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अत्यधिक यथार्थवाद (दृश्य कलाऐं)
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अत्यधिक यथार्थवाद (हाइपररियलिज़्म अथवा hyperrealism) चित्रकला और मूर्तिकला की एक ऐसी शैली है जो उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले फोटो के समान दिखाई देती है। हाइपररियलिज़्म को फोटो यथार्थवाद (फोटोरियलिज़्म) का उन्नत रूप माना जाता है, क्योंकि इसमें चित्रों और मूर्तियों के निर्माण के लिए अधिक विकसित तकनीकों का उपयोग किया जाता है,किन्तु यह केवल दृश्य समानता तक सीमित न होकर भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक संदेशों को भी व्यक्त करता है। हाइपररियलिज़्म शब्द मुख्यतः संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में 1970 के दशक के प्रारम्भ से विकसित हुए एक स्वतंत्र कला आंदोलन और कला शैली के लिए प्रयुक्त होता है।Bredekamp, Horst, Hyperrealism - One Step Beyond. Tate Museum, Publishers, UK. 2006. p. 1 कैरोल फ्यूरमैन, डुआन हैनसन और जॉन डी एंड्रिया के साथ हाइपररियलिज़्म आंदोलन की अग्रणी कलाकारों में से एक मानी जाती हैं। Fragments Born of Water, Earth and Fire—Beyond Hyperrealism 2014-03-19 http://www.sculptclub.com/2014/03/fragments-born-of-water-earth-and-fire-beyond-hyperrealism/ 2018-07-24
इतिहास
सन् 1973 में कला व्यापारी इसी ब्राशो (Isy Brachot) ने ब्रुसेल्स स्थित अपनी गैलरी में आयोजित एक प्रमुख प्रदर्शनी और उसकी सूची (कैटलॉग) के शीर्षक के रूप में फ्रांसीसी शब्द हाइपररियलिस्म (hyperréalisme) का प्रयोग किया, जिसका अर्थ अत्यधिक यथार्थवाद है। इस प्रदर्शनी में अमेरिकी फोटोरियलिस्ट कलाकारों जैसे राल्फ गोइंग्स, चक क्लोज़, डॉन एडी, रॉबर्ट बेक्टल और रिचर्ड मैक्लीन की प्रमुख उपस्थिति थी। इसके साथ ही इसमें डोमेनिको ग्नोली, गेर्हार्ड रिक्टर, कॉनराड क्लापहेक और रोलां डेलकोल जैसे प्रभावशाली यूरोपीय कलाकार भी शामिल थे।
तब से हाइपररियलिस्म शब्द का उपयोग यूरोपीय कलाकारों और कला-विक्रेताओं द्वारा उन चित्रकारों के लिए किया जाने लगा जो फोटोरियलिस्ट कलाकारों से प्रभावित थे। समकालीन यूरोपीय हाइपररियलिस्ट चित्रकारों में गॉटफ़्रीड हेल्नवाइन, विलेम फ़ान फ़ेल्डहुइज़ेन, त्जाल्फ़ स्पारनाय, रोजर विटेव्रोंगेल तथा फ्रांसीसी कलाकार पियरे बराया, जाक बोदान, रोनाल्ड बोवेन, फ़्रांस्वा ब्रिक, जेरार श्लोसर, जाक मोनोरी, बर्नार्ड रांसियाक, जिल आयो और जेरार फ्रॉमांजे प्रमुख हैं।Hyperréalisme, le retour http://www.hyperrealism.net/book%201.htm www.hyperrealism.net 2017-09-20 https://web.archive.org/web/20090101143758/http://www.hyperrealism.net/book%201.htm 2009-01-01 dead
