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सोहराय
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सोहराय संस्कृतिक अंगूठाकार|दाएँ|सोहराय पर्व में खुंटाव का एक दृश्य दीया जलाना, घर की सजावट, अनुष्ठान और दावत करना कार्तिक अमावस्या के बाद वर्षीय सोहराय पोरोब
सोहराय भारतीय राज्यों झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, असम, त्रिपुरा और बिहार का सबसे बड़ा पर्व संताल आदिवासियों जैसे समुदायों का पर्व है,इसे पशु उत्सव भी कहा जाता है। यह फसल कटाई के पहले और फसल कटाई के बाद मनाया जाता है और यह त्यौहार कार्तिक (सोहराय चाँदो) महीना अर्थात् अंग्रेजी महीना अक्टूबर - नवंबर के आस - पास में मनाया जाता है, ठीक यही सोहराय पर्व अंग्रेजी महीना जनवरी (पूस) में भी मनाया जाता है।https://www.shuru-art.com/blogs/news/sohrai-the-traditional-harvest-art-of-jharkhand Sohrai: The Traditional Harvest art of Jharkhand 2018-12-05 SHURUA(R)T en 2024-06-19 अलग - अलग क्षेत्र के अनुसार देखें तो यह त्यौहार कार्तिक (सोहराय चाँदो) महीना अर्थात् अंग्रेजी महीना अक्टूबर - नवंबर के आस - पास में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड का कोल्हान प्रमंडल और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के कुछ हिस्से में मनाया जाता है, दूसरी ओर झारखंड का उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के कुछ हिस्से, झारखंड का संताल परगना प्रमंडल, असम और बिहार में यह सोहराय पर्व को जनवरी (पूस) माह में मनाया जाता है। यह पर्व संतालों के लिए सबसे बड़ा पर्व मना जाता है साथ ही हो, भूमिज, मुंडा, खड़िया, उरांव सहित अन्य लोगों या समुदाय द्वारा मनाया जाता है।https://indroyc.com/2015/11/11/sohrai-unique-festival-of-jharkhand/ Sohrai Festival: Celebrating Harvest and Cattle with Wall Paintings Choudhury Indrajit Roy 2015-11-10 Indrosphere en 2024-06-19 इस त्यौहार में लोग उपवास करते हैं, घर की रंगाई-पुताई करते हैं।https://books.google.com/books?id=adfL-YEHN_AC&dq=sohrai&pg=PA58 Complementarity of Human Life and Other Life Forms in Nature: A Study of Human Obligations Toward the Environment with Particular Reference to the Oraon Indigenous Community of Chotanagpur, India Xalxo Prem 2007 Gregorian Biblical BookShop 978-88-7839-082-9 58 en
thumb|उत्तरी सन्ताली सोहराय गीत
उत्सव
सोहराय फसल कटाई के पहले और फसल कटाई के बाद मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह त्यौहार कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) के सारना आदिवासी महीने में अमावस्या (नया चाँद) होने के बाद इस पर्व को मनाया जाता है। यह त्यौहार मवेशियों, खास तौर पर बैल, भैंस, बकरी और भेड़ के सम्मान में मनाया जाता है। इस दिन लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं, घरों, मवेशियों के बाड़े, रसोई और बगीचे में मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं। त्यौहार के दिन, उन जानवरों को नहलाया जाता है, उनके सींग और माथे पर तेल में घुला हुआ हल्दी लगाया जाता है। उन्हें (बरबट्टी ,सेमी, मक्का, उड़द, शक्करकंद, अरहर , मूंगफली आदि) सात प्रकार के अन्न को अधपका उबालकर विशेष भोजन तैयार कर दिया जाता है, इस भोजन को उरांव जनजाति में कुहड़ी कहा जाता है। शाम को मुर्गे की बलि घर में आने वाले दुःख तकलीफ आने से बचने व परिवार की सुख समृद्धि हेतु दी जाती है और तपन हेतु चावल का पेय (हड़िया, झरा) अपने पुरखों के नाम से दी जाती है। फिर मुर्गे के मांस को विशेष तरीके से खिचड़ी के समान पकाया जाता है, जिसे लोग आजकल विरयानी कहते हैं,उस भोजन को तपन हेतु चावल का पेय के साथ खाया जाता है। ढोल नगाड़ों के साथ नाच-गान करते हैं, सोहराय पशुओं के प्रति कृतज्ञता और स्नेह व्यक्त करने का दिन है। फसल उत्सव वर्ष का वह समय होता है जब वे अपने कलात्मक कौशल और भावों का प्रदर्शन करते हैं। संताल समुदाय द्वारा सोहराय पर्व पाँच दिनों का होता है सभी क्षेत्र के अनुसार सभी क्षेत्र में पाँच दिनों के सोहराय को अलग - अलग नामों से जानते हैं। संतालों का सोहराय पर्व लगातार पाँच दिनों तक सोहराय गाने के साथ - साथ गाय - बैल का जागाव करते हैं और लंगड़े का गीत में गाते बजाते हैं।
कला
सोहराई कला
महिलाओं द्वारा एक स्वदेशी कला का अभ्यास किया जाता है। फसल का स्वागत करने और मवेशियों का जश्न मनाने के लिए मिट्टी की दीवारों पर अनुष्ठानिक कला की जाती है। महिलाएँ अपने घरों की सफाई करती हैं और दीवारों को सोहराई कला के भित्तिचित्रों से सजाती हैं। यह कला रूप 10,000-4,000 ईसा पूर्व से जारी है। यह ज़्यादातर गुफाओं में प्रचलित था, लेकिन बाद में मिट्टी की दीवारों वाले घरों में भी प्रचलित हो गया।https://www.newindianexpress.com/cities/delhi/2020/Feb/05/cocooned-in-jharkhand-s-sohrai-and-khovar-art--2099063.html Cocooned in Jharkhand 's Sohrai and Khovar art Sharma Nikita 2020-02-05 The New Indian Express en 2024-06-19
अंगूठाकार|दाएँ|सोहराय कला
अंगूठाकार|सोहराय दीवार की चित्रकला
अंगूठाकार|दाएँ|महिला द्वारा सोहराय चित्र बनाते हुए
संदर्भ
Sohrai
श्रेणी:भारत में त्यौहार
श्रेणी:झारखंड में त्यौहार
श्रेणी:झारखंड की संस्कृति