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फ़राह, अफ़्ग़ानिस्तान
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फ़राहFarah / ur فراه फ़राह Afghanistan 32 20 37 N 62 7 10 E अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति फ़राह प्रान्त, अफ़ग़ानिस्तान १,०९,४०९ २००४ पश्तो
thumb|240px|कुछ अमेरिकी सैनिक फ़राह में 'सिकंदर का क़िला' कहलाए जाने वाले ढाँचे के सामने
फ़राह (फ़ारसी और पश्तो: ur فراه, अंग्रेजी: Farah) पश्चिमी अफ़्ग़ानिस्तान के फ़राह प्रान्त की राजधानी है। यह शहर फ़राह नदी के किनारे स्थित है और ईरान की सीमा के काफ़ी पास है।
लोग
फ़राह के अधिकतर लोग पश्तो बोलने वाले पश्तून हैं और वे स्थानीय आबादी के ९०% हैं। इनके अलावा शहर के ७% लोग ताजिक और ३% लोग बलोच हैं।2003 National Geographic Population Map (PDF file) https://web.archive.org/web/20170912083622/http://ngm.nationalgeographic.com/ngm/0311/feature2/images/mp_download.2.pdf 12 सितंबर 2017 , Thomas Gouttierre, Center For Afghanistan Studies, University of Nebraska at Omaha; Matthew S. Baker, Stratfor
इतिहास
ईरान की सरहद के पास होने के कारण फ़राह पर उस देश का प्रभाव काफ़ी रहा है और यह उस देश के अशकानी साम्राज्य की 'आरिया' (Aria) नामक सात्रापी का एक प्रमुख शहर हुआ करता था।A manual of ancient history https://web.archive.org/web/20170203032200/https://books.google.com/books?id=-Z8NAAAAQAAJ&pg=PA553&dq=Furrah+Iran&cd=3#v=onepage&q=Furrah%20Iran&f=false 3 फ़रवरी 2017 . Clarendon, 1880 जब सिकंदर महान की यूनानी सेनाओं ने ईरान पर क़ब्ज़ा कर लिया तो यहाँ भी उसका नियंत्रण हो गया। आगे चलकर ५वीं सदी ईसवी में यह ईरान के सासानी साम्राज्य की भारत से लगने वाली पूर्वी सीमा का एक महत्वपूर्ण गढ़ था।FARAÚH https://web.archive.org/web/20080527080800/http://www.iranica.com/newsite/articles/v9f3/v9f301.html 27 मई 2008 , Daniel Balland, Ehsan Yarshater (editor), Encyclopædia Iranica, Columbia University, Accessed January 2008 इस क्षेत्र को ख़ुरासान का हिस्सा माना जाने लगा। एक-के-बाद-एक ताहिरी, सफ़्फ़ारी, सामानी, ग़ज़नवी, ग़ौरी, ख़्वारेज़्मी, इल्ख़ानी, तैमूरी, बुख़ारा की ख़ानत और सफ़्फ़ावी साम्राज्यों ने यहाँ अपना नियंत्रण जमाया। १८वीं सदी के शुरूआती दौर में यह पहले अफ़्ग़ान होतकी राजवंश और फिर दुर्रानी साम्राज्य के साम्राज्य का हिस्सा बन गया।
यहाँ मुहम्मद जौनपुरी नामक इस्लामी प्रचारक दफ़न हैं। यह सन् १४४३ में भारत में जौनपुर में पैदा हुए थे और इन्होनें स्वयं को महदी (आने वाले मसीहा) घोषित कर दिया था। यह जौनपुर से भारत, अरब और ख़ुरासान भर में प्रचार करते हुए घूमें और ६३ की उम्र पर इनका फ़राह में देहांत हो गया। इनके मानाने वालों को 'महदवी' बुलाया जाता है।
मौसम
फ़राह में गर्मियों में तापमान ४५ सेंटीग्रेड तक और सर्दियों में −५ सेंटीग्रेड तक जा सकता है, यानि गर्मी भी बहुत पड़ती है और सर्दी भी। इलाक़ा काफ़ी शुष्क है और बारिश कम पड़ती है।
इन्हें भी देखें
फ़राह प्रान्त
फ़राह नदी
पश्तून
प्राचीन ख़ुरासान
सन्दर्भ
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श्रेणी:अफ़्गानिस्तान के शहर
श्रेणी:फ़राह प्रान्त