इक्कीसवीं सदी के प्रारम्भिक हाइपररियलिज़्म की नींव फोटोरियलिज़्म के सौंदर्यशास्त्रीय सिद्धांतों पर आधारित थी। अमेरिकी चित्रकार डेनिस पीटरसन, जिनकी अग्रणी कृतियों को व्यापक रूप से फोटोरियलिज़्म की एक विकसित शाखा माना जाता है, ने सबसे पहले 'हाइपररियलिज़्म' शब्द का प्रयोगThompson, Graham, American Culture in the 1980s, Edinburgh University Press, 2007, pp. 77–79. इस नए कला आंदोलन और उससे जुड़े कलाकारों के समूह के लिए किया।Jean-Pierre Criqui, Jean-Claude Lebensztejn interview, Artforum International, 2003-06-01Robert Bechtle: A Retrospective by Michael Auping, Janet Bishop, Charles Ray, and Jonathan Weinberg. University of California Press, Berkeley, CA, USA (2005). 978-0-520-24543-3 ग्राहम थॉम्पसन ने लिखा है, 'कला जगत में फोटोग्राफी के समावेशन का एक उदाहरण 1960 के दशक के उत्तरार्ध और 1970 के दशक के प्रारम्भ में फोटोरियलिस्ट चित्रकला की सफलता है। इसे सुपर-रियलिज़्म या हाइपर-रियलिज़्म भी कहा जाता है, और रिचर्ड एस्टेस, डेनिस पीटरसन, ऑड्री फ्लैक तथा चक क्लोज़ जैसे चित्रकार अक्सर स्थिर फोटोग्राफ़ों के आधार पर ऐसे चित्र बनाते थे जो स्वयं फोटोग्राफ़ जैसे दिखाई देते थे।'
हालाँकि, हाइपररियलिज़्म को बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध की पारंपरिक फोटोरियलिस्ट चित्रकला में पाई जाने वाली शाब्दिक (यथावत) शैली से भिन्न माना जाता है।Mayo, Deborah G., 1996, Error and the Growth of Experimental Knowledge, Chicago: University of Chicago Press. pp. 57–72. हाइपररियलिस्ट चित्रकार और मूर्तिकार फोटोग्राफ़िक छवियों का उपयोग संदर्भ स्रोत के रूप में करते हैं, जिनके आधार पर वे अधिक स्पष्ट, सटीक और विस्तृत कलाकृतियाँ निर्मित करते हैं। फोटोरियलिज़्म के विपरीत, उनकी रचनाओं में प्रायः कथात्मकता और भावनात्मक अभिव्यक्ति भी शामिल होती है।Chase, Linda, Photorealism at the Millennium, The Not-So-Innocent Eye: Photorealism in Context. Harry N. Abrams, Inc. New York, 2002. pp. 14–15.Nochlin, Linda, The Realist Criminal and the Abstract Law II, Art In America. 61 (November – December 1973). p. 98.
कठोर फोटोरियलिस्ट चित्रकार सामान्यतः फोटोग्राफ़िक छवियों की हूबहू नकल करने का प्रयास करते थे तथा समग्र चित्रात्मक संरचना को बनाए रखने के लिए कुछ सीमित विवरणों को छोड़ देते थे या उन्हें अमूर्त रूप दे देते थे। वे अक्सर मानवीय भावनाओं, राजनीतिक मूल्यों और कथात्मक तत्वों को भी अपनी रचनाओं से बाहर रखते थे।
यद्यपि हाइपररियलिज़्म मूल रूप से फोटोग्राफ़िक प्रकृति का होता है, फिर भी इसमें चित्रित विषय पर अपेक्षाकृत अधिक कोमल और कहीं अधिक जटिल ढंग से ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिससे वह एक जीवंत और मूर्त वस्तु के रूप में प्रस्तुत होता है। हाइपररियलिस्ट चित्रों और मूर्तियों में वस्तुओं तथा दृश्यों को अत्यंत सूक्ष्मता और विस्तार से प्रस्तुत किया जाता है, ताकि ऐसी वास्तविकता का भ्रम उत्पन्न हो जो मूल फोटोग्राफ़ में दिखाई नहीं देती। इसका अर्थ यह नहीं है कि ये कृतियाँ अतियथार्थवादी (सुर्रियल) होती हैं; बल्कि यह भ्रम एक कृत्रिम रूप से निर्मित वास्तविकता का विश्वसनीय चित्रण होता है। इन कृतियों में बनावट, सतहें, प्रकाश प्रभाव और छायाएँ संदर्भ फोटोग्राफ़ अथवा वास्तविक विषय-वस्तु की तुलना में अधिक स्पष्ट, तीक्ष्ण और विशिष्ट दिखाई देती हैं।
