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सरिय्या औतास
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सरिय्या औतास या औतास की लड़ाई (अंग्रेज़ी: Battle of Autas) इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद और मुस्लिम सेनाओं से जुड़ी एक प्रारंभिक लड़ाई थी, जो गज़वा ए हुनैन के बाद, लेकिन गज़वा ए तायफ़ से पहले औतास में वर्ष 630 में लड़ी गई थी। मुहम्मद जनजातियों के गठबंधन के खिलाफ 12,000 सेनानियों के साथ आए थे। घात लगाकर मुसलमानों पर तीर बरसाए गए। हालाँकि, मुसलमान विजयी हुए।
== पृष्ठभूमि ==
मुहम्मद के प्रति शत्रुतापूर्ण पहाड़ी जनजातियों के एक संघ ने उस पर हमला करने के लिए एक गठबंधन बनाया।
लीग में बनू सक़ीफ़ , हवाज़िन्स , जोशीमाइट्स, सादाइट्स और कई अन्य कठोर पहाड़ी जनजातियाँ शामिल थीं। इस्लामी परंपरा के अनुसार बनू साद (जो इरविंग को "सादाइट्स" कहते हैं) की घाटी वह जगह है जहां मुहम्मद को एक बच्चे के रूप में पाला गया था और एक देवदूत द्वारा शुद्ध भी किया गया था।
थकीफ मूर्तिपूजक थे जो अल-लात की पूजा करते थे। वे तैफ के उत्पादक क्षेत्र को नियंत्रित करते थे, और वे जनजाति भी थे जिन्होंने मुहम्मद को तैफ से बाहर निकाल दिया था, जब वह पहली बार इस्लाम का प्रचार कर रहे थे, तब सार्वजनिक चौराहे पर उन पर पथराव किया था ।
== लड़ाई ==
मुहम्मद 12,000 आदमियों के साथ ऑटस गए। जैसे ही मुस्लिम सेना हुनैन की घाटी से गुजरी , शत्रुतापूर्ण कबीलों के एक समूह ने मुसलमानों पर तीरों की बारिश शुरू कर दी।
हमले ने मुसलमानों को चौंका दिया, और कई तीरों से दूर भाग गए। मुहम्मद के साथ केवल नौ आदमी रह गए। थोड़ी देर बाद मुसलमान फिर से इकट्ठा हो गया और मुहम्मद के पास इकट्ठा हो गए। इसके बाद उन्होंने ऑटस की ओर कूच किया, एक टकराव के बाद, जनजातियों को पराजित किया गया और मुसलमानों ने बड़ी मात्रा में माले ग़नीमत पर कब्जा कर लिया।
=== कैसे जीते ===
== हदीस में वर्णन ==
अबुल फ़ज्ल अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ हुनैन के दिन उपस्थित था। मैं और अबु सुफ़यान बिन हारिस बिन अब्दुल मुत्तलिब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ रहे और आपसे अलग नहीं हुए। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने एक सफ़ेद खच्चर पर सवार थे। जब युद्ध आरंभ हुआ तो मुसलमान पीठ दिखाकर भाग खड़े हुए, लेकिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने खच्चर को काफ़िरों की ओर बढ़ाते रहे। मैं खच्चर की लगाम पकड़े हुआ था और उसे तेज़ चलने से रोक रहा था और अबू सुफ़यान आपकी सवारी की रकाब पकड़े हुए थे। इतने में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “ऐ अब्बास! समुरा वालों (पेड़ के नीचे बैअत करने वालों) को पुकारो।” अब्बास ऊँची आवाज़ वाले थे। वह कहते हैं कि मैंने तेज़ आवाज़ से कहा : समुरा वाले कहाँ हैं? अल्लाह की क़सम! जब उन लोगों ने मेरी आवाज़ सुनी, तो इस तरह तेज़ी से पलटे जिस तरह गाय अपने बछड़े की ओर पलटती है और कहने लगे : हम यहाँ हैं, हम यहाँ हैं! फिर वे काफ़िरों से युद्ध करने लगे। फिर अंसार को आवाज दी गई। लोग कहने लगे : ऐ अंसारियो! ऐ अंसारियो! सबसे अंत में बनी हारिस़ बिन खज़रज को आवाज़ दी गई। अब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने, जो अपने खच्चर पर सवार थे, मुँह उठाकर उनके युद्ध को देखा और फ़रमाया : “अब ज़ोर का रण पड़ा है!” फिर कुछ कंकड़ों को लेकर काफ़िरों के चेहरों पर मारा और फ़रमाया : “मोहम्मद के रब की क़सम, वे हार गए।” मैं देखने गया (कि जंग की क्या दशा है) तो देखा जंग वैसी ही थी, लेकिन जैसे ही आपने उनकी ओर कंकड़ फ़ेंके, तो देखा कि वे दुर्बल हो गए और भागने लगे।
[सह़ीह़ - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
== सराया और ग़ज़वात ==
अरबी शब्द ग़ज़वा इस्लाम के पैग़ंबर के उन अभियानों को कहते हैं जिन मुहिम या लड़ाईयों में उन्होंने शरीक होकर नेतृत्व किया,इसका बहुवचन है गज़वात, जिन मुहिम में किसी सहाबा को ज़िम्मेदार बनाकर भेजा और स्वयं नेतृत्व करते रहे उन अभियानों को सरियाह(सरिय्या) या सिरया कहते हैं, इसका बहुवचन सराया है।
== इन्हें भी देखें ==
वादियुल क़ुरा का तीसरा अभियान
सरिय्या ज़ैद बिन हारिसा
ग़ज़वा ए ज़ी अम्र
मुहम्मद की सैन्य उपलब्धियाँ
मुहम्मद के अभियानों की सूची
गुलामी पर इस्लाम के विचार
== सन्दर्भ ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
अर्रहीकुल मख़तूम (सीरत नबवी ), पैगंबर की जीवनी (प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित पुस्तक), हिंदी (Pdf)
Ghazwat Un Nabi By Professor Noor Bakhsh (Urdu Pdf