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महात्मा आनन्द स्वामी
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अगस्त 2015
महात्मा आनन्द स्वामी सरस्वती (15 अक्टूबर 1882 - 24 अक्टूबर 1977) आर्य समाज के नेता एवं 'आर्य गजट' तथा 'मिलाप' आदि पत्रों के सम्पादक थे। वे अविभाजित पंजाब की पत्रकारिता के पितामह तथा संघर्षशील संन्यासी थे। उनका मूल नाम 'खुशहालचन्द खुरसंद' था।
Parichay
महात्मा आनन्द स्वामी सरस्वती का जन्म 15 अक्टूबर 1882 को पंजाब (अब पाकिस्तान) के जलालपुर जट्टा गांव में हुआ था। आर्यसमाज से प्रभावित होकर उन्होंने युवावस्था में ही अपना जीवन वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया। लाहौर में महात्मा हंसराज जी के सान्निध्य में उन्होंने 'आर्य गजट' साप्ताहिक के सम्पादकीय विभाग में प्रवेश कर पत्रकारिता क्षेत्र में पदार्पण किया। राष्ट्रीय जागरण तथा वैदिक धर्म के प्रचार के उद्देश्य से उन्होंने 13 अप्रैल 1923 को वैशाखी पर्व पर दैनिक उर्दू 'मिलाप' का प्रकाशन शुरू किया। उस समय वे खुशहालचन्द 'खुरसंद' के नाम से जाने जाते थे।
सन् 1921 में मालाबार में जब मोपला मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अमानवीय अत्याचार ढाए तब वे आर्य युवकों को साथ लेकर मालाबार पहुंचे तथा अत्याचारियों के विरुद्ध चेतना जगाई। सन् 1939 में हैदराबाद के निजाम ने जब हिन्दुओं का उत्पीड़न किया तो वे सत्याग्रही जत्था लेकर हैदराबाद पहुंचे तथा सात महीने तक निजाम की जेल में रहकर संघर्ष किया। सिंध में जब सत्यार्थ प्रकाश पर प्रतिबंध लगाया गया तब उन्होंने सिन्ध पहुंचकर संघर्ष किया। सन् 1949 में वे संन्यास ग्रहण कर 'महात्मा-आनंद स्वामी सरस्वती' बन गए। उन्होंने कीनिया, युगांडा तथा तंजानिया आदि का भ्रमण कर वैदिक धर्म का प्रचार किया।
कृतियाँ
प्रभु भक्ति,
प्रभु मिलन की राह,
उपनिषदों का संदेश,
प्रभु दर्शन,
आनन्द गायत्री-कथा,
भक्त और भगवान,
बोध कथाएं,
एक ही रास्ता आदि
उन्होंने पूरे संसार को गायत्री मंत्र की अनूठी शक्ति से परिचित कराने में सफलता प्राप्त की। 24 अक्टूबर 1977 को वे ब्राह्मलीन हो गए।
इन्हें भी देखें
स्वामी आनन्द (गुजराती लेखक एवं गांधीवादी)
बाहरी कड़ियाँ
प्रेरक था महात्मा आनंद स्वामी का व्यक्तित्व (प्रभासाक्षी)
[/https://www.krantikari.org/2012/07/anand-swamis-25-books-set.html आनंद स्वामी के 25 पुस्तकों का सेट for more deep knowledge of महात्मा आनन्द स्वामी ]
श्रेणी:आर्य समाज