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धाकड़
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धाकड़ भारत की एक जाति है। यह मुख्यतः राजस्थान व मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पाई जाती है।कोठारी मनोहर Bhārata ke svātantrya saṅgrāma meṃ Rājasthāna 2003 राजस्थान स्वर्ण जयंती प्रकाशन समिति के लिए राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी, जयपुर द्वारा प्रकाशित। https://books.google.co.in/books?id=QxNuAAAAMAAJ&q=%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%A1%E0%A4%BC+%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF&dq=%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%A1%E0%A4%BC+%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF&hl=hi&sa=X&ved=2ahUKEwjv092ZnN31AhVyzjgGHUUWCrwQ6AF6BAgMEAM 1 फरवरी 2022 hi गुप्ता गिरी राज https://books.google.com/books?id=2o-aAAAAIAAJ Marriage, Religion, and Society: Pattern of Change in an Indian Village विली 1973 9780470336489 28सिंह सी.एस.के. https://books.google.com/books?id=nU1uAAAAMAAJ The Sound of Drums: Tribal Movement in Rajasthan, 1881-1947 मानक पब्लिकेशन्स. 1995 9788185445908 116, 163दास नव किशोर https://books.google.com/books?id=R5fXAAAAMAAJ Culture, Religion, and Philosophy: Critical Studies in Syncretism and Inter-faith Harmony रावत प्रकाशन 2003 9788170338208 285जिसका ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व दोनों ही दृष्टियों से उल्लेखनीय रहा है। प्राचीन शिलालेखों में इसका उल्लेख एक प्रभावशाली व्यापारी समुदाय के रूप में मिलता है, जो यह दर्शाता है कि धाकड़ समाज केवल कृषि तक सीमित नहीं था, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाता था। वर्तमान समय में यह समुदाय राजस्थान के विभिन्न भागों, मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र तथा सीमित रूप से विदर्भ क्षेत्र में भी पाया जाता है।जैन कैलाश चंद https://books.google.com/books?id=RGF8XltxgPEC&q=Dharkata Jainism in Rajasthan: Issue 15 of Jīvarāja Jaina granthamālā 1963 गुलाबचंद हीराचंद दोषी 108 en
‘धाकड़’ शब्द स्वयं में साहस और निर्भीकता का प्रतीक है, जिसका अर्थ है—ऐसा व्यक्ति जो परिस्थितियों से भयभीत न होकर उनका दृढ़ता से सामना करता है। यह विशेषता इस समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को भी अभिव्यक्त करती है। भौगोलिक दृष्टि से, ये लोग मुख्यतः कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, टोंक, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़ तथा अजमेर जैसे जिलों में निवास करते हैं।
भाषाई रूप से धाकड़ समुदाय बहुभाषी है, जो मुख्यतः हिंदी के साथ-साथ क्षेत्रीय बोलियाँ जैसे हाड़ौती का प्रयोग करता है, और लेखन के लिए देवनागरी लिपि का उपयोग करता है।राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग https://ncbc.nic.in/Writereaddata/addup36.pdf
सन्दर्भ
श्रेणी:भारत की जनजातियाँ
श्रेणी:मध्य प्रदेश के सामाजिक समुदाय
श्रेणी:राजस्थान के सामाजिक समुदाय
श्रेणी:भारतीय जाति