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नारायण भट्ट
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भट्टनारायण
नारायण भट्ट (वैशाख शु. 14, संवत् 1588 - मृत्यु १७वीं शती के अन्त में) संस्कृत के प्रकांड पंडित तथा प्रतिभाशाली थे। इन्होंने लगभग 60 रचनाएँ संस्कृत में प्रस्तुत कीं। ब्रजभक्तिविलास, ब्रजोत्सव चंद्रिका अनेक ग्रंथों में ब्रज के स्थानों, उत्सवों आदि का विस्तार से वर्णन है। लीला सम्बन्धी एक प्रेमांकुर नाटक भी लिखा है। इन्होंने ब्रज के लुप्त तीर्थों के उद्धार, ब्रजयात्रा के प्रचार तथा भावुक भक्तों के लिए रासमंडलियों की स्थापना में बहुत प्रयास किया।
जीवन वृत्त
नारायण भट्ट दक्षिण भारत के मदुरा नगर के माधव संप्रदायी भृगुवंशी ब्राह्मण भास्कर भट्ट के पुत्र थे। माता का नाम यशोमति था तथा जन्म वैशाख शु. 14, सं. 1588 को हुआ था। 12 वर्ष की अवस्था ही में यह गृहत्यागी हो गए और यात्रा करते संवत् 1602 में ब्रज पहुँच गए। श्री चैतन्य के पार्षद गदाधर पंडित के शिष्य कृष्णदास ब्रह्मचारी राधाकुंड पर मदनमोहन जी की सेवा करते थे, जिनसे इन्होंने दीक्षा ली और वहीं रहने लगे। 12 वर्ष के अनंतर यह ब्रज के ऊँचे गाँव में जाकर रहने लगे और गृहस्थ जीवन आरंभ किया। यहाँ बल्देव जी को तथा बरसाने में लाडिली लालजी को प्रतिस्थापित किया, जिनकी सेवा अभी तक इन्हीं के वंशज तथा शिष्य करते हैं। इनका देहावसान 17वीं शती के प्राय: अन्त में वामन द्वादशी को हुआ।
इन्हें भी देखें
मेल्पत्तूर नारायण भट्टतिरि या नारायण भट्ट
श्रेणी:संस्कृत
श्रेणी:साहित्य