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411 समाचार
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जिलिया

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जून 2016 जिलिया गढ़ राजस्थान के नागौर जिले में स्थित एक स्थान है। यह मारोठ (गौड़ावाटी) के पाँचमहलों की पाटवी रियासत थी, जिसके तीन आधिकारिक नाम थे — झिलिया, अभयपुरा और मारोठ (महारोठ, महाराष्ट्र, मरुराष्ट्रकोट)। इसका राजघराना मीरा बाई के चचेरे भ्राता मेड़ता के राव जयमल के वंशज हैं। http://books.google.co.in/books?ei=BCPZU4rdHYfHuASfmYCYAQ&id=eEobAAAAIAAJ&dq=गौडों Rājasthāna ke rājagharānoṃ kā saṃskr̥tika adhyayana Rāghavendrasiṃha Manohara Pañcaśīla Prakāśana, 1991 30 जुलाई 2014 http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj005.htm राजस्थानी कला : इतिहास का पूरक साधन इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर दि आर्ट्स 2003 28 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20130611102725/http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj005.htm 11 जून 2013 dead http://members.iinet.net.au/~royalty/ips/j/jiliya.html मारोठ का मेड़तिया राजवंश यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेलबोर्न, ऑस्ट्रेलिया 2007 29 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20131224203513/http://members.iinet.net.au/~royalty/ips/j/jiliya.html 24 दिसंबर 2013 dead नामोत्पत्ति जिलिया जिलिया रियासत के तीन आधिकारिक नाम थे — मारोठ, जिलिया और अभयपुरा। मारवाड़ी भाषा में झिलिया का अर्थ है — शोभित होना। जयपुर में स्थित झिलाय इससे मिलता–जुलता नाम है। संभवतः जिलिया नाम की उत्पत्ति यहाँ स्थित कालूसर नामक एक झील के कारण "झिलिया" नाम से हुई है। Jiliya Gram Panchayat http://jiliya.panchayatsofindia.com/ 2014-07-28 Panchayats of India, Nagaur District, Rajasthan, भारत. 2014 https://web.archive.org/web/20140808052045/http://jiliya.panchayatsofindia.com/ 8 अगस्त 2014 dead अभयपुरा अभयपुरा नामक ग्राम मारोठ से दो कोस दक्षिण में है। यह नाम जोधपुर महाराजा अभयसिंह के कारण पड़ा। http://books.google.co.in/books?ei=GvLYU_jlHoPz8QWr_IGAAw&id=BkxuAAAAMAAJ&dq=%221781+1806%22 Rājasthāna ke abhilekha: Māravāṛa ke sandarbha meṃ, Volume 2, Page 438 Govindalāla Śrīmālī, Study of the inscriptions of Jodhpur, Princely State, as a source of history of the place. Mahārājā Mānasiṃha Pustaka Prakāśa, 2000 30 जुलाई 2014 मारोठ १४००-१४१० ईस्वी में नयचन्द्र सूरि ने अपनी पुस्तक 'हम्मीर महाकाव्य' में मारोठ को 'महाराष्ट्र नगर' लिखा है। मारोठ का यह संस्कृत निष्ट नाम अठारहवीं शती तक की पुस्तकों और लेखों में मिलता है। अपभ्रंश में इसे महारोठ (मरुकोट्ट) लिखा गया है। चौदहवीं शताब्दी के किसी कालखंड गौड़ों ने यह क्षेत्र दहियों से छीन लिया। http://books.google.co.in/books?ei=2hzZU9LlCpOWuATBz4GYBA&id=0q0NtMKHJ1IC&dq=मारोठ Rāva Śekhā: Śekhāvāṭī-saṅgha tathā Śekhāvata vaṁśa ke pravarttaka Rāva Śekhā kā jīvana-vr̥tta Surajanasiṃha Śekhāvata Mahārāva Śekhā Smāraka Samiti, 1973 30 जुलाई 2014 