चूँकि फोटोरियलिज़्म का विकास पॉप आर्ट से हुआ था, इसलिए इसकी चित्रकला शैली अत्यंत नियंत्रित, सटीक और यांत्रिक प्रकृति की थी, जिसमें दैनिक जीवन की साधारण और सामान्य वस्तुओं तथा दृश्यों को विशेष महत्व दिया जाता था।
यद्यपि हाइपररियलिज़्म मूल रूप से फोटोग्राफ़िक प्रकृति का होता है, फिर भी इसमें चित्रित विषय पर अपेक्षाकृत अधिक कोमल और कहीं अधिक जटिल ढंग से ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिससे वह एक जीवंत और मूर्त वस्तु के रूप में प्रस्तुत होता है। हाइपररियलिस्ट चित्रों और मूर्तियों में वस्तुओं तथा दृश्यों को अत्यंत सूक्ष्मता और विस्तार से प्रस्तुत किया जाता है, ताकि ऐसी वास्तविकता का भ्रम उत्पन्न हो जो मूल फोटोग्राफ़ में दिखाई नहीं देती। इसका अर्थ यह नहीं है कि ये कृतियाँ अतियथार्थवादी (सुर्रियल) होती हैं; बल्कि यह भ्रम एक कृत्रिम रूप से निर्मित वास्तविकता का विश्वसनीय चित्रण होता है। इन कृतियों में बनावट, सतहें, प्रकाश प्रभाव और छायाएँ संदर्भ फोटोग्राफ़ अथवा वास्तविक विषय-वस्तु की तुलना में अधिक स्पष्ट, तीक्ष्ण और विशिष्ट दिखाई देती हैं।Horrocks, Chris and Zoran Jevtic. Baudrillard For Beginners. Cambridge: Icon Books, 1996. pp. 80–84.
हाइपररियलिज़्म की जड़ें जाँ बॉद्रियार के दर्शन में निहित हैं, जिसे उन्होंने ‘ऐसी किसी वस्तु का अनुकरण जो वास्तव में कभी अस्तित्व में ही नहीं थी’ के रूप में परिभाषित किया।Jean Baudrillard, "Simulacra and Simulation", Ann Arbor Mich.: University of Michigan Press, 1981 इसी कारण हाइपररियलिस्ट कलाकार एक कृत्रिम यथार्थ का निर्माण करते हैं—ऐसा विश्वसनीय भ्रम जो वास्तविकता के अनुकरण, अर्थात् डिजिटल फ़ोटोग्राफ़, पर आधारित होता है। हाइपररियलिस्ट चित्रकला और मूर्तिकला डिजिटल कैमरों द्वारा निर्मित तथा कंप्यूटरों पर प्रदर्शित अत्यंत उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली छवियों के विकास का परिणाम हैं।Horrocks, Chris and Zoran Jevtic. Baudrillard For Beginners. Cambridge: Icon Books, 1996. pp. 80–84. जहाँ फ़ोटोरियलिज़्म ने एनालॉग फ़ोटोग्राफ़ी का अनुकरण किया, वहीं हाइपररियलिज़्म डिजिटल छवियों का उपयोग करते हुए उन्हें आगे बढ़ाता है और यथार्थ की एक नई अनुभूति उत्पन्न करता है। हाइपररियलिस्ट चित्र और मूर्तियाँ दर्शक को अत्यंत सूक्ष्मता से निर्मित, परिवर्तित उच्च-रिज़ॉल्यूशन छवियों के भ्रम से रूबरू कराती हैं।Bredekamp, Horst, Hyperrealism - One Step Beyond. Tate Museum, Publishers, UK. 2006. pp. 1–4.
