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शैक्षिक प्रौद्योगिकी
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शैक्षिक प्रौद्योगिकी (अधिगम प्रौद्योगिकी भी कहा जाता है) उचित तकनीकी प्रक्रियाओं और संसाधनों के सृजन, उपयोग तथा प्रबंधन के द्वारा अधिगम और कार्य प्रदर्शन सुधार के अध्ययन और नैतिक अभ्यास को कहते हैं।रिची, आर. सी (2008). 2008 एईसीटी (AECT) डिफिनेशन ऑफ़ द फील्ड पर विचार. टेकट्रेंड्स. 52(1) 24-25 शैक्षिक प्रौद्योगिकी शब्द के साथ प्रायः अनुदेशात्मक सिद्धांत तथा अधिगम सिद्धांत संबद्ध और शामिल होते हैं। जबकि अनुदेशी प्रौद्योगिकी में अधिगम एवं अनुदेश की प्रक्रियाएं तथा प्रणालियां शामिल हैं, शैक्षिक प्रौद्योगिकी में मानवीय क्षमताओं के विकास हेतु प्रयुक्त अन्य प्रणालियां शामिल होती हैं। शैक्षिक प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और इंटरनेट अनुप्रयोगों तथा गतिविधियों का समावेश करती है किंतु इन तक सामित नहीं है। लेकिन इन शब्दों के अर्थ को लेकर अब भी बहस होती है।लोवेंथल, पी. आर. और विल्सन, बी. जी. (2010). लेबल डू मैटर्स! एईसीटी (AECT) के रिडिफिनेशन ऑफ़ द फील्ड की आलोचना. टेकट्रेंड्स, 54 (1), 38-46. DOI: 10.1007/s11528-009-0362-y
विवरण और अर्थ
शैक्षिक प्रौद्योगिकी को सर्वाधिक सरलता और सुगमता से ऐसे उपकरणों की एक सरणी के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो शिक्षार्थी के सीखने की प्रक्रिया में सहायक सिद्ध हो सकें. शैक्षिक प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी "शब्द" की एक व्यापक परिभाषा पर निर्भर करती है। प्रौद्योगिकी, मानव उपयोग की भौतिक सामग्रियों जैसे मशीनों या हार्डवेयर के रूप में संदर्भित की जा सकती है, लेकिन इसमें प्रणालियां, संगठऩ की विधियां तथा तकनीक जैसे व्यापक विषय भी शामिल हो सकते हैं। कुछ आधुनिक उपकरण शामिल हैं लेकिन ये सिर्फ ओवरहैड प्रोजेक्टर, लैपटॉप, कंप्यूटर और कैलकुलेटर तक ही सीमित नहीं हैं। "स्मार्टफोन" और गेम (ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों) जैसे नए उपकरण गंभीरता से अपनी अभिज्ञान क्षमता की वजह से काफी ध्यान आकर्षित करने लगे हैं।
जो वैचारिक खोज और आशय संप्रेषण के लिए शैक्षिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हैं वो या तो शिक्षार्थी हैं या शिक्षक हैं।
मानवीय कार्य-प्रदर्शन प्रौद्योगिकी हस्तपुस्तिका पर विचार करें। हैंडबुक ऑफ़ ह्युमन परफॉर्मेंस टेक्नोलॉजी (एड्स. हैरोल्ड स्टोलोविच, एरिका कीप्स, जेम्स पर्शिंग) (3 एड, 2006) सम विषयक क्षेत्रों, शैक्षिक और मानवीय कार्य-प्रदर्शन प्रौद्योगिकी के लिए प्रौद्योगिकी का अर्थ "व्यावहारिक विज्ञान है।" दूसरे शब्दों में, वैज्ञानिक पद्धति के उपयोग के द्वारा मौलिक शोध से व्युत्पन्न कोई भी प्रक्रिया या प्रक्रियाएं प्रौद्योगिकी मानी जा सकती हैं। शैक्षिक या मानवीय कार्य-प्रदर्शन प्रौद्योगिकी विशुद्ध रूप से कलनविधीय या स्वानुभविक प्रक्रियाओं पर आधारित हो सकती हैं, किंतु दोनों में से किसी का भी तात्पर्य आवश्यक रूप से भौतिक प्रौद्योगिकी से नहीं है। प्रौद्योगिकी शब्द यूनानी शब्द “टेक्ने” से बना है जिसका अर्थ है शिल्प या कला. एक अन्य शब्द "तकनीक" भी उसी मूल से आया है, जिसका उपयोग शैक्षिक प्रौद्योगिकी पर विचार करते समय किया जा सकता है। इसलिए शिक्षक की तकनीकों का समावेश करने के लिए शैक्षिक प्रौद्योगिकी का विस्तार किया जा सकता है।अप्रैल 2008
1956 की ब्लूम की पुस्तक, टेक्सोनोमी ऑफ एजुकेशनल ऑवूजेक्टिव्ज शैक्षिक मनोविज्ञान के पाठ का एक उत्तम उदाहरण है।ब्लूम बी. एस. (1956). टैक्सानॉमी ऑफ़ एजुकेशनल ऑबजेकटिव्स, हैंडबुक I: द कॉग्निशन डोमेन . न्यूयॉर्क: डेविड मैकके कंपनी इंक ब्लूम की टेक्सोनोमी, अधिगम गतिविधियां अभिकल्पित करते समय, यह ध्यान में रखने के लिए उपयोगी हो सकती है कि शिक्षार्थियों के अधिगम लक्ष्य क्या हैं तथा उनसे क्या अपेक्षित है। बहरहाल, ब्लूम का कार्य स्पष्ट रूप से स्वतः ही शैक्षिक प्रौद्योगिकी से संबद्ध नहीं होता और शैक्षणिक रणनीतियों से अधिक संबंधित है।