http://books.google.co.in/books?ei=2hzZU9LlCpOWuATBz4GYBA&id=0q0NtMKHJ1IC&dq=मारोठ Rājasthānī Vīra-gīta saṅgraha, Volume 1 Saubhāgyasiṃha Śekhāvata Rājasthāna Prācyavidyā Pratishṭhāna, 1968 30 जुलाई 2014 http://books.google.co.in/books?ei=wCHZU8-FNs6SuATvtYHgDw&id=ti0FAQAAIAAJ&dq=मारोठ Śrī Dādū Pantha paricaya: Dādū Pantha kā itihāsa Nārāyaṇadāsa (Swami.) Śrīdādū Dayālu Mahāsabhā, 1978 30 जुलाई 2014 http://books.google.co.in/books?ei=4x_ZU_6YEdC6uATM7YH4CA&id=mmtXAAAAMAAJ&dq=मारोठ Nāgaura, unnīsasaupaiṃsaṭha Mannīlāla Śukla Economic assistance, Domestic Directorate of Public Relations, Rajasthan (India)., 1965 30 जुलाई 2014 मारोठ एक बहुत प्राचीन क़स्बा है जो संप्रति मारवाड़ के नागौर जिले में है। मारोठ पर पहले गौडों का राज्य था। http://books.google.co.in/books?ei=BCPZU4rdHYfHuASfmYCYAQ&id=y6ZjAAAAMAAJ&dq=मरोठ Maru-Bhāratī, Volume 33 Biṛlā Ejyūkeśana Ṭrasṭa., 1985 - Rajasthani philology 30 जुलाई 2014 तवाराखां के अनुसार मरोठ को संवत १११४ (सन् 1057) में बछराज गौड़ ने माठा गौड़ के नाम से बसाया था। पहले यहाँ माठा गौड़ की ढाणी थी। http://books.google.co.in/books?ei=BCPZU4rdHYfHuASfmYCYAQ&id=y6ZjAAAAMAAJ&dq=गौडों Maru-Bhāratī, Volume 33 Biṛlā Ejyūkeśana Ṭrasṭa., 1985 - Rajasthani philology 30 जुलाई 2014 इतिहास राजस्थान के नागौर जिले का मारोठ परगना दीर्घ काल तक गौड़ क्षत्रियों के आधिपत्य में रहने के कारण गौड़ावाटी भू-भाग के नाम से आज भी प्रसिद्ध है। गौड़ाटी के महाराजा रघुनाथ सिंहजी पुनलौता के ठाकुर राव सांवलदास मेड़तिया के छोटे पुत्र, व मीरा बाई के चचेरे भाई राव जयमल के पुत्र गोविन्ददास के पौत्र थे। वो दक्षिण में औरंगजेब के साथ थे और उत्तराधिकार के उज्जैन और धोलपुर के युद्धों में भी उनके पक्ष में लड़े थे और बादशाह औरंगजेब ने महाराजाधिराज महाराजा की पदवी व मारोठ–गौडावाटी सात परगनों सहित राजा रघुनाथ सिंह मेड़तिया को 140 गावों के वतन के रूप में दिया। http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-1924734-3025514.html महाराजा रघुनाथ सिंह जयन्ती दैनिक भास्कर न्यूज़ 28 मार्च 2012 29 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20140728040408/http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-1924734-3025514.html 28 जुलाई 2014 live मारोठ का मान मंदिर व दुर्ग भारतीय कला के लिये विख्यात है। मारोठ के पांचमहल मारोठ अजमेर सूबे के अंतर्गत सात परगनों (महलों) का एक विशाल साम्राज्य था। Rajasthan [district gazetteers], p. 23 http://books.google.ca/books?id=z4VhAAAAIAAJ&q=%22maroth%22 30 Jul 2014 Government of Rajasthan (India) Printed at Govt. Central Press 1978 History of Jainism: Medieval Jainism p. 335-341 http://books.google.ca/books?id=P1LjAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=Marotha 30 Jul 2014 Kailash Chand Jain D. K. Print World (P) Limited 1959 https://web.archive.org/web/20140814042029/http://books.google.ca/books?id=P1LjAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=Marotha 14 अगस्त 2014 live मींडा, मारोठ, लूणवा, पांचोता