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411 समाचार
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लिनेन

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right|thumb|250px|किनारों के आसपास धागा की कढ़ाई के साथ एक लिनन का रूमाल thumb|right|250px|डेड सी के पास से बरामाद कोरान केव 1 से प्राप्त एक लेनिन का कपड़ा. लिनेन सन या अलसी के पौधे (लिनम यूज़ीटेटीसीमम) के रेशों से बना एक कपड़ा है। लिनेन का निर्माण श्रम-साध्य है, लेकिन जब इसके वस्त्र तैयार हो जाते हैं तो गर्मियों के मौसम में इसकी असाधारण ठंडक एवं ताजगी के लिए इसकी गुणवत्ता बढ़ जाती है। लिनेन की बुनावट वाले कपड़ों को भी मोटे तौर पर "लिनेन" के रूप में संदर्भित किया जाता है, भले ही वे कपास, सन या सन के अतिरिक्त अन्यान्य रेशों से बने हों. आम तौर पर ऐसे कपड़ों का लिनेन के अलावा अपना एक ख़ास नाम होता है; मसलन, लिनेन शैली की बुनाई वाले महीन सूती के कपड़ों को मडापोलम कहा जाता है। समूहवाचक शब्द "लिनेन्स" को अब भी अक्सर आम तौर पर कढ़े हुए एवं बुने हुए बिस्तर, स्नान, टेबल एवं रसोई के कपड़ों का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। लिनेन नाम बरकरार रखा गया है, क्योंकि परंपरागत रूप से लिनेन का प्रयोग इस तरह की बहुत सी सामग्रियों के लिए किया जाता था। अतीत में, "लिनेन्स" शब्द का प्रयोग शर्ट, कमीज़, बनियान, लिंगरी (लिनेन का समगोत्री शब्द), एवं शर्ट के खुलने योग्य कॉलरों एवं कफ़ जैसे हल्के अधोवस्त्रों के लिए हुआ करता था, जो ऐतिहासिक तौर पर विशेष रूप से लिनेन से ही बनाए जाते थे। लिनेन के कपड़े दुनिया के सबसे प्राचीन कपड़ों में से माने जाते हैं: इनका इतिहास हज़ारों वर्ष पुराना है। लगभग 8000 ई.पू. वाले भूसा, बीजों, रेशों, यार्न, एवं विभिन्न प्रकार के कपड़ों के अंश स्विस झील के आवासों में पाए गए हैं। जॉर्जिया के एक प्रागैतिहासिक गुफा में पाए गए रंगे हुए सन के रेशों से यह पता चलता है कि जंगली रेशों से बुने हुए लेनिन के कपड़े 36, 000 ई.पू. से भी पहले के हो सकते हैं।एम. बौल्टर (2009). क्लोथ्स मेक द (हु) मैन. विज्ञान,325(5946):1329.10.1126/science.325_1329a2009).30,000 वर्षीय वन्य सन फाइबर. विज्ञान, 325(5946): 1359. 10.1126/science.1175404सहायक सामग्री ऑनलाइन प्राचीन मिस्र में लिनेन को कभी-कभी मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। मिस्र की ममियों को लिनेन में लपेटा जाता था, क्योंकि इसे प्रकाश एवं पवित्रता के प्रतीक तथा संपदा के प्रदर्शन के रूप में माना जाता था। इनमें से हाथ से काते गए धागों वाले कुछ वस्त्र उनके समय के हिसाब से तो ठीक थे, लेकिन आधुनिक लिनेन की तुलना में मोटे थे।द नैचुरल हिस्ट्री ऑफ़ द बाइबल, थाडेस मैसन हैरिस पृष्ठ 135 https://web.archive.org/web/20121114032829/http://books.google.co.uk/books?id=NtYGAAAAQAAJ&pg=PA135&dq=Egyptian+mummies+were+wrapped+in+linen+very+fine&client=firefox-a 14 नवंबर 2012 मौजूदा समय में लिनेन आमतौर पर एक महंगा कपड़ा है एवं अपेक्षाकृत रूप से कम निर्मित होता है। इसमें कपास एवं अन्यान्य प्राकृतिक रेशों जैसा एक लंबा "रेशा" (फाइबर की लम्बाई वाला) होता है।