कुछ के अनुसार, एक शैक्षिक प्रौद्योगविज्ञ वह है, जो आधारभूत शैक्षणिक एवं मनोवौज्ञानिक शोध को अधिगम अथवा अनुदेश हेतु साक्ष्य-आधारित प्रयुक्त विज्ञान (या प्रौद्योगिकी) में रूपांतरित कर देता है। शैक्षिक प्रौद्योगविज्ञों के पास प्रायः शैक्षिक मनोविज्ञान, शैक्षिक मीडिया, प्रयोगात्मक मनोविज्ञान, संज्ञानात्मक मनोविज्ञान या अधिक विशुद्ध रूप में, शैक्षिक, अनुदेशात्मक या मानवीय कार्य-प्रदर्शन प्रौद्योगिकी या अनुदेशात्मक (प्रणाली) अभिकल्पना के क्षेत्रों में स्नातक उपाधि (स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट, पीएच.डी. या डी.फिल) होती है। लेकिन नीचे सूचीबद्ध कुछ सिद्धांतकारों में से कुछ हमेशा स्वयं अपना वर्णन करने के लिए "शिक्षक" जैसे शब्द पर वरीयता देते हुए "शैक्षिक प्रौद्योगविज्ञ" शब्द का प्रयोग करते थे।अप्रैल 2008 शैक्षिक प्रौद्योगिकी के एक कुटीर उद्योग से एक व्यवसाय में रूपांतरण के बारे में शुरविले, ब्राउन तथा व्हिटेकर ने चर्चा की है। Shurville S. Browne, T., & Whitaker, M. Employing the new educational technologists: A call for evidenced change Proceedings ascilite Melbourne 2008 2008 http://www.ascilite.org.au/conferences/melbourne08/procs/shurville.pdf PDF 2 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20101205194652/http://ascilite.org.au/conferences/melbourne08/procs/shurville.pdf 5 दिसंबर 2010 dead
एक लघु इतिहास
शैक्षिक प्रौद्योगिकी के उद्भव को उसकी राह में गुफाओं की दीवारों पर बनी पेंटिंग्स में बहुत ही प्रारंभिक उपकरणों के रूप में पाया जा सकता है। लेकिन आमतौर पर इसके इतिहास का आरंभ शैक्षिक फिल्म (1900 का) या 1920 के दशक की सिडनी प्रेस्से की यांत्रिक शिक्षण मशीन से माना जाता है।
नई प्रौद्योगिकियों का बड़े पैमाने पर पहला उपयोग, प्रशिक्षण फिल्मों और अन्य मीडिया सामग्री के माध्यम से द्वित्तीय विश्वयुद्ध के अमेरिकी सैनिकों के प्रशिक्षण में पाया जा सकता है। आज की प्रस्तुतिकरण आधारित प्रौद्योगिकी इस विचार पर आधारित है कि लोग विषय वस्तु को श्रव्य और दृश्य अभिग्रहण से सीख सकते हैं, जो अनेक प्रारूपों में उपलब्ध है, जैसे- स्ट्रीमिंग ऑडियो और वीडियो, पॉवरपॉइंट प्रस्तुतिकरण + आवाज. 1940 के दशक का एक अन्य रोचक आविष्कार हाइपरटेक्स्ट, यानी वी. बुश का मेमेक्स था।
1950 के दशक ने दो प्रमुख स्थिर लोकप्रिय अभिकल्प दिये। स्किनर्स कार्य ने अनुदेशात्मक विषयवस्तु को छोटी इकाइयों में विभाजित कर, तथा सही अनुक्रियाओं को अक्सर जल्दी पुरस्कृत कर, "क्रमादेशित अनुदेशों" का व्यवहारजन्य लक्ष्यों के संरूपण पर ध्यान केंद्रित करना संभव बनाया। अपने बौद्धिक व्यवहारों के वर्गीकरण के आधार अधिगम के प्रति एक प्रवीण दृष्टिकोण की वकालत करते हुए, ब्लूम ने अनुदेशात्मक तकनीकों का समर्थन किया जिसने शिक्षार्थी की आवश्यकतानुसार अनुदेश एवं समय दोनों को परिवर्तित किया। 1970 के दशक से 1990 के दशक तक इन डिजाइनों पर आधारित मॉडल आम तौर पर कंप्यूटर आधारित प्रशिक्षण (सीबीटी (CBT)), कंप्यूटर सहायतायुक्त अनुदेश या कंप्यूटर की सहायता से अनुदेश (CAI) कहलाते थे। एक अधिक सरलीकृत रूप में वे आज के "ई-कंटेंट्स" जो कि अक्सर "ई-सेट अप" का मुख्य भाग होता है, जैसे थे है, कभी-कभी इसे वेब आधारित प्रशिक्षण (WBT) या ई-अनुदेश भी कहा जाता था। पाठ्यक्रम अभिकल्पक अधिगम सामग्री के, ग्राफिक्स और मल्टीमीडिया प्रस्तुति के साथ संवर्धित छोटे-छोटे पाठ-खंड बनाते हैं। आत्म मूल्यांकन और मार्गदर्शन के लिए तत्काल प्रतिक्रिया के साथ लगातार बहुविकल्पी प्रश्न जोड़े जाते हैं। ऐसी ई-सामग्री आईएमएस (IMS), एडीएल/स्कॉर्म (ADL/SCORM) और आईईईई (IEEE) द्वारा परिभाषित मानकों पर भरोसा करती है।