और पांचवा मारोठ के प्रमुख राजघराने हैं — व पाँचमहल कहलाते हैं। इनमें मींडा और मारोठ (जिलिया) दोनों ही मारोठ राज्य की डेढ़सौ घोड़ों की वतन जागीर के बराबर हिस्से थे। Glimpses of Rajasthan: Off the Beaten Track, p. 148 http://books.google.ca/books?ei=tsjIUPLgJ4vprQeszYGgDQ&id=edofAAAAIAAJ&dq=maroth 30 Jul 2014 Daulat Singh Rajawat Delta Publications, Rajasthan (India) 1991 https://web.archive.org/web/20140814042024/http://books.google.ca/books?ei=tsjIUPLgJ4vprQeszYGgDQ&id=edofAAAAIAAJ&dq=maroth 14 अगस्त 2014 live The Orissa Historical Research Journal, Volumes 8-9, p. 201 http://books.google.ca/books?id=P1LjAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=sons 30 Jul 2014 Kailash Chand Jain Superintendent, Research and Museum, Orissa 1959 https://web.archive.org/web/20140814042031/http://books.google.ca/books?id=P1LjAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=sons 14 अगस्त 2014 live Cities and towns of Rajasthan: 'Maroth', p. 335-341 http://books.google.ca 30 Jul 2014 Kailash Chand Jain Delta Publications, Rajasthan (India) 1972 https://web.archive.org/web/20140730120947/http://books.google.ca/ 30 जुलाई 2014 live जिलिया की जोधपुर व टोंक से संधि जोधपुर के महाराजा अजीतसिंह ने जब मारोठ पर आक्रमण किया, तब दीर्घ युद्ध के पश्चात संवत 1764 (अप्रैल सन् 1710) में जिलिया ने जोधपुर से संधि कर संरक्षित राज्य (ठिकाना) का दर्जा प्राप्त किया। अजीतसिंह के पुत्र महाराजा अभयसिंह के नाम पर रियासत का नाम अभयपुरा हुआ, http://books.google.co.in/books?id=8re1AAAAIAAJ&q=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A0 राजस्थानी ऐतिहासिक ग्रंथों का विवरणात्मक सूची पत्र, भाग एक Śrī Naṭanāgara Śodha-Saṃsthāna, Manoharasiṃha Rāṇāvata, Śivadattadāna Bārahaṭa Śrī Naṭanāgara Śodha-Saṃsthāna, 1991 (Manuscripts, Rajasthani) 30 जुलाई 2014 और उनके पोत्र जोधपुर (महाराजा बख्तसिंह के पुत्र) महाराजा बिजयसिंह का नाम जिलिया के महाराजा बिजयसिंह के नाम पर रखा गया तथा उनका राजतिलक भी संवत 1809 (सन् 1753)) में मारोठ में ही मारोठ (जिलिया) के महाराजा दुर्जनसालसिंह ने करवाया। http://books.google.co.in/books?id=8re1AAAAIAAJ&q="महारोठ" Rājasthānī aitihāsika granthoṃ kā vivaraṇātmaka sūcī patra, Part 1 Śrī Naṭanāgara Śodha-Saṃsthāna, Manoharasiṃha Rāṇāvata, Śivadattadāna Bārahaṭa Śrī Naṭanāgara Śodha-Saṃsthāna, 1991 (Manuscripts, Rajasthani) 30 जुलाई 2014 दुर्जनसाल गुजरात के युद्ध में मारवाड़ के साथ लड़े और घावों के कारण जालोर में प्राण त्यागे, जब जोधपुर दरबार ने कहा: "ढूँढाड़ खंड को सेहरो, मरुधर खंड की ढाल।। (जयपुर की चट्टान, मारवाड़ की ढाल।) डंका है चहुँ देस में, बांको है दुर्जनसाल।।" (जो विश्व विख्यात है, ऐसा श्रृेष्ठ वीर है दुर्जनसाल।) मरहटों से हारे जोधपुर के महाराजा विजयसिंह ने संधि कर अजमेर और 60 लाख रूपए की जगह मारोठ, नावां, परबतसर और मेड़ता की आमदनी उन्हें सौंप दी। यह अस्थिरता का दौर काफी समय चलता रहा। जून 1804 में जोधपुर नरेश ने मारोठ पर सेना