411 REFERENCE · Wikipedia
खेजड़ली नरसंहार
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
खेजड़ली नरसंहार सितंबर 1730 में, खेजरी वृक्षों के एक उपवन की शांतिपूर्वक रक्षा करने के प्रयास में 363 बिश्नोई मारे गए । 363 Bishnoi Sacrifice Memorial.jpg स्मारक जोधपुर के खेजड़ली गाँव में वृक्षों की रक्षा के लिये ३६३ विश्नोई बलिदान हुए थे। उनकी स्मृति में निर्मित स्मारक ११ सितम्बर १७३० के आसपास खेजड़ली गाँव, जोधपुर, राजस्थान 26.1666654, 73.1591207 वृक्षों की कटाई का विरोध ३६३ विश्नोई लोगों की हत्या, वृक्षों की कटाई रोक दी गयी। खेजड़ली गाँव के विश्नोई समाज के लोग 25px मारवाड़ राज्य के सैनिक और कार्यकर्ता अमृता देवी विश्नोई, वयोवृद्ध विश्नोई जन गिरिधर भण्डारी कई सौ विश्नोई लोग 363 ग्रामीण विश्नोई लोग शून्य 363
खेजड़ली का नरसंहार सितंबर 1730 में राजस्थान के खेजड़ली गाँव में हुआ था। इसमें खेजरी एक पेड़ को काटने से शांतिपूर्वक बचाने की कोशिश करते हुए 363 बिश्नोई मारे गए थे। ये हत्याएं मारवाड़ के महाराजा अभय सिंह के मंत्री गिरिधर भंडारी के आदेश पर की गई थीं।
मारवाड़ के महाराजा अभय सिंह ने अपने सैनिकों को खेजरली गाँव में पेड़ काटने के लिए भेजा था ताकि एक नए महल के लिए लकड़ी उपलब्ध कराई जा सके। अमृता देवी नामक एक महिला के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। अमृता देवी ने पेड़ों को कटने से बचाने के लिए अपना सिर कटवाने के लिये तैयार हो गयीं। महाराजा के सैनिकों ने दोबारा नहीं सोचा और अमृता देवी का सिर काट दिया। उन्होंने उस दिन 350 से अधिक लोगों को मार डाला, जिनमें अमृता देवी के छोटे बच्चे भी शामिल थे।खेजड़ली नरसंहार
जब इस नरसंहार की सूचना राजा तक पहुंची तो उन्होंने तुरंत अपने सैनिकों को पीछे हटने के लिए कहा और बिश्नोई समुदाय के लोगों से माफी मांगी। इसके अलावा राजा अभय सिंह ने एक घोषणा की कि बिश्नोई गांवों के आसपास के क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई और जानवरों की हत्या नहीं होगी। पेड़ों को काटने का आदेश को वापस ले लिया गया।http://theviewspaper.net/nature-conservation-is-my-religion/ Nature Conservation is my Religion Mehra Satya Prakash 31 December 2008 The Viewspaper https://web.archive.org/web/20150602063517/http://theviewspaper.net/nature-conservation-is-my-religion/ 2 June 2015 20 April 2020
इस प्रयास का पर्यावरण की वकालत पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा और बाद में इस नरसंहार को 20वीं शताब्दी के चिपको आंदोलन के अग्रदूत के रूप में जाना जाने लगा।
सन्दर्भ
श्रेणी:पर्यावरण
श्रेणी:बिश्नोई