कपड़ा, सारा जे. कडॉल्फ़ और एन्ना एल. लैंगफोर्ड द्वारा नौवीं संस्करण. अपर सैडल रिवर, एनजे: प्रेंटिस हॉल लिनेन से एप्रन, बैग, तौलिये (तैराकी, स्नान, समुद्र-तट, शरीर एवं धुलने योग्य तौलिये), रुमाल, चादर, मेज़पोश, रनर, कुर्सीपोश, पुरुष एवं महिला परिधान आदि बहुत से उत्पाद बनते हैं। सन फाइबर विवरण लिनेन को एक छालयुक्त फाइबर कहा जाता है। सन फाइबर की लम्बाई तकरीबन 25 से 125 सेंटीमीटर (18 से 55 इंच) तथा उसका व्यास औसतन 12-16 माइक्रोमीटर होता है। इनके दो किस्म हैं : छोटे-छोटे फाइबरों को मोटे कपड़े बनाने तथा लम्बी धारी वाले फाइबरों को महीन कपड़े बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। सन के फाइबरों को आम तौर पर उनके "गांठों" से पहचाना जाता है, जो कपड़े के लचीलेपन एवं बनावट की शोभा बढ़ाते हैं।https://www.bombayshirts.com/how-to-select-a-custom-shirt-fabric कैसे चुने एक शर्ट कपड़ा बॉम्बे शर्ट कंपनी https://web.archive.org/web/20190117143118/https://www.bombayshirts.com/how-to-select-a-custom-shirt-fabric 17 जनवरी 2019 dead लिनेन फाइबर के क्रॉस-सेक्शन अनियमित पॉलीगोनल आकार में बने होते हैं, जो कपड़े की मोटी बुनावट में योगदान देते हैं।वर्गीकरण एवं वस्त्र विश्लेषण: करेन एल. लाबट, पीएच.डी. और कैरोल जे. सलुस्सो द्वारा एक हैंडबुक, पीएच.ए. मिनेसोटा का विश्वविद्यालय, 2003 विशेषताएं अवशोषण की उच्च क्षमतायुक्त एवं गर्मी के सुचालक लिनेन कपड़े छूने पर ठंडे महसूस होते हैं। कपास से दो-तीन गुना अधिक मज़बूती वाला लिनेन वनस्पति फाइबरों में सबसे मज़बूत फाइबरों में शुमार है। ये नर्म होते हैं, जिससे तैयार होने के बाद कपड़े रोएं-मुक्त रहते हैं तथा धुलने के बाद दिनोंदिन नर्म होते जाते हैं। बहरहाल, कपड़े तह करते वक़्त एक ही स्थान पर लगातार परत बैठाने पर लिनेन के धागे टूट भी सकते हैं। ये टूटन कॉलरों, सिलाई एवं अन्यान्य जगहों पर दिख सकती हैं, जिनपर धोने के बाद इस्त्री बैठाकर तह लगाया गया हो. लिनेन का लचीलापन बेहद कमज़ोर होता है एवं यह सहज रूप से सीधा नहीं होता, इसके आसानी से सिकुड़ जाने की यही वजह है। लिनेन के कपड़ों में एक बेहद प्राकृतिक चमक होती है; आइवरी, कोरा, टैन, या भूरा आदि उनके प्राकृतिक रंग हैं। शुद्ध श्वेत लिनेन भारी ब्लीचिंग के बाद तैयार किये जाते हैं। आम तौर पर कुरकुरी और बुनावट वाले लिनेन की एक मोटी और पतली बनावट होती है, लेकिन ये सख्त और खुरदुरे से लेकर नर्म और मुलायम हो सकते हैं। ठीक से तैयार होने पर, लिनेन के कपड़ो में जल्दी से पानी को सोखने की तथा उसे बाहर निकालने की क्षमता होती हैं। ये बिना नमी महसूस किये 20% तक आर्द्रता सोख सकते है।