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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

मुनाफ़िक़ (इस्लाम)

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मुनाफ़िक़ (منافق; जमा मुनाफ़िक़ून ; हिन्दी अर्थ- छद्म मुसलमान, झूठे मुसलमान), इस्लाम में उन लोगों के लिए प्रयुक्त होता है जो प्रत्यक्ष रूप में इस्लाम के सिद्धान्तों को मानने वाले लगते हैं किन्तु अन्दर से इस्लाम के सिद्धान्तों को अस्वीकर करते हैं या इस्लाम के शत्रुओं के बीच इस्लाम के सिद्धान्तों के विरुद्ध विचार व्यक्त करते हैं। इस तरह के दोहरे आचरण को निफ़ाक (نفاق) कहा जाता है। कुरान और हदीस के मुताबिक़ मुनाफ़िक़ को अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत, फ़ज़ल और हिदायत से दूर कर दिया है। क़ुरआन के मुताबिक़ क़ुरआन में मुनाफ़िक़ीन को ख़ास तौर पर अल्लाह को धोका देने की कोशिश के तौर पर बयान किया गया है। फ़रमान-ए-इलाही: ख़ुदा को और मोमिनों धोखा देते हैं हालाँकि वह अपने आपको धोखा देते हैं और कुछ शऊर नहीं रखते।"Al-Baqarah [2:9] - फ़ारूक़ ख़ान & नदवी - Tanzil Quran Navigator" https://tanzil.net (अल-बक़रा: आयत 9) इरशाद-ए-बारी तआला भी: बेशक मुनाफ़िक़ीन (अपने ख्याल में) ख़ुदा को फरेब देते हैं हालॉकि ख़ुदा ख़ुद उन्हें धोखा देता है और ये लोग जब नमाज़ पढ़ने खड़े होते हैं तो (बे दिल से) अलकसाए हुए खड़े होते हैं और सिर्फ लोगों को दिखाते हैं और दिल से तो ख़ुदा को कुछ यूं ही सा याद करते हैं।"An-Nisa [4:142] - फ़ारूक़ ख़ान & नदवी - Tanzil Quran Navigator" https://tanzil.net (अन-निसा: आयत 142) यही नहीं बल्कि मुनाफ़िक़ीन का मुक़द्दर भी दोज़ाख़ में सबसे नीचे से। इरशाद-ए-इलाही: इसमें तो शक ही नहीं कि मुनाफ़िक जहन्नुम के सबसे नीचे तबके में होंगे और (ऐ रसूल) तुम वहॉ किसी को उनका हिमायती भी न पाओगे।"An-Nisa [4:145] - फ़ारूक़ ख़ान & नदवी - Tanzil Quran Navigator" https://tanzil.net (अन-निसा: आयत 145) हदीस के मुताबिक़ मुनाफ़िक़ हबीबे ख़ुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बुख़ारी की रिवायत करदा हदीस में इरशाद फ़रमाया है: "मुनाफ़िक़ की तीन निशानियों है, यानी: जब वो बोलता है तो झूठ बोलता है, जब वादा करता है तो ख़िलाफ़ वरज़ी करता है, और जब उसे अमानत दी जाती है तो ख़यानत करना है।" हबीबे ख़ुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी इरशाद फ़रमाया है: "चार ख़सलतें ऐसी हैं, अगर किसी इंसान में ये चारों मौजूद हों तो वो हक़ीक़ी मुनाफ़िक़ है, लेकिन जब किसी इंसान में इन चारों में से सिर्फ़ एक भी मौजूद हो तो उसमें निफ़ाक़ आ जाती है, यहाँ तक कि वो उसे छोड़ न दे, यानी जब उसे अमानत दी जाए तो वो ख़यानत करता है, जब वो बात करे तो वो झूठ बोलता है, जब वो वादा करे तो उसे पूरा न करे और जब वो झगड़ा करे तो वो ज़ालिम है। (रिवायत-ए-बुख़ारी)" इस्लाम में मुनाफ़िक़ीन के प्रमुख लक्षण ये दिये गये हैं- झूठ बोलना ख़यानत करना फ़ुजूर वादा ख़िलाफ़ी करना रिया इबादत में सस्ती है सिर्फ़ थोड़ा सा ज़िक्रे इलाही करना नमाज़ में जल्दी करना फ़रमानबंदारों और सालेहीन को मुलामत करना क़ुरआन, सुन्नत और नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का मज़ाक़ उड़ाना झूठी क़सम खाता ख़र्च करना से ग्रीज़ान साथी मोमिनों की क़िस्मत को नज़र अंदाज़ करना झूठी ख़बरें फैलाना पसंद करना, वाक़यात को बड़ा करना पसंद करना तक़दीर का इन्कार करता है, हमीशा एहतजाज करना और अल्लाह तआला की तक़दीर से ख़ूश नहीं होना सालेहीन की इज़्ज़त की तौहीन करना अक्सर बाजमाअत छोड़ना बेहतरी के बहाने रूए ज़मीन को नुक़सान पहचाना ज़ाहिरी तौर पर बातिन के दरम्यान मुताबक़त नहीं रखना कसी भी वाक़ेय से डरना झूठ के बहाने बनाना बुराई का हुक्म देना और नेकी से रोकना फ़ज़ीलत के मुआमले में बख़ल करना अल्लाह तआला को भूल जाना अल्लाह तआला और उसके रसूल (स.अ.व) के वादों का इन्कार करना ज़ाहिर पर ज़्यादा तवज्जो देना, बातिन को नज़र अंदाज़ करना बोलना में मग़रूर दीनी मुआमलात को नहीं समझना लोगों से छिपना और गुनाहकर कि अल्लाह की मुख़ालिफ़त करना दूसरों को तकलीफ़ में देखकर लुत्फ़ आना, दूसरों को ख़ुश देखकर ग़मगीन होना सन्दर्भ इन्हें भी देखें कुफ्र काफिर इस्लाम की आलोचना पूर्व-मुसलमान श्रेणी:इस्लाम