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कूचिपूड़ी
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आन्ध्रप्रदेश के गाँव के बारे में कुचिपुड़ी, कृष्णा जिला कूचिपूड़ी కూచిపూడి Kuchipudi Performer DS.jpg 240px नृत्यांगना वैदेही कुलकर्णी द्वारा कुचिपुड़ी नृत्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य भारत
thumb|कुचिपुड़ी नायिका एक भंगिमा प्रदर्शित करती हुई
thumb|कुचिपुड़ी नृत्य
thumb|कुचिपुड़ी नृत्य में श्री कृष्ण का अंक
कूचिपूड़ी (तेलुगू : కూచిపూడి) आंध्र प्रदेश, भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। यह पूरे दक्षिण भारत में प्रसिद्ध है। इस नृत्य का नाम कृष्णा जिले के दिवि तालुक में स्थित कुचिपुड़ी गाँव के ऊपर पड़ा, जहाँ के रहने वाले ब्राह्मण इस पारंपरिक नृत्य का अभ्यास करते थे। परम्परा के अनुसार कुचिपुडी़ नृत्य मूलत: केवल पुरुषों द्वारा किया जाता था और वह भी केवल ब्राह्मण समुदाय के पुरुषों द्वारा। ये ब्राह्मण परिवार कुचिपुडी़ के भागवतथालू कहलाते थे। कुचिपुडी़ के भागवतथालू ब्राह्मणों का पहला समूह १५५९ विक्रमाब्द के आसपास निर्मित किया गया था। उनके कार्यक्रम देवताओं को समर्पित किए जाते थे।
प्रचलित कथाओं के अनुसार कुचिपुड़ी नृत्य को पुनर्परिभाषित करने का कार्य सिद्धेन्द्र योगी नामक एक कृष्ण-भक्त संत ने किया था।Kothari Sunil Pasricha Avinash कुचिपुड़ी 2001 अभिनव प्रकाशन 31 https://books.google.co.in/books?id=Xa8FamiJJKgC&lpg=PP1&dq=%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80&pg=PA31#v=onepage&q=%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80&f=false 29 अक्टूबर 2015 en https://web.archive.org/web/20160304230836/https://books.google.co.in/books?id=Xa8FamiJJKgC&lpg=PP1&dq=%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80&pg=PA31#v=onepage&q=%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80&f=false 4 मार्च 2016 liveBanham edited by James R. Brandon ; advisory editor, Martin The Cambridge guide to Asian theatre 1993 Cambridge University Press Cambridge, England 9780521588225 96 http://books.google.co.in/books?id=ttnH5W9qoBAC&dq=kuchipudi&source=gbs_navlinks_s Pbk. 29 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20140221171506/http://books.google.co.in/books?id=ttnH5W9qoBAC&dq=kuchipudi&source=gbs_navlinks_s 21 फ़रवरी 2014 live
कूचिपूड़ी के पंद्रह ब्राह्मण परिवारों ने पांच शताब्दियों से अधिक समय तक परम्परा को आगे बढ़ाया है। प्रतिष्ठित गुरु जैसे वेदांतम लक्ष्मी नारायण, चिंता कृष्णा मूर्ति और तादेपल्ली पेराया ने महिलाओं को इसमें शामिल कर नृत्य को और समृद्ध बनाया है। डॉ॰ वेमापति चिन्ना सत्यम ने इसमें कई नृत्य नाटिकाओं को जोड़ा और कई एकल प्रदर्शनों की नृत्य संरचना तैयार की और इस प्रकार नृत्य रूप के क्षितिज को व्यापक बनाया। यह परम्परा तब से महान बनी हुई है जब पुरुष ही महिलाओं का अभिनय करते थे और अब महिलाएं पुरुषों का अभिनय करने लगी हैं।
प्रदर्शन एवं मंचन
thumb|100px|कुचिपुड़ी नृत्य पर भारत सरकार द्वारा जारी डाक टिकट
नृत्य का प्रदर्शन एक विशेष परंपरागत विधि से होता है। मंच पर परंपरागत पूजन के पश्चात् प्रत्येक कलाकार मंच पर प्रवेश करता है और एक विशेष लयबद्ध रचना धारवु के द्वारा अपना पात्र-परिचय देता है। पात्रों के परिचय और नाटक के भाव तथा परिपेक्ष निर्धारित हो जाने के बाद मुख्य नाट्य आरम्भ होता है। नृत्य के साथ कर्नाटक संगीत में निबद्ध गीत मृदंगम्, वायलिन, बाँसुरी और तम्बूरा इत्यादि वाद्ययंत्रों के साथ नृत्य में सहयोगी भूमिका निभाता है और कथानक को भी आगे बढ़ाने में सहायक होता है। नर्तकों द्वारा पहने जाने वाले आभूषण परंपरागत होते हैं जिन्हें एक विशेष प्रकार की हलकी लकड़ी बूरुगु से निर्मित किये जाने की परंपरा लगभग सत्रहवीं सदी से चली आ रही है।
शैली