September 2007 अशुद्धताओं से मुक्त हो जाने पर लिनेन की अवशोषण की क्षमता बढ़ जाती है एवं यह त्वचा से पसीने को जल्दी सोख लेता है। लिनेन एक सख्त कपड़ा है एवं यह त्वचा से चिपकता नहीं है; जब यह लहराता है तो सूखकर ठंडा हो जाता है, ताकि त्वचा लगातार एक शीतल सतह के संपर्क में रहे. यह बेहद टिकाऊ, मज़बूत कपड़ा है तथा सूखी अवस्था के बजाय गीली अवस्था में मज़बूत रहने वाले कुछेक कपड़ों में से एक है। इसके रेशे खिंचते नहीं हैं तथा घिस कर नष्ट भी नहीं होते. बहरहाल, चूंकि लेनिन के रेशों में लचीलापन बहुत कम होता है, अतः यदि बारम्बार एक ही स्थान पर इस्त्री कर तह लगाया जाय तो अंततः लिनेन के रेशे टूट सकते हैं। फफूंद, पसीना, एवं ब्लीच भी कपड़े को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन यह पतंगों एवं कीटों का प्रतिरोधी है। लिनेन की देखभाल करना अपेक्षाकृत रूप से आसान है, चूंकि यह धूल एवं धब्बों का प्रतिरोधी है, इसमें रोएं या उघरने की प्रवृत्ति नहीं है तथा इन्हें ड्राई क्लीन किया जा सकता है, मशीन से धोया जा सकता है तथा भाप से भी साफ़ किया जा सकता है। यह उच्च तापमान को झेल सकता है तथा इसमें बहुत ही हल्की-फुल्की आरंभिक सिकुड़न होती है। लिनेन को लटका कर बहुत ज्यादा नहीं सुखाना चाहिए: इसपर गीली अवस्था में अधिक आसानी से इस्त्री की जा सकती है। लिनेन बड़ी आसानी से सिकुड़ते है, अतः लिनेन के कुछ औपचारिक परिधानों में अक्सर इस्त्री करनी पड़ती है ताकि उसकी नरमी और चिकनाई बनी रहे. फिर भी, शिकन पड़ने की इस प्रवृत्ति को अक्सर कपड़े की विशिष्ट "शोभा" माना जाता है तथा बहुत से आधुनिक लिनेन परिधान इस तरीके से डिजाइन किये जाते हैं कि उन्हें हैंगर पर लटकाकर सुखाया जा सके तथा इस्त्री के प्रयोजन के बिना ही पहना जा सके. समकालीन लिनेन धागे से अक्सर जुड़ने वाली एक प्रवृत्ति इसमें "गांठों" की उपस्थिति है, जो पूरे कपड़े में बेतरतीबी से मौजूद रहते हैं। हालांकि, दरअसल ये गांठें निम्न गुणवत्ता के कारण होने वाले दोष हैं। बेहतरीन लिनेन में बेहद अनुरूप व्यास वाले धागे होते हैं, जिनमें कोई गांठ नहीं होती. माप थोक लिनेन धागों का मानक माप ली है, जो लिनेन के एक पाउंड में गज की संख्या है जिसे 300 से विभाजित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर 1 ली के आकार वाला एक यार्न 300 गज़ प्रति पाउंड देगा। रुमाल आदि में इस्तेमाल किये जाने वाले महीन गज़ 40 ली के हो सकते हैं एवं प्रति पाउंड 40X300 = 12,000 यार्ड देगा। यह एक विशिष्ट लम्बाई है अतः लिनेन के महीनपन का एक अप्रत्यक्ष मापदंड है अर्थात लम्बाई की संख्या प्रति ईकाई की यूनिट है। इसका प्रतीक-चिह्न है नेल.(' 3)''' महाद्वीपीय यूरोप में अधिक सामान्यतः मैट्रिक प्रणाली, एनएम (Nm) का प्रयोग किया जाता है। यह प्रति किलोग्राम 1,000 मीटर लम्बाई की संख्या है। चीन में अंग्रेजी कपास प्रणाली ईकाई एनईसी (NeC) अधिक प्रचलित है। यह एक पाउंड में 840 यार्ड लम्बाई की एक संख्या है। उत्पादन विधि thumb|left|सन प्लांट के विवरण, जहां से लेनिन के फाइबर्स प्राप्त होते हैं thumb|right|बेल्जियम में यांत्रिक सन की कटाई.