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मारवाड़ी भोजनालय
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मारवाड़ी भोजनालय भारत के अनेक नगरों में मारवाड़ी शैली के पूर्णतः शाकाहारी भोजनालयों हेतु प्रचलित नाम है।http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-metroplus/The-city-eternal/article15387736.ece The city eternal 2008-08-23 The Hindu 2018-06-09 en-IN 0971-751X ये सभी भोजनालय स्वतन्त्र रूप से संचालित होते हैं। “मारवाड़ी” शब्द का आशय यह है कि यह भोजनालय मूलतः उन मारवाड़ी व्यापारियों के लिए अभिप्रेत थे, जो कठोर रूप से शाकाहारी होते हैं तथा सरल, दैनिक उपयोग योग्य और अल्प व्यय वाला भोजन पसन्द करते हैं। तथापि, ये भोजनालय सभी शाकाहारियों में समान रूप से लोकप्रिय हैं। “भोजनालय” शब्द प्रायः सरल एवं किफ़ायती शाकाहारी भोजन का संकेत देता है। “जैन भोजनालय” अथवा “वैष्णव ढाबा” नाम वाले भोजनालय भी पूर्णतः शाकाहारी होते हैं।http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-metroplus/From-the-desert-country/article15927049.ece From the desert country 2009-05-21 The Hindu 2018-06-09 en-IN 0971-751X भारत में प्रायः भोजनालयों को “होटल” भी कहा जाता है। कुछ भोजनालयों में परम्परागत रूप से लकड़ी की पट्टिकाओं पर भूमि‑आसन की व्यवस्था होती थी, परन्तु यह प्रथा अब अल्पप्रचलित है और मेज़ कुर्सियों का उपयोग अधिक सामान्य हो गया है।May 2021
भोजन शैली
नाम में “मारवाड़ी” होने पर भी यहाँ परोसा जाने वाला भोजन अनिवार्यतः राजस्थान शैली का नहीं होता। उदाहरणार्थ, दाल बाटी चूरमा अथवा गट्टे की कढ़ी जैसे लोकप्रिय राजस्थानी व्यंजन प्रायः उपलब्ध नहीं होते, अथवा केवल विशेष अवसरों पर ही परोसे जाते हैं। समृद्ध एवं उत्सवी राजस्थानी भोजन विशेष भोजनालयों, जैसे चोखी‑धानी शृंखला, में अधिक मिलता है।
भोजन सामान्यतः स्टेनलेस इस्पात की थालियों में परोसा जाता है। प्रायः प्याज़ केवल आग्रह पर ही दी जाती है, क्योंकि अनेक मारवाड़ी तथा जैन समुदाय के लोग प्याज़ का सेवन नहीं करते।
यह भी देखें
वैष्णव
सन्दर्भ
श्रेणी:मारवाड़
श्रेणी:राजस्थानी खाना