भेजी। http://books.google.co.in/books?ei=WufXU9HsIYK_uAS-uIHoBw&id=8MIBAAAAMAAJ&dq=मारोठ Rājasthāna ke itihāsa kā tithikrama Sukhvir Singh Gahlot Hindī Sāhitya Mandira, 1967 30 जुलाई 2014 उस समय मराठा होल्कर के सेनानायक पठान पिण्डारी अमीर खां (जो सन् 1820 में टोंक का नवाब बना) ने जोधपुर, जयपुर, शेखावाटी एवं फिरंगी हुकूमत में लूटमार और हड़कम्प मचा रखा था। जब अमीरखां ने मारोठ के बूढ़े राजा को पराजित कर दिया, तो उसका कुंवर अमीरखान की पुत्री को उठा लाया व संधि में अमीरखां ने जिलिया की सेना के विरुद्ध कभी न लड़ने का वचन दिया। अमीरखां जब अपनी एक लाख की विशाल सेना के साथ जोधपुर जा पहुंचा, तो इसी संधि के कारण जोधपुर नरेश महाराजा मानसिंह ने मारोठ (जिलिया) से सहायत मांगी। मेवाड़ महाराणा का सिर झुकने से रोकना जब मेवाड़ महाराणा राजसिंह दिल्ली के बादशाह की गुलामी स्वीकारने दिल्ली जा रहे थे, तब जिलिया गढ़ के अंतर्गत रतनूं शाखा के चारणों के ग्राम चारणवास के निवासी कवि कम्मा नाई ने दिल्ली जा रहे राणा को उनके पूर्वजों का गौरव-स्मरण कराते हुए बादशाह के सामने सिर झुकाने से रोका और महाराणा राज सिंह रास्ते से ही वापस आ गए। Maharana Bhupal Singh Mewar: Birth Centenary Commemoration, 1884-1984, p. 86 http://books.google.co.in/books?id=voYyAAAAIAAJ&q=जिलिया 22 Nov 2014 Chundawat, N.S. , Sharma, D.P. 1937- Pratap Shodh Pratishthan, Udaipur 1984 1857 ई. की क्रांति thumb|जिलिया गढ़ में प्रवेश का मुख्य पोल। गूलर, मारोठ, सोजत, आसोप, आलणियावास, बुड़सू आदि के सरदार अंग्रेज़ों व मारवाड़ की गुलामी व मनमानी के खिलाफ कई वर्षों से रेख नहीं दे रहे थे अतः उनकी पैतृक जागीरें जोधपुर हड़पे जा रहा था। Political Awakening and Indian Freedom Movement with Special Reference to Rajasthan http://books.google.ca/books?ei=003ZU9qAFcLJuATmwIDYBw&id=fipuAAAAMAAJ&dq=maroth 30 Jul 2014 Gollapalli Nagabhushana Sarma, Vijay Kumar Vashishtha Centre for Rajasthan Studies, University of Rajasthan 1993 https://web.archive.org/web/20140814042037/http://books.google.ca/books?ei=003ZU9qAFcLJuATmwIDYBw&id=fipuAAAAMAAJ&dq=maroth 14 अगस्त 2014 live 1857 ई. की क्रांति में अंग्रेजो का विरोध कर यहाँ के वीरों ने जान की बाज़ी लगा दी, Rajasthan [district gazetteers], p. 34 http://books.google.ca/books?id=z4VhAAAAIAAJ&q=%22maharaj+%22+%22maroth%22 30 Jul 2014 Government of Rajasthan (India) Printed at Govt. Central Press 1978 जिसके पश्चात नावां व सांभर का इलाका ज़प्त कर लिया गया व रियासत को ठिकाने का दर्जा मिला जिससे महाराजा को केवल उसके क्षेत्र सम्बंधी अधिकार रहे। जबकि कुचामन आदि ने अंग्रेजों का साथ दिया व तरक्की की। फिर भी कुचामन आदि जागीरों से भिन्न मारोठ (जिलिया) को जोधपुर की सेवा में फ़ौज नहीं भेजनी पड़ती। उसकी महाराजाधिराज महाराजा की पदवी व 11 तोपों की सलामी, पचरंगा झंडा (केसरिया, काला, पीला, हरा, गुलाबी), फ़ौज, मर्ज़िदान, चपरास, कर्मचारी, कामदार, व स्वायत्ता कायम रही। http://freepages.genealogy.rootsweb.ancestry.com/~princelystates/states/j/jiliya.html जिलिया (मारोठ) प्रिंसली स्टेट्स ऑफ़ इंडिया 2012 29 