1980 और 1990 के दशकों ने विविध प्रकार की संस्थाएं, जिनको एक लेबल कंप्यूटर आधारित शिक्षा (CBL) की छतरी के नीचे रखा जा सकता है, दी। अक्सर रचनावादी और संज्ञानवादी अधिगम सिद्धांतों पर आधारित, इन परिवेशों ने अमूर्त एवं प्रक्षेत्र-विशिष्ट समस्या समाधान शिक्षण पर जोर दिया। पसंदीदा प्रौद्योगिकियां सूक्ष्म संसार (कंप्यूटर वातावरण जहां शिक्षार्थी खोज सकता था, निर्माण कर सकता था), अनुरूपण (कंप्यूटर वातावरण जहां शिक्षार्थी गतिशील प्रणालियों के मापदंडों के साथ खेल सकते हैं) और हाइपरटेक्स्ट थे।
शिक्षा के क्षेत्र में डिजीटल संचार और नेटवर्किंग 80 के दशक के मध्य में शुरू हुए और 90 के दशक के मध्य में, विशेषकर विश्वव्यापी वेब (www), ईमेल तथा मंचों (फोरम्स) के माध्यम से लोकप्रिय हुए. ऑनलाइन अधिगम के दो प्रमुख प्रारूपों में अंतर है। कंप्यूटर आधारित प्रशिक्षण (सीबीटी) या कंप्यूटर आधारित अधिगम (CBL), पूर्व के इन दोनों ही प्रकारों ने एक ओर छात्र और कंप्यूटर अभ्यास एवं अनुशिक्षण तथा दूसरी ओर छात्र और सूक्ष्म संसार एवं अनुरूपण पर जोर दिया। आज, कंप्यूटर के माध्यम से संचार (CMC) नियमित विद्यालय प्रणाली में प्रचलित रूपावली है, जहां छात्र एवं अनुदेशकों के बीच पारस्परिक क्रिया का प्राथमिक प्रारूप कंप्यूटर के माध्यम से है। आमतौर पर सीबीटी/सीबीएल (CBT/CBL) का मतलब है वैयक्तीकृत अधिगम (स्व-अध्ययन), जबकि सीएमसी (CMC) में शिक्षक/निजी शिक्षक सुविधा शामिल है और लचीली शिक्षण गतिविधियों के मानसदर्शन की आवश्यकता है। इसके अलावा, आधुनिक आईसीटी (ICT) उपकरणों के साथ, अधिगम समूहों और संबद्ध ज्ञान प्रबंधन कार्य को बनाए रखने के लिए शिक्षा प्रदान करता है। यह छात्र और पाठ्यक्रम प्रबंधन के लिए उपकरण भी उपलब्ध कराता है।
अधिगम प्रौद्योगिकियां कक्षा संवर्द्धन के अलावा, पूर्णकालिक दूरस्थ शिक्षण में भी प्रमुख भूमिका निभाती हैं। जबकि अधिकांश गुणवत्ता की पेशकश कागज, वीडियो और सामयिक सीबीटी/सीबीएल (CBT/CBL) सामग्री पर भरोसा करती हैं, मंचों, तत्क्षण संदेशों, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि के माध्यम से ई-शिक्षण का उपयोग बढ़ा है। छोटे समूहों को लक्ष्यित पाठ्यक्रम अक्सर मिश्रित या संकर अभिकल्पना जिसमें वर्तमान पाठ्यक्रम मिश्रित होता है, का दूरस्थ गतिविधियों के साथ उपयोग करते हैं (प्रायः मॉड्यूल के आरंभ और अंत में) और विभिन्न शैक्षणिक शैलियों (जैसे प्रशिक्षण अभ्यास और अभ्यास, कवायद, परियोजनाएं, आदि) का उपयोग करते हैं।
2000 के दशक में बहुगुण मोबाइल तथा सर्वव्यापी प्रौद्योगिकियों के उद्भव ने अधिगम- के-संदर्भ परिदृश्यों के अनुकूल स्थानिक अधिगम को नई प्रेरणा दी। कुछ साहित्य स्कूल एवं प्रामाणिक (उदाहरण के लिए कार्यस्थल) व्यवस्था दोनों को एकीकृत करने वाले मिश्रित अधिगम परिदृश्यों का वर्णन करने के लिए एकीकृत अधिगम अवधारणा का उपयोग करते हैं।
सिद्धांत एवं व्यवहार
शैक्षिक प्रौद्योगिकी साहित्य में तीन मुख्य सैद्धांतिक स्कूल या दार्शनिक ढांचे उपस्थित रहे हैं। ये हैं व्यवहारवाद, संज्ञानवाद और रचनावाद, तीनों वैचारिक स्कूलों में से प्रत्येक आज के साहित्य में उपस्थित है, लेकिन इनका विकास उसी प्रकार हुआ है जिस प्रकार मनेविज्ञान साहित्य का हुआ है।
व्यवहारवाद
इस सैद्धांतिक संरचना का विकास इवान पावलोव, एडवर्ड थोर्नडिके, एडवर्ड सी. टोलमैन, क्लार्क एल हल, बी. एफ. स्किनर और अन्य कई लोगों के पशु अधिगम प्रयोगों के साथ 20वीं शताब्दी में हुआ था। कई मनोवैज्ञानिकों ने इन सिद्धांतों का मानव अधिगम के साथ वर्णन और प्रयोग करने के लिए इस्तेमाल किया। जबकि यह अभी भी बहुत उपयोगी है, इस अधिगम दर्शन ने कई शिक्षकों का समर्थन खो दिया है।
स्किनर का योगदान