बाईं ओर, सन जो कटाई के लिए पड़ा हुआ है। तैयार लिनेन उत्पाद की गुणवत्ता अक्सर उपज की अवस्थाओं एवं कटाई की तकनीक पर निर्भर है। यथासंभव लम्बे रेशों की उत्पत्ति के लिए सन को या तो पूरे पौधे को उखाड़ते हुए हाथ से काटा जाता है या डंठल को जड़ के एकदम पास से काटा जाता है। फसल कटाई के उपरान्त बीजों को "रिप्लिंग" नामक एक यंत्रीकृत प्रक्रिया के माध्यम से अथवा सूप से फटक कर हटाया जाता है। इसके बाद डंठल से रेशों को अलग किया जाता है। इसे अपगलन के द्वारा अलग किया जता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें रेशों को जोड़ कर रखने वाले लसे को ढ़ीला करने के लिए बैक्टेरिया का इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक अपगलन प्रक्रिया टंकियों एवं तालाबों में अथवा सीधे खेतों में की जाती है। रासायनिक अपगलन की विधियां भी हैं; ये द्रुत होती हैं लेकिन ये पर्यावरण तथा स्वयं रेशों के लिए भी बहुत हानिकारक होती हैं। अपगलन के उपरान्त डंठल कुटाई के लिए तैयार हो जाता है, जिसे अगस्त एवं दिसंबर में करते हैं। दो धातु रोलरों के बीच कुचल कर कुटाई करने से डंठल का लकड़ी वाला अंश निकल जाता है, ताकि डंठल के हिस्सों को अलग-अलग किया जा सके. रेशे अलग कर दिए जाते हैं तथा अलसी, shive, तथा पटसन आदि जैसे अन्यान्य हिस्सों को दूसरे कामों में लगाने के लिए अलग रख दिया जाता है। फिर रेशों के सफाई की जाती है: छोटे रेशों को सुतली की कंघी से "कंघी" कर अलग किया जाता है और सन के सिर्फ लम्बे, नर्म रेशों को अलग छोड़ दिया जाता है। रेशों को अलग तथा संसाधित करने के बाद उन्हें कात कर धागा बना कर बुना जाता है या लिनेन के कपड़ों में बुना जाता है। उसके बाद इन कपड़ों को ब्लीच, रंग किया जाता है एवं उनपर छपाई की जाती है अथवा कुछ तरीकों एवं परतों से तैयार किया जाता है। एक वैकल्पिक उत्पादन विधि को "सूतीकरण" के नाम से जाना जाता है, जो त्वरित एवं कम उपकरणों वाला होता है। सन के डंठलों को परंपरागत कपास यंत्रों के इस्तेमाल से संसाधित किया जाता है, तैयार रेशों में अक्सर लिनेन की विशेषताएं ख़त्म हो जाती हैं। इन्हें भी देखें: हस्त संसाधित सन उत्पादक सन दुनिया के कई हिस्सों में उपजाया जाता है, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले सन मुख्य रूप से पश्चिमी यूरोप में उपजाए जाते हैं। बहुत हाल के वर्षों में थोक लिनेन उत्पादन पूर्वी यूरोप तथा चीन में भी चला आया है, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले कपड़े अब भी आयरलैंड, इटली एवं बेल्जियम के आला उत्पादकों तक सीमित है। यह पोलैंड, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क, लिथुआनिया, लातिवा, नीदरलैंड, इटली, स्पेन, स्विटज़रलैंड, ब्रिटेन एवं भारत के कुछ हिस्सों में भी उपजाया जाता है। असबाब बाज़ार के लिए उच्च गुणवत्ता वाले लिनेन के कपड़ों का उत्पादन अब अमेरिका में होता है। प्रयोग पिछले 30 वर्षों में लिनेन के प्रयोग में नाटकीय बदलाव आया है। 