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अनुच्छेद 333 (भारत का संविधान)
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भारत का संविधान भाग 16 प्रत्येक जनगणना के पश्चात् ; पुनः समायोजन अनुच्छेद 334 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 332 (भारत का संविधान) भारतीय संविधान सभा भारत हिंदी संविधान 1949 प्रकाशित
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 333 राज्य की विधानसभाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय के प्रतिनिधित्व से संबंधित है।
हालाँकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा इस प्रावधान को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया गया है।
मूल पाठ
अनुच्छेद १७० में किसी बात के होते हुए भी यदि किसी राज्य के राज्यपाल की राय हो कि उस राज्य की विधान-सभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व आवश्यक है और पर्याप्त नहीं है तो उस विधान-सभा में उस समुदाय के जितने सदस्य वह समुचित समझे नाम-निर्देशित कर सकेगा।भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र लेखक:राजेन्द्र प्रसाद 1957 १२४ पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/२९१
अनुच्छेद 333 के मुख्य बिंदु:
नामांकन की शक्ति: इस अनुच्छेद के अनुसार, यदि किसी राज्य के राज्यपाल को यह लगता है कि विधानसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है, तो वह उस समुदाय के एक सदस्य को विधानसभा के लिए नामित (Nominate) कर सकता था।
उद्देश्य: इसका मूल उद्देश्य अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करना और विधायी प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना था।
संदर्भ
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