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अज्ञेय
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सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (7 मार्च, 1911 - 4 अप्रैल, 1987) हिन्दी में अपने समय के सबसे चर्चित कवि, कथाकार, निबन्धकार, पत्रकार, सम्पादक, यायावर, अध्यापक रहे हैं।मिश्र विद्यानिवास अज्ञेय प्रतिनिधि कविताएं एवं जीवन-परिचय मार्च १९९९ राजपाल एण्ड सन्ज़ दिल्ली आवरण २९ सितंबर २००९ इनका जन्म 7 मार्च 1911 को उत्तर प्रदेश के कसया, पुरातत्व-खुदाई शिविर में हुआ।विद्यानिवास मिश्र अज्ञेय 2007 राजपाल दिल्ली 9788170284017 6 बचपन लखनऊ, कश्मीर, बिहार और मद्रास में बीता। बी.एससी. करके अंग्रेजी में एम.ए. करते समय क्रांतिकारी आन्दोलन से जुड़कर बम बनाते हुए पकड़े गये और वहाँ से फरार भी हो गए। सन् 1930 ई. के अन्त में पकड़ लिये गये। अज्ञेय प्रयोगवाद एवं नई कविता को साहित्य जगत में प्रतिष्ठित करने वाले कवि हैं। अनेक जापानी हाइकु कविताओं को अज्ञेय ने अनूदित किया। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी और प्रखर कवि होने के साथ ही साथ अज्ञेय की फोटोग्राफ़ी भी उम्दा हुआ करती थी। और यायावरी तो शायद उनको दैव-प्रदत्त ही थी ।
जीवन परिचय
प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा पिता की देख रेख में घर पर ही संस्कृत, फारसी, अंग्रेजी और बांग्ला भाषा व साहित्य के अध्ययन के साथ हुई। 1925 में पंजाब से एंट्रेंस की परीक्षा पास की और उसके बाद मद्रास क्रिस्चन कॉलेज में दाखिल हुए। वहाँ से विज्ञान में इंटर की पढ़ाई पूरी कर 1927 में वे बी.एससी. करने के लिए लाहौर के फॅरमन कॉलेज के छात्र बने। 1929 में बी. एससी. करने के बाद एम.ए. में उन्होंने अंग्रेजी विषय लिया; पर क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लेने के कारण पढ़ाई पूरी न हो सकी।
कार्यक्षेत्र
1930 से 1936 तक विभिन्न जेलों में कटे। 1936-37 में सैनिक और विशाल भारत नामक पत्रिकाओं का संपादन किया। 1943 से 1946 तक ब्रिटिश सेना में रहे; इसके बाद इलाहाबाद से प्रतीक नामक पत्रिका निकाली और ऑल इंडिया रेडियो की नौकरी स्वीकार की। देश-विदेश की यात्राएं कीं। जिसमें उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से लेकर जोधपुर विश्वविद्यालय तक में अध्यापन का काम किया। दिल्ली लौटे और दिनमान साप्ताहिक, नवभारत टाइम्स, अंग्रेजी पत्र वाक् और एवरीमैंस जैसी प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। 1980 में उन्होंने वत्सलनिधि नामक एक न्यास की स्थापना की जिसका उद्देश्य साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में कार्य करना था। दिल्ली में ही 4 अप्रैल 1987 को उनकी मृत्यु हुई।
1964 में आँगन के पार द्वार पर उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार प्राप्त हुआ और 1978 में कितनी नावों में कितनी बार पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार।सामान्य ज्ञान एवं व्यक्ति परिचय उपकार प्रकाशन 37 https://books.google.co.in/books?id=BJx6BwAAQBAJ&lpg=PA37&ots=H1tfQhdgKG&dq=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A5%87%E0%A4%AF%201978%20%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A0&pg=PA37#v=onepage&q=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A5%87%E0%A4%AF%201978%20%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A0&f=false 29 दिसंबर 2015 https://web.archive.org/web/20160304213040/https://books.google.co.in/books?id=BJx6BwAAQBAJ&lpg=PA37&ots=H1tfQhdgKG&dq=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A5%87%E0%A4%AF%201978%20%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A0&pg=PA37#v=onepage&q=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A5%87%E0%A4%AF%201978%20%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A0&f=false 4 मार्च 2016 live
अज्ञेय की भाषा शिक्षा
अज्ञेय, हिंदी साहित्य के महान कवि और लेखक, ने अपने साहित्यिक कार्यों में भाषा और शिक्षा के महत्व को गहरे तरीके से समझा और प्रस्तुत किया है। उनका मानना था कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि विचारों और संस्कृति का संरक्षक भी है। अज्ञेय ने अपने लेखन में भाषा के माध्यम से समाज, मनुष्य और जीवन के जटिल पहलुओं को प्रकाशित किया। उनकी भाषा शिक्षा की अवधारणा में केवल व्याकरण और शब्दावली नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और अभिव्यक्ति के रूप में भाषा की शक्ति को स्थान दिया गया।