1990 के दशक में तकरीबन 70% लिनेन उत्पादन वस्त्र उद्योग के लिए होता था, जबकि 1970 के दशक में तकरीबन मात्र 5% ही फैशन परिधानों के लिए इस्तेमाल होते थे। लिनेन का प्रयोग चादरों एवं स्नान वस्त्रों (मेज़पोश, तश्तरी तौलिये, चादरें आदि), गृह एवं वाणिज्यिक सज्जा सामग्रियों (वॉलपेपर, वॉल कवरिंग, असबाब, पर्दे आदि), परिधान सामग्रियों (सलवार, वस्त्र, स्कर्ट, शर्ट आदि) से लेकर औद्योगिक उत्पादों (सामानों, कैनवस, सिलाई का सूता आदि) तक के लिए होता है। यह कभी शिकारी जूतों (लोफरों) के ऊपरी हिस्से को हाथ से सिलने के लिए उपयोग में लाया जाता था, लेकिन अब इसके प्रयोग का स्थान रसायनिक कपड़ों ने ले लिया है। 20वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के अधिकतम हिस्से में लिनेन रुमाल का इस्त्री कर तह लगाया हुआ किनारा किसी सजे-संवरे पुरुष के परिधान की मानक शोभा हुआ करता था। हाल में शोधकर्ता कपास/सन के एक मिश्रण पर काम कर रहे हैं ताकि एक ऐसे नए धागे का निर्माण किया जा सके जो गर्म एवं आर्द्र मौसम में सूती कपड़े के अहसास को और बेहतर बना सके."सन फाइबर ऑफर्स कॉटन कुल कम्फर्ट", नवंबर 2005 कृषि अनुसंधान पत्रिका के अंक लिनेन के कपड़े तैल-चित्रों के लिए एक पसंदीदा पारंपरिक चयन रहे हैं। अमेरिका में लिनेन अधिक महंगा होने के कारण कपास का प्रयोग अधिक लोकप्रिय है। लिनेन का प्रयोग केवल पेशेवर चित्रकार ही करते हैं। हालांकि यूरोप में कला दुकानों में आम तौर पर लिनेन एक मात्र उपलब्ध कपड़ा हुआ करता है। लिनेन मज़बूत, टिकाऊ एवं अभिलेखीय अखंडता वाला होने के कारण अधिक पसंदीदा होता है। लिनेन को बेकर कारीगरों द्वारा भी खूब इस्तेमाल में लाया जाता है। काउच के रूप में परिचित सन का कपड़ा बेक करने से ठीक पहले आटे के गोले को पकड़ने के काम में लाया जाता है। काउच को आटे में खूब लपेटा जाता है, जिसे कपड़े के पोरों में मला जाता है। इसके बाद आकार वाला आटे का गोला काउच पर रखा जाता है। आटे में लिपटा काउच आटे के गोले को पकड़ने के लिए एक "गैर चिपकाऊ" सतह बनाता है। उसके बाद काउच में चोटियां बनाई जाती हैं ताकि आटे के गोले को फैलने से रोका जा सके. यह /\o/\o/\o/\o/\ जैसा दिखता है, जिसमें "o" आटे का गोला है एवं /\/\/\/\ तह किया हुआ काउच है। पहले लिनेन क़िताबों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था (जिसका एकमात्र जीवित उदाहरण लिबर लिंटीअस है). मध्य युग में इसकी मजबूती के कारण लिनेन को ढालों एवं कवचों (गलही आदि की तरह इस्तेमाल के लिए) के लिए इस्तेमाल किया जाता था, लगभग उसी तरह जैसे शास्त्रीय पुरातनता एवं यूनानी ग्रीस में लिनेन का प्रयोग शस्त्र-सज्जित पैदल सैनिकों के कवच बनाने में किया जाता था। गीली अवस्था में इसकी मजबूती के कारण भी, हाथों से पसीने की नमी सोख लेने की क्षमता की वजह से आयरिश लिनेन पूल/बिलियर्ड संकेतों को लपेटने के काम में लाया जाता था। लिनेन से बने कागज़ बेहद मज़बूत एवं कुरकुरे हो सकते हैं। इसी वजह से अमेरिका