बी.एफ. स्किनर ने अपने मौखिक व्यवहारस्किनर, बी.एफ. अध्यनन के विज्ञान और शिक्षण का कला. हार्वर्ड शैक्षिक समीक्षा, 1954, 24, 86-97, शिक्षण मशीन. विज्ञान, 1958, 128, 969-77. और दूसरे देखें https://web.archive.org/web/20081217104146/http://www.bfskinner.org/f/EpsteinBibliography.pdf के प्रकार्यात्मक विश्लेषण के आधार पर शिक्षण में सुधार पर व्यापक रूप से लिखा था और समकालीन शिक्षा में निहित मिथकों को समाप्त करने के प्रयास में तथा साथ ही अपनी प्रणाली जिसे वे क्रमादेशित अनुदेश कहते थे, का प्रोत्साहन करने के लिए "द टेक्नोलोजी ऑफ टीचिंग" Proc R Soc Lond B Biol Sci 1965 162 989 427–43 The technology of teaching Skinner BF 10.1098/rspb.1965.0048 4378497 लिखी. ऑगडेन लिंड्सले ने भी इसी प्रकार व्यवहार विश्लेषण पर आधारित सेलेरेशन अधिगम प्रणाली विकसित की थी लेकिन वह केलर और स्किनर के मॉडल से बिलकुल अलग थी।
संज्ञानवाद
संज्ञानात्मक विज्ञान ने शिक्षकों के अधिगम के प्रति दृष्टिकोण को बदला है। 1960 और 1970 के दशक में संज्ञानात्मक क्रांति की शुरुआत के बहुत प्रारंभ से अधिगम सिद्धांत में काफी परिवर्तन आया है। व्यवहारवाद की अनुभवजन्य रूपरेखा को ज्यादातर बरकरार रखा गया भले ही एक नया प्रतिमान शुरू हो चुका था। संज्ञानात्मक सिद्धांत मस्तिष्क आधारित अधिगम को समझाने के लिए व्यवहार से परे देखते हैं। संज्ञानवादी इस पर विचार करते हैं कि मानव स्मृति अधिगम को बढ़ावा देने के लिए कैसे काम करती है।
संज्ञानात्मक मनोविज्ञान में एटकिंसन-शिफ्रिन के स्मृति मॉडल तथा बैडेले के कार्यकारी स्मृति मॉडल जैसे स्मृति सिद्धांत के सैद्धांतिक ढांचे के रूप में स्थापित हो जाने के बाद, 1970, 1980, 1990 के दशकों में अधिगम का नया संज्ञानात्मक ढांचा उभरने लगा था। इस पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि कंप्यूटर विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी का संज्ञानात्मक विज्ञान के सिद्धांत पर एक बड़ा प्रभाव पड़ा है। कम्प्यूटर साइंस के क्षेत्र में अनुसंधान और प्रौद्योगिकी द्वारा कार्यकारी स्मृति (पूर्व में अल्पकालिक स्मृति के नाम से ज्ञात) और दीर्घ अवधि स्मृति की संज्ञानात्मक अवधारणाओं को सुगम बना दिया गया। संज्ञानात्मक विज्ञान के क्षेत्र पर एक अन्य प्रमुख प्रभाव नोआम चोमस्की का है। आज शोधकर्ता संज्ञानात्मक भार तथा सूचना संसाधन सिद्धांत जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
रचनावाद/रचनात्मकतावाद
रचनावाद एक अधिगम सिद्धांत है या शैक्षिक दर्शन है जिस पर अनेक शिक्षकों ने 1990 के दशक में विचार करना शुरू कर दिया था। इस दर्शन के प्राथमिक सिद्धांतों में से एक है कि शिक्षार्थी नई जानकारी से अपने स्वयं के अर्थों की रचना करते हैं, जब वे वास्तविकता या भिन्न दृष्टिकोण वाले अन्य लोगों के साथ पारस्परिक क्रिया करते हैं।
रचनावादी अधिगम वातावरण की आवश्यकता होती है कि छात्र अपने पूर्व ज्ञान एवं अनुभवों का उपयोग करके अधिगम की नई, संबद्ध और/या अनुकूली अवधारणाएं तैयार करे. इस ढांचे के तहत शिक्षक की भूमिका एक मार्गदर्शन देने वाले सुविधाप्रदाता की हो जाती है, ताकि शिक्षार्थी अपने स्वयं के ज्ञान की रचना कर सकें. रचनावादी शिक्षकों को चह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि पूर्व अधिगम अनुभव उपयुक्त तथा सिखाई जाने वाली अवधारणाओं से संबंधित हैं या नहीं। जोनासेन (1997) का सुझाव है "अच्छी तरह से संरचित" अधिगम वातावरण नौसिखिया शिक्षार्थियों के लिए उपयोगी होता है और "बीमार संरचित" वातावरण केवल अधिक उन्नत शिक्षार्थियों के लिए उपयोगी होते हैं। प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाले शिक्षकों को एक रचनावादी दृष्टिकोण से पढ़ाते समय ऐसी प्रौद्योगिकी का चुनाव करना चाहिए जो समस्या समाधान के वातावरण में पूर्व ज्ञान को सुदृढ़ करे.