अज्ञेय की भाषा को आधुनिक हिंदी कविता का प्रतीक माना जाता है, जिसमें उन्होंने अभिव्यक्ति की नवीनता, रूपक और प्रतीकात्मकता का भरपूर उपयोग किया। उनकी रचनाएँ साहित्यिक गहराई और सामाजिक यथार्थ को जोड़ने वाली कड़ी हैं। उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, विचारशील और समाज के प्रति जागरूक नागरिक तैयार करना है।अज्ञेय कि भाषा शिक्षा
प्रमुख कृतियां
कविता संग्रह:-
भग्नदूत-1933,
चिन्ता-1942,
इत्यलम्-1946,
हरी घास पर क्षण भर-1949,
बावरा अहेरी-1954,
इन्द्रधनुष रौंदे हुए ये-1957,
अरी ओ करुणा प्रभामय-1959,
आँगन के पार द्वार-1961,
कितनी नावों में कितनी बार (1967)
क्योंकि मैं उसे जानता हूँ (1970)
सागर मुद्रा (1970)
पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ (1974)
महावृक्ष के नीचे (1977)
नदी की बाँक पर छाया (1981)
प्रिज़न डेज़ एण्ड अदर पोयम्स (अंग्रेजी में,1946)।हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास, रामस्वरूप चतुर्वेदी, पृ-२८१
कहानियाँ:-
विपथगा 1937
परम्परा 1944
कोठरी की बात 1945
शरणार्थी 1948
जयदोल 1951
उपन्यास:-
शेखर एक जीवनी- प्रथम भाग(उत्थान)1941 द्वितीय भाग(संघर्ष)1944
नदी के द्वीप 1951
अपने अपने अजनबी 1961
यात्रा वृतान्त:-
अरे यायावर रहेगा याद? 1953
एक बूँद सहसा उछली 1960
निबंध संग्रह :
सबरंग
त्रिशंकु 1945
आत्मनेपद 1960
आधुनिक साहित्य: एक आधुनिक परिदृश्य आलवाल 1971
सब रंग और कुछ राग 1956
लिखी कागद कोरे 1972
आलोचना:-
त्रिशंकु 1945
आत्मनेपद 1960
भवन्ती 1971
अद्यतन 1971
संस्मरण: स्मृति लेखा
डायरियां: भवंती, अंतरा और शाश्वती।
विचार गद्य: संवत्सर
नाटक: उत्तरप्रियदर्शी
जीवनी: रामकमल राय द्वारा लिखित शिखर से सागर तक
संपादित ग्रंथ:-
आधुनिक हिन्दी साहित्य (निबन्ध संग्रह)1942,
तार सप्तक (कविता संग्रह) 1943,
दूसरा सप्तक (कविता संग्रह)1951,
तीसरा सप्तक (कविता संग्रह),
सम्पूर्ण 1959,
नये एकांकी 1952,
रूपांबरा 1960।
उनका लगभग समग्र काव्य सदानीरा (दो खंड) नाम से संकलित हुआ है तथा अन्यान्य विषयों पर लिखे गए सारे निबंध सर्जना और सन्दर्भ तथा केंद्र और परिधि नामक ग्रंथो में संकलित हुए हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के संपादन के साथ-साथ अज्ञेय ने तारसप्तक, दूसरा सप्तक और तीसरा सप्तक जैसे युगांतरकारी काव्य संकलनों का भी संपादन किया तथा पुष्करिणी और रूपांबरा जैसे मौलिक और अनूठे काव्य-संकलनों का भी। वे वत्सलनिधि से प्रकाशित आधा दर्जन निबंध-संग्रहों के भी संपादक रहे हैं। यद्यपि अज्ञेय ने कहानियॉं कम ही लिखी हैं और अपने उत्तरकालीन जीवन में तो न के बराबर ही लिखी हैं, परंतु हिन्दी कहानी को आधुनिकता की दिशा में एक नया और स्थायी मोड़ देने का श्रेय उन्हीं को प्राप्त है। यशपाल मेरी प्रिय कहानियाँ https://archive.org/details/dli.ministry.29846 २०१० राजपाल एण्ड सन्ज़ दिल्ली प्रस्तावना २ फरवरी २००९ निस्संदेह वे आधुनिक हिन्दी साहित्य के शलाका-पुरूष हैं, जिनके कारण हिन्दी साहित्य में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के बाद पुनः आधुनिक युग का प्रवर्तन हुआ।
अज्ञेय रचनावली
अज्ञेय रचनावली के १८ खंडों में उनकी समस्त रचनाओं को संग्रहित करने का प्रयास किया गया है। इसके संपादक कृष्णदत्त पालीवाल हैं। http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=777&pageno=1 अज्ञेय :: अज्ञेय रचनावली :: खंड : 1, हिंदी समय 12 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20171213010543/http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=777&pageno=1 13 दिसंबर 2017 dead
इन खंडों की सामग्री का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-
काव्य
कहानियाँ
उपन्यास
भूमिकाएँ
यात्रा-वृत्त
डायरी
निबन्ध
संस्मरण, नाटक, निबन्ध
साक्षात्कार
साक्षात्कार और पत्र
अनुवाद
पुरस्कार/सम्मान
साहित्य अकादमी 1964(आंगन के पार द्वार)
भारतीय ज्ञानपीठ 1978(कितनी नावों में कितनी बार)
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
अज्ञेय की रचनाएँ कविताकोश में
अज्ञेय अभिव्यक्ति पर
अज्ञेय अनुभूति पर
अज्ञेय लिटरेचर इन इंडिया पर
yes
श्रेणी:हिन्दी गद्यकार
श्रेणी:प्रगतिशील कवि
श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी भाषा के साहित्यकार
श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना
श्रेणी:ज्ञानपीठ सम्मानित
श्रेणी:1911 में जन्मे लोग
श्रेणी:अज्ञेय