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खाँटी किकटिया
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खाँटी किकटिया Khanti-Kikatia-Magahi.jpg 200px खाँटी किकटिया अश्विनी कुमार पंकज प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन, रांची (झारखंड) 2018 मगही भारत ऐतिहासिक प्रिंट 224 978-93-81056-76-9
खाँटी किकटिया हिंदी के चर्चित कहानीकार और उपन्यासकार अश्विनी कुमार पंकज का उपन्यास है।https://books.google.co.in/books?id=CIlVDwAAQBAJ&printsec=frontcover&source=gbs_atb#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 24 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20180425115758/https://books.google.co.in/books?id=CIlVDwAAQBAJ&printsec=frontcover&source=gbs_atb#v=onepage&q&f=false 25 अप्रैल 2018 live ‘माटी माटी अरकाटीhttp://www.biharkhojkhabar.com/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8/ संग्रहीत प्रति 24 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20180425115315/http://www.biharkhojkhabar.com/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8/ 25 अप्रैल 2018 dead ’ फेम श्री पंकज का यह दूसरा उपन्यास है जो उन्होंने अपनी मातृभाषा मगही में लिखा हॅै। जनवरी, 2018 में प्रकाशित यह उपन्यास 600 ईसा पूर्व के सुप्रसिद्ध दार्शनिक मक्खलि गोसाल के जीवन और दर्शन पर आधारित है। आलोचकों के अनुसार ‘खाँटी किकटिया’ मगही साहित्य के उपन्यास लेखन में अपनी तरह का विरल प्रयास है।"‘खांटी किकटिया’ मगही उपन्यास में अपनी तरह का विरल लेखन", राष्ट्रीय सहारा, पटना संस्करण, 23 अप्रैल 2018
1928 में छपी सुनीता मगही भाषा में जयनाथ पति का लिखा पहला उपन्यास है। तब से अब तक कुल 28 मगही उपन्यासों का प्रकाशन हो चुका है।http://magahi-sahitya.blogspot.in/2006/09/blog-post_115818807205973637.html संग्रहीत प्रति 24 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20180425115328/http://magahi-sahitya.blogspot.in/2006/09/blog-post_115818807205973637.html 25 अप्रैल 2018 dead लेकिन मगही उपन्यासों की शृंखला में यह पहला उपन्यास है जो व्यापक फलक पर मगध में विकसित हुई आजीवक दर्शन की परंपरा को उसके मूल सरोकार के साथ उसको समग्रता में व्याख्यायित करता है।"मगही उपन्यास ‘खांटी किकटिया’ का विमोचन", हिंदुस्तान, पटना संस्करण, 23 अप्रैल 2018
बहुजन साहित्य के विचारक और प्रखर हिंदी आलोचक प्रेमकुमार मणि कहते हैं, ‘मगध के इतिहास की व्याख्या करने वाली यह कृति बहुत ही बहसतलब है और रचनात्मकता से भरी पड़ी है। दैनिक ‘आज’, पटना संस्करण, 23 अप्रैल 2018 मगही लेखक घमंडी राम की टिप्पणी है, ‘वर्ण व्यवस्था देश में सदियों से अपने बर्बर रूप में विद्यमान रही है। लेखक ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में बौद्धकालीन समाज की सामाजिक राजनीतिक और आर्थिक जीवन की जो तस्वीर इस कृति में खींची है, वह मगही साहित्य में अपनी वैचारिकता के लिए सदैव याद की जाएगी।’ मगही लेखक धनंजय श्रोत्रिय का मानना है कि मगही के इतिहास लेखन में अश्विनी पंकज ने ‘खाँटी किकटिया’ लिखकर एक ऐतिहासिक धरोहर मगध के समाज को सौंपा है। कवि हरीन्द्र विद्यार्थी की सम्मति है, ‘भाषा, शैली, कथन और पात्रों के सृजन की दृष्टि से यह मगही का एक सर्वोत्कृष्ट उपन्यास है। इस शोधपरक कृति ने मगही उपन्यास का मानक तय कर दिया है।’ वहीं, साहित्यकार ध्रुव गुप्त के अनुसार ‘अश्विनी कुमार पंकज ने मक्खलि गोसाल के जीवन, विचार और उनके नेतृत्व में आजीवकों की लड़ाई की जैसी जीवंत तस्वीर खींची है, उससे गुज़रना एक दुर्लभ अनुभव है। उनकी इस कृति में देशज भाषा मगही और उसकी लोकोक्तियों का सौंदर्य अपने पूरे निखार पर है। इसमें कोई संदेह नहीं कि मगही भाषा का यह सर्वथा अलग-सा उपन्यास मगही ही नहीं, तमाम देशज भाषाओं के लिए गर्व का विषय साबित होगा।’"‘खांटी किकटिया’ मगही उपन्यास में अपनी तरह का विरल लेखन", राष्ट्रीय सहारा, पटना संस्करण, 23 अप्रैल 2018
इन्हें भी देखें
मक्खलि गोशाल
आजीविक
बाहरी कड़ियाँ
खाँटी किकटिया, मक्खलि गोसाल के जीवन पर आधारित मगही उपन्यास, प्यारा केरकेट्टा फाउण्डेशन, रांची, 2018
महान आजीवक: कबीर, रैदास और गोसाल, डॉ. धर्मवीर, वाणी प्रकाशन, दिल्ली, 2017
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सन्दर्भ
श्रेणी:उपन्यास
श्रेणी:भारतीय उपन्यास
श्रेणी:मगही उपन्यास