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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कार्बोनेटाइट

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कार्बोनेटाइट (Carbonatite) 260pxब्राजील के जैकुपिरंगा से प्राप्त कार्बोनेटाइट पत्थर का नमूना (कैल्साइट, मैग्नेटाइट और ओलिविन का मिश्रण) चट्टान का प्रकार आग्नेय चट्टान (Igneous rock) प्राथमिक संघटन कार्बोनेट खनिज (>50%) भूवैज्ञानिक विन्यास महाद्वीपीय दरार (Continental Rift) घाटियाँ thumb|right|तंजानिया के ओल्डोइन्यो लेंगाई ज्वालामुखी पर बहता हुआ दुर्लभ कार्बोनेटाइट लावा कार्बोनेटाइट (Carbonatite) एक अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट प्रकार की अंतर्भेदी (Intrusive) या बहिर्भेदी (Extrusive) आग्नेय चट्टान है, जिसका खनिज वैज्ञानिक संघटन मुख्य रूप से 50% से अधिक कार्बोनेट खनिजों से बना होता है।Bell Keith 1989 Carbonatites: Genesis and Evolution London Unwin Hyman अपनी बाहरी बनावट के कारण कार्बोनेटाइट्स को अक्सर सामान्य संगमरमर (Marble) समझने की भूल हो जाती है, इसलिए इसकी वास्तविक पहचान स्थापित करने के लिए कड़े भू-रासायनिक (Geochemical) सत्यापन की आवश्यकता होती है। कार्बोनेटाइट्स आमतौर पर क्षारीय अंतर्भेदी परिसरों के भीतर छोटे ज्वालामुखीय प्लग, डाइक (Dikes), सिल (Sills) और नसों (Veins) के रूप में पाए जाते हैं।Andersson Magnus Carbonatite ring-complexes explained by caldera-style volcanism Scientific Reports 2013 3 1677 ये भूवैज्ञानिक रूप से लगभग विशेष रूप से महाद्वीपीय दरार (Continental Rift) से जुड़े विवर्तनिक विन्यासों में ही प्रकट होते हैं। पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में आर्कियन कल्प (Archean Eon) से लेकर वर्तमान समय तक कार्बोनेटाइट आग्नेय गतिविधियों में लगातार वृद्धि देखी गई है। सतह पर बहने वाले कार्बोनेटाइट लावा प्रवाह मुख्य रूप से अत्यधिक घुलनशील कार्बोनेटों से बने होते हैं, जिसके कारण हवा और पानी के संपर्क में आते ही इनका रासायनिक अपक्षय (Weathering) बहुत तेजी से होता है। इसी वजह से पृथ्वी के इतिहास में बहिर्भेदी कार्बोनेटाइट लावा के अवशेष भूवैज्ञानिक रिकॉर्ड में बहुत कम सुरक्षित रह पाए हैं। वर्तमान समय में पूरे ब्रह्मांड और मानव इतिहास में केवल एक ही सक्रिय कार्बोनेटाइट ज्वालामुखी ज्ञात है, जो तंजानिया में स्थित ओल्डोइन्यो लेंगाई (Ol Doinyo Lengai) है। यह दुनिया के सबसे ठंडे लावा (तापमान मात्र 500-600 °C) का उद्गार करता है। इसका लावा मुख्य रूप से नैट्रोकार्बोनेटाइट (Natrocarbonatite) होता है जिसमें न्येरेराइट और ग्रेगोरीराइट खनिजों की प्रचुरता होती है। उत्पत्ति और भूवैज्ञानिक बहस (Genesis) आग्नेय चट्टानों के रूप में कार्बोनेटाइट की कलीसियाई उत्पत्ति को सबसे पहले वर्ष 1948 में स्वीडिश भूवैज्ञानिक हैरी वॉन एकरमैन ने स्वीडन के 'अल्नो कॉम्प्लेक्स' के अपने गहन वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर प्रतिपादित किया था।