release-of-mythological-work-satyaki-the-invincible-warrior-of-dwapar-135533573.html पौराणिक कृति 'सात्यकि द्वापर का अजेय योद्धा' का विमोचन:लखनऊ में मालिनी अवस्थी और वरिष्ठ शिक्षाविदों की मौजूदगी में हुआ पुस्तक का विमोचन 26 July 2025 Dainik Bhaskar भारत हिन्दी उपन्यास, पौराणिक इंडीप्रेस २०२५ प्रिंट (पेपरबैक) २९० 978-9360458010
सत्यकि द्वापर का अजेय योद्धा महाभारत कालीन सात्यकि के जीवन से प्रेरित तथा वर्ष २०२५ में प्रकाशित एक हिंदी पौराणिक उपन्यास है। इसके लेखक भारतीय फिल्म निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह हैं। https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/development/dushyant-pratap-singh-book-satyaki-dwapar-ka-ajey-yodha-released-web-series-will-made-soon-lucknow/articleshow/123019700.cms दुष्यंत प्रताप सिंह की किताब 'सात्यकि द्वापर का अजेय योद्धा' का लखनऊ में भव्य विमोचन, जल्द बनेगी वेब सीरीज 31 July 2025 Navbharat Timeshttps://www.amarujala.com/lucknow/book-release-of-dushyant-pratap-singh-lucknow-news-c-13-1-lko1020-1308659-2025-07-25 दुष्यंत प्रताप सिंह की पुस्तक ‘सात्यकि : द्वापर का अजेय योद्धा’ का विमोचन, ऑडियो फॉर्म के साथ वेब सीरीज भी बनेगी 25 July 2025 Amar Ujala
पृष्ठभूमि
इंडीप्रेस द्वारा प्रकाशित, यह उपन्यास भारतीय महाकाव्य महाभारत के एक योद्धा, सात्यकि की कहानी को पुनर्परिभाषित करता है। यह पुस्तक एक काल्पनिक कथा है जो सात्यकि के दृष्टिकोण को वाणी देती है तथा कृष्ण के प्रति उनकी भक्ति और महाभारत में उनकी भूमिका को दर्शाती है।https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/lucknow/story-launch-of-satyaki-the-unconquerable-warrior-of-dwapar-by-bollywood-director-dushyant-pratap-singh-201753460235413.html द्वापर युग के अजेय योद्धा सात्यकि की कहानी दुनिया के सामने आयी 25 July 2025 Hindustan
पुस्तक के कुछ अंश
सबकी नजरें श्री कृष्ण पर थी, परंतु माधव की नजर श्रेष्ठी सात्यक के पीछे खड़े उस तरुण योद्धा पर थीं जो उन्हे निरंतर श्रद्धा और जिज्ञासा भरी नजरों से देख रहा था, शायद महान विष्णु के आठवें अवतार को उसकी उपयोगिता का अनुमान था, सामने आओ मित्र अपना परिचय दो वासुदेव बोले, मैं तत्काल सामने आया व अपनी तलवार वसुदेव कृष्ण के पैरों में रख दी और अपना दायाँ हाथ सैन्य अभिवादन की परंपरानुसार अपने सीने पर रखकर बोला, प्रभु मेरा नाम युयुधान है पर अधिकांश लोग मुझे मेरे पिता श्रेष्ठी सात्यक के नाम पर सात्यकि के नाम से भी संबोधित करते हैं।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
https://www.amazon.in/Satyaki-Dwapar-सात्यकि-द्वापर-योद्धा/dp/9360458015
श्रेणी:भारतीय उपन्यास