शैली और विधियाँ
अत्यधिक यथार्थवाद शैली में विवरणों और विषय-वस्तु पर विशेष रूप से अधिक बल दिया जाता है। हाइपररियलिस्ट चित्रकृतियाँ और मूर्तियाँ फ़ोटोग्राफ़ों की कठोर व्याख्याएँ नहीं हैं और न ही वे किसी विशेष दृश्य या विषय का शाब्दिक चित्रण करती हैं।.Fleming, John and Honour, Hugh The Visual Arts: A History, 3rd Edition. Harry N. Abrams, Inc. New York, 1991. pp. 680–710. इसके बजाय, वे अतिरिक्त तथा प्रायः सूक्ष्म दृश्यात्मक तत्वों का उपयोग करती हैं, ताकि ऐसी वास्तविकता का भ्रम उत्पन्न किया जा सके जो वास्तव में या तो अस्तित्व में नहीं होती या जिसे मानव नेत्र प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख सकता। इसके अतिरिक्त, इनमें भावनात्मक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयगत तत्वों को भी चित्रित दृश्य-भ्रम के विस्तार के रूप में सम्मिलित किया जा सकता है। यह पुरानी और अपेक्षाकृत अधिक शाब्दिक फ़ोटोरियलिस्ट परंपरा से एक स्पष्ट भिन्नता को दर्शाता है।Meisel, Louis K. Photorealism. Harry N. Abrams, Inc., Publishers, New York. 1980.
हाइपररियलिस्ट चित्रकार और मूर्तिकार छवियों को कैनवास या साँचे पर स्थानांतरित करने के लिए कुछ यांत्रिक साधनों का उपयोग करते हैं, जिनमें प्रारंभिक रेखाचित्र, ग्रिज़ाय (एकरंगी) अधोचित्रण तथा साँचे शामिल हैं। छवियों को कैनवास पर प्रक्षेपित करने के लिए फ़ोटोग्राफ़िक स्लाइड प्रोजेक्टर या मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर का उपयोग किया जाता है, जबकि सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ग्रिडिंग जैसी मूलभूत तकनीकों का भी सहारा लिया जाता है।.Meisel, Louis K. Photorealism. Harry N. Abrams, Inc., Publishers, New York. 1980. pp. 12–13. मूर्तियों के निर्माण में पॉलिएस्टर पदार्थों को सीधे मानव शरीर या साँचे पर लगाया जाता है। हाइपररियलिज़्म में कृत्रिम यथार्थ का अनुकरण करने के लिए अत्यंत उच्च स्तर की तकनीकी दक्षता और कलात्मक निपुणता की आवश्यकता होती है। इसी कारण यह शैली फ़ोटोग्राफ़ी की सीमाओं—जैसे क्षेत्र-गहराई (डेप्थ ऑफ़ फ़ील्ड), परिप्रेक्ष्य (पर्सपेक्टिव) और फ़ोकस की सीमा—को अपने भीतर समाहित करती है तथा अक्सर उनका लाभ भी उठाती है। डिजिटल छवियों में पाए जाने वाले विचलन, जैसे फ्रैक्टलाइज़ेशन, का उपयोग भी कुछ हाइपररियलिस्ट कलाकार—जैसे चक क्लोज़, डेनिस पीटरसन, बर्ट मोनरॉय और रॉबर्ट बेख्टले—उनकी डिजिटल उत्पत्ति को रेखांकित करने के लिए करते हैं।Battock, Gregory. Preface to Photorealism. Harry N. Abrams, Inc., Publishers, New York, 1980. pp. 8–10.