संयोजनवाद
संयोजनवाद "डिजिटल युग के लिए एक अधिगम सिद्धांत" है, जिसे जॉर्ज सीमेन्स तथा स्टीवन डाउनेस द्वारा अपने व्यवहारवाद, संज्ञानवाद तथा रचनावाद के विश्लेषण के आधार पर, यह समझाने के लिए कि हम कैसे जीते हैं, हम कैसे संवाद करते हैं और हम कैसे सीखते हैं, इस पर प्रौद्योगिकी का क्या प्रभाव हुआ था, विकसित किया गया था। शिक्षण प्रौद्योगिकी और दूरस्थ शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीय जर्नल के कार्यकारी संपादक, डोनाल्ड जी पेरिन का कहना है कि सिद्धांत "डिजिटल युग में सीखने के लिए एक शक्तिशाली सैद्धांतिक अवधारणा की रचना करने के लिए कई शिक्षण सिद्धांतों, सामाजिक संरचना और प्रौद्योगिकी के प्रासंगिक तत्वों को जोड़ता है।"
अनुदेशात्मक तकनीक और प्रौद्योगिकी
समस्या आधारित अधिगम और पूछताछ आधारित अधिगम सक्रिय अधिगम शैक्षिक प्रौद्योगिकियां हैं जिनका उपयोग सीखने की सुविधा के लिए किया जाता है। वह प्रौद्योगिकी जिसमें भौतिक एवं प्रक्रिया प्रयुक्त विज्ञान शामिल हैं, को इस परियोजना, समस्या, पूछताछ-आधारित अधिगम के साथ सम्मिलित किया जा सकता है क्योंकि इन सब में एक समान शैक्षिक दर्शन है। ये तीनों ही छात्र केन्द्रित, आदर्शतः ये वास्तविक दुनिया के परिदृश्यों को शामिल करते हैं जिनमें छात्र सक्रिय रूप से विवेचनात्मक सोच की गतिविधियों में शामिल होते हैं। वह प्रक्रिया एक प्रौद्योगिकी मानी जाती है, जिसे अपनाने के लिए छात्र प्रोत्साहित (जब तक यह अनुभवजन्य अनुसंधान पर आधारित है) होते हैं। शिक्षकों और शैक्षिक प्रौद्योगविदों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली प्रौद्योगिकी के उत्कृष्ट उदाहरण है ब्लूम की टैक्सोनोमी और अनुदेशात्मक अभिकल्प.
सिद्धांतकार
यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां नए विचारक हर रोज आगे आ रहे हैं। अनेक विचारों का सिद्धांतकारों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने अपने ब्लॉग के माध्यम से प्रसार किया है। अभिरुचि के क्षेत्रवार शैक्षिक व्लॉगर्स की व्यापक सूची स्टीव हरगाडोन के “सपोर्टव्लॉगर्स” (SupportBloggers) स्थल या स्कॉट मैक्लिऑड द्वारा शुरू किये गये विकी “मूविंगफॉरवर्ड” (movingforward) पर उपलब्ध है।http://supportblogging.com/Links+to+School+Bloggers https://web.archive.org/web/20101205052850/http://supportblogging.com/Links+to+School+Bloggers 5 दिसंबर 2010 और http://movingforward.wikispaces.com/Blogs https://web.archive.org/web/20101113150355/http://movingforward.wikispaces.com/Blogs 13 नवंबर 2010 देखें इन में से अनेक ब्लॉग्स को उनके मित्रसमूह द्वारा प्रति वर्ष एडुव्लॉगर (edublogger) के माध्यम से पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है।» वेलकम टू द एडिज़! https://web.archive.org/web/20101203100347/http://edublogawards.com/ 3 दिसंबर 2010 इडाब्लौग पुरस्कार https://web.archive.org/web/20101203100347/http://edublogawards.com/ 3 दिसंबर 2010 वेब 2.0 प्रौद्योगिकियों ने इस विषय पर उपलब्ध जानकारी में और इस पर औपचारिक या अनौपचारिक रूप से चर्चा करने वाले शिक्षकों की संख्या में भारी वृद्धि की है। ऊपर वर्णित कुछ नये विचारक तथा एक दशक से अधिक से सक्रिय विचारक यहां नीचे सूचीबद्ध हैं।
एलन नवम्बर
सेमुर पेपर्टhttp://www.papert.org/ प्रोफेसर सेमुर पेपर्ट 2 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20101201143356/http://www.papert.org/ 1 दिसंबर 2010 live
विल रिचर्डसन
जॉन स्वेलर
एलेक्स जोन्स
जॉर्ज सीमेंस
डेविड विले
डेविड विल्सन
लाभ
शैक्षिक प्रौद्योगिकी का उद्देश्य, प्रौद्योगिकी के बिना शिक्षा की जो स्थिति होती, उसमें सुधार करना है। दावा किये गये लाभों में से कुछ नीचे सूचीबद्ध हैं:
आसान सामग्री का उपयोग करने वाला पाठ्यक्रम. अनुदेशक पाठ्यक्रम सामग्री या किसी पाठ्यक्रम पर महत्वपूर्ण जानकारी वेबसाइट पर पोस्ट कर सकते हैं, जिसका मतलब है कि छात्र जिस समय या स्थान पर चाहे अध्ययन कर सकता है और अधययन सामग्री को शीघ्रता से प्राप्त कर सकता है।http://www.nsba.org/sbot/toolkit/tiol.html अध्यनन पर प्रौद्योगिकी प्रभाव 2 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20130701042623/http://www.nsba.org/sbot/toolkit/tiol.html 1 जुलाई 2013 dead
