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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

क़सीदा

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क़सीदा (अरबी: ar قصيدة) शायरी का वह रूप है जिसमें किसी की प्रशंसा की जाए। कुछ शायर अपने बेहतरीन क़सीदों के लिए विख्यात हुए हैं, जैसे कि मिर्ज़ा मुहम्मद रफ़ी सौदा।http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urdu/sauda/txt_pegors_jsal1990.pdf A Shahr-ashob of Sauda, translated by Mark Pegors 20 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20121023074419/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urdu/sauda/txt_pegors_jsal1990.pdf 23 अक्तूबर 2012 dead क़सीदे लिखने का रिवा अरबी संस्कृति से आया है, जहाँ यह इस्लाम के आगमन से बहुत पूर्व से लिखे जा रहे हैं।Poetry and Drama: Literary Terms and Concepts, Britannica Educational Publishing, The Rosen Publishing Group, 2011, ISBN 978-1-61530-539-1, ... The qasida (Arabic qas·īdah) is a poetic form that was developed in pre-Islamic Arabia and perpetuated throughout Islamic literary history into the present. It is a laudatory, elegiac, or satiric poem ... शब्द की जड़ें और उच्चारण 'क़सीदा' में 'क़' अक्षर के उच्चारण पर ध्यान दें क्योंकि यह बिन्दु रहित वाले 'क' से ज़रा भिन्न है। इसका उच्चारण 'क़ीमत' और 'क़रीब' के 'क़' से मिलता है। यह एक अरबी-मूल का शब्द है और 'क़सादा' शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ 'ध्येय या नीयत रखना' है।Qasida Poetry in Islamic Asia and Africa: Classical traditions and modern meanings https://web.archive.org/web/20151125090844/https://books.google.com/books?id=3pbwgOLcwTYC 25 नवंबर 2015, Stefan Sperl, C. Shackle, BRILL, 1996, ISBN 978-90-04-10295-8, ... The term is derived from the verb qasada, 'to aim at, to intend' ... रूप और प्रकार क़सीदों में हर शेर का दूसरा मिस्रा एक ही रदीफ़ और क़ाफ़िया (तुकान्त) में होता है। क़सीदे दो प्रकार के होते हैं। एक वह, जिसमें कवि प्रारम्भ से ही प्रशंसा करने लगता है और दूसरा वह जिसमें प्रारम्भ में एक तरह की भूमिका दी जाती है और कवि और बातों के अलावा वसन्त, बहार, दर्शन, ज्योतिष आदि के विषय में कुछ कहता है। इन प्रारम्भिक वर्णनों को तश्बीब कहते हैं। तश्बीब के बाद कवि प्रशंसा करने की ओर अपने शेरों को मोड़ता है। इस मोड़ को गुरेज़ कहते है। इसका वर्णन बहुत मुश्किल समझा जाता है और इसी के द्वारा शायर के कमाल का अनुमान होता है। अच्छी गुरेज़ वह है जिसमें कवि 'तश्बीब' (वर्णन) से 'तारीफ़' (प्रशंसा) पर इस प्रकार आ जाए कि पढने वालों को यह पता ही न चले कि प्रशंसा का विषय ठूँस-ठाँसकर लाया गया है। क़सीदे के तीसरे अंग 'मदह' (प्रशंसा) के बाद चौथा अङ्ग 'दुआ' होता है, जिसमें कवि 'ममदूह' (प्रशंसित व्यक्ति) के लिए शुभकामनाएँ करता हुआ उससे कुछ याचना करता है। इसी के बाद क़सीदा समाप्त हो जाता है।Encyclopaedic dictionary of Urdu literature https://web.archive.org/web/20140708215023/http://books.google.com/books?id=-otQriwQ9z4C 8 जुलाई 2014, Global Vision Publishing House, 2007, ISBN 978-81-8220-191-0, ... Madh (eulogy) is the main component of a qasida. The poet extols his mamduh, putting together in his person all possible qualities ... मिसाल लखनऊ के प्रसिद्ध शायर 'नासिख़' द्वारा लिखे किसी घोड़े पर एक क़सीदे का अंश इस प्रकार है:Calcutta review, Volumes 72-73, University of Calcutta, University of Calcutta. Dept. of English, University of Calcutta, 1881, ... Raftar men aurang-i-Sulaiman hai yih ghora ... मूल जुमलेटीकारफ़्तार में औरंग-ए-सुलेमान है ये घोड़ा पा' सीरत-ओ-ख़िलक़त में तो इंसान है ये घोड़ा चमकाते ही जाता है ज़मीं से जो फ़लक पर सब कहते हैं ख़ुरशाद-ए-दरख़्शाँ है ये घोड़ा है जलवा, तमाशा-ए-जहाँ चाँद की मानिंद रुतबे में फ़लक से भी दो-चन्दन है ये घोड़ा गर्दन ये बुलंद उसकी है गुलशन में जो गुज़रा क़ुमरी ने कहा सर्व-ए-ख़िरामाँ है ये घोड़ा आता है पसीना जो उसे, आब-ए-बक़ा है हैवाँ है तो क्या, चश्मा-ए-हैवाँ है ये घोड़ारफ़्तार में यह घोड़ा तख़्त-ए-सुलेमान१ है चरित्र और प्रकृति से तो यह इंसान जैसा है ज़मीन से आसमान पर जो जाता है२ सब कहते हैं कि यह घोड़ा एक चमकता (दरख़्शाँ) सूरज है इसका जलवा दुनिया पर चाँद की तरह प्रकट होता है लेकिन इसका ऊँचा स्थान आसमान से भी दुगना है अपनी गर्दन ऊंची कर के जब बाग़ से गुज़रा देखकर क़ुमरी३ ने कहा सनोबर४ की तरह सुन्दर हिलता है उसका पसीना ऐसे है जैसे अमृत५ जानवर है तो क्या हुआ, जीवनदायी पानी का चश्मा है६ टिप्पणी१. सुलेमान बहुत न्याय प्रीय राजा था, यानि उसके तख़्त (सिंहासन) से इंसाफ़ बरसता था २. घोड़े की तेज़ी पकड़ने की तुलना सूरज के उदय होने से की जा रही है ३. क़ुमरी एक चिड़िया होती है जिसे 'कपोत' भी कहते हैं और अंग्रेज़ी में 'डव' (dove) कहते हैं ४. सनोबर (फ़ारसी में 'सर्व') के वृक्ष जैसा लम्बा और सजीला ५. आब-ए-बक़ा यानि 'अमरत्व का आब या पानी', जिसे अमृत भी कह सकते हैं ६. मूल वाक्य में 'हैवाँ' शब्द के साथ खेला गया है - पहली बार इसका मतलब 'हैवान' यानि 'जानवर' है और दूसरी बार 'जीवन' (हयात) है इन्हें भी देखिये शायरी क़व्वाली सन्दर्भ 2 कसीदा श्रेणी:शायरी