411 REFERENCE · Wikipedia
पैराशूट रेजिमेंट
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
पैराशूट रेजिमेंट File:Parachute Regiment Insignia (India).svg रेजिमेंट का प्रतीक चिह्न 1945 -वर्तमान भारत भारत भारतीय सेना आर्मी/थल सेना पैराशूट इन्फेंट्री और स्पेशल फ़ोर्स एयरबोर्न/स्पेशल फ़ोर्स 17 बटालियन बैंगलोर, कर्नाटक. रेजिमेंट केंद्र IMI टेवर टार 21 असॉल्ट राइफल द पारस शत्रुजीत मरून और आसमानी 7 अशोक चक्र, 7 परम विशिष्ठ सेवा मैडल, 11 महावीर चक्र, 13 कीर्ति चक्र, 61 वीर चक्र, 53 शौर्य चक्र, 77 सेना मैडल, 13 अति विशिष्ठ सेवा मैडल, 6 उत्तम युद्ध सेवा मैडल, 10 युद्ध सेवा मैडल 28 विशिष्ठ सेवा मैडल, 246 सेवा मैडल 265 मेंशन-इन-डिस्पैच, पंख युक्त खुला पैराशूट रेजिमेंट प्रतीक चिह्न हैकल(Hackle)
पैराशूट रेजिमेंट भारतीय सेना की हवाई (एयरबॉर्न) इंफेंट्री रेजिमेंट है।http://www.indianparachuteregiment.kar.nic.in/ https://web.archive.org/web/20160118221142/http://www.indianparachuteregiment.kar.nic.in/ 18 जनवरी 2016 इंडियन पैराशूट रेजिमेंट जो कुमारी कृष्णा अहीरवार को एक ट्रेनर के रूप में स्विकार करती हैं और 4 अक्टुबर 2023 को फिजिकल पास के दोरान पैरा शूट रेजिमेंट मे जॉइन कर सकती हैं
इतिहास
पहला भारतीय हवाई गठन 50वाँ पैराशूट ब्रिगेड था जो 29 अक्टूबर 1941 को बनाया गया, इसमें 151 ब्रिटिश, 152 भारतीय और 153 गोरखा पैराशूट बटालियन और अन्य समर्थक इकाइयाँ भी थीं।
रेजिमेंट की पहली हवाई कार्रवाई द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुई जब एक प्रबलित(रीइंफोर्सड) गोरखा बटालियन ऑपरेशन ड्रैकुला के एक भाग में पैराशूट से 1 मई 1945 को बर्मा के हाथी प्वाइंट पर उतरी। बटालियन ने अच्छी तरह से सभी का सम्मान कमाया और हवाई युद्ध के आलोचकों सहित सभी ने इस प्रदर्शन की प्रसंशा की।
भारतीय पैराशूट रेजिमेंट का 1 मार्च 1945 गठन किया गया जिसमें चार बटालियनों और स्वतंत्र कंपनियों की संख्या को बराबर मिलाया गया था।
आजादी के बाद, एयरबोर्न डिवीजन भारत की सेनाओं और हाल में गठित पाकिस्तान के बीच विभाजित की गई , भारत ने 50 वीं और 77 वीं ब्रिगेड साथ रखी जबकि पाकिस्तान 14 वें पैराशूट ब्रिगेड को ले लिया।
इनके छोटे लेकिन घटनापूर्ण अस्तित्व के दौरान अब तक रेजिमेंट की बटालियनों ने व्यापक परिचालन अनुभव और विलक्षण उपलब्धियों से अपनी पेशेवर्ता का सदैव प्रमाण दिया है।
1999 में, दस में से नौ पैराशूट बटालियनों को कारगिल में ऑपरेशन विजय में तैनात किया गया जो रेजिमेंट के परिचालन प्रोफ़ाइल की गवाही देता है। पैराशूट ब्रिगेड ने मुश्कोह घाटी घुसपैठ को साफ किया, जबकि 5 पैरा सक्रिय रूप से बटालिक क्षेत्र में कार्यरत थे , जहां इन्होंने महान साहस और दृढ़ता का प्रदर्शन किया गया था, और इन्हें थलसेनाध्यक्ष यूनिट प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए कोरिया (1953-1954), गाजा (1956-1958) और सिएरा लियोन (2000) में भी पैराशूट इकाइयों को भेजा गया है। बाद वाला मिशन 2 पैरा (एस एफ) द्वारा आयोजित एक साहसी मिशन था।
1 मई 1962, को पैराशूट रेजिमेंट के एक प्रशिक्षण विंग का ब्रिगेड ऑफ़ गार्ड प्रशिक्षण केन्द्र के तहत कोटा में गठन किया गया और इस तरह सीधी भर्ती व पैराशूट रेजिमेंट के लिए रंगरूटों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया। रेजिमेंट ने 1961 से ही अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी। उसी समय रेजिमेंट में रंगरूटों की भर्ती बढ़ने के लिए, एक प्रशिक्षण केन्द्र को13 मार्च 1963 को अधिकृत किया गया, और भारत सरकार ने एक स्वतंत्र प्रशिक्षण केंद्र के लिए मंजूरी दे दी।
पर्वतारोहण
यह दल पर्वतारोहण में भी एक लम्बे समय से मुकाम हासिल करता रहा है। इस दल माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले का प्रथम सफल पर्वतारोही अवतार सिंह चीमा थे।
अभी हाल ही में 2024 में 29 पैरा(विशेष बल) के दो कमांडोज मेजर बलवीर सिंह और कमांडो सुशील, एस एम ने अपनी बहादुरी का प्रदर्शन देते के2 को फतह किया है।मुखपृष्ठ 2022-07-22 https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0&oldid=5590190 Wikipedia, the free encyclopedia hi 2026-01-16
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय सेना
श्रेणी:भारतीय सेना के सैन्य-दल
श्रेणी:भारतीय सेना की रेजिमेंट