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अयन बल
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अयन बल विभिन्न छः प्रकार के बलों में से एक है। अन्य पाँच बल काल बल, चेष्टाबल, उच्च बल, दिक् बल और स्थान बल हैं।फलदीपिका - भावार्थबोधिनी http://books.google.co.in/books?id=CEY317OnpTEC गोपेश कुमार ओझा मोतीलाल बनारसीदास पब्लिकेशन्स २००१ ८२ 9788120821477 25 अक्तूबर 2014 https://web.archive.org/web/20141025122938/http://books.google.co.in/books?id=CEY317OnpTEC 25 अक्तूबर 2014 live
प्रत्येक ग्रह विषुवत रेखा के उतर या दक्षिण में स्थित होता है और अपनी स्थिति के अनुसार बल प्राप्त करता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए निकाले गये बल को अयन बल कहा जाता है। इस बल को निकालने के लिये क्रान्ति ज्ञात की जाती है। अयन बल उतरायन व दक्षियाणन पर आधारित है।
ग्रह की विषुवत रेखा से कोणीय दूरी ही क्रान्ति कहलाती है। सूर्य, मंगल, शुक्र और गुरु जब उतरायन में चलते हुए अपने अधिकतम क्रान्ति तक पहुंचते है तो इनका बल अधिकतम होता है।
इसके विपरीत दक्षिणायन में चलते हुए चन्द्र और शनि अधिकतम बल प्राप्त करते है। बुध दोनों अयनों में शक्तिशाली होता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:ज्योतिष