छात्र अभिप्रेरणा . कंप्यूटर-आधारित अनुदेश छात्रों को तत्क्षण प्रतिपुष्टि दे सकते हैं और सही उत्तरों की व्याख्या कर सकते हैं। इसके अलावा, एक कंप्यूटर धैर्यवान तथा गैर-आलोचनात्मक होता है, जो विद्यार्थी को शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरणा दे सकता है। जेम्स कुलिक के अनुसार, जो अनुदेशों के लिये प्रयुक्त कंप्यूटर की प्रभावशीलता पर विचार करते हैं, वे छात्र प्रायः कंप्यूटर आधारित अनुदेश प्राप्त कर के कम समय में अधिक सीख जाते हैं और वे कक्षाओं को अधिक पसंद करते हैं और कंप्यूटर आधारित कक्षाओं में कंप्यूटर के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।http://www.electronic-school.com/0997f3.html प्रौद्योगिकी का प्रभाव 2 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20141129080505/http://www.electronic-school.com/0997f3.html 29 नवंबर 2014 dead अमेरिकी शिक्षक, कैसेंड्रा बी व्हाइट ने शोध किया और नियंत्रण के ठिकाने तथा सफल अकादमिक कार्य-प्रदर्शन के बारे में बताया तथा 1980 के दशक के अंत तक उन्होंने लिखा कि किस प्रकार भविष्य में उच्च शिक्षा में कंप्यूटर का उपयोग और सूचना प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण हो जाएगी.व्हाइट कसेंड्रा बौल्यार्ड. (1980). "एक एकीकृत परामर्श और अध्यनन सहायता सेंटर". नई निर्देश सोर्सबुक. जोसे बास, इंक सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया.व्हाइट, कसेंड्रा बी. (1989). छात्र मामले - भविष्य", कॉलेज के छात्र विकास के जर्नल, 10, (1), 86-89.
विस्तृत सहभागिता . अधिगम सामग्री का दीर्घ दूरस्थ अधिगम के लिए उपयोग किया जा सकता है और यह व्यापक श्रोताओं की पहुंच में होती है।http://www.nsba.org/sbot/toolkit/tuie.html शिक्षा के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का उपयोग 2 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20130706183412/http://www.nsba.org/sbot/toolkit/tuie.html 6 जुलाई 2013 dead
उन्नत छात्र लेखन. छात्रों के लिए शब्द संसाधक पर अपने लिखित कार्य का संपादन करना सुविधाजनक है, जो परिणामस्वरूप उनके लेखन की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, कंप्यूटर नेटवर्क पर परिचित छात्रों के बीच आदान-प्रदान किये गये लिखित कार्य की समीक्षा और संपादन में छात्र बेहतर हैं।
सीखने के लिए विषय आसान बन गये हैं . विशिष्ट विषयों को सीखने के लिए बच्चों और किशोरों की सहायता के लिए विभिन्न प्रकार के अनेक शैक्षिक सॉफ्टवेयर डिजाइन किये गये हैं। उदाहरण में, पूर्व स्कूल सॉफ्टवेयर, कम्प्यूटर सिम्युलेटर्स और ग्राफ़िक्स सॉफ्टवेयर शामिल हैं।
एक संरचना जो मापन और परिणामों में सुधार की अनुगामी है। उचित संरचना के साथ, छात्र के काम का निरीक्षण करना, उसके काम को बनाये रखना और छात्र के अधिगम में वृद्धि करने के लिए आवश्यकतानुसार अनुदेशो में संशोधन करना आसान हो जाता है।
आलोचना
हालांकि कक्षा में प्रौद्योगिकी के कई लाभ है, वहां स्पष्ट कमियां भी हैं। उचित प्रशिक्षण की कमी, एक प्रौद्योगिकी की पर्याप्त मात्रा तक सीमित पहुंच और प्रौद्योगिकी के कई क्रियान्वयनों के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता, कुछ कारण हैं जिनकी वजह से अक्सर कक्षा में प्रौद्योगिकी का बड़े पैमाने पर प्रयोग नहीं किया जाता है।
एक नया कार्य या व्यापार सीखने के समान, कक्षा प्रौद्योगिकी का प्रभावी एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है। चूंकि प्रौद्योगिकी शिक्षा का अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि एक साधन है जिसके द्वारा यह प्राप्त की जा सकती है, प्रयुक्त होने वाली प्रौद्योगिकी और अधिक पारंपरिक पद्धतियों की तुलना में इसके लाभों पर शिक्षकों की अच्छी पकड़ होनी चाहिये। यदि इन दोनों में क्षेत्रों में से किसी एक में भी कमी है, तो प्रौद्योगिकी शिक्षण के लक्ष्यों के लिए एक लाभ न हो कर बाधा के रूप में देखी जाएगी.
