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एकी आन्दोलन
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मई 2015
1917 ई. में भीलों व गरासियों ने मिलकर दमनकारी नीति व बेगार के विरुद्ध महाराणा को पत्र लिखा। इसका कोई परिणाम नहीं निकालता देखकर 1921 में बिजौलिया के किसान आन्दोलन से प्रभावित phada (udhapur) के भीलों ने पुनः महाराणा को शिकायत की। 1918 को राणा ने इनकी मांग मन ली।
1921में मांदडी पट्टाके भीलों ने आंदोलन पुनःशुरू किया और मोतीलाल तेजावत ने संभाला।
तेजावत ने शुरुवात झाड़ोल से की।
विधिवत रूप से मातृकुंडिया चित्तौड़ से की ।
21 मांग रखी जिसे मेवाड़ की पुकार कहते है।राणा ने 18मांगे मान ली और3 नहीं मानी।और तेजावत पर 500रुपए का इनाम रख दिया।तेजावत सिरोही चले गए।वहा भील वो गरासिया के साथ मीटिंग की।सिरोही में तिल टैक्स और आबू से अंबाजी तक रखवाली बंद कर दी।हकीम ओर हुकुम नहीं का नारा दिया।।।
निमाडा हत्याकांड 6 मार्च1922 को हुआ। स्टन के आदेश पर 1200 भील मारे गए।3 जून 1929 को गांधी जी के कहने पर खेड़ ब्रह्मा में सरेंडर किया।
मणिलाल कोठारी के कहने पर 1936 को रिहा किया।
प्रो,राहुल छावडी कोटपुतली9785857277
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1921 ई में मोतीलाल तेजावत ने इस आन्दोलन को नेतृतव प्रदान किया। इस आन्दोलन को जनजातियों में राजनितिक जागरण का प्रतिक माना जाता है। यह आन्दोलन भोमट क्षेत्र के अतिरिक्त सिरोही व गुजरात राज्यों में भी फैला।
इस आन्दोलन का कार्यक्षेत्र भोमट था इसलिए इस अन्दोलन को 'भोमट का भील आन्दोलन' भी कहते हैं।
इस अहिंसात्मक आन्दोलन का श्रीगणेश फलासियाँ गाँव में हुआ।
महात्मा गाँधी की सलाह पर 1929 में तेजावत जी ने आत्मसमर्पण कर दिया।
श्रेणी:भारत का इतिहास