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411 समाचार
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पाषाण युग

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पाषाण युग इतिहास का वह काल है जब मानव का जीवन पत्थरों (संस्कृत - पाषाणः) पर अत्यधिक आश्रित था। उदाहरणार्थ पत्थरों से शिकार करना, पत्थरों की गुफाओं में शरण लेना, पत्थरों से आग पैदा करना इत्यादि। इसके तीन चरण माने जाते हैं, पुरापाषाण काल, मध्यपाषाण काल एवं नवपाषाण काल जो मानव इतिहास के आरम्भ (२५ लाख साल पूर्व) से लेकर काँस्य युग तक फैला हुआ है।http://www.nhm.ac.uk/about-us/news/2010/august/oldest-tool-use-and-meat-eating-revealed75831.html Oldest tool use and meat-eating revealed Natural History Museum 2010-08-18 web.archive.org 2021-11-15 18 अगस्त 2010 https://web.archive.org/web/20100818123718/http://www.nhm.ac.uk/about-us/news/2010/august/oldest-tool-use-and-meat-eating-revealed75831.html bot: unknown पाषाण कालीन पत्थरों के उपकरण https://web.archive.org/web/20230317083901/https://latestxp.com/pashan-kal 17 मार्च 2023 बनाने तथा उसे इस्तेमाल करने का विश्व में सबसे प्राचीनतम साक्ष्य इथोपिया और केन्या से प्राप्त हुई है संभवतः ऑस्ट्रेलोपिथेकस द्वारा सबसे पहले पत्थर के औजार बनाए गए थे, किन्तु इसका श्रेय होमो हैबिलस नामक प्रजाति को दिया जाता है| thumb|भीमबेटका स्थित पाषाण कालीन शैल चित्र पुरापाषाण काल (Paleolithic Era) पुरापाषाण काल 25_20 लाख साल से 12000 साल पूर्व तक। किंतु मानव के वंशज लगभग 4.4 मिलियन वर्ष पूर्व आ चुके थे, जो भूमि पर धीरे धीरे चलते थे और पूरी तरह से अहिंसक थे। भारत में इसके अवशेष सोहन, बेलन तथा नर्मदा नदी घाटी में प्राप्त हुए हैं। भोपाल के पास स्थित भीमबेटका नामक चित्रित गुफाएं, शैलाश्रय तथा अनेक कलाकृतियां प्राप्त हुई हैं। विशिष्ट उपकरण- हैण्ड-ऐक्स (कुल्हाड़ी) ,क्लीवर और स्क्रेपर आदि। सम्भवतया 5 लाख वर्ष पूर्व द्वितीय हिमयुग के आरंभकाल मेंं भारत में मानव अस्तित्व आया। लेकिन हाल ही में महाराष्ट्र के बोरी नामक स्थान से जिन तथ्यों की रिपोर्ट मिली जानकारी के अनुसार मानव की उपस्थिति और भी पहले 14 लाख वर्ष पूर्व मानी जा सकती है । भारत में आदिमानव पत्थर के अनगढ़ और अपरिष्कृत औजारों का इस्तेमाल करता था ।https://www.bbc.com/news/science-environment-32804177 Oldest stone tools pre-date earliest humans 2015-05-20 BBC News 2021-11-15 en-GB पुरापाषाण कालीन लोग नेग्रिटो जनजाति के थे| लोग खानाबदोश यानी घुमक्कड़ जीवन व्यतीत करते थें और जीवका का मुख्य आधार आखेट यानी की शिकार था हालाँकि आखेटक के साथ-साथ खाद्य संग्राहक होना पूरापाषाण कालhttps://latestxp.com/pashan-kal/ पाषाण काल प्रागैतिहासिक कालीन इतिहास Pashan Kal » Latestxp 2022-05-18 Latestxp hi-in 2022-05-29 17 मार्च 2023 https://web.archive.org/web/20230317083901/https://latestxp.com/pashan-kal dead की विशेषता है| मध्यपाषाण काल (Mesolithic Era) मध्यपाषाण काल 12000 साल से लेकर 10000 साल पूर्व तक। इस युग को माइक्रोलिथ (Microlith) अथवा लधुपाषाण युग भी कहा जाता हैंं।http://www.stonepages.com/news/archives/002605.html Stone Pages Archaeo News: Neolithic Vinca was a metallurgical culture 2017-09-19 web.archive.org 2021-11-15 19 सितंबर 2017 https://web.archive.org/web/20170919043337/http://www.stonepages.com/news/archives/002605.html bot: unknown(मध्यपाषाण काल) पाषाण युग और उसके बाद का मानव जीवन संक्षेप में युग कालऔजारअर्थव्यवस्था शरण स्थलसमाजधर्म पाषाण युग पुरापाषाण काल हाथ से बने अथवा प्राकृतिक वस्तुओं का हथियार/औजार के रूप में उपयोग--- भाला, कुल्हाड़ी, धनुष, तीर, सुई, गदा शिकार एवं खाद्य संग्रह अस्थाई जीवन शैली - गुफा, अस्थाई झोपड़ीयां, मुख्यता नदी एवं झील के किनारे २५-१०० लोगों का समूह (अधिकांशतः एक ही परिवार के सदस्य) मध्य पुरापाषाण काल के आसपास मृत्यु पश्चात जीवन में विश्वास के साक्ष्य