एक और कठिनाई पेश की जाती है जब एक संसाधन की पर्याप्त मात्रा तक पहुंच सीमित होती है। यह अक्सर देखा गया है कि कंप्यूटर की मात्रा या कक्षा के उपयोग के लिए डिजिटल कैमरों की संख्या एक पूरी कक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होती है। कुछ कम सूचित रूप में ऐसा भी होता है कि प्रौद्योगिकी की ऊंची लागत और खराब होने के डर से प्रौद्योगिकी अनुसंधान के लिए सीमित पहुंच होती है। अन्य मामलों में, लैपटॉप के माध्यम से एक कक्षा में ही कंप्यूटर पहुंच की सुविधा होने के बजाय एक कक्षा को परिवहन द्वारा कंप्यूटर प्रयोगशाला में ले जाने जैसी संसाधन स्थापन की असुविधा एक बाधा है।
प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन में भी समय लग सकता है। कुछ प्रौद्योगिकियों के प्रयोग में एक प्रारंभिक सेटअप या प्रशिक्षण समय लागत निहित हो सकती है। इन कार्यों के पूरा होने के बाद भी, गतिविधि के दौरान प्रौद्योगिकी की विफलता पाए जाने पर, परिणाम में शिक्षकों के पास एक वैकल्पिक पाठ तैयार होना चाहिए। एक अन्य प्रमुख मुद्दा प्रौद्योगिकी के विकासशील स्वभाव की वजह से उठता है। जब भी तकनीकी मंच बदल जाता है, नये संसाधन डिजाइन और वितरित करने होते हैं। इस तरह के परिवर्तनों के बाद अक्सर कक्षा उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए गुणवत्ता सामग्री प्राप्त मुश्किल होता है, उनकी पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता के बाद भी शिक्षकों को इन संसाधनों को अपने मुताबिक डिजाइन करना होता है।
ये भी देखें:कोर्डेस, कोलेन एंड मिलर, एडवर्ड. (1999), "फूल्स गोल्ड: अ क्रिटिकल लूक एट कंप्यूटर इन चाइल्डहुड" https://web.archive.org/web/20110618113755/http://drupal6.allianceforchildhood.org/fools_gold 18 जून 2011
शैक्षिक प्रौद्योगिकी और मानविकी
अलबर्टा इनीशिएटिव फॉर स्कूल इम्प्रूवमेंट (AISI)http://education.alberta.ca/media/616853/techprojectsreview.pdf एआईसीआई (AISI) टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स रिसर्च रिव्यू 21 नवंबर 2008 https://web.archive.org/web/20081121185916/http://education.alberta.ca/media/616853/techprojectsreview.pdf 21 नवंबर 2008 dead के शोध के अनुसार पाठ्यक्रम केंद्रित पूछ-ताछ और परियोजना-आधारित दृष्टिकोण प्रभावी रूप से शैक्षिक प्रौद्योगिकी के अधिगम एवं शिक्षण प्रक्रिया में सम्मिश्रण को समर्थन देते हैं।
कक्षा में प्रौद्योगिकी
पारंपरिक कक्षाओं में वर्तमान में कंप्यूटर और गैर कंप्यूटर प्रौद्योगिकी के कई प्रकार उपयोग में हैं। इनमें शामिल हैं:
कक्षा में कम्प्यूटर: कक्षा में कंप्यूटर होना एक शिक्षक के लिए एक संपत्ति है। कक्षा में एक कंप्यूटर के साथ, शिक्षक एक नया पाठ प्रदर्शित करने, नयी सामग्री प्रस्तुत करने, नये प्रोग्राम का उपयोग समझाने और नयी वेबसाइट दिखाने में सक्षम होते हैं।कक्षा के पर्यावरण को बेहतर करने के लिए तकनीक का प्रयोग. https://web.archive.org/web/20090501024334/http://www.thejournal.com/articles/15769/ 1 मई 2009 जर्नल, 01 जनवरी 2002
कक्षा वेबसाइट: अपने छात्रों के काम को प्रदर्शित करने का इससे बेहतर तरीका और क्या हो सकता है कि अपनी कक्षा के लिए डिजाइन किया हुआ एक वेब पेज बनाया जाये. एक बार एक वेब पेज बनाया लिया गया है, तो शिक्षक उस पर गृहकार्य, छात्र कार्य, प्रसिद्ध उद्धरण, छोटे-मोटे गेम और भी बहुत कुछ पोस्ट कर सकते हैं। आजकल के समाज में, बच्चे कंप्यूटर का उपयोग जानते हैं, वे वेबसाइट खोल सकते हैं, तो उन्हें क्यों नहीं कंप्यूटर उपलब्ध करवा दिया जाये जहां वे एक प्रकाशित लेखक बन सकें. जरा सावधानी के साथ, क्योंकि अधिकतर जिलों में स्कूल और कक्षाओं में आधिकारिक वेबसाइट प्रबंधन के लिये सख्त नीतियां हैं। इसके अलावा, सभी स्कूल जिले शिक्षक वेबपेज उपलब्ध करवाते हैं जिन्हें आसानी से स्कूल जिले की वेबसाइट के माध्यम से देखा जा सकता है।
कक्षा ब्लॉग और विकी: वेब 2.0 के उपकरणों के कुछ प्रकार हैं जिन्हें कक्षाओं में क्रियान्वित किया जा रहा है। ब्लॉग से छात्रों को विचार, कल्पनाओं और कार्य, छात्र टिप्पणी और बार-बार दुहरानेवाले प्रतिबिंब के लिए एक पत्रिका की तरह चल रहे संवाद को बनाए रखने की सुविधा निलती है। विकी अधिक समूह केंद्रित हैं जहां समूह के कई सदस्यों को एक एकल दस्तावेज़ को संपादित करने और वास्तव में सब के सहयोग से और ध्यान से संपादित अंतिम उत्पाद बनाने की सुविधा प्रदान करता है।
वायरलेस कक्षा माइक्रोफोन: कक्षाओं में एक दैनिक घटना है, माइक्रोफोन की मदद से छात्र अपने शिक्षकों को स्पष्ट सुनने में सक्षम हैं। बच्चों को बेहतर सीखते हैं जब वे शिक्षक को स्पष्ट रूप से सुनते हैं। शिक्षकों के लिए लाभ यह है कि वे अब दिन के अंत में अपनी आवाज नहीं खोते.
