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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

घण्टा

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समय की इकाई के लिए घंटाअंगूठाकार|छोटा एवं बड़ा घण्टा, चाङ्गु नारायण मन्दिर, नेपाल घण्टा (संस्कृत: घण्टा, IAST: ghaṇṭā; तिब्बती: drilbu) एक संस्कृत शब्द है जो हिन्दू धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होने वाली पूजा-घण्टी को दर्शाता है। घण्टी का निनाद शुभ माना जाता है। हिन्दू मन्दिरों में प्रायः एक धातु की घण्टी प्रवेश-द्वार पर लटकी होती है, जिसे भक्त मन्दिर में प्रवेश करते समय बजाते हैं, यह दर्शन की तैयारी का एक अनिवार्य अंग है। पूजारी भी पूजन अथवा यज्ञ के समय, दीपार्चन, धूपार्पण, अभिषेक तथा नैवेद्य या पुष्प अर्पण के समय, घण्टी बजाते हैं। कुछ विशेष घण्टियाँ ओम् ध्वनि की दीर्घ तरंग उत्पन्न करने हेतु निर्मित की जाती हैं।https://www.templepurohit.com/why-do-we-ring-bells-or-ghanta-in-hindu-temples/ Why Do We Ring Bells or Ghanta in Hindu Temples? 12 February 2016 TemplePurohit.com 22 April 2021 विशेषताएँ घण्टी प्रायः पाँच से सात मूल्यवान धातुओं से निर्मित होती है, जो नवग्रहों से सम्बद्ध मानी जाती हैं, सीसा (शनि), राँगा (बृहस्पति), लोहा (मंगल), ताम्रा (शुक्र), पारा (बुध), चाँदी (चन्द्र) तथा स्वर्ण (सूर्य)। इसके भीतर एक टक्करने वाला भाग (घण्टानादक) जुड़ा होता है, जिससे उच्च स्वर उत्पन्न होता है। घण्टी के शीर्ष पर प्रायः पीतल की मूर्ति होती है, यदि वह शिव-पूजन हेतु हो तो नन्दि की आकृति, यदि विष्णु अथवा उनके अवतार जैसे राम, नरसिंह या कृष्ण की पूजा हेतु हो तो गरुड़, पाञ्चजन्य शङ्ख या सुदर्शन चक्र की आकृति होती है।https://www.templepurohit.com/why-do-we-ring-bells-or-ghanta-in-hindu-temples/ Why Do We Ring Bells or Ghanta in Hindu Temples? 12 February 2016 TemplePurohit.com 22 April 2021 प्रयोग हिन्दू धर्म में घण्टियाँ प्रायः मन्दिर के शिखर अथवा गर्भगृह के सम्मुख लटकाई जाती हैं। भक्तजन मन्दिर में प्रवेश करते समय घण्टी बजाते हैं, जिससे वे देवता को अपने आगमन की सूचना देते हैं। घण्टी की ध्वनि शुभ मानी जाती है, यह दिव्यता का स्वागत करती है तथा अपवित्रता का निवारण करती है। यह ध्वनि मन को वर्तमान विचारों से विमुक्त करती है, जिससे मन अधिक ग्रहणशील बनता है। प्रार्थना के समय घण्टी बजाना चित्त की चञ्चलता को नियन्त्रित करने तथा ध्यान को देवता पर केन्द्रित करने में सहायक माना गया है।https://www.hinduscriptures.com/ Hindu Scriptures | Vedic lifestyle, Scriptures, Vedas, Upanishads, Smrutis Hinduscriptures.com 22 April 2021"Peal of bells". Timesofindia.com, Retrieved on 4 March 2015https://www.templepurohit.com/why-do-we-ring-bells-or-ghanta-in-hindu-temples/ Why Do We Ring Bells or Ghanta in Hindu Temples? 12 February 2016 TemplePurohit.com 22 April 2021 मन्त्र हिन्दू परम्परा में घण्टी बजाते समय निम्न मन्त्र उच्चारित किया जाता है —आगमार्थं तु देवानां गमनार्थं तु रक्षसाम् । घण्टारवं करोम्यादौ देवताह्वान लाञ्छनम् ॥ मैं यह घण्टी बजाकर दिव्यता का आह्वान करता हूँ, जिससे पुण्य एवं शुभ शक्तियाँ प्रवेश करें; तथा असुर एवं अपवित्र शक्तियाँ, अन्तः एवं बाह्य दोनों स्तरों पर, दूर हो जाएँ। योगदृष्टि कुण्डलिनी योग के अनुसार, घण्टी की ध्वनि चक्रों को ऊर्जित करती है तथा शरीर में ऊर्जा के वितरण को संतुलित करती है। मन्त्र में जितने अक्षर होते हैं, उतनी बार घण्टी बजाना उचित माना गया है, अतः घण्टी को ८, १६, २४ या ३२ बार बजाना चाहिए। शिल्पशास्त्रों में उल्लिखित है कि घण्टी पञ्चधातु से निर्मित होनी चाहिए, ताम्र, चाँदी, स्वर्ण, जस्ता तथा अयस्। ये पाँच धातुएँ पञ्चभूतों का प्रतिनिधित्व करती हैं।"Why to ring the bell while coming to Temple or starting any pooja?" https://web.archive.org/web/20140522105111/http://www.vishnushivamandir.org.au/index.php/2013-12-15-09-31-18/discourse/76-ringing-the-bell.html 22 मई 2014 . Vishnushivamandir.org.au, Retrieved on 9 March 2015 प्रतीकात्मकता हिन्दू धर्म में घण्टी का प्रतीकात्मक महत्त्व भी है। घण्टी का वक्राकार शरीर अनन्त का प्रतीक है। इसके भीतर का टक्करने वाला भाग सरस्वती का प्रतीक है, जो ज्ञान एवं विद्या की देवी हैं। घण्टी का हस्तग्रहण भाग प्राणशक्ति का प्रतीक है, जो हनुमान्, गरुड़, नन्दि अथवा सुदर्शन चक्र से सम्बद्ध होता है।"Why do Hindus ring the bell in temple". Sanskritimagazine.com, Retrieved on 3 March 2015 चित्रशाला सम्बन्धित विषय चन्द्रघण्टा सन्दर्भ आगे पढ़ें Sonic Theology: Hinduism and Sacred Sound Beck Guy L. University of South Carolina Press 1993 978-1611171082 Puja: A Study in Smarta Ritual Buhnemann Gudrun E. J. Brill 2007 Crossley-Holland Peter 1976 The Ritual Music of Tibet The Tibet Journal 1 3–4 45–54 43299823 Mantra Interpretation in the Śrauta and Grhya Sutras Gonda Jan Brill 1975 Tibetan Ritual Music: A General Survey with Special Reference to the Mindroling Tradition Scheidegger Daniel A. Tibet-Institut 1988 978-3720600163 The Buddhist Tantras: Light on Indo-Tibetan Esotericism Wayman Alex Routledge 1971 Music in India: The Classical Traditions https://archive.org/details/musicinindiaclas0000wade_m3r1 Wade Bonnie C. Prentice-Hall 1979 978-0136070283 श्रेणी:वज्रयान