कब्र एवं अन्तिम संस्कार के रूप में मिलते है। मध्यपाषाण काल (known as the Epipalaeolithic in areas not affected by the Ice Age (such as Africa)) हाथ से बने अथवा प्राकृतिक वस्तुओं का हथियार/औजार के रूप में उपयोग- धनुष, तीर, मछली के शीकार एवं भंडारण के औजार, नौका कबिले एवं परिवार समूह नवपाषाण काल आग कि खोज भी ऐसी कल में हुआ था हाथ से बने अथवा प्राकृतिक वस्तुओं का हथियार/औजार के रूप में उपयोग - चिसल (लकड़ी एवं पत्थर छीलने के लिये), खेती में प्रयुक्त होने वाले औजार, मिट्टी के बरतन, हथियार खेती, शिकार एवं खाद्य संग्रह, मछली का शिकार और पशुपालन खेतों के आस पास बसी छोटी बस्तियों से लेकर काँस्य युग के नगरों तक कबीले से लेकर काँस्य युग के राज्यों तक काँस्य युग तांबे एवं काँस्य के औजार, मिट्टी के बरतन बनाने का चाक खेती, पशुपालन, हस्तकला एवं व्यपार लौह युग लोहे के औजार शैल चित्र ऐसे ही शैल चित्र उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले के विंध्यपहाड़ी के कंदराओं में भी मिला। जिसे सीता कोहबर नामक स्थान पर 12 फरवरी 2014 को एक गुमनाम पत्रकार शिवसागर बिंद ने खोज निकाला था। जिसकी पुष्टि के लिए उ० प्र० राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारियों ने की। शैल चित्र, सीता कोहबर, जनपद मिर्ज़ापुर जनपद मुख्यालय मिर्ज़ापुर से लगभग 11-12 किलोमीटर दूर टांडा जलप्रपात से लगभग एक किलोमीटर पहले “सीता कोहबर” नामक पहाड़ी पर एक कन्दरा में प्राचीन शैल-चित्रों के अवशेष प्रकाश में आये हैं। शिव सागर बिंद, जन्संदेश टाइम्स म़िर्जा़पुर सूचना पर उ० प्र० राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी के साथ उक्त शैलाश्रय का निरीक्षण किया और शैलचित्रों को प्राचीन तथा ऐतिहासिक महत्त्व का बताया। लगभग पांच मीटर लम्बी गुफा, जिसकी छत 1.80 मीटर ऊँची तथा तीन मीटर चौड़ी है, में अनेक चित्र बने हैं। विशालकाय मानवाकृति, मृग समूह को घेर कर शिकार करते भालाधारी घुड़सवार शिकारी, हाथी, वृषभ, बिच्छू तथा अन्य पशु-पक्षियों के चित्र गहरे तथा हल्के लाल रंग से बनाये गए हैं, इनके अंकन में पूर्णतया: खनिज रंगों (हेमेटाईट को घिस कर) का प्रयोग किया गया है। इस गुफा में बने चित्रों के गहन विश्लेषण से प्रतीत होता है कि इनका अंकन तीन चरणों में किया गया है। प्रथम चरण में बने चित्र मुख्यतया: आखेट से सम्बन्धित है और गहरे लाल रंग से बनाये गए हैं, बाद में बने चित्र हल्के लाल रंग के तथा आकार में बड़े व शरीर रचना की दृष्टि से विकसित अवस्था के प्रतीत होते हैं साथ ही उन्हें प्राचीन चित्रों के उपर अध्यारोपित किया गया है। यहाँ उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र (मिर्ज़ापुर व सोनभद्र) में अब तक लगभग 250 से अधिक शैलचित्र युक्त शैलाश्रय प्रकाश में आ चुके हैं, जिनकी प्राचीनता ई० पू० 6000 से पंद्रहवी सदी ईस्वी मानी जाती है। मिर्ज़ापुर के सीता कोहबर से प्रकाश में आये शैलचित्र बनावट की दृष्टि से 1500 से 800 वर्ष प्राचीन प्रतीत होते हैं। इन क्षेत्रों में शैलचित्रों की खोज सर्वप्रथम 1880-81 ई० में जे० काकबर्न व ए० कार्लाइल ने ने किया तदोपरांत लखनऊ संग्रहालय के श्री काशी नारायण दीक्षित, श्री मनोरंजन घोष, श्री असित हालदार, मि० वद्रिक, मि० गार्डन, प्रोफ़० जी० आर० शर्मा, डॉ० आर० के० वर्मा, प्रो० पी०सी० पन्त, श्री हेमराज, डॉ० जगदीश गुप्ता, डॉ० राकेश तिवारी तथा श्री अर्जुनदास केसरी के अथक प्रयासों से अनेक नवीन शैल चित्र समय-समय पर प्रकाश में आते रहे हैं। इस क्रम में यह नवीन खोज भारतीय शैलचित्रों के अध्ययन में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी मानी जा सकती है। बाहरी कड़ियाँ Zdeněk Burian - Upper Paleolithic large color images. Zdeněk Burian - Middle Paleolithic large color images. सन्दर्भ 5. Pre historic period, Proto-historic period, Vedic period, https://web.archive.org/web/20231106092325/https://pdfsamadhan.com/ancient-history-notes-of-india-free-pdf-download/ 6 नवंबर 2023 श्रेणी:पाषाण युग श्रेणी:ऐतिहासिक युग श्रेणी:इतिहास