मोबाइल डिवाइस: या स्मार्टफोन मोबाइल उपकरण जैसे क्लिकर्स या स्मार्टफोन कक्षा अनुभव बढ़ाने के लिए उपयोग किये जा सकते हैं, इससे प्रोफेसरों को प्रतिपुष्टि प्राप्त होने की संभावना होती है। Tremblay Eric Educating the Mobile Generation – using personal cell phones as audience response systems in post-secondary science teaching. Journal of Computers in Mathematics and Science Teaching, 2010, 29(2), 217-227. Chesapeake, VA: AACE. http://editlib.org/p/32314 2010-11-05 HTML https://web.archive.org/web/20101031222518/http://www.editlib.org/p/32314 31 अक्तूबर 2010 live
(एमलर्निंग (MLearning) लेख में और अधिक पढ़ें).
स्मार्टबोर्ड्स: एक इंटरैक्टिव सफेद बोर्ड है जो कंप्यूटर अनुप्रयोगों के लिए स्पर्श नियंत्रण प्रदान करता है। जो कुछ भी एक कंप्यूटर स्क्रीन पर किया जा सकता है उसे दिखाने से कक्षा में अनुभव में वृद्धि होती है। यह न केवल दृश्य अधिगम में सहायक है, बल्कि यह परसस्पर प्रभावी है ताकि छात्र उस पर चित्र बना सकते हैं, लिख सकते हैं या स्मार्टबोर्ड पर पर छवियों में हेरफेर कर सकते हैं।
ऑनलाइन मीडिया: कक्षा पाठ के संवर्द्धन हेतु प्रदर्शित वीडियो वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है (जैसे यूनाइटेड स्ट्रीमिंग, टीचर ट्यूब आदि).
स्थानीय स्कूल बोर्ड और कोष उपलब्धता के आधार पर अन्य बहुत से उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इन में डिजिटल कैमरा, वीडियो कैमरा, इंटरैक्टिव व्हाइटबोर्ड उपकरण, दस्तावेज़ कैमरा या एलसीडी प्रोजेक्टर शामिल हो सकते हैं।
समाज/संस्थाएं
शैक्षिक प्रौद्योगिकी के साथ संबंधित संस्थाओं में शामिल हैं:
शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटिंग की प्रगति के लिए एसोसिएशन (AACE)
शैक्षिक संचार और प्रौद्योगिकी के लिए एसोसिएशन
एसोसिएशन प्रौद्योगिकी अधिगम
प्रदर्शन में सुधार के लिए इंटरनेशनल सोसायटी
इंटरनेशनल सोसायटी फॉर टेक्लोलोजी इन एजुकेशन - (ISTE)
इन्हें भी देखें
तकनीकी
एड्डी (ADDIE) मॉडल
दूरस्थ शिक्षा
सूचना और शिक्षा के क्षेत्र में संचार प्रौद्योगिकी
अनुदेशात्मक प्रणाली डिजाइन
तकनीकी शैक्षणिक सामग्री ज्ञान
मिश्रित अध्ययन
इलेक्ट्रौनिक अध्ययन
एम-अध्ययन
मानव प्रदर्शन प्रौद्योगिकी
मायएजु (MyEdu)
सहायक तकनीक
माइंड मैप
जानकारी मानचित्रण
व्यक्ति एवं प्रौद्योगिकी मॉडल का मिलन
कंप्यूटर-अनुकूलक परीक्षा
योजनाबद्ध निर्देश
स्कौर्म (SCORM)
उपयोगिता परीक्षण
शिक्षा
अध्ययन सिद्धांत (शिक्षा)
शैक्षिक मनोविज्ञान
शैक्षिक अनुसंधान
अनुनेय अध्ययन
विश्वास के आधार पर अध्ययन
आदी होना
निंद्रा-अध्ययन
मेटाकॉग्निशन
अधिक अध्ययन
ओप्रेन्ट कंडीशनिंग
अवलोकन अध्ययन
ब्लूम वर्गीकरण
सहकारी अध्ययन
शिक्षा
भाषा विनियम
स्मरक
परियोजना आधारित अधिगम
शैक्षिक एनीमेशन
शैक्षिक मूल्यांकन
रबरिक्स (शिक्षा)
मौखिक व्यवहार
लागू व्यवहार विश्लेषण
प्रॉक्सिमल विकास के क्षेत्र
सन्दर्भ
आगे पढ़ें
बेडनर, एम.आर. और स्वीडर, जे. जे. (2005). परिभाषित और विचार प्रौद्योगिकियों का आवेदन: शिक्षकों के लिए एक व्यवस्थित और वैचारिक ढांचे। कंप्यूटर इन द स्कूल्स, 22(3/4).
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शैक्षिक प्रौद्योगिकी का विश्वकोश, शैक्षिक प्रौद्योगिकी के बारे में लेखों के लिए एक व्यापक संसाधन, शैक्षिक प्रौद्योगिकी विभाग के द्वारा प्रकाशित, सैन डिएगो राज्य विश्वविद्यालय
आगे देखने के लिए पीछे देखो - आत्मा के माध्यम से और मानव आत्मा से सीखना.जून 2020 InternetArchiveBot
2008 में बंगलौर में स्कूलों में शिक्षा और प्रौद्योगिकी पर संगोष्ठी में गीता नारायणन का मुख्य उद्बोधन.जून 2020 InternetArchiveBot
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प्रकाशन
शैक्षिक प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रौनिक अध्यनन के संयुक्त अरब अमीरात जर्नल
श्रेणी:शैक्षिक प्रौद्योगिकी
श्रेणी:शैक्षिक मनोविज्ञान