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20150929122651/http://freepages.genealogy.rootsweb.ancestry.com/~princelystates/states/j/jiliya.html 29 सितंबर 2015 dead जोधपुर दरबार में उसे उच्चतम दर्जे की दोहरी ताज़ीम, सोनानरेश, आदि सम्मान मिले परन्तु ठिकाना बनने से महाराजाधिराज महाराजा की मुग़ल पदवी केवल नाममात्र रह गयी तथा मारोठ (जिलिया) के महाराजा ठिकाने के स्वामी होने के कारण ठाकुर साहेब के नाम से भी सम्बोधित किये जाने लगे। धार्मिक सौहार्द मारोठ की सेना में मूलतः मुसलमान सैनिक थे। मारोठ के शासक महाराजा रघुनाथसिंह राठौड़ का प्रधान-सेनापति 'भाकर शाह' मुसलमान था, व राजा की इच्छानुसार मरणोपरांत दोनों की मजारें साथ-साथ बनीं थी। रघुनाथसिंह राठौड़ के दाह स्थल पर मंदिर और भाकर शाह की मजार पर मस्जिद दोनों की मित्रता स्वरूप आज भी साथ-साथ स्थित हैं। http://books.google.co.in/books?ei=o9_XU6z7A9CPuAT_noKgDQ&id=0695AAAAMAAJ&dq=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B0+%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9 ब्रह्मलीन सूफीसंत थानेदार ठाकुरसाहिब श्री रामसिंहजी भाटी का विस्तृत जीवन-वृत्त: ऐतहासिक सन्दर्भ में कालक्रमबद्ध, प्रामाणिक घटनाएँ। Cirañjīlāla Boharā, Hindu Saints Cirānukr̥ti Kalāśrama, 2006 11 जुलाई 2006 29 जुलाई 2014 भाषाएँ मारोठ में बोली जाने वाली मुख्य भाषाओं की सूची इस प्रकार है: 4 संस्कृत हिन्दी अंग्रेजी राजस्थानी उर्दू भूगोल और जलवायु thumb|right|190px|जिलिया गढ़ महल की छत से मारोठ की अरावली पर्वतमाला का नज़ारा। भू-आकृतिक विशेषतायें मारोठ संसार की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला अरावली पर्वतमाला के पश्चिमी भाग व सांभर झील के उत्तर में स्थित एक क़स्बा है। यहाँ के रेत के टीले, खुले मैदान, नदियाँ, झीलें और अरावली के पर्वत इस क्षेत्र की विशेषता हैं। यह पर्वतश्रेणी राजस्थान से दिल्ली तक फैली हुई है। यह संसार की सबसे प्राचीन पर्वतमाला है और इसमें अनेक किले व दुर्ग हैं। मारोठ के दक्षिण में सांभर झील है जो मीण्डा, रुपनगढ़, खण्डेल तथा खारी और उनकी सहायक नदियों द्वारा बना है। सांभर झील के दक्षिण में किशनगढ़, अजमेर, मेड़ता और जोधपुर हैं। मारोठ की उत्तर दिशा में सीकर, खंडेला और दांता-रामगढ़ हैं। पूर्व दिशा में जयपुर व टोंक और पश्चिम में नागौर और बीकानेर हैं। मकराना, कुचामन, नावां आदि में जलस्तर नीचे होने के कारण पानी खारा व फ्लोराइड युक्त होने से पीने योग्य नहीं है। अतः गत वर्षों में सरकार द्वारा जिलिया के निकटवर्ती गावँ आनंदपुरा से बोरिंग द्वारा पानी मकराना तक ले जाया जा रहा है जिससे जिलिया का भूमि जल स्तर काफी नीचे चला गया है। http://www.dailynewsnetwork.in/news/jaipur/14032010/dailynews/5953.html अभी गर्मी, फिर पानी छुड़ाएगा पसीने भास्कर न्यूज़ नेटवर्क, मार्च 14, 2010 30 जुलाई 2014जून 2020 InternetArchiveBot http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-MAT-latest-merta-news-070602-5442-NOR.html अवैध पानी के कनेक्शन काटे भास्कर न्यूज़ नेटवर्क, जून 10, 2014 30 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20140420030751/http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-MAT-latest-merta-news-070602-5442-NOR.html 