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हिन्द-यवन राज्य
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हिन्द-यवन राज्य हिन्द-यवन राज्य एशिया पुरातनता 180 बी.सी. ए.डी. 10 यवन-बैक्ट्रियन साम्राज्य भारत-सयथियंस Indo-Greeks 100bc.jpg 100 ईसा पूर्व में इंडो-ग्रीक साम्राज्य सिकन्दरिया, काकेशस में सिरकाप/तक्षशिलाचिनिओतसगळा/सियालकोटपुष्कलावटी/चारसद्दा यूनानी (यूनानी वर्णमाला)पाली (खरोष्ठी लिपि) संस्कृत प्राकृत (ब्राह्मी लिपि) बुद्ध धर्मप्राचीन यूनानी धर्महिन्दू धर्मपारसी धर्म राज-तंत्र अपोलोडोटस I 180–160 ईसा पूर्व स्ट्रेटो II 25 ईसा पूर्व – 10 ई. राजा 2500000 पाकिस्तानअफ़ग़ानिस्तानभारततुर्कमेनिस्तान
thumb|230px|पहले हिन्द-यवन राजा दीमीत्रीयस प्रथम (अनुमानित जीवनकाल: २०५ ई॰पू॰ - १७० ई॰पू॰) द्वारा गढ़ा सिक्का - हाथीनुमा टोपी उनका भारतीय क्षेत्र पर राज दर्शाती है
हिन्द-यवन राज्य(भारत-यूनान राज्य) भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तरी क्षेत्र में स्थित २०० ईसापूर्व से १० ईसवी तक के काल में यूनानी मूल के राजाओं द्वारा प्रशासित राज्य थे। इस दौरान यहाँ ३० से भी अधिक हिन्द-यवन राजा रहे जो आपस में भी लड़ा करते थे। इन राज्यों का सिलसिला तब आरम्भ हुआ जब बैक्ट्रिया के दीमीत्रीयस प्रथम नामक यवन राजा ने १८० ई॰पू॰ में हिन्दू-कुश पर्वत शृंखला पार करके पश्चिमोत्तर भारतीय क्षेत्रों पर धावा बोल दिया।India condensed: 5000 years of history & culture Anjana Motihar Chandra Marshall Cavendish, 2007 9789812613509 http://books.google.com/books?id=of7t-odF0t4C अपने काल में इन शासकों ने भाषा, वेशभूषा, चिह्नों, शासन प्रणाली और रहन-सहन में यूनानी-भारतीय संस्कृतियों में गहरा मिश्रण किया और बहुत से हिन्दू और बौद्ध धर्म के तत्वों को अपनाया। हिन्द-यवनों का राज शक लोगों के आक्रमणों से अंत हुआ, हालांकि १० ई॰ के बाद भी इक्की-दुक्की जगहों पर कुछ देर तक यूनानी समुदाय अपनी पहचान बनाए हुए थे। समय के साथ उनका भारतीय समाज में विलय हो गया।Rome and the Mediterranean to 133 B.C.Volume 8 of The Cambridge Ancient History, Iorwerth Eiddon Stephen Edwards, ISBN 0-521-85073-8, 9780521850735Volume 8 of The Cambridge Ancient History 14 Volume Set in 19 Hardback Parts A. E. Astin, F. W. Walbank, M. W. Frederiksen Cambridge University Press, 1989 9780521234481 http://books.google.com/books?id=5Oe1u1H_OSMC ... When the Greeks of Bactria and India lost their kingdom they were not all killed, nor did they return to Greece. They were merged with the people of the area and worked for the new masters ...
इन्हें भी देखें
बैक्ट्रिया
शक लोग
सन्दर्भ
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