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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ख़

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right|230px|thumb|ख़ की ध्वनि सुनिए ख़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। हिंदी-उर्दू के कई शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे कि ख़रगोश, ख़ुश, ख़बर, ख़ैर और ख़ून। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसके उच्चारण को [x] के चिह्न से लिखा जाता है और उर्दू में इसे خ लिखा जाता है, जिस अक्षर का नाम ख़े है।3! अघोष कण्ठ्य संघर्षी ख़ को भाषाविज्ञान के नज़रिए से अघोष कण्ठ्य संघर्षी वर्ण कहा जाता है (अंग्रेजी में इसे वायसलेस वीलर फ़्रिकटिव कहते हैं)। वैदिक संस्कृत में right|230px|thumb|२०११ के अन्ना हज़ारे आन्दोलन में रामलीला मैदान में प्रयोग हुआ एक चिह्न - अंतिम पंक्ति में 'ख़ून' के 'ख़' में सही जगह लगा बिंदु देखिए 'ख़' की ध्वनि के बारे में एक ग़लत धारणा है कि इसे भारत में केवल अरबी-फ़ारसी के शब्दों की वजह से मान्यता प्राप्त है। प्राचीन वैदिक संस्कृत में 'ख़' की ध्वनि पाई जाती थी और इसे जिह्वामूलीय की श्रेणी में डाला जाता था।A practical grammar of the Sanskrit language, arranged with reference to the classical languages of Europe, for the use of English students Sir Monier Monier-Williams Clarendon Press, 1864 http://books.google.com/books?id=qRwJAAAAQAAJ ... An Ardha-visarga ... sometimes employed before k,kh and p,ph. Before the two former letters this symbol is properly called Jihva-muliya, and the organ of its enunciation said to be the root of the tongue ... 15 अगस्त 2011 https://web.archive.org/web/20150119054303/http://books.google.com/books?id=qRwJAAAAQAAJ 19 जनवरी 2015 live 'ख़' की ध्वनि को विसर्ग में ही अघोष कण्ठ्य वर्णों से पहले उच्चारित किया जाता था।Sociolinguistic perspectives: papers on language in society, 1959-1994 Charles Albert Ferguson, Thom Huebner Oxford University Press US, 1996 9780195092905 http://books.google.com/books?id=bcuIz1M0AzQC ... This weakened variant, also spelled with visarga, is described by grammarians as a weak voiceless fricative that varies in place of constriction in accordance with the following consonant: labial before /p, ph/, retroflex before /ṣ, ṭ, ṭh/, palatal before /ś, č, čh/, and velar before /k, kh/ ... पाणिनि के समय तक यह ध्वनि संस्कृत से लुप्त हो गयी और केवल एक सरल विसर्ग ही उच्चारित किया जाने लगा। उर्दू के अलावा भारत के ऑफ़िशल भाषाओं में से सिर्फ़ असमिया भाषा में ही इसका इस्तेमाल होता है। असमिया में 'स' (স), 'ष' (ষ) और 'श' (শ) का उच्चारण 'ख़' है - 'অসম' (ôxôm) - अर्थः असम 'সাধাৰণ' (xadharôn) - अर्थः 'साधारण' 'সিন্ধু' (xindhu) - अर्थः 'सिंधु' 'সত্য' (xôtyô) - अर्थः 'सत्य' 'সেনা' (xêna) - अर्थः 'सेना' [यहाँ पर 'x' का उच्चारण 'ख़' है, 'ô' का उच्चारण छोटी 'ऑ' है और असमिया में किसी भी स्वरवर्ण का दीर्घ उच्चारण नहीं होता है।] भारत की कुछ आदिवासी भाषाओं में भी यह ध्वनि अभी तक पाई जाती है, जैसे की झारखंड और बिहार की उरांव जनजाति की बोली का नाम ही कुड़ुख़ है। ग़लत उच्चारण 'ख़' की ध्वनी का उच्चारण कईं लोग ग़लती से 'ख' से मिलता-जुलता कर देते हैं। इस से कभी-कभी शब्दों का अर्थ बदल कर ग़लत अर्थ निकल आता है। कुछ उदहारण हैं - ख़ाना का अर्थ होता है कोई कमरा या घर (जैसे की ग़ुसलख़ाना, पागलख़ाना, मयख़ाना, चायख़ाना) जबकि खाना का अर्थ है कोई खाने की चीज़ (खाद्य पदार्थ) ख़ुदा का अर्थ है भगवान जबकि खुदा का अर्थ है वो जगह जहां खुदाई करी गई हो. अगर कहें "इधर भी ख़ुदा है, उधर भी ख़ुदा है" तो इसका अर्थ है "इधर भी भगवान है, उधर भी भगवान है" यानी भगवान सर्वत्र है। लेकिन अगर कहें "इधर भी खुदा है, उधर भी खुदा है" तो इसका अर्थ है के "इधर, उधर, हर जगह पर खुदाई हुई है" जिसका मतलब पहले वाक्य से बिलकुल भिन्न है। इन्हें भी देखिये वैदिक संस्कृत देवनागरी अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला ख सन्दर्भ श्रेणी:देवनागरी वर्णमाला श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना श्रेणी:संघर्षी व्यंजन