और बहुत से अन्य देश अपनी मुद्राएं 25% लिनेन एवं 75% कपास से बने कागज़ पर मुद्रित करते हैं। इतिहास August 2009 प्राचीन काल में मिस्र के लोगों द्वारा ममी बनाने के लिए लिनेन का प्रयोग किया जाता था। मिस्र के लोग लिनेन का इस्तेमाल कफ़न के रूप में करते थे। इसके अलावा, पादरी केवल लिनेन से बने वस्त्र ही धारण करते थे एवं भक्तों को मंदिर में तभी प्रवेश करने दिया जाता था, यदि उन्होंने लिनेन का वस्त्र पहन रखा हो. शताब्दियों से लिनेन का प्रयोग मेज़पोशों, चादरों एवं परिधानों के लिए होता रहा है। लिनेन की खासियत धागों के साथ काम करने की कठिनाई एवं उसके निर्माण में लगने वाले समय से पैदा होती है (सन को उपजाना अपने आप में एक बेहद मुश्किल काम है). सन के धागे लोचदार नहीं होते, अतः धागों को टूटने देने बिना बुनाई करना मुश्किल है। अतः इसका विनिर्माण कपास के मुक़ाबले अधिक महंगा है। द लिविंग लिनेन प्रोजेक्ट की स्थापना 1995 में आयरिश लिनेन उद्योग के मौखिक अभिलेख के ज्ञान के रूप में हुई, जो अल्स्टर में इस उद्योग में पहले काम कर चुके कुछ लोगों के बीच अब भी उपलब्ध है। आयरलैंड में लिनेन का एक लम्बा इतिहास है। 36,000 बी.पी.(B.P.) में जॉर्जिया की एक गुफा में मृत सन के रेशों की खोज से यह पता चलता है कि लोग प्राचीन काल से ही लिनेन की तरह के कपड़े बनाने के लिए जंगली सन के रेशों का इस्तेमाल करते रहे हैं।बौल्टर एम. (2009). क्लोथ्स मेक द (हु) मैन. 10.1126/science.325_1329aविज्ञान,325(5946):1329.क्वावाडज़े ई, बार-योसेफ ओ, बेल्फर-कोहेन ए, बोरेट्टो ई, जकेली एन, मत्स्केविच जेड, मेषवेलिअनी टी. (2009).30,000 वर्षीय वन्य सन फाइबर. विज्ञान, 325(5946):1359. 10.1126/science.1175404सहायक सामग्री ऑनलाइन पुजारियों के वस्त्रों के लिए लिनेन का इस्तेमाल केवल इजराइलियों तक ही सीमित नहीं था। ईसा के जन्म के बाद सौ वर्ष तक जीवित रहने वाले प्लूटार्च ने लिखा है कि आइसिस के पुजारी इसकी पवित्रता के कारण लिनेन धारण करते थे। दिसंबर 2006 में अमेरिका की आम सभा ने 2009 को प्राकृतिक रेशों का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया ताकि लिनेन एवं अन्यान्य प्राकृतिक रेशों की प्रोफाइल को बढ़ावा दिया जा सके. पुरातनता 1881 में जब 1213 ई.पू. मरे फ़राओ रैमसेस द्वितीय की क़ब्र की खोज हुई, तो लगभग 3000 वर्षों बाद भी लिनेन का लपेटन सटीक संरक्षण की अवस्था में मिला था। बेलफास्ट पुस्तकालय में पुजारी एमोन की पुत्री "काबुली" की एक ममी संरक्षित की हुई है, जिसकी मौत 2,500 वर्ष पूर्व हुई थी। इस ममी के ऊपर का लिनेन अब भी बिलकुल सही अवस्था में है। जब तुतानकामेन की कब्र को खोला गया, तो लिनेन के परदे बरकरार पाए गए थे। प्राचीनतम लिनेन उद्योग thumb|रोमन साम्राज्य भर में 3 ग्रेड के लिए कीमतों में दिखता फतवा प्रभावशाली बाथ्स 4सदी की अधिकतम कीमतें दिखाते हुए पुराने दिनों में, लगभग हर देश में प्रत्येक परिवार द्वारा सन की खेती की जाती थी एवं अपने उपयोग के लिए उसकी बुनाई की जाती थी; लेकिन किसी स्थापित लिनेन उद्योग का प्राचीनतम रिकॉर्ड मिस्र का 4,000 वर्ष पुराना है।