विषय-वस्तु
अत्यधिक यथार्थवाद कला की विषय-वस्तु में चित्र-प्रतिमाएँ (पोर्ट्रेट), मानव आकृतियों पर आधारित कला, स्थिर जीवन (स्टिल लाइफ़), प्राकृतिक दृश्य (लैंडस्केप), शहरी दृश्य (सिटीस्केप) तथा कथात्मक दृश्य शामिल होते हैं। आधुनिक हाइपररियलिस्ट शैली सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर विशेष बल देते हुए चित्रात्मक विवरण की सटीकता के मामले में फ़ोटोरियलिज़्म की तुलना में कहीं अधिक प्रत्यक्ष और यथार्थवादी होती है। यह समकालीन फ़ोटोरियलिज़्म से भी स्पष्ट रूप से भिन्न है, क्योंकि फ़ोटोरियलिज़्म अब भी फ़ोटोग्राफ़िक विचलनों और असंगतियों से बचने का प्रयास करता है। हाइपररियलिस्ट चित्रकार अत्यंत सटीक फ़ोटोग्राफ़िक छवियों का अनुकरण करने के साथ-साथ उन्हें और अधिक परिष्कृत भी बनाते हैं, ताकि वे वास्तविकता का ऐसा दृश्य-भ्रम उत्पन्न कर सकें जो देखने में पूरी तरह विश्वसनीय लगे, और जो प्रायः किसी सामाजिक या सांस्कृतिक संदर्भ से जुड़ा होता है।Petra Halkes, "A Fable in Pixels and Paint - Gottfried Helnwein's American Prayer". Image & Imagination, Le Mois de la Photo à Montréal, McGill-Queen's University Press, 2005, 0-7735-2969-1.Alicia Miller, "The Darker Side of Playland: Childhood Imagery from the Logan Collection at SFMOMA", Artweek, US, 2000-11-01.
कुछ अत्यधिक यथार्थवाद कलाकारों ने घृणा और असहिष्णुता की विरासत को कथात्मक रूप में चित्रित करके अधिनायकवादी शासन व्यवस्थाओं और तीसरी दुनिया की सैन्य सरकारों को उजागर किया है।Jean Baudrillard, "The Precession of Simulacra", in Media and Cultural Studies : Keyworks, Durham & Kellner, eds. 0-631-22096-8. डेनिस पीटरसन और गॉटफ्राइड हेल्नवाइन ने अपने कार्यों में सामाजिक पतन के राजनीतिक और सांस्कृतिक विचलनों को दर्शाया। पीटरसन का कार्य प्रवासी समुदायों, जनसंहारों और शरणार्थियों पर केंद्रित था। विषयवस्तु की दृष्टि से, इन विवादास्पद हाइपररियलिस्ट कलाकारों ने कथात्मक चित्रकला को एक अनुभूतिपरक माध्यम के रूप में उपयोग करते हुए मानव स्थिति के भ्रष्ट स्वरूप का तीव्रता से सामना किया।George Ritzer, The McDonaldization of Society (2004). 978-0-7619-8812-0 ये जीवंत प्रतीत होने वाले चित्र मानवों के साथ किए गए क्रूर और वीभत्स दुर्व्यवहार पर एक ऐतिहासिक टिप्पणी प्रस्तुत करते हैं।Rywalt Chris http://www.crywalt.com/blog/2006/06/denis-peterson.html Christoper Rywalt, "Denis Peterson", NYC Art, June 7, 2006 Crywalt.com 2014-05-29Robert Flynn Johnson, Curator in Charge, "The Child - Works by Gottfried Helnwein", California Palace of the Legion of Honor, Fine Arts Museums of San Francisco, 0-88401-112-7, 2004.
