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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

हमज़ा अलवी

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अंगूठाकार हमज़ा अलवी (10 अप्रैल 1921 - 1 दिसंबर 2003) एक पाकिस्तानी मार्क्सवादी अकादमिक समाजशास्त्री और कार्यकर्ता थे।https://www.theguardian.com/news/2003/dec/19/guardianobituaries.race Hamza Alavi 19 December 2003 The Guardian.com 16 November 2011 https://web.archive.org/web/20130827185709/http://www.theguardian.com/news/2003/dec/19/guardianobituaries.race 27 अगस्त 2013 live वे अपने "अतिविकसित राज्य" (overdeveloped state) के सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं, जिससे उन्होंने पाकिस्तान की तत्कालीन राज्य-व्यवस्था को समझाने का प्रयत्न किया था। उनका तर्क यह था कि पाकिस्तान, जिसपर पहले अंग्रेज़ों का राज था, को एक विरासत के तौर पर एक बनी-बनायी राजव्यवस्था मिल गयी, जो उसके लोगों ने स्वयं अपने राजनैतिक प्रयत्नों से नहीं स्थापित की थी। अर्थात् जैसे वहाँ की पुलिस, प्रशासनिक सेवा इत्यादि अंग्रेज़ों की देन थे, और आज़ादी के बाद वहाँ की सरकार ने उन्हें हुबहू अपने सिस्टम में मिला लिया। अतः अब पाकिस्तान के पास एक ऐसा समाज था, जिसे विकसित देशों की तर्ज़ पर लोकतांत्रिक अनुभव तो नहीं था, लेकिन उसके पास उन देशों की तर्ज़ पर विकसित सिविल सर्विस, पुलिस और सेना थी। अतः एक ऐसा देश, जिसका समाज लोकतांत्रिक रूप से विकसित न हो, किंतु उसके पास अन्य लोकतंत्रों की तरह अपना ख़ुद का संविधान, संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था, गहरी पैठ वाली आर्मी, पुलिस और सिविल सर्विस हों- ऐसा देश अतिविकसित है। चूँकि भारत और पाकिस्तान दोनों समान हालातों में और लगभग एक ही साथ आज़ाद हुए थे, और दोनों का ही अंग्रेज़ों की ग़ुलामी का इतिहास था, इसलिए अलवी का यह सिद्धांत भारत पर भी सटीक बैठता है। अतिविकसित राज्य अविकसित या विकसित राज्यों की तुलना में अधिक शोषणकारी होते हैं, क्योंकि यहाँ विकसित राज्यों की तरह सेना, पुलिस और सिविल सर्विस जैसी ताक़तवर संस्थाएँ तो हैं लेकिन लोग विकसित राज्यों की तरह लोकतांत्रिक मानसिकता वाले नहीं हैं। अविकसित राज्यों की तरह ऐसे राज्यों में लोगों को अपने अधिकारों की समझ नहीं होती, जिस कारण उनका शोषण और भी बुरी तरह से होता है। इसके अलावा अलवी ने भारत के विभाजन को लेकर यह तर्क भी दिया था कि इसके पीछे ब्रिटिश राज के मुस्लिम सिविल सेवकों ने का बड़ा हाथ था, क्योंकि उन्हें ऐसा प्रतीत होता था कि अविभाजित भारत में उन्हें उतना वर्चस्व प्राप्त नहीं हो पाता।http://www.dawn.com/news/1176770 संग्रहीत प्रति 8 अगस्त 2019 https://web.archive.org/web/20190808115554/https://www.dawn.com/news/1176770 8 अगस्त 2019 live चयनित प्रकाशन उनके प्रकाशनों में निम्नलिखित शामिल हैं: 1965 The White Paper: A Spur to Racialism CARD जागीरदारी और समराज, फिक्शन हाउस लैहर (उर्दू) तखलेक-ए-पाकिस्तान, फिक्शन हाउस लहार (उर्दू) पाकिस्तान एक रियासत का बोहराँ, फिक्शन हाउस लैहर (उर्दू) अलवी, हमजा (1965), 'पीजैन्ट ऐन्ड रिवोलूशन', समाजवादी रजिस्टर, पीपी।   241-77 अल्वी, हमजा और शानिन, तेओडोर (2003), "इन्ट्रोडक्शन टू सोशियालोजी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज़" , मासिक समीक्षा प्रेस R S Pannu (1985) , Third World Quarterly, Jan., vol. 7, no. 1, p. 162-164 अलवी, एच (1982), 'कैपिटलिज्म ऐण्ड कोलोनियल प्रोडक्शन', लंदन: Croom Helm। अल्वी, एच, और हैरिस, जे (1989)। दक्षिण एशिया। न्यूयॉर्क: मासिक समीक्षा प्रेस। अल्वी, एच।, और हैरिस, जे। (1989)। 'सोसिआलोजी ऑफ डेवेलपिंग सोसायटीज' : दक्षिण एशिया। बेसिंगस्टोक: मैकमिलन एजुकेशन। हॉलिडे, फ्रेड एंड अलावी, हमजा (1988) स्टेट एंड आइडियोलॉजी इन मिडिल ईस्ट एंड पाकिस्तान, मंथली रिव्यू प्रेस संदर्भ श्रेणी:२००३ में निधन श्रेणी:1921 में जन्मे लोग श्रेणी:मार्क्सवाद श्रेणी:मार्क्सवादी सिद्धान्तकार श्रेणी:मार्क्सवादी सिद्धान्त श्रेणी:पाकिस्तानी अंग्रेज़ी लेखक श्रेणी:मार्क्सवादी इतिहासकार