Hode Vuorinen Jaana 2005 The Alnö alkaline and carbonatitic complex – a petrogenetic study Ph.D. Stockholm University हालांकि, लंबे समय तक भूवैज्ञानिकों का एक बड़ा वर्ग इसे चूना पत्थर (Limestone) के पिघलने से बनी चट्टान मानता था। वर्ष 1960 में तंजानिया के ओल्डोइन्यो लेंगाई ज्वालामुखी के लाइव उद्गार ने आखिरकार इस वैज्ञानिक मत की पुष्टि की कि कार्बोनेटाइट सीधे भू-गर्भ के गहरे मैग्मा (Magma) से उत्पन्न होता है। इसके कार्बन समस्थानिक (Carbon Isotopes) सीधे पृथ्वी के मेंटल (Mantle) से मेल खाते हैं, न कि तलछटी चूना पत्थरों से। इसके निर्माण के तीन मुख्य भूवैज्ञानिक मॉडल मौजूद हैं: पृथ्वी के मेंटल में बहुत कम मात्रा में आंशिक रूप से पिघलने (Partial Melting) और आग्नेय विभेदन द्वारा प्रत्यक्ष निर्माण। एक ही कक्ष के भीतर कार्बोनेट मेल्ट और सिलिकेट मेल्ट के बीच होने वाला तरल अमिश्रणीय अलगाव (Liquid Immiscibility)। कड़ा और अत्यधिक चरम क्रिस्टल आंशिक पृथक्करण (Crystal Fractionation)। खनिज विज्ञान (Mineralogy) कार्बोनेटाइट की कलीसियाई खनिज संरचना अत्यधिक परिवर्तनशील होती है, लेकिन इसमें आमतौर पर नैट्रोलाइट, सोडालाइट, एपेटाइट, मैग्नेटाइट, बेराइट और फ्लोराइट जैसे दुर्लभ खनिज शामिल होते हैं जो सामान्य सिलिकेट चट्टानों में नहीं पाए जाते। इसके वर्गीकरण में कैल्साइट-समृद्ध मोटे बनावट वाले पत्थरों को सोवाइट (Sövite) और महीन बनावट वाले पत्थरों को अल्वीकाइट (Alvikite) कहा जाता है। डोलोमाइट-समृद्ध संरचनाओं को 'रौहौगाइट' और एंकरपाइट-समृद्ध संरचनाओं को 'बेफोर्सिट' नाम दिया गया है। ओल्डोइन्यो लेंगाई से निकलने वाले काले और गहरे भूरे रंग के नैट्रोकार्बोनेटाइट लावा में सोडियम और पोटेशियम की अत्यधिक उच्च मात्रा होती है। निर्जलीय (Anhydrous) होने के कारण यह लावा वायुमंडल की नमी के साथ कड़ा और अत्यंत तीव्र गति से रियेक्ट करता है। इसके कारण, काला लावा बहने के मात्र कुछ घंटों के भीतर रासायनिक रूप से बदलकर सफेद, कुछ दिनों में भूरा और कुछ हफ्तों में मटमैला पाउडर बन जाता है। आर्थिक और औद्योगिक महत्व दुर्लभ होने के बावजूद, कार्बोनेटाइट चट्टानें कलीसियाई वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये आधुनिक उच्च-तकनीकी उद्योगों, रक्षा उपकरणों और मोबाइल चिप्स में उपयोग होने वाले दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare-earth elements - REEs) का दुनिया का सबसे बड़ा प्राथमिक स्रोत हैं। इसके अलावा, इनसे बड़े पैमाने पर फास्फोरस, नाइओबियम, टैंटलम, यूरेनियम, थोरियम, तांबा और लोहा निकाला जाता है। ऑस्ट्रेलिया का प्रसिद्ध माउंट वेल्ड (Mount Weld) और अमेरिका का माउंटेन पास इसके वैश्विक गढ़ हैं। दक्षिण अफ्रीका के पालाबोरा परिसर से इसके जरिए भारी मात्रा में तांबा, सोना, चांदी और प्लैटिनम का उप-उत्पाद के रूप में उत्पादन किया जाता है। लोकप्रिय संस्कृति में विश्व के सबसे प्रसिद्ध वीडियो गेम माइनक्राफ्ट (Minecraft) में कस्टमाइज्ड रूप से पाए जाने वाले जेनेरिक पत्थरों (Stone blocks) के बारे में गेमर्स और भूवैज्ञानिकों ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया है कि वे कूट संरचना में वास्तव में कार्बोनेटाइट चट्टानें ही हैं।https://www.youtube.com/watch?v=uMx63AJShLE Geologist answers: What is Stone YouTube संदर्भ बाहरी कड़ियाँ ओल्डोइन्यो लेंगाई ज्वालामुखी के नैट्रोकार्बोनेटाइट लावे के लाइव चित्र यूएसजीएस (USGS): कार्बोनेटाइट भंडार और भूवैज्ञानिक विवरण (पीडीएफ) Category:आग्नेय चट्टानें Category:भूविज्ञान