20 अप्रैल 2014 live thumb|right|190px|जिलिया में राष्ट्रीय पक्षी मोर बहुतायत में हैं। लोगों की श्री कृष्णा में श्रद्धा के कारण यहाँ मोर सुरक्षित हैं। जलवायु मारोठ में भू-आकृति के प्रभाव में छोटे और स्थानीय स्तर पर भी जलवायु में कुछ विविधता और विशिष्टता मिलती है। मूलतः मारोठ क्षेत्र की जलवायु शुष्क प्रकार की है, परन्तु झीलों के समीपस्थ नम प्रकार की। नावां शहर, जिलिया, अजमेर शहर तथा कुचामन सिटी में उमस के बाद हल्की बारिश व बूंदाबांदी आम बात है। http://www.dailynewsnetwork.in/news/07072013/s/93512.html उमस के बाद राहत के छींटे डेली न्यूज़, रविवार, जुलाई 07, 2013 30 जुलाई 2014 जून 2020 InternetArchiveBot जिलिया क्षेत्र में बारिश से मौसम खुशगवार रहता है। http://rajasthanpatrika.patrika.com/news/the-fire-sawan-jhoom/1169789.html झूम के बरसा सावन राजस्थान पत्रिका, 27 जुलाई 2014 30 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20140728101427/http://rajasthanpatrika.patrika.com/news/the-fire-sawan-jhoom/1169789.html 28 जुलाई 2014 dead राजस्थान व मारवाड़ के अन्य मरुस्थलीय भागों से भिन्न जिलिया में तेज बारिश से खेत लबालब हो जाते हैं। http://www.pressnote.in/Ajmer-Samachar_83708.html#.U9kxKuOSySq जिलिया में तेज बारिश से खेत लबालब प्रेसनोट, अजमेर समाचार 30 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20160304122904/http://www.pressnote.in/Ajmer-Samachar_83708.html#.U9kxKuOSySq 4 मार्च 2016 dead कभी कभी एक ही दिन में आग जैसी तेज धुप व बेर के आकार के ओले गिरना भी यहाँ संभव है। http://rajasthanpatrika.patrika.com/news/first-anniversary-of-fire-water/1152234.html पहले बरसी आग, फिर पानी राजस्थान पत्रिका, 5 मई 2014 30 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20140527005709/http://rajasthanpatrika.patrika.com/news/first-anniversary-of-fire-water/1152234.html 27 मई 2014 dead यहाँ वैशाख महीने में में भी की बार सावन जैसा रंग दिख जाता है। आकाशीय बिजली के प्रभाव से पिछले कुछ समय से जान-माल को भी नुक्सान हुआ है। http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-MAT-latest-merta-news-070602-5442-NOR.html बारिश ने किया परेशान, तेज अंधड़ ने उड़ाए होर्डिंग्स, बैनर, झोंपड़े भास्कर न्यूज़ नेटवर्क, अप्रेल 19, 2014 30 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20140420030751/http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-MAT-latest-merta-news-070602-5442-NOR.html 20 अप्रैल 2014 live संस्कृति thumb|190px|जिलिया, राजस्थान स्थित छतरियाँ। मारोठ भारत के प्राचीनतम नगरों में से एक है। यहां की सांस्कृतिक धरोहर बहुत संपन्न है। आक्रमणकारियों तथा प्रवासियों से विभिन्न चीजों को समेट कर यह एक मिश्रित संस्कृति बन गई है। मारोठ का समाज, भाषाएं, रीति-रिवाज इत्यादि इसका प्रमाण हैं। गौड़ाटी समाज बहुधर्मिक, बहुभाषी तथा मिश्र-सांस्कृतिक है। पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों को काफी आदर की दृष्टि से देखा जाता है। मारोठ महाभारत काल से ऐतिहासिक व्यापार पथों का अभिन्न अंग रहा है। जैन