411 REFERENCE · Wikipedia
देवी दत्त शुक्ल
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
देवीदत्त शुक्ल (१८८८ -- २० मई १९७१) हिन्दी के साहित्यकार एवं पत्रकार थे। महावीर प्रसाद द्विवेदी के बाद सरस्वती पत्रिका के सम्पादन का गुरुतर भार सन् १९२५ से १९२७ फिर १९२९ - १९४६ तक शुक्ल जी ने ही सँभाला। शुक्ल जी ने २७ वर्षों तक सरस्वती का सम्पादन किया।हिन्दी साहित्य कोश, भाग-2, प्रकाशक- ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी, प्रधान सम्पादक- धीरेन्द्र वर्मा, प्रथम संस्करण (संवत 2020), पृष्ठ- २६५
१९४८ में उनके आंखों की शल्यचिकित्सा हुई जो दुर्भाग्यवश असफल रही। परिणामतः वे पूरी तरह दृष्टिहीन हो गये।
जीवन परिचय
देवी दत्त शुक्ल का जन्म सन् १८८८ ई॰ में उत्तर प्रदेश के बक्सर के बैसवारा क्षेत्र में हुआ था।विदग्ध-वाक् पंओ देवीदत्त शुक्त की हिन्दीधारिता (सरस्वती पत्रिका, जनवरी १९४१ अंक) वे हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेंगे। सन् १९४६ में दृष्टहीन होते हुए भी इन्होने अपने पच्चीस वर्षों के सम्पादन काल के कृतित्व का वर्णन अपनी आत्मकथा "सम्पादक के पच्चीस वर्ष" में किया, जिसकी पंक्ति-पंक्ति से कर्तव्य निष्ठा और दृढ़ संकल्प के अनेक मर्मस्पर्शी दृष्टांत प्रकाश में आ चुके हैं। इंडिया न्यूज, अंक- १८ अगस्त से २४ अगस्त २००७, पृष्ठ-४४
साहित्येतिहास-लेखक तथा निष्पक्ष विचारक अब इस बात से सहमत होने लगे हैं कि हिंदी को राजभाषा के पद पर आसीन करने वाले साधकों में पंडित देवीदत्त शुक्ल का नाम अग्रणी है। वे संस्कृतनिष्ठ हिन्दी के प्रबल समर्थक एवं 'हिन्दुस्तानी' के विरोधी थे। नवम्बर १९३६ में 'मदारी' नामक पत्रिका में 'हिंदी पर संकट' नामक पंडित शुक्ल का एक महत्वपूर्ण लेख छपा। इस निबंध में महात्मा गांधी की ओर संकेत करते हुए उन्होंने लिखा-
और तो और, जिन लोगों ने उसे राष्ट्रभाषा स्वीकार किया था, वही आज यह प्रयत्न कर रहे हैं कि 'हिंदी', 'हिंदुस्तानी' हो जाए और हिंदी वाले 'राम' को 'रहीम' और 'धर्म' को 'मजहब' लिखा करें। इस तरह वे हिंदी को 'वर्णसंकरी' भाषा बना डालना चाहते हैं।.... राजा शिवप्रसाद सितारे हिंद ने भी ऐसा ही प्रयत्न एक बार पहले किया था, परंत् बाबू हरिश्चंद्र ने उनके सारे प्रयत्नों को बेकार कर दिया, यहां तक कि उसके लिए उन्होंने अपना सर्वस्व स्वाहा कर दिया ।.. ..परंतु हिंदी आत्महत्या करने को तैयार न होगी। उसकी भी अपनी संस्कृति है । .... संसार में एक हिंदी ही ऐसी भाषा है, जो एकमात्र सर्वसाधारण के सहारे पर जीवित रही है।विदग्ध-वाक् पंओ देवीदत्त शुक्त की हिन्दीधारिता (सरस्वती पत्रिका, जनवरी १९४१ अंक)
प्रमुख कृतियाँ
शुक्ल जी हिन्दी साहित्य के श्रेष्ठ गद्य लेखक रहे हैं। शुक्ल जी ने कहानी, उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा, इतिहास तथा धर्म और दर्शन सम्बंधी पुस्तकों की रचना की है। शुक्ल जी की प्रमुख कृतियाँ हैं-
स्वाधीनता के पुजारी,
अवध के गदर का इतिहास,
सम्पादक के पचीस वर्ष,
हिन्दुओं की पोथी,
साधक का संवाद,
कालरात्रि,
क्रान्तिकारी, आदि।
इन्हें भी देखें
सरस्वती पत्रिका
सन्दर्भ
श्रेणी:ऐतिहासिक हिन्दी पत्रिकाएँ
श्रेणी:हिन्दी निबन्धकार
श्रेणी:हिन्दी पत्रकार