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बेसिक आक्सीजन भट्ठी
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right|thumb|300px|सन् १९५२ में बनी एलडी भट्ठी जो इस्पात निर्माण में खूब प्रयोग की गयी; अब वियेना के तकनीकी संग्रहालय में है।
इस्पात बनाने के लिए बेसिक ऑक्सीजन प्रक्रिया (basic Oxygen Steelmaking) मुख्यतः सामान्य प्रक्रिया है। बेसिक ऑक्सीजन फरनेस (या, एल.डी. कनवर्टर) अपवर्तक ब्रिक्स के साथ अन्दर की ओर नाशपाती के अकार का वेसल लाइन्ड फरनेस है। वेसल लाइनिंग टार बोन्डेड डोलोमाइट/मेगनेशिया कार्बन या अन्य अपवर्तकों का बना होता है। वेसल अपने अक्ष में 360 पर घुम सकता है। वाटर कूल्ड लान्स की सहायता से ऑक्सीजन वेसल में बह जाता है। थोड़ा झुका हुआ कनवर्टर में रद्दी माल के अधिक होने के साथ हीट बढ़ता है और कनवर्टर को सीधा (ठीक) करके गर्म धातु को मिलाया जाता है तत्पश्वात् लेंस के द्वारा घोल (बाथ) में आक्सीजन को दिया जाता है जिसमें आवश्यक फ्लक्सेज छोड़ा जाता है। कनवर्टर के उपर स्थित बंकर के द्वारा यंत्रवत और सूक्ष्म अतिरिक्त फ्लक्स मिलाया जाता है। 16-18 मिनट के लिए आक्सीजन छोड़ने के पश्चात एक नमूना लिया जाता है। थर्मोकपल का इस्तेमाल कर तापमान को मापा जाता है। टेपिंग साइड में कनवर्टर को टिलटिंग करके इस्पात को टेप्ड किया जाता है। जब धातु को टेप्ड किया जाता है तो ऐलाइंग तत्वों को शूट के द्वारा मिलाया जाता है। फ्लोटिंग स्लेग को हटाने के लिए चार्जिंग साइड की ओर कनवर्टर को टिल्टेड किया जाता है।
अभिक्रिया
प्रचालन के दौरान आक्सीजन से लोहा का आक्सीकरण करने पर लोहा ऑक्साइड और कार्बन मनोऑक्साइड हो जाता है। लोहा आक्साइड तत्काल अक्सीजन को ट्रैम्प तत्वों में अन्तरण कर देता है। लगभग 2000 डिग्री – 2500 डिग्री सेंटिग्रेड तापमान पर रिएक्शन का केन्द्र होता है। परिष्कृत प्रक्रिया के दौरान कार्बन मनोअक्साइड के बढ़ने से पिघला उष्मक के अंदर ऐजिटेशन बढ़ता है। आक्सीजन से ट्रैम्प तत्वों का रिएक्शन और रिएक्शन के केन्द्र में लोहा आक्साइड बनता है जिससे रिएक्टिव स्लेग का निर्माण होता है। प्रचालन के जारी रहने पर गलन के समय कार्बन, फासफोरस, मैंगनीज और सिलिकन का निरन्तर कमी होता है। आक्सीजन के साथ पाउडर चूना को मिलाने पर शीघ्र स्लेग निर्माण होता है जिससे फासफोरस कम हो जाता है। जब वांछित कार्बन कानटेन्ट प्राप्त किया जाता है तो परिस्कृत प्रक्रिया पूर्ण हो जाता है।
विविध अन्य ब्लोविग प्रक्रियाएँ जिनका प्रयोग किया जाता है वह निम्नवत हैं-
आक्सीजन बाटम ब्लोविंग प्रक्रिया
इस प्रक्रिया में कूल नाजल के नीचे से शुद्ध आक्सीजन को उष्मक (बाथ) में छोड़ा जाता है। अधिक गहन मिश्रण के कारण लोअर टैप से टेम टाइम में और ग्रेटर आउटपुट में प्रभाव पड़ता है।
कम्बाइनड ब्लोविंग प्रक्रिया
उपर से ऑक्सीजन का ब्लोविंग और नीचे से ऑक्सीजन का ब्लोविंग या इनर्ट गैस जैसे नाइट्रोजन या आर्गन के नीचे क्रियाशील होने पर कम्बाइनड ब्लोविंग प्रक्रिया होता है। उपर्युक्त प्रक्रियाओं से लाभ है—ब्लोविंग साइकल का गतिवर्द्धन (एक्सेलरेशन) 25 % तक, उच्च लाभ, लेस स्लेग, कनवर्टर लाइनिंग लाइफ में सुधार, विशिष्ट कमपोजिशन को प्राप्त करने में शुद्धता में वृद्धि धब्बा को कम करना। बेसिक ऑक्सीजन फरनेस में उत्पादित इस्पात निरंतर ढलाई (कास्टिंग) या इनगाट टीमिंग के लिए भेजा जाता है।
श्रेणी:धातुकर्म