धर्म का भी यहाँ काफी विकास हुआ, History of Jainism: Medieval Jainism, Cities and towns of Rajasthan, p. 340 http://books.google.ca/books?id=P1LjAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=Marotha 30 Jul 2014 Kailash Chand Jain D. K. Print World (P) Limited 1959 https://web.archive.org/web/20140814042029/http://books.google.ca/books?id=P1LjAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=Marotha 14 अगस्त 2014 live और राजपूताना के सत्रहवीं शताब्दी के चित्रणों में मारोठ के मान मन्दिर, उदयपुर के महलों तथा अम्बामाता के मंदिर, नाडोल के जैन मंदिर, मोजमाबाद (जयपुर), आमेर (जयपुर) के निकट मावदूमशाह की कब्र के मुख्य गुम्बद के चित्र, जूनागढ़ (बीकानेर) स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूनों में गिने जाते हैं। मारोठ कस्बे में ग्यारहवीं व बारहवीं शताब्दी के जैन चित्र व अभिलेख पाये गए हैं। कस्बे में चार प्राचीन जैन मंदिर हैं। धरम चंद सेठी, जिसे श्रीभूषण ने भट्टार्क बनाया, मारोठ का निवासी था। उसने सन् 1659 में मारोठ में गौतमचरित्र लिखी, जिस समय यहाँ महाराजाधिराज रघुनाथसिंह शासक था। उसके चेले दामोदर ने सन् 1670 में आदिनाथ के जैन मंदिर में चन्द्रप्रभुचरित्र लिखी। History of Jainism: Medieval Jainism, Cities and towns of Rajasthan, p. 341 http://books.google.ca/books?id=P1LjAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=Marotha 30 Jul 2014 Kailash Chand Jain Rajasthan 1959 https://web.archive.org/web/20140814042029/http://books.google.ca/books?id=P1LjAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=Marotha 14 अगस्त 2014 live विभिन्न धर्मों के इस भूभाग पर कई मनभावन पर्व त्यौहार मनाए जाते हैं - दिवाली, होली, दशहरा, ईद उल-फ़ित्र, ईद-उल-जुहा, मुहर्रम आदि भी काफ़ी लोकप्रिय हैं। यहां खानपान बहुत ही समृद्ध है। शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों ही तरह का खाना पसन्द किया जाता है। यहां में संगीत तथा नृत्य की अपनी शैलियां भी विकसित हुईं, जो बहुत ही लोकप्रिय हैं। कुचामनी ख्याल की मनोरंजक व हास्य लोक नाट्य शैली कला जगत में प्रसिद्ध है। http://www.bhaskar.com/article/MAT-RAJ-OTH-c-189-138964-NOR.html राजस्थान की संस्कृति साकार हुई दैनिक भास्कर मैट्रिक्स न्यूज़ फ़रवरी 6, 2014 31 जुलाई 2014 http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj156.htm राजस्थान में रंगकर्म: राहुल तोन्गारिया इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर दि आर्ट्स 2003 31 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20140831015130/http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj156.htm 31 अगस्त 2014 dead खेलों में फुटबॉल तथा क्रिकेट सबसे अधिक लोकप्रिय है। http://www.bhaskar.com/article/PUN-OTH-c-10-229968-NOR.html क्रिकेट प्रतियोगिता का आगाज दैनिक भास्कर मैट्रिक्स न्यूज़ दिसंबर 26, 2012 30 जुलाई 2014 2 अगस्त 2014 https://archive.today/20140802221248/http://www.bhaskar.com/article/PUN-OTH-c-10-229968-NOR.html dead सन्दर्भ 2 श्रेणी:भारत के क्षेत्र श्रेणी:राजपूत साम्राज्य श्रेणी:राजस्थान का इतिहास