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411 REFERENCE · Wikipedia

नगपुरी साहित्य

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नगपुरी साहित्य नगपुरी भाषा में लिखे गए काव्य, गद्य और अन्य साहित्यिक रूपों को संदर्भित करता है। नगपुरी भाषा मुख्यतः झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार के कुछ हिस्सों में बोली जाती है। इसे सदानी भाषाओं की प्रमुख भाषा माना जाता है।https://www.livehindustan.com/jharkhand/ranchi/story-seminar-on-nagpuri-language-literature-culture-and-education-9507712.html नागपुरी भाषा, साहित्य, संस्कति एवं शिक्षा विषय पर संगोष्ठी 2024-03-10 www.livehindustan.com hi 2025-09-24 इतिहास नगपुरी साहित्य की जड़ें लोकगीतों और मौखिक परंपराओं में गहरी रही हैं। नगपुरी लोकगीतों में ग्रामीण जीवन, कृषि, प्रेम, विवाह, उत्सव और सामाजिक परंपराओं का जीवंत चित्रण मिलता है। धीरे-धीरे यह परंपरा लिखित साहित्य में विकसित हुई। 19वीं और 20वीं सदी में नगपुरी साहित्य को व्यवस्थित रूप से लिखित रूप देने वाले कई कवि और लेखक सामने आए। प्रमुख लेखक गंगाराम कल्याणकर - नगपुरी भाषा के सुप्रसिद्ध कवि, जिन्हें "नगपुरी के सूर" कहा जाता है। सिद्देश्वर प्रसाद - नगपुरी गद्य और कविता में योगदान। रामदयाल मुंडा - नगपुरी और अन्य आदिवासी भाषाओं के साहित्य में योगदान। बिन्देश्वरी प्रसाद केशरी - नगपुरी नाट्य और गद्य के रचनाकार। विषयवस्तु नगपुरी साहित्य में निम्नलिखित विषय प्रमुख हैं: ग्रामीण और आदिवासी जीवन प्रकृति और पर्यावरण ऐतिहासिक घटनाएँ प्रेम और सामाजिक संबंध धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान आधुनिक विकास समकालीन दौर में नगपुरी साहित्य का विस्तार गीत, नाटक, फिल्म और अखबारों तक हुआ है। झारखंड की सांस्कृतिक संस्थाएँ और साहित्यिक संगठन नगपुरी साहित्य को संरक्षित और प्रचारित करने का कार्य कर रहे हैं। महत्व नगपुरी साहित्य सदानी क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का दर्पण है। यह न केवल क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करता है बल्कि भारतीय भाषाई विविधता में भी विशेष योगदान देता है। इधर भी देखें नगपुरी भाषा झारखंड का साहित्य सदानी भाषा परिवार संदर्भ