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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

वामनावतार

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thumb भगवान वामन भगवान वामन अवतार वामन Vāmana (Dwarf) वामन Vāmana (Dwarf) [स्वयं भगवान] ॐ वामनाय नम: कमण्डल , छत्र (छतरी) , जपमाला और पुस्तक ब्रह्मचारी वैकुण्ठ भागवत पुराण, विष्णु पुराण, ''वामन पुराण प्रजापति कश्यप श्रवण द्वादशी (वामन द्वादशी) अथवा श्रोणम् (ओणम) देवी अदिति आदित्य, उपेन्द्र, विक्रम, त्रिविक्रम, काश्यप, अदितिनन्दन आदि। इन्द्र , विवस्वान् और वरुण सहित अन्य आदित्य thumb|left|वामन कुएँ से पानी निकालने जाते हुए श्री वामन भगवान विष्णु के अवतार है। त्रेतायुग के प्रारम्भ होने में भगवान विष्णु ने बक्सर में मां गंगा के तट पर सिद्धाश्रम स्थल पर वामन रूप में देवी अदिति के गर्भ से उत्पन्न हुए। इसीलिए इस स्थान को वामन जन्मस्थली एवम वामनाश्रम भी कहते हैं। इसके साथ ही यह भगवान विष्णु के पहले ऐसे अवतार थे जो मानव रूप में प्रकट हुए — बालक रूपी ब्राह्मण अवतार । दक्षिण भारत में इनके मूल नाम उपेन्द्र से जाना जाता है। इनके पिता प्रजापति कश्यप थे तथा माता अदिति थीं। इनके बड़े भाई विवस्वान् , इन्द्र, वरुण , पूषा , अर्यमा , भग , धाता , पर्जन्य , अंशुमान , त्वष्टा और मित्र थे। उत्पत्ति thumb|right|300px|भगवान वामन नारायण भगवान वामन ऋषि कश्यप तथा उनकी पत्नी अदिति के पुत्र थे।मनुस्मृति https://web.archive.org/web/20080706055829/http://www.sacred-texts.com/hin/vp/vp075.htm 6 जुलाई 2008 सन् १८४० ई. में होरेस हेमैन विल्सन द्वारा अनुवादित विष्णु पुराण की पुस्तक संख्या ३ अध्याय १ में श्लोक २६५:२२ वह आदित्यों में बारहवें थे। ऐसी मान्यता है कि वह इन्द्र के छोटे भाई थे। कथा thumb|भगवान वामन को तीन पैरों वाला दर्शाया गया है। त्रिविक्रम रूप में एक पैर धरती पर, दूसरा आकाश अर्थात् देवलोक पर तथा तीसरा बलि के सिर पर। भागवत कथा के अनुसार विष्णु ने इन्द्र का देवलोक में अधिकार पुनः स्थापित करने के लिए यह अवतार लिया। देवलोक असुर राजा बलि ने हड़प लिया था। बलि विरोचन के पुत्र तथा विष्णु भक्त प्रह्लाद के पौत्र थे और एक दयालु असुर राजा के रूप में जाने जाते थे। यह भी कहा जाता है कि अपनी तपस्या तथा शक्ति के माध्यम से बलि ने त्रिलोक पर आधिपत्य पा लिया था। http://indianmythology.com/finish/seestory.php?storyID=18 वामनावतार 2012-04-11 https://web.archive.org/web/20110405150143/http://indianmythology.com/finish/seestory.php?storyID=18 5 अप्रैल 2011 dead वामन, एक बौने ब्राह्मण के वेष में बलि के पास गये और उनसे अपने रहने के लिए तीन पग भूमि देने का आग्रह किया। उनके हाथ में एक लकड़ी का छत्र (छाता) था। गुरु शुक्राचार्य के चेताने पर भी बलि ने वामन को वचन दे डाला। thumb|left|300px|राजा बलि से जल स्वीकारते भगवान वामनदेव भगवान वामन ने अपना आकार इतना बढ़ा लिया कि पहले ही पग में पूरा भूलोक (पृथ्वी) नाप लिया। दूसरे पग में देवलोक नाप लिया। इसके पश्चात् ब्रह्मा ने अपने कमण्डल के जल से वामन के पाँव धोये। इसी जल से गंगा उत्पन्न हुयीं। http://www.sanatansociety.org/hindu_gods_and_goddesses/vamana.htm देवगण 2012-04-11 सनातन सोसाइटी https://web.archive.org/web/20120503230545/http://sanatansociety.org/hindu_gods_and_goddesses/vamana.htm 3 मई 2012 dead तीसरे पग के लिए कोई भूमि बची ही नहीं। वचन के पक्के बली ने तब वामन को तीसरा पग रखने के लिए अपना सिर प्रस्तुत कर दिया। वामन बलि की वचनबद्धता से अति प्रसन्न हुये। यतः राजा बलि के दादा प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम् भक्त थे, भगवान वामन (विष्णु) ने बलि को सुुताल लोक देने का निश्चय किया और अपना तीसरा पग बलि के सिर में रखा जिसके फलस्वरूप बलि सुताल में पहुँच गये। एक और कथा के अनुसार वामन ने बलि के सिर पर अपना पैर रखकर उनको अमरत्व प्रदान कर दिया। http://www.vaikhari.org/vamana.html त्रिविक्रम 2012-04-11 वैखरी https://web.archive.org/web/20120312224004/http://www.vaikhari.org/vamana.html 12 मार्च 2012 dead विष्णु अपने विराट रूप में प्रकट हुये और राजा को महाबलि की उपाधि प्रदान की क्योंकि बलि ने अपनी धर्मपरायणता तथा वचनबद्धता के कारण अपने आप को महात्मा सिद्ध कर दिया था। विष्णु ने महाबलि को आध्यात्मिक आकाश जाने की अनुमति दे दी जहाँ उनका अपने सद्गुणी दादा प्रहलाद तथा अन्य दैवीय आत्माओं से मिलना हुआ। thumb|300px|भगवान वामन जी का शिलाचित्र, पाटण गुजरात। बलि का विवरन बलि के 101 पुत्र थे. ज्येष्ठ पुत्र का नाम था बाणासुर . प्रतीकात्मकता thumb|left|300px|भगवान त्रिविक्रम (वामन) का भित्ति शिलाचित्र। वामनावतार के रूप में विष्णु ने बलि को यह पाठ दिया कि दम्भ तथा अहंकार से जीवन में कुछ नहीं मिलता है और यह भी कि धन-सम्पदा क्षणभंगुर होती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु के दिये वरदान के कारण प्रति वर्ष बलि प्रतिपदा पर राजा बलि धरती पर आगमन करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि उनकी प्रजा सुखी रहे। रामायण में अध्यात्म रामायण के अनुसार राजा बलि भगवान वामन के सुतल लोक में द्वारपाल बन गयेP. 281 The Adhyatma Ramayana: Concise English Version By Chandan Lal Dhody P. 134 Srī Rūpa Gosvāmī's Bhakti-rasāmṛta-Sindhuh By Rūpagosvāmī, Bhakti Hridaya Bon और सदैव बने रहेंगे। P. 134 Sri Rūpa Gosvāmīs Bhakti-rasāmrta-sindhuh By Rūpagosvāmī तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस में भी इसका ऐसा ही उल्लेख है। P. 246 Complete Works of Gosvami Tulsidas By Satya Prakash Bahadur, Tulasīdāsa सन्दर्भ श्रेणी:संस्कृत ग्रन्थ श्रेणी:संस्कृत साहित्य श्रेणी:वामन