भरत मुनि, जिन्होंने नाट्य शास्त्र की रचना की, इस प्रकार के नृत्य के कई पहलुओं की व्याख्या प्रस्तुत करते हैं। बाद में कोई १३वीं सदी के अंतर्गत सिद्धेन्द्र योगी ने इसे एक अलग विशिष्ट शैली का रूप प्रदान किया। माना जाता है कि वे नाट्यशास्त्र में पारंगत थे और कुछ विशेष नाट्यशास्त्रीय तत्वों को चुन कर उन्हें इस नृत्य के रूप में समायोजित किया। उन्होंने पारिजातहरणम नामक नाट्यावली की रचना की।Banham Sunil Kothari, Avinash Pasricha Kuchipudi 2001 Shakti Malik, Abhinav Publications New Delhi, India https://books.google.co.in/books?id=Xa8FamiJJKgC&printsec=frontcover&dq=kuchipudi&hl=en&sa=X&redir_esc=y#v=onepage&q=orphan&f=false. 31 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20150801090227/https://books.google.co.in/books?id=Xa8FamiJJKgC&printsec=frontcover&dq=kuchipudi&hl=en&sa=X&redir_esc=y#v=onepage&q=orphan&f=false. 1 अगस्त 2015 live
कुचिपुड़ी नर्तक चपल और द्रुत गति से युक्त, एक विशेष वर्तुलता लिये क्रम में भंगिमाओं का अनुक्रम प्रस्तुत करते हैं और इस नृत्य में पद-संचालन में उड़ान की प्रचुर मात्रा होती है जिसके कारण इसके प्रदर्शन में एक विशिष्ट गरिमा और लयात्मकता का सन्निवेश होता है। कर्नाटक संगीत के साथ प्रस्तुत किया जाने वाला यह नृत्य कई दृष्टियों से भरतनाट्यम के साथ समानतायें रखता है। एकल प्रसूति में कुचिपुड़ी में जातिस्वरम् और तिल्लाना का सन्निवेश होता है जबकि इसके नृत्यम् प्रारूप में कई संगीतबद्ध रचनाओं द्वारा भक्त के भगवान में लीन हो जाने की आभीप्सा का प्रदर्शन होता है। इसके एक विशेष प्रारूप तरंगम् में नर्तकी थाली, जिसमें दो दीपक जल रहे होते हैं, के किनारों पर नृत्य करती है और साथ ही हाथों में एक जलपात्र किन्दी को भी संतुलित रखती है।
नृत्य की वर्तमान शैली कुछ मानक ग्रंथों पर आधारित है। इनमें सबसे प्रमुख है - नंदिकेश्वर रचित "अभिनय दर्पण" और "भरतार्णव"।
प्रमुख कलाकार
लक्ष्मी नारायण शास्त्रीhttps://books.google.co.in/books?id=BJx6BwAAQBAJ&lpg=PA43&ots=H1wlOdfbHI&dq=%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%20%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A5%9C%E0%A5%80&pg=PA43#v=onepage&q=%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%20%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A5%9C%E0%A5%80&f=false संग्रहीत प्रति 15 फ़रवरी 2017 https://web.archive.org/web/20170215203240/https://books.google.co.in/books?id=BJx6BwAAQBAJ&lpg=PA43&ots=H1wlOdfbHI&dq=%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%20%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A5%9C%E0%A5%80&pg=PA43#v=onepage&q=%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%20%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A5%9C%E0%A5%80&f=false 15 फ़रवरी 2017 live
स्वप्नसुंदरी http://www.thehindu.com/features/friday-review/dance/back-in-time/article2455871.ece Back in time 15 फ़रवरी 2015 दि हिन्दू
राजा और राधा रेड्डीhttp://www.bhavalaya.com/art%20and%20culture/famous_kuchipudi_dancers.html प्रसिद्द कुचिपुड़ी नर्तक:भावालय.कॉम पर 31 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20151027095859/http://www.bhavalaya.com/art%20and%20culture/famous_kuchipudi_dancers.html 27 अक्तूबर 2015 dead
यामिनी कृष्णमूर्ति
यामिनी रेड्डी
कौशल्या रेड्डी
वेदांतम सत्यनारायण
मल्लिका साराभाई (भारतनाट्यम)
अपर्णा सथिसन
इन्हें भी देखें
विलासिनी नाट्यम्
आंध्र नाट्यम्
भरतनाट्यम्
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Kuchipudi कुचिपुड़ी
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कुचिपुड़ी नृत्य की पोशाक और आभूषण
एक मुसलमान का कुचिपुड़ी सीखना चुनौती बीबीसी पर हलीम खान के बारे में एक रपट
राजा और राधा रेड्डी समूह द्वारा प्रस्तुत नृत्य का वीडियो, यू ट्यूब पर
सुझावित ग्रन्थ और सामग्री
Kuchipudi Bhartam. Sri Satguru Publications/Indian Books Centre, Delhi, India, in Raga-Nrtya Series.
श्रेणी:शास्त्रीय नृत्य
श्रेणी:संस्कृति