हाइपररियल चित्रकृतियाँ और मूर्तियाँ सूक्ष्म प्रकाश एवं छायांकन प्रभावों के माध्यम से एक मूर्त ठोसपन और भौतिक उपस्थिति का निर्माण करती हैं।Daniel Boorstin The Image: A Guide to Pseudo-Events in America 1992 Random House 978-0-679-74180-0 registration https://archive.org/details/imageguidetopseu00boor_0 चित्र के अग्रभाग के सबसे निकट स्थित आकृतियाँ, रूप और क्षेत्र दृश्य रूप से कैनवास की सतह से बाहर उभरते हुए प्रतीत होते हैं; और मूर्तियों के मामले में, उनके विवरण प्रकृति में दिखाई देने वाले विवरणों से भी अधिक स्पष्ट होते हैं। हाइपररियलिस्टिक चित्र सामान्यतः मूल फोटोग्राफिक संदर्भ स्रोत से 10 से 20 गुना बड़े होते हैं, फिर भी रंग, सटीकता और सूक्ष्म विवरणों में अत्यंत उच्च विभेदन (रेज़ोल्यूशन) बनाए रखते हैं। इनमें से अनेक चित्र एयरब्रश तकनीक से बनाए जाते हैं, जिनमें ऐक्रेलिक रंगों, तेल रंगों अथवा दोनों के संयोजन का उपयोग किया जाता है। रॉन म्यूएक की जीवंत प्रतीत होने वाली मूर्तियाँ वास्तविक आकार से कहीं बड़ी या छोटी बनाई जाती हैं और पॉलिएस्टर रेज़िन तथा अनेक साँचे (मोल्ड) के अत्यंत सावधानीपूर्वक उपयोग से उन्हें अविश्वसनीय रूप से यथार्थपूर्ण विवरण प्रदान किया जाता है। बर्ट मोनरॉय की डिजिटल छवियाँ देखने में फोटोग्राफ़ों से बनी वास्तविक पेंटिंग्स जैसी लगती हैं, किंतु वे पूरी तरह कंप्यूटर पर निर्मित होती हैं।
विशेषताएँ
हाइपररियलिस्ट कला की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
अत्यधिक सूक्ष्म विवरण और स्पष्टता।
प्रकाश, छाया तथा परावर्तन का सटीक चित्रण।
मानव त्वचा, बाल, वस्त्र और अन्य सतहों की यथार्थवादी प्रस्तुति।
उच्च गुणवत्ता वाले फोटोग्राफ जैसी दृश्य प्रभावशीलता।
सामाजिक, राजनीतिक या मनोवैज्ञानिक विषयों की अभिव्यक्ति।
वास्तविकता को कभी-कभी उसके सामान्य अनुभव से भी अधिक तीव्र रूप में दिखाना।
चित्रकला
हाइपररियलिस्ट चित्रकार प्रायः फोटोग्राफ को संदर्भ के रूप में उपयोग करते हैं। वे कैनवास पर अत्यंत बारीकी से रंगों, बनावटों और विवरणों को पुनर्निर्मित करते हैं। मानव चेहरे, शहरी दृश्य, वाहन, दुकानों की खिड़कियाँ और दैनिक जीवन की वस्तुएँ इस शैली के सामान्य विषय हैं।
मूर्तिकला
हाइपररियलिस्ट मूर्तियाँ मानव शरीर के आकार, त्वचा, बालों और भाव-भंगिमाओं को इतनी सटीकता से दर्शाती हैं कि वे वास्तविक व्यक्तियों जैसी प्रतीत होती हैं। इन मूर्तियों में सिलिकॉन, रेज़िन, फाइबरग्लास और मानव बाल जैसे पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
फोटोरियलिज़्म से अंतर
यद्यपि हाइपररियलिज़्म और फोटोरियलिज़्म दोनों यथार्थवादी कला शैलियाँ हैं, फिर भी उनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं:
फोटोरियलिज़्म हाइपररियलिज़्म फोटोग्राफ की सटीक प्रतिकृति पर बल वास्तविकता को और अधिक प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करना तकनीकी यथार्थवाद प्रमुख भावनात्मक और वैचारिक अभिव्यक्ति भी महत्वपूर्ण अपेक्षाकृत तटस्थ प्रस्तुति सामाजिक और मनोवैज्ञानिक संदेशों का समावेश
प्रभाव
हाइपररियलिज़्म ने समकालीन कला, विज्ञापन, डिजिटल कला और दृश्य संस्कृति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। डिजिटल तकनीकों के विकास के साथ इस शैली ने नए माध्यमों और अभिव्यक्ति के रूपों को भी अपनाया है।
इन्हें भी देखें
यथार्थवाद (कला)
समकालीन कला
सन्दर्भ
श्रेणी:कला आंदोलन
श्रेणी:दृश्य कला
श्रेणी:समकालीन कला
श्रेणी:चित्रकला