May 2010 लिनेन उद्योग का प्राचीनतम लिखित प्रलेख पिलोस, ग्रीस के लिनियर बी (B) गोलियों से मिलता है जहां लिनेन को एक संकेत चिह्न के रूप में दर्शाया गया है एवं "री-नो" (ग्रीक:λίνον, लिनोन) के रूप में भी लिखा गया है एवं महिला लिनेन कर्मियों को "री-ने-जा" (λίνεια, लिनिया) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।http://www3.lu.se/klass/textiles/throughsociety.html#rouge सन और लिनेन टेक्स्टाइल्स इन द म्य्सनियन पलटियल इकॉनोमी 11 अगस्त 2010 https://web.archive.org/web/20080411124925/http://www3.lu.se/klass/textiles/throughsociety.html#rouge 11 अप्रैल 2008 dead Links.jstor.org फोनेशिया वालों ने, जिन्होंने कॉर्नवॉल के टिन खानों के विकास के अलावा अपनी वाणिज्यिक उड़ानों द्वारा भूमध्य के लोगों के लिए वाणिज्य के नए अवसरों के रास्ते प्रशस्त किये, सन उपजाना और आम युग से पहले आयरलैंड में लिनेन बनाना शुरू किया, लेकिन एक प्रतिष्ठित उद्योग की स्थापना के विरुद्ध उन प्रारंभिक दिनों भी एरिन में प्रचलित आतंरिक मतभेद शुरू हो गए, एवं बारहवीं शताब्दी तक हमें व्यवस्थित सन उत्पादन के किसी निश्चित प्रयास का अभिलेख प्राप्त नहीं होता. 1685 ई. में जब नेंटस का फतवा वापस ले लिया गया, तो देश से भाग गए बहुत से हुगूएनौट्स ब्रिटिश द्वीपों में बस गए एवं लुईस क्रोमेलिन उन्हीं में से एक थे, जिनकी पैदाइश एवं परवरिश कैमब्रेई शहर में महीन लिनेन बुनकर के रूप में हुई थी। वे अल्स्टर चले गए और अंततः बेलफास्ट से तकरीबन दस मील दूर अवस्थित एक छोटे से शहर लिस्बर्न में बस गए। समूचे इतिहास में स्वयं बेलफास्ट लिनेन उत्पादन का संभवतः सबसे विख्यात केंद्र है। विक्टोरिया युग में दुनिया भर का ज़्यादातर लिनेन इसी शहर में उत्पादित होता था, जिससे इसका नाम लिनेनपोलिस पड़ गया। परवर्ती युद्ध के दौरान कैमब्रेई सबसे बेताब लड़ाइयों के केन्द्रों में से एक रूप में प्रसिद्ध हुआ। "कैमब्रिक" नाम इसी शहर से व्युत्पन्न हुआ है। हालांकि अल्स्टर में लिनेन उद्योग पहले से ही स्थापित हो चुका था, लुईस क्रोमेलिन को बुनाई में सुधार करने का मौका मिला एवं उनकी कोशिशें इतनी कामयाब हुईं कि उन्हें सरकार द्वारा इस उद्योग को लिस्बर्न एवं इसके आसपास के क्षेत्रों के सीमित दायरे से परे और अधिक बड़े पैमाने पर विकसित करने के लिए नियुक्त किया गया। उनके अच्छे काम के सीधे नतीजे के रूप में वर्ष 1711 में आयरलैंड के लिनेन निर्माताओं के न्यासी बोर्ड की विधिसम्मत स्थापना हुई. धर्म यहूदी धर्म में किन्ही दो कपड़ों की एक साथ बुनाई को लेकर विद्यमान एकमात्र कानून लिनेन और ऊन के मिश्रण के सम्बन्ध में ही है। इस मिश्रण को शाटनेज़ कहा जाता है और सख्त हिदायत है "तुम मिलावटी वस्तु न धारण करो, बल्कि ऊन और लिनेन को साथ में धारण करो" एवं,"'...दो प्रकार की मिलावटी चीज़ धारण कर भी वहां न आओ.'"Deuteronomy 22:11 HELeviticus 19:19 HE स्वयं टोराह में भी इसकी कोई व्याख्या नहीं है एवं इसे चुकिम नामक कानून के एक प्रकार के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसे समझना मानवीय योग्यता से परे की बात है।शमुएल हिमेल्स्टिन द्वारा द जेविश प्राइमर, न्यूयॉर्क, एनवाई: फ़ाइल पर तथ्य 1990. जोसेफस ने कहा है कि इस वर्जन का कारण सांसारिक लोगों को पुजारियों के पहनावे को धारण करने से रोकना था। जबकि मैमोनाइड्स के अनुसार इसका कारण परधर्मावलम्बी पुजारियों द्वारा ऐसे मिलावटी परिधानों को पहनना था।इट्ज़ हईम पृष्ठ 1118गाइड टू द परप्लेक्स्ड 3:37 कुछ दूसरे लोग वर्णन करते हैं कि भगवान सदैव ऐसी विषम प्रकार की वस्तुओं को मिलाने से मना करते हैं, जो भगवान द्वारा नहीं बनाए गए। इस मत के अनुसार पशु एवं सब्जियों के रेशों को मिलाना वैसा ही है, जैसे दो भिन्न प्रकार के पशुओं को एक साथ जोता जा रहा हो. एवं यह कि इस तरह के आदेश व्यावहारिक के साथ-साथ अन्योक्ति-संबंधी उद्देश्य भी पूरे करते हैं। यहां संभवतः पुजारीनुमा परिधान को पहनने से रोका जा रहा है, जो गर्म मौसम में असुविधाजनक (या अत्यधिक पसीने वाले) हो सकते हैं।जमिएसन, फॉसेट, ब्राउन कमेंटरी, एलवी. 19:19 लिनेन का उल्लेख बाइबल के 31वें कहावत के उस अंश में भी है, जहां एक महान पत्नी का वर्णन किया गया है। 31:22 कहावत में लिखा है, "वह अपना बिस्तर बनाती है; वह बैगनी रंग वाले महीन लिनेन का वस्त्र पहने हुए है।" व्युत्पत्ति लिनेन शब्द की व्युत्पत्ति सन के पौधे के लिए प्रयुक्त लैटिन शब्द लिनम तथा पूर्ववर्ती ग्रीक लिनौन शब्द से हुई है। इस शब्द के इतिहास ने कई अन्य शब्दों को जन्म दिया है: लाइन (Line) शब्द एक सीधी रेखा बनाने के लिए लिनेन धागे के इस्तेमाल से व्युत्पन्न हुआ है। लिनिमेंट (Liniment) शब्द सन के बीजों के महीन लेप के कारण बना, जो मांसपेशियों में दर्द से राहत के लिए त्वचा पर मला जाता है। लाइनिंग (Lining) शब्द ऊन एवं चमड़े के वस्त्रों में अस्तर डालने के लिए अक्सर होने वाले लिनेन के प्रयोग के कारण बना. लिंगरी (Lingerie) फ्रांसीसी भाषा से आयातित शब्द है, जो लिनेन से बने अधोवस्त्रों के लिए प्रयुक्त होता है। लिनसीड तेल (Linseed) सन के बीजों से निकलने वाला एक तेल. लिनोलियम (Linoleum), अलसी के तेल एवं अन्य सामग्रियों से बना एक गलीचा। इसके अलावा, हल्के उज्जवल सुनहरे बालों वाली बाला के लिए प्रयुक्त अंग्रेज़ी का शब्द फ्लैक्सेन-हेयर्ड'' (flaxen-haired) कच्चे सन के रेशों से उसकी तुलना से बना है। बाहरी कड़ियाँ Ars.usda.gov लिविंग लिनेन आर्काइव - 20वीं सदी में लिनेन उद्योग आयरिश एक मौखिक में के संग्रह का काम किया जो लोग नाभिक है। सन से लिनन बनाना https://web.archive.org/web/20131122034014/http://www.deliberatelife.com/index.php?option=com_content&task=view&id=163&Itemid=70 22 नवंबर 2013 आयरिश लिनन का इतिहास आयरिश लिनेन - आयरलैंड के फैब्रिक सन्दर्भ श्रेणी:फाइबर पौधें